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कॉफी अधिनियम, 1942 ( Coffee Act, 1942 )


 

कॉफी अधिनियम, 1942

(1942 का अधिनियम संख्यांक 7)

[2 मार्च, 1942]

[संघ के नियंत्रण के अधीन कॉफी उद्योग के विकास के लिए                                                                                                               उपबन्ध करने के लिए] अधिनियम

यह समीचीन है कि 1[संघ के नियंत्रण के अधीन कॉफी उद्योग के विकास के लिए उपबन्ध किया जाए;]

अतः निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया  जाता हैः-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और अस्तित्वावधि-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम  [कॉफी अधिनियम], 1942 है

(2) इसका विस्तार  [जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवायट सम्पूर्ण भारत पर है

                                                                                                                                                                                         

 [2. संघ नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-यह घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि कॉफी उद्योग को संघ अपने नियंत्रण में ले ले ]

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध हो,-

                () “बोर्ड" से धारा 4 के अधीन गठित  [ *** कॉफी बोर्डट अभिप्रेत है;

                 [(कक) “अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;]

                () कॉफी" से रूबियासियस पौधे के फल से व्युत्पन्न वस्तु अभिप्रेत है, जो उस नाम से ज्ञात है, तथा इसके अन्तर्गत कच्ची कॉफी, संसाधित कॉफी, असंसाधित कॉफी, भुनी हुई कॉफी और तैयार कॉफी आती है;

 [() “आयुक्त" से सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52)की धारा 3 के खण्ड () में विनिर्दिष्ट सीमाशुल्क आयुक्त अभिप्रेत है;]

() “संसाधन" से विपणन के लिए कॉफी को तैयार करने के प्रयोजन के लिए, गूदा निकालने से भिन्न यांत्रिक प्रक्रियाओं का कच्ची कॉफी पर प्रयोग किया जाना अभिप्रेत है;

() “संसाधन स्थापन" से कोई ऐसा स्थान अभिप्रेत है, जिसको रजिस्ट्रीकृत स्वामी द्वारा संसाधन के लिए कच्ची कॉफी भेजी जाती है, तथा इसके अन्तर्गत कोई ऐसी संपदा आती है, जिसे बोर्ड इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए संसाधन स्थापना घोषित करे;

 [(ङङ) “व्यवहारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो कॉफी के थोक या फुटकर विक्रय का कारबार करता है;]

() “सम्पदा" से एक इकाई के रूप में प्रशासित ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है, जिसमें ऐसी भूमि अन्तर्विष्ट है, जिसमें कॉफी के पौधे रोपे गए हैं;

 [(चच) “भारत" से जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर भारत का राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है;]

() “भारतीय कॉफी-उपकर समिति" से भारतीय कॉफी-उपकर अधिनियम, 1935 (1935 का 14) के अधीन गठित भारतीय कॉफी-उपकर समिति अभिप्रेत है;

 [() “खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा" से संपदा द्वारा वर्ष में उत्पादित संपूर्ण कॉफी का, आयतन या तौल के रूप में अभिव्यक्त वह प्रभाग अभिप्रेत है, जिसे कोई रजिस्ट्रीकृत संपदा इस अधिनियम के अधीन विक्रय करने के लिए      अनुज्ञात है;]

 [() किसी ऐसी भूमि के संबंध में, जिसमें कॉफी के पौधे रोपे गए हैं, “स्वामी" के अन्तर्गत आते हैं-

(1) स्वामी का कोई अभिकर्ता; और

(2) बंधकदार, पट्टेदार या भूमि का वास्तविक कब्जाधारी अन्य व्यक्ति;]

() “विहित" से अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

() “रजिस्ट्रीकृत सम्पदा" से ऐसी सम्पदा अभिप्रेत है, जिसकी बाबत स्वामी धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत है, और इसके अन्तर्गत कोई ऐसी सम्पदा भी आती है, जिसकी बाबत स्वामी से उस उपधारा के उपबन्धों के अधीन रजिस्ट्रीकरण करा लेने की अपेक्षा की गई है;

() “रजिस्ट्रीकृत स्वामी" से रजिस्ट्रीकृत सम्पदा का ऐसा स्वामी अभिप्रेत है, जिसका धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकरण कर लिया गया है या जिससे ऐसा रजिस्ट्रीकरण करा लेने की अपेक्षा की गई है;

