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अयोध्या में कतिपय क्षेत्र अर्जन अधिनियम, 1993 ( Acquisition of certain Area at Ayodhya Act, 1993 )


 

अयोध्या में कतिपय क्षेत्र अर्जन अधिनियम, 1993

(1993 का अधिनियम संख्यांक 33)

[3 अप्रैल, 1993]

अयोध्या में कतिपय क्षेत्र के अर्जन और उससे संबद्ध या

उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

                उत्तर प्रदेश राज्य के जिला फैजाबाद की तहसील फैजाबाद सदर के परगना हवेली अवध के अंतर्गत अयोध्या में ग्राम कोट रामचन्द्र में स्थित संरचना के संबंध में (जिसके अंतर्गत ऐसी संरचना के भीतरी और बाहरी आंगनों के परिसर भी हैं) जो सामान्यतया राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद के नाम से ज्ञात है, दीर्घकालीन विवाद बना हुआ है;

                और उक्त विवाद ने देश में लोक व्यवस्था बनाए रखने और विभिन्न समुदायों के बीच समरसता को प्रभावित किया है;

                और लोक व्यवस्था बनाए रखना तथा भारत के लोगों में सांप्रदायिक समरसता और समान भ्रातृव्य की भावना का निर्माण करना आवश्यक है;

                और पूर्वोक्त उद्देश्यों की पूर्ति की दृष्टि से, अयोध्या में कतिपय क्षेत्रों का अर्जन करना आवश्यक है;

                भारत गणराज्य के चवालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अयोध्या में कतिपय क्षेत्र अर्जन अधिनियम, 1993 है ।

(2) यह 7 जनवरी, 1993 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) क्षेत्र" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट क्षेत्र (जिसके अंतर्गत उसमें समाविष्ट सभी भवन, संरचनाएं या अन्य संपत्ति है) अभिप्रेत है; 

(ख) प्राधिकृत व्यक्ति" से धारा 7 के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय या किसी न्यास के न्यासी अभिप्रेत हैं;

(ग) दावा आयुक्त" से धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त दावा आयुक्त अभिप्रेत है;

(घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।

अध्याय 2

आयोध्या में क्षेत्र का अर्जन

3. कतिपय क्षेत्र की बाबत अधिकारों का अर्जन-इस अधिनियम के प्रारंभ से ही, क्षेत्र के संबंध में अधिकार, हक और हित, इस अधिनियम के आधार पर, केंद्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।

4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) क्षेत्र के संबंध में यह समझा जाएगा कि उसके अंतर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी स्थावर और जंगम संपत्ति, जिसके अंतर्गत भूमि, भवन, संरचना, किसी भी प्रकार की दुकानें या अन्य संपत्ति और ऐसी संपत्ति में या उससे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित हैं, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व, यथास्थिति, किसी व्यक्ति या उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में थे और उससे संबंधित सभी रजिस्टर, नक्शे, रेखांक, रेखाचित्र और किसी भी प्रकार के अन्य दस्तावेज हैं ।

                (2) पूर्वोक्त सभी संपत्तियां, जो धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के आधार पर, किसी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी और किसी न्यायालय या अधिकरण या अन्य प्राधिकारी की कोई कुर्की, व्यादेश, डिक्री या आदेश का, जो ऐसी संपत्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निबंधित करता है या जो ऐसी संपूर्ण संपत्ति या उसके किसी भाग की बाबत कोई रिसीवर नियुक्त करता है, प्रभाव        नहीं रहेगा ।

                (3) यदि, इस अधिनियम के प्रारंभ पर ऐसी किसी संपत्ति से, जो धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गई है, संबंधित अधिकार, हक और हित की बाबत कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही किसी न्यायालय, अधिकरण, या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित है तो उसका उपशम न हो जाएगा ।

5. क्षेत्र के प्रबंध के भारसाधक व्यक्ति या राज्य सरकार का सभी आस्तियां, आदि परिदत्त करने का कर्तव्य-(1) केन्द्रीय सरकार उस क्षेत्र का, जो धारा 3 के अधीन उस सरकार में निहित हो गया है, कब्जा लेने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर सकेगी ।

                (2) धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में क्षेत्र के निहित हो जाने पर, ऐसे निहित हो जाने के ठीक पहले क्षेत्र के प्रबंध का भारसाधक, यथास्थिति, व्यक्ति, या उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार, ऐसे निहित होने से संबंधित अपने कब्जे में की सभी आस्तियां, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का, जहां ऐसे रजिस्टर या दस्तावेजों का परिदान करना साध्य नहीं है वहां ऐसे रजिस्टरों या दस्तावेजों की विहित रीति से अधिप्रमाणित प्रतियों का सरकार या प्राधिकृत व्यक्ति को परिदान करने के लिए बाध्य होगी ।

