भारतीय दंड संहिता की धारा 172 के अनुसार, जो कोई किसी ऐसे लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील से बचने के लिए फरार हो जाएगा, जो ऐसे लोक सेवक के नाते ऐसे समन, सूचना या आदेश को निकालने के लिए वैध रूप से सक्षम हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
1 2003 के अधिनियम सं. 24 की धारा 5 द्वारा (22-9-2003 से) अंतःस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 33
अथवा, यदि समन या सूचना या आदेश 1[किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए, या दस्तावेज अथवा इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए] हो तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
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एक लोक सेवक से सम्मन या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार यदि सम्मन या नोटिस में व्यक्ति की उपस्थिति की आवश्यकता होती है, आदि, न्याय अदालत में |
1 महीने के लिए साधारण कारावास या जुर्माना या दोनों 6 महीने के लिए साधारण कारावास या जुर्माना या दोनों |
असंज्ञेय
असंज्ञेय |
जमानती
जमानती |
किसी भी मजिस्ट्रेट किसी भी मजिस्ट्रेट |