                                                                                                                                                                         

() “अधिशेष पूल" से कॉफी का वह स्टाक अभिप्रेत है, जो धारा 25 के अधीन बोर्ड को प्रदान की गई कॉफी की मात्राओं में से बोर्ड द्वारा संचित किया गया है;

 [() “वर्ष" से जुलाई के प्रथम दिन को आरम्भ होने वाली तथा उसके ठीक बाद के जून के तीसवें दिन को समाप्त होने वाली बारह मास की अवधि अभिप्रेत है ]

+++++++++++++++++++++-(1) भारतीय कॉफी बाजार विस्तारण अध्यादेश, 1940 (1940 का 13) की धारा 4 के अधीन भारतीय कॉफी बाजार विस्तारण बोर्ड के नाम से गठित बोर्ड इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए  [कॉफी बोर्डट होगा

 [ [ [(2) बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-

() एक अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियुक्त किया जाएगा;

() संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा द्वारा और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे; तथा

() उनतीस से अनधिक इतने अन्य सदस्य, जितने केन्द्रीय सरकार समीचीन समझे और वे उस सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाएंगे, जो उसकी राय में निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ हैं,-

(i) कॉफी उपजाने वाले प्रमुख राज्यों की सरकारें;

(ii) कॉफी उपजाने वाला उद्योग;

(iii) कॉफी व्यापार हित;

(iv) संसाधन स्थापन;

(v) श्रमिक हित;

(vi) उपभोक्ता हित; तथा

(vii) ऐसे अन्य हित, जिनका, केन्द्रीय सरकार की राय में, बोर्ड में प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिए

(2) उपधारा (2) के खण्ड () में विनिर्दिष्ट प्रत्येक प्रवर्ग में से सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, अपने कृत्यों के निर्वहन में उनके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा उनमें रिक्तियों को भरने की रीति वे होंगी, जो विहित की जाएं ]

(2) केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी को, जब वह उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्रतिनियुक्त किया गया हो, बोर्ड के अधिवेशनों में हाजिर होने तथा उनकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ]

                                                                                                                                                                                         

 [(4)] बोर्ड द्वारा किए गए किसी भी कार्य पर केवल इस आधार पर ही आक्षेप नहीं किया जाएगा कि उसमें कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है

 [(5) यह घोषित किया जाता है कि बोर्ड के सदस्य का पद उसके धारक को संसद् के किसी भी सदन का सदस्य चुने जाने या होने के लिए निरर्हित नहीं करेगा ]

5. बोर्ड का निगमन-बोर्ड  [ *** कॉफी बोर्ड] के नाम से निगमित होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी, और जिसे जंगम और स्थावर, दोनों प्रकार की सम्पत्ति अर्जित और धारण करने की और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा

6. बोर्ड में सम्पत्ति का निहित होना-जब तक यह अधिनियम प्रवृत्त रहता है, तब तक भारतीय कॉफी-उपकर समिति की या उसके कब्जे में की सब जंगम या स्थावर सम्पत्ति बोर्ड में निहित होगी और उक्त समिति के सब ऋण और दायित्व बोर्ड को अन्तरित हो जाएंगे, तथा उक्त समिति के अधिकारी और सेवक बोर्ड के कर्मचारिवृन्द में अधिकारी और सेवक होंगे तथा उक्त समिति निलम्बित कर दी जाएगी

 [6. बोर्ड से परामर्श-इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के कार्यकलाप के विषय में कोई कार्रवाई करने के पहले, केन्द्रीय सरकार सामान्यतः बोर्ड से परामर्श करेगीः

परन्तु केन्द्रीय सरकार द्वारा की गई कोई भी कार्रवाई केवल इस आधार पर ही कि कार्रवाई ऐसे परामर्श के बिना की गई थी, अविधिमान्य नहीं होगी या उस पर आपत्ति नहीं की जाएगी ]

7. समितियां, कर्मचारिवृन्द और अभिकर्ता-                                                                                          

(2) बोर्ड ऐसे प्रयोजनों के लिए ऐसी समितियां नियुक्त कर सकेगा और ऐसा कर्मचारिवृन्द नियोजित कर सकेगा, जिन्हें या जिसे वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझता है