6. किसी अन्य प्राधिकारी या निकाय या न्यास में क्षेत्र को निहित करने का निदेश देने की केंद्रीय सरकार की शक्ति-(1) धारा 3, धारा 4, धारा 5 और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, यदि केंद्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम के प्रारंभ को या उसके पश्चात् गठित कोई प्राधिकारी या अन्य निकाय या किसी न्यास के न्यासी ऐसे निबंधनों और शर्तों का, जो वह सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, अनुपालन करने के लिए रजामंद है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि उस क्षेत्र या उसके किसी भाग के संबंध में अधिकार, हक और हित या उनमें से कोई, केन्द्रीय सरकार में इस प्रकार निहित बने रहने के बजाय, उस प्राधिकारी या निकाय या उस न्यास के न्यासियों में अधिसूचना की तारीख को या ऐसी पश्चात्वर्ती तारीख को, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, निहित हो जाएगा ।

                (2) जब उस क्षेत्र या उसके भाग के संबंध में कोई अधिकार, हक और हित उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी या निकाय या न्यासियों में निहित हो जाता है तब उस क्षेत्र या उसके भाग के संबंध में केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकार ऐसे निहित होने की तारीख से ही, उस प्राधिकारी या निकाय या उस न्यास के न्यासियों के अधिकार समझे जाएंगे ।

                (3) धारा 4, धारा 5, धारा 7 और धारा 11 के उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसे प्राधिकारी या निकाय या न्यासियों के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे केन्द्रीय सरकार के संबंध में लागू होते हैं और इस प्रयोजन के लिए उसमें केन्द्रीय सरकार के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे प्राधिकारी या निकाय या न्यासियों के प्रति निर्देश हैं । 

अध्याय 3

संपत्ति का प्रबंध और प्रशासन

7. सरकार द्वारा संपत्ति का प्रबंध-(1) किसी संविदा या लिखत अथवा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के आदेश में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ से ही, धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित संपत्ति का प्रबंध, केंद्रीय सरकार द्वारा अथवा उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय या किसी न्यास के न्यसियों द्वारा किया जाएगा ।

                (2) धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित संपत्ति का प्रबंध करने में, केन्द्रीय सरकार या प्राधिकृत व्यक्ति यह सुनिश्चित करेगा कि उस क्षेत्र में, जिस पर उत्तर प्रदेश राज्य के जिला फैजाबाद की तहसील फैजाबाद सदर तहसील के परगना हवेली अवध के अंतर्गत अयोध्या में ग्राम कोट रामचन्द्र में ऐसी संरचना की (जिसके अंतर्गत उस संरचना के भीतरी और बाहरी आंगनों के परिसर हैं) स्थित थी जो सामान्यतया राम जन्म-भूमि बाबरी मस्जिद, के नाम से ज्ञात है । इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व विद्यमान स्थिति को बनाए रखा जाए ।

अध्याय 4

प्रकीर्ण

8. रकम का संदाय-(1) क्षेत्र में समाविष्ट किसी भूमि, भवन, संरचना, या अन्य संपत्ति के स्वामी को केन्द्रीय सरकार द्वारा, उस भूमि, भवन, संरचना या अन्य संपत्ति के धारा 3 के अधीन उस सरकार को अंतरण और उसमें निहित होने के लिए, भूमि, भवन, संरचना या अन्य संपत्ति के बाजार मूल्य के बराबर रकम नकद रूप में दी जाएगी ।

                (2) केन्द्रीय सरकार, स्वामी के या किसी व्यक्ति के जिसका उपधारा (1) के अधीन स्वामी के विरुद्ध दावा है, दावों का विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, दावा आयुक्त नियुक्त करेगी ।

                (3) दावा आयुक्त, स्वयं दावे प्राप्त करने और उनका विनिश्चय करने के लिए अपनी प्रक्रिया का स्वयं विनियमन करेगा ।

(4) स्वामी या कोई व्यक्ति, जिसका स्वामी के विरुद्ध दावा है, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर, दावा आयुक्त को दावा कर सकेगा :

परन्तु यदि दावा आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि दावेदार, पर्याप्त कारण से उक्त नब्बे दिन की अवधि के भीतर दावा करने से निवारित रहा था, तो दावा आयुक्त नब्बे दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर, दावा ग्रहण कर सकेगा किन्तु उसके पश्चात् नहीं ।

9. अधिनियम का अन्य सभी अधिनिमियतियों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी की किसी डिक्री या आदेश में, उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

10. शास्तियां-कोई व्यक्ति, जो क्षेत्र के प्रबंध का भारसाधक है और जो केंद्रीय सरकार या प्राधिकृत व्यक्ति को, ऐसे क्षेत्र से संबंधित कोई आस्ति, रजिस्टर या अन्य दस्तावेज, जो उसकी अभिरक्षा में है, या, यथास्थिति, ऐसे रजिस्टर, या दस्तावेज की अधिप्रमाणित प्रतियां परिदत्त करने में असफल रहेगा, कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

