भारतीय दंड संहिता की धारा 130 के अनुसार, जो कोई जानते हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने में मदद या सहायता देगा, या किसी ऐसे कैदी को छुड़ाएगा, या छुड़ाने का प्रयत्न करेगा, या किसी ऐसे कैदी को, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, संश्रय देगा या छिपाएगा या ऐसे कैदी के फिर से पकड़े जाने का प्रतिरोध करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह 1[आजीवन कारावास] से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
स्पष्टीकरण--कोई राजकैदी या युद्धकैदी, जिसे अपने पैरोल पर 2[भारत] में कतिपय सीमाओं के भीतर, यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है, विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, यह तब कहा जाता है, जब वह उन सीमाओं से परे चला जाता है, जिनके भीतर उसे यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है ।
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| भागने में मदद करना, बचाना या शरण देना, या ऐसे कैदी की पुनरावृत्ति के लिए किसी भी प्रतिरोध की पेशकश | जीवन के लिए कारावास या 10 साल + जुर्माना | संज्ञेय | गैर जमानतीय | सत्र न्यायालय |