(3) बोर्ड कॉफी के विपणन, भंडारकरण और संसाधन के संबंध में अपनी और से अपने कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अभिकर्ताओं को प्राधिकृत कर सकेगा

 [8. अध्यक्ष का वेतन और भत्ते-अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्तों का तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों का हकदार होगा, जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाएं

8. उपाध्यक्ष-बोर्ड अपने सदस्यों में से एक उपाध्यक्ष का निर्वाचण करेगा जो अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जो विहित की या किए जाएं या जो अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित की या किए जाएं

9. मुख्य कॉफी विपणन अधिकारी, सचिव और अन्य कर्मचारिवृन्द-(1) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड का एक ऐसा अधिकारी, जो मुख्य कॉफी विपणन अधिकारी के नाम से ज्ञात होगा, और एक सचिव नियुक्त करेगी और बोर्ड का एक उपसचिव और उतने विपणन अधिकारी, जितने आवश्यक हों, बोर्ड के निदेश के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिए, जो विहित की या किए जाएं, नियुक्त कर सकेगी

(2) इस धारा के अधीन नियुक्त अधिकारी, ऐसे वेतन और भत्तों के तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की शर्तों के हकदार होंगे, जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाएं ]

10. बोर्ड का विघटन-जब बोर्ड इस अधिनियम के प्रवृत्त रह जाने के कारण विघटित हो जाता है तब भारतीय कॉफी बाजार विस्तारण अध्यादेश 1940 (1940 का 13) के अधीन या इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा प्राप्त सब धन के व्यय किए गए अतिशेष का, पूल निधि में के धन के सिवाय, ऐसी रीति से व्ययन किया जाएगा, जैसी केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे केन्द्रीय सरकार पूल निधि के धन को वैसे ही संवितरित करेगी जैसे बोर्ड संवितरित करता, यदि वह विद्यमान बना रहता

                                                                                                                                                                                   

रजिस्ट्रीकरण

14. कॉफी सम्पदाओं के स्वामियों का रजिस्ट्रीकरण- [(1) कॉफी के पौधों से रोपित भूमि का, चाहे ऐसी भूमि एक सम्पदा में या एक से अधिक सम्पदाओं में समाविष्ट हो और चाहे वह भारत में पूर्णतः या केवल भागतः स्थित हो, हर स्वामी उस तारीख से जिसको वह ऐसी सम्पदा या सम्पदाओं का प्रथम बार स्वामी हुआ, एक मास के अवसान के पूर्व, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को अपने स्वामित्व में की हर एक सम्पदा की बाबत स्वामी के रूप में अपना रजिस्ट्रीकरण कराने के लिए आवेदन करेगा; तथा कॉफी (संशोधन) अधिनियम, 1961 (1961 का 48) के प्रारम्भ के पहले किया गया कोई भी रजिस्ट्रीकरण इस उपधारा के अधीन किया गया समझा जाएगा ]

                                                                                                                                                                                         

(3) एक बार किया गया रजिस्ट्रीकरण तब तक प्रवृत्त बना रहेगा जब तक वह रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी द्वारा रद्द नहीं कर              दिया जाता

                                                                                                                                                                                         

15. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार धारा 14 के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम रजिस्ट्रीकरण के लिए और रजिस्ट्रीकरण के रद्द किए जाने के लिए आवेदन का प्ररूप, ऐसे आवेदनों पर संदेय फीसें ऐसे आवेदनों में अन्तर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां, रजिस्ट्रीकरण के मंजूर किए जाने और रद्द किए जाने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारियों द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर तथा रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारियों द्वारा बोर्ड को जानकारी का प्रदाय, विहित कर सकेंगे

कॉफी के विक्रय, निर्यात और पुनः आयात का नियंत्रण

 [16. कॉफी के विक्रय के लिए कीमतों का नियत किया जाना-(1) केन्द्रीय सरकार  *** राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वह कीमत या वे कीमतें नियत कर सकेगी जिस पर या जिन पर कॉफी भारतीय बाजार में थोक या फुटकर विक्रय की जा सकेगी