11. सद्भापूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भापूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केद्रीय सरकार या प्राधिकृत व्यक्ति के अलावा उस सरकार या प्राधिकृत व्यक्ति के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध नहीं होगी ।

12. नियम बनाने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवासन के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह, ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

13. निरसन और व्यावृत्ति-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अयोध्या में कतिपय क्षेत्र अर्जन अध्यादेश, 1993 (1993 का अध्यादेश संख्यांक 8) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) उक्त अध्यादेश में किसी बात के होते हुए भी,- 

(क) उक्त अध्यादेश की अनुसूची के क्रम सं० 1 के सामने विनिर्दिष्ट ग्राम कोट रामचन्द्र में स्थित प्लाट सं० 242 से संबंधित अधिकार, हक और हित के बारे में यह समझा जाएगा कि वह कभी भी केंद्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित नहीं हुआ है; 

(ख) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित उक्त प्लाट सं० 242 से संबंधित अधिकार, हक और हित की बाबत किसी वाद, अपील या अन्य कार्यवाही के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका कभी भी उपशमन नहीं हुआ है और ऐसे वाद, अपील या अन्य कार्यवाही (जिसके अंतर्गत उसके संबंध में किसी न्यायालय के आदेश या अंतरिम आदेश हैं) के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उक्त अध्यादेश के प्रारंभ के ठीक पूर्व विद्यमान स्थिति में प्रत्यावर्तित हो गई है;

(ग) उक्त प्लाट सं० 242 के संबंध में उस अध्यादेश के अधीन की गई किसी अन्य कार्रवाई या बात के बारे में यह समझा जाएगा कि वह कभी भी नहीं की गई है ।

                (3) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी । 

 

अनुसूची

[धारा 2(क) देखिए]

क्षेत्र का विवरण

क्रम सं०

ग्राम/परगना/तहसील/जिला/ राज्य का नाम

राजस्व (खसरा)                    

      प्लाट सं०

अर्जित किया जाने वाला क्षेत्र

विस्वांसी

 

 

 

 

बीघा

विस्वा

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

1.

ग्राम कोट रामचन्द्र परगना हवेली अवध, तहसील फैजाबाद सदर, जिला फैजाबाद, उत्तर प्रदेश

143

0

9

0

 

 

144

0

7

0

 

 

145

0

8

0

 

 

146

1

6

7

 

 

147

5

8

0

 

 

158

0

4

0

 

 

159

0

13

8

 

 

160

5

13

0

 

 

161

0

18

0

 

 

162

1

8

7

 

 

168

1

2

0

 

 

169

1

7

0

 

 

170

0

8

0

 

 

171

1

7

0

 

 

172

2

7

0

 

 

173

0

18

0

 

 

174

0

3

0

 

 

175

0

6

0

 

 

176

1

2

0

 

 

177

0

16

0

 

 

178

0

10

0

 

 

179

0

14

0

 

 

180

0

14

5

 

 

181

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13

10

 

 

182

0

7

5

 

 

183

0

7

5

 

 

184

0

6

0

 

 

185

0

7

5

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

 

 

186

0

6

10

 

 

187

0

7

0

 

 

188

0

18

15

 

 

189

0

14

0

 

 

190

0

4

0

 

 

191

4

6

14

 

 

192

0

7

0

 

 

193

0

12

0

 

 

194

4

19

0

 

 

195

0

5

0

 

 

196

0

5

0

 

 

197

0

5

0

 

 

198

0

3

0

 

 

199

0

12

0

 

 

200

2

0

0

 

 

204

0

3

0

 

 

(भाग)

जिसके दक्षिण में प्लाट सं० 222, पश्चिम में प्लाट सं० 205 और पूर्व में प्लाट सं० 231 हैं

 

 

 

 

 

205

0

10

0

 

 

206

0

5

0

 

 

207

0

19

0

 

 

208

0

5

0

 

 

209

1

11

0

 

 

210

0

8

0

 

 

211

0

13

0

 

 

212

0

4

14

 

 

213

1

19

15

 

 

214

0

6

0

 

 

215

0

2

5

 

 

216

0

6

0

 

 

217

0

11

0

 

 

218

0

3

0

 

 

219

1

6

5

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

 

 

220

0

12

0

 

 

221

1

2

15

 

 

222

0

5

7

 

 

223

5

6

0

 

 

224

1

0

0

 

 

225

0

11

15

 

 

226

0

10

5

 

 

227

0

7

5

 

 

228

0

5

0

 

 

229

0

11

10

 

 

230

0

2

10

 

 

231

1

1

10

 

 

232

0

2

0

 