(2) कोई भी रजिस्ट्रीकृत स्वामी या अनुज्ञप्त संसाधक या व्यवहारी, कॉफी का भारतीय बाजार में थोक या फुटकर विक्रय ऐसी कीमत या कीमतों पर नहीं करेगा, जो इस धारा के अधीन नियत कीमत या कीमतों से अधिक है ]

 [17. खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे के आधिक्य में कॉफी का विक्रय-कोई भी रजिस्ट्रीकृत स्वामी किसी रजिस्ट्रीकृत संपदा से कॉफी का विक्रय नहीं करेगा या विक्रय करने की संविदा नहीं करेगा, यदि ऐसे विक्रय से उस संपदा को आबंटित खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा अधिक हो जाता है और कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी अपनी संपदा पर किसी वर्ष में उत्पादित किसी कॉफी का विक्रय नहीं करेगा या विक्रय करने की संविदा नहीं करेगा, जिसके लिए उस संपदा को खुले बाजार के लिए कोई विक्रय कोटा आबंटित नहीं है ]

18. कॉफी का विक्रय कैसे किया जाएगा-कोई भी रजिस्ट्रीकृत स्वामी तब तक कॉफी का विक्रय नहीं करेगा, जब तक                   या तो-

() वह धारा 28 के अधीन अनुज्ञप्त संसाधन स्थापन पर संसाधित की गई हो या उसके माध्यम से क्रेता को परिदत्त नहीं की जानी है, अथवा

                () वह धारा 24 के अधीन बोर्ड से उपाप्त अनुज्ञप्ति के उपबन्धों के अधीन और अनुसार नहीं बेची जाती है

19. [कॉफी का अरजिस्ट्रीकृत सम्पदा पर भंडारकरण या उसका वहां से विक्रय ]-कॉफी (संशोधन) अधिनियम, 1961 (1961 का 48) की धारा 8 द्वारा (19-4-1962 से) निरसित

20. कॉफी का निर्यात- [भारत] से किसी भी कॉफी का निर्यात, बोर्ड द्वारा, अथवा बोर्ड द्वारा अनुदत्त प्राधिकरण के अधीन, विहित रीति से तथा विहित मामलों में ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं, तथा  [सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो इस धारा द्वारा किया गया उपबंध, इस अधिनियम की धारा 11] के अधीन जारी कि गई अधिसूचना द्वारा किया गया होः

 [परन्तु इसमें अन्तर्विष्ट कोई भी बात उस कॉफी को लागू नहीं होगी जो-

(i) किसी जलयान या वायुयान पर भण्डार के रूप में इतनी मात्रा में लादी जाती है, जिसे कर्मीदल और यात्रियों की संख्या को तथा, यथास्थिति, उस जल यात्रा या यात्रा की दूरी को, जिस पर जलयान या वायुयान अग्रसर होने वाला है; यान में रखते हुए  [आयुक्त] युक्तियुक्त समझता है; अथवा

 [(ii) किसी यात्री के निजी सामान के रूप में, इतनी मात्राओं से जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, अनधिक मात्रा में ले जाई जाती है; अथवा

(iii) ऐसे प्रयोजनों के लिए और इतनी मात्राओं में निर्यात की जाती है, जो केन्द्रीय सरकार वैसी ही रीति में विनिर्दिष्ट करे :]]

 [परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा, कॉफी की वह मात्रा विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो किसी वर्ष के दौरान निर्यात के लिए अनुज्ञात होगी, और जहां ऐसा कोई आदेश किया जाता है, वहां भारत से कोई भी कॉफी उस मात्रा से आधिक्य में निर्यात नहीं की जाएगीः]

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार,  [जम्मू-कश्मीर राज्य को] या भारत द्वारा सीमाबद्ध किसी विदेशी उपनिवेश को  [भारत] से कॉफी के निर्यात को, इस धारा के प्रवर्तन से या तो आत्यन्तिक रूप से या शर्तों के अधीन रहते हुए छूट दे सकेगी

21. भारत से निर्यात की गई कॉफी का पुनः आयात-(1) किसी भी कॉफी का जो, भारत से निर्यात की गई है 4[भारतट में पुनः आयात, बोर्ड द्वारा अनुदत्त अनुज्ञापत्र के अधीन और उसके अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं

(2) बोर्ड किसी भी उचित मामले में ऐसा अनुज्ञापत्र दे सकेगा और उसके लिए कोई प्रभार नहीं लिया जाएगा

 [22. खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा-(1) जब तक केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से बोर्ड यह विनिश्चय नहीं करता है कि खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे आबंटित नहीं किए जाएंगे, तब तक बोर्ड, यथाशीघ्र हर एक रजिस्ट्रीकृत संपदा को वर्ष के लिए खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा आबंटित करेगा

(2) खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा वर्ष में संपदा के कुल अधिसंभाव्य उत्पादन का, जो बोर्ड द्वारा प्राक्कलित किया जाए, पचास प्रतिशत से अनधिक कोई नियत प्रतिशत होगा, जो सभी रजिस्ट्रीकृत संपदाओं के लिए समान होगाः

परन्तु बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, उक्त अधिसंभाव्य कुल उत्पादन के पचास प्रतिशत से अधिक प्रतिशत पर ऐसा कोटा आबंटित कर सकेगा

(3) बोर्ड उस नियत प्रतिशत में फेरफार करके जो सभी रजिस्ट्रीकृत संपदाओं के लिए समान है, खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे में किसी भी समय फेरफार कर सकेगा अथवा किसी संपदा के खुले बाजार के लिए संपूर्ण विक्रय कोटे को या उसके किसी भाग को तोल के रूप में अभिव्यक्त करने के बजाय आयतन के रूप में अभिव्यक्त कर सकेगा ]

23. रजिस्ट्रीकृत स्वामियों द्वारा विवरणियों का दिया जाना-(1) रजिस्ट्रीकृत स्वामी बोर्ड को विहित समयों पर और विहित रीति से ऐसी विवरणियां देगा, जो विहित की जाएं

(2) यदि कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी किसी सम्पदा की बाबत उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित विवरणियां देने में असफल रहता है, तो बोर्ड  [किसी ऐसी शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिसके लिए उक्त स्वामी धारा 37 के अधीन दायी है] उस सम्पदा को  [खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा] का आबंटन करने से इन्कार कर सकेगा, अथवा जहां 7[खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा] पहले ही आबंटित किया जा चुका है, वहां उसे रद्द कर सकेगा

(3) बोर्ड किसी अधिकारी को प्राधिकृत कर सकेगा कि वह इस धारा के अधीन दी गई किसी विवरणी की शुद्धता का सत्यापन करने के लिए या उस सम्पदा की उत्पादन-क्षमता का अभिनिश्चय करने के लिए किसी सम्पदा का किसी भी समय निरीक्षण करे

24. असंसाधित कॉफी के विक्रय के लिए अनुज्ञप्तियां-किसी सम्पदा का रजिस्ट्रीकृत स्वामी, विहित शर्तों के अधीन रहते हुए तथा जब तक कि प्रस्थापित विक्रय से उस सम्पदा को आबंटित 7[खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे] का अतिक्रमण नहीं हो, असंसाधित कॉफी के उस सम्पदा से विक्रय के लिए बोर्ड से अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त कर सकेगा

25. अधिशेष कॉफी और अधिशेष पूल-(1) रजिस्ट्रीकृत सम्पदा द्वारा, अपने को  [आबंटित खुले बाजार के लिए विक्रय कोटा] में विनिर्दिष्ट मात्रा से अधिक उत्पादित सब कॉफी,  [अथवा जब सम्पदाओं को कोई भी 7[खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे] आबंटित नहीं किए गए है तब सम्पदा द्वारा उत्पादित सब कॉफी], सम्पदा के स्वामी द्वारा अथवा सम्पदा से कॉफी प्राप्त करने वाले संसाधन स्थापन द्वारा बोर्ड को, अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए, परिदत्त कर दी जाएंगीः

 [परन्तु जहां सम्पदाओं को कोई भी  [खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे] आबंटित नहीं किए गए हैं वहां अध्यक्ष किसी सम्पदा के स्वामी को उसके कुटुम्ब द्वारा उपभोग के प्रयोजनों के लिए, तथा बीज के प्रयोजनों के लिए, कॉफी की उतनी मात्रा जितनी अध्यक्ष युक्तियुक्त समझे, अपने ही पास रखे रहने के लिए अनुज्ञात कर सकेगाः

परन्तु यह और कि जहां केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में कॉफी उत्पादित करने वाले किसी वर्ग के स्वामियों के लिए यह साध्य नहीं है कि वे अपने द्वारा उत्पादित कॉफी की अल्प मात्रा होने के कारण, अथवा उनकी सम्पदाएं दूरवर्ती परिक्षेत्र में स्थित होने के कारण, इस उपधारा के उपबन्धों का अनुपालन कर सके, वहां केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे वर्ग के स्वामियों को इस उपधारा के उपबन्धों से छूट दे सकेगी ]

(2) बोर्ड को परिदान ऐसे स्थानों में,  [ऐसे समयों पर] और ऐसी रीति से किया जाएगा जो बोर्ड निर्दिष्ट करे, तथा ऐसे निर्देश किसी समय अधिशेष पूल को आंशिक परिदान की व्यवस्था कर सकेंगे चाहे उस समय  [खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे] का अतिक्रमण हो गया हो या नहीं; तथा परिदत्त कॉफी ऐसी होगी, जो किस्म और क्वालिटी में उस सम्पदा की उपज की पर्याप्त प्रतीक हो बोर्ड परिदान के लिए प्रस्थापित किए गए किसी ऐसे परेषण को जो इस अपेक्षा को पूरा नहीं करता है, अस्वीकार कर सकेगा, किन्तु किसी परेषण को संसाधन में केवल किसी त्रुटि के कारण ही अस्वीकार नहीं करेगा

(3) अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त कॉफी, बोर्ड को परिदान की जाने पर, बोर्ड के नियंत्रण में रहेगी, जो कॉफी के भंडारकरण, जहां आवश्यक हो वहां संसाधन और विपणन के लिए उत्तरदायी होगा

(4) बोर्ड  ***  [समय-समय पर] कॉफी के मूल्यांकन के लिए एक समन्तरीय मान तैयार करेगा, और उस मान के अनुसार, अधिशेष पूल में सम्मिलित किए जाने के लिए परिदत्त हर एक परेषण में की कॉफी को उसकी किस्म और क्वालिटी के अनुसार वर्गीकृत करेगा, तथा उसकी मात्रा, किस्म और क्वालिटी पर आधारित उसके मूल्य का निर्धारण करेगा

(5) बोर्ड, रजिस्ट्रीकृत स्वामी की सम्मति से,  *** ऐसी सम्पदा की किसी ऐसी कॉफी को अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त की गई मान सकेगा, जिसके इस प्रकार माने जाने के लिए रजिस्ट्रीकृत स्वामी सहमत हो जाए

(6) जब कॉफी अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त कर दी गई है अथवा परिदत्त की गई मानी गई है तब उस रजिस्ट्रीकृत स्वामी के, जिसकी कॉफी इस प्रकार परिदत्त की गई है, अथवा इस प्रकार परिदत्त की गई मानी गई है, ऐसी कॉफी की बाबत, धारा 34 में निर्दिष्ट संदाय प्राप्त करने के अपने अधिकार के सिवाय, कोई भी अधिकार नहीं रह जाएंगे

26. बोर्ड द्वारा कॉफी के विक्रय-(1) बोर्ड, अधिशेष पूल में सम्मिलित की गई कॉफी के विपणन के लिए सभी व्यवहारिक उपाय करेगा, और उसके सभी विक्रय बोर्ड द्वारा उसकी मार्फत किए जाएंगे

(2) बोर्ड अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए ऐसी कॉफी का क्रय कर सकेगा जो उसमें सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त नहीं की गई है

कॉफी का संसाधन

27. अनुज्ञप्त संसाधन स्थापनों में कॉफी का संसाधित किया जाना-कोई भी रजिस्ट्रीकृत स्वामी कॉफी को किसी अनुज्ञप्त संसाधन स्थापन से अन्यत्र संसाधित नहीं कराएगा अथवा संसाधित नहीं किए जाने देगा, चाहे संसाधन स्थापन स्वयं उसके द्वारा अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अनुरक्षित हो