 

233

0

2

0

 

 

234

1

12

0

 

 

235

0

10

0

 

 

236

0

4

0

 

 

237

0

1

0

 

 

238

1

6

0

 

 

239

2

1

0

 

 

244

0

14

10

 

 

(भाग)

जिसके उत्तर में भागतः प्लाट सं० 240 और भागतः प्लाट सं० 243, पश्चिम में भागतः प्लाट सं० 239 और भागतः प्लाट सं० 240 और दक्षिण में प्लाट सं० 246 है

 

 

 

 

 

246

(भाग)

जिसके दक्षिण में प्लाट सं० 238, पश्चिम में प्लाट सं० 239 और उत्तर में प्लाट सं० 244 है

0

18

0

 

 

 

75

14

7

 

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

 

 

1105

0

7

14

 

 

1106

0

6

2

 

 

1107

0

14

14

 

 

1108

0

4

3

 

 

1109

0

3

0

 

 

1110

0

4

5

 

 

1111

0

12

15

 

 

1112

0

5

8

 

 

1113

0

5

10

 

 

1114

0

0

10

 

 

1115

0

1

10

 

 

1116

0

3

10

 

 

1117

0

9

12

 

 

1118

1

1

17

 

 

1119

0

7

14

 

 

1120

0

13

15

 

 

1121

0

3

0

 

 

1122

0

8

0

 

 

1123

0

8

0

 

 

1124

0

9

10

 

 

1125

0

6

6

 

 

1126

0

4

15

 

 

1127

0

11

4

 

 

1128

1

12

6

 

 

1129

0

5

9

 

 

1130

0

5

0

 

 

1132

1

3

5

 

 

1133

0

4

15

 

 

1134

0

4

0

 

 

1135

0

1

0

 

 

1136

0

9

0

 

 

1143

0

4

5

 

 

1144

0

5

15

 

 

1145

0

0

15

 

 

1146

0

3

0

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

 

 

1147

0

5

0

 

 

1148

0

7

15

 

 

1149

0

6

10

 

 

1166

0

6

0

 

 

(भाग)

जिसके पूर्व में प्लाट सं० 1203, पश्चिम में प्लाट सं० 1151 और दक्षिण में प्लाट सं० 1167 है

 

 

 

 

 

1206

0

7

0

 

 

1210

0

1

5

 

 

1211

0

2

5

 

 

1212

0

11

5

 

 

1213

0

2

10

 

 

1214

0

7

0

 

 

1215

0

0

15

 

 

1216

0

0

15

 

 

1217

0

3

5

 

 

1218

0

4

10

 

 

1219

0

5

0

 

 

1220

0

7

5

 

 

1221

0

11

10

 

 

1222

0

4

0

 

 

1223

0

1

15

 

 

1225

0

12

15

 

 

1226

0

8

10

 

 

1227

0

7

15

 

 

1228

0

4

15

 

 

1229

0

1

0

 

 

1230

0

13

5

 

 

1231

0

7

5

 

 

1232

0

1

6

 

 

1233

0

4

15

 

 

1234

0

7

5

 

 

1235

0

1

6

 

 

1236

0

2

5

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

 

 

1237

0

9

10

 

 

1238

0

1

18

 

 

1239

0

1

10

 

 

1240

0

8

15

 

 

1241

0

1

10

 

 

1242

0

1

15

 

 

1243

0

2

0

 

 

1247

0

5

0

 

 

(भाग)

जिसके उत्तर में प्लाट सं० 1248, दक्षिण में प्लाट सं० 1246 और पूर्व में प्लाट सं० 1291/सड़क है

 

 

 

 

 

1248

1

7

10

 

 

1249

0

0

13

 

 

1250

0

7

7

 

 

1251

0

8

0

 

 

1252

0

9

0

 

 

1253

0

12

10

 

 

1254

0

4

0

 

 

1255

0

2

0

 

 

1256

0

2

0

 

 

1257

0

2

10

 

 

1258

0

2

5

 

 

1259

0

1

10

 

 

 

27

00

11

3.

ग्राम जलवानपुर, परगना हवेली अवध, तहसील फैजाबाद सदर, जिला फैजाबाद, उत्तर प्रदेश

1

0

3

5

 

 

2

1

1

0

 

 

3

0

0

5

 

 

4

1

9

15

 

 

5

0

0

10

 

 

6

0

19

10

 

 

7

0

2

15

 

 

8

0

4

15

 

 

9

0

10

10

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

 

 

10

0

0

10

 

 

11

0

3

0

 

 

12

0

14

5

 

 

13

0

10

0

 

 

14

0

0

10

 

 

15

0

15

15

 

 

16

0

8

15

 

 

17

0

3

15

 

 

18

0

6

5

 

 

19

0

7

5

 

 

27

1

6

0

 

 

 

9

7

15

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