28. संसाधन स्थापनों का अनुज्ञप्त किया जाना-कॉफी संसाधित करने के लिए प्रत्येक स्थापन बोर्ड से उस रूप में कार्य करने के लिए अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करेगा

29. संसाधन के संबंध में बोर्ड को जानकारी का प्रदाय किया जाना-(1) रजिस्ट्रीकृत स्वामी, किसी संसाधन स्थापन को कॉफी भेजते समय, ऐसी हर एक सम्पदा की बाबत जिससे कॉफी भेजी जाती है, भेजी गई कॉफी की मात्रा की, बोर्ड को अलग-अलग रिपोर्ट देगा; तथा संसाधन स्थापन ऐसे अनुदेशों के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा जारी किए जाएं, तथा  [सम्पदा के खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे को,]  [जहां वह आबंटित किया गया है], ध्यान में रखते हुए, ऐसे हर एक परेषण को दो भागों में प्रभाजित करेगा, जिनमें एक भाग  [खुले बाजार में विक्रय के लिए] आशयित कॉफी का होगा तथा एक भाग अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त की जाने के लिए आशयित कॉफी का होगा, तथा बोर्ड को ऐसे हर एक भाग में की कॉफी की मात्रा की रिपोर्ट देगा 9[जहां सम्पदाओं को कोई भी  [खुले बाजार के लिए विक्रय कोटे] आबंटित नहीं किए गए हैं, वहां संसाधन स्थापन ऐसे हर एक परेषण में भेजी गई कॉफी की केवल सम्पूर्ण मात्रा की ही रिपोर्ट देगा ]

(2) अपने द्वारा अनुरक्षित संसाधन स्थापन में कॉफी संसाधित करने वाला रजिस्ट्रीकृत स्वामी बोर्ड को उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट जानकारी का प्रदाय करेगा

(3) ऐसा संसाधन स्थापन जो किसी व्यक्ति से असंसाधित कॉफी का क्रय करता है या उसे प्राप्त करता है, वह सम्पदा अभिनिश्चय करेगा जिसमें वह कॉफी उत्पादित की गई थी तथा बोर्ड को, इस प्रकार अभिप्राप्त की गई कॉफी की मात्रा की तथा उस सम्पदा या उन सम्पदाओं की, जिससे या जिनसे वह प्राप्त हुई, रिपोर्ट देगा

(4) प्रत्येक संसाधन स्थापन ऐसे प्ररूपों में लेखे रखेगा, जो बोर्ड द्वारा अपेक्षित किए जाएं, तथा ऐसे लेखे बोर्ड द्वारा, अथवा बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा, किसी भी समय निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे

वित्त

30. बोर्ड द्वारा पृथक् निधियों का रखा जाना-बोर्ड दो पृथक् निधियां, अर्थात् एक साधारण निधि और एक पूल                   निधि, रखेगा

 [31. साधारण निधि-(1) साधारण निधि में निम्नलिखित रकमें जमा की जाएंगीः-

() केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को संदाय की गई सब रकमें; और

() साधारण निधि को  [धारा 32 की उपधारा (2) के परन्तुक के अधीन अन्तरित की गई कोई                           धनराशियां; 3[और]

 [() बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत सब फीसें ]

(2) साधारण निधि निम्नलिखित के लिए, उपयोजित की जाएगीः-

                () बोर्ड के व्ययों को पूरा करने के लिए;

                () ऐसे उपायों के खर्च को पूरा करने के लिए, जिन्हें बोर्ड भारत के कॉफी उद्योग के हित में कृषिक और प्रौद्योगिक अनुसंधान के संप्रवर्तन के लिए करना उचित समझे;

() कॉफी सम्पदाओं को ऐसे अनुदान देने के लिए अथवा कॉफी सम्पदाओं को ऐसी अन्य सहायता के खर्च को पूरा करने के लिए, जिन्हें या जिसे बोर्ड ऐसी सम्पदाओं के विकास के लिए आवश्यक समझे;

() ऐसे उपायों के खर्च को पूरा करने के लिए, जिन्हें बोर्ड भारत में उत्पादित कॉफी के भारत में और अन्यत्र विक्रय की अभिवृद्धि और उपभोग को बढ़ाने के लिए करना उचित समझता है; तथा

() कर्मकारों के लिए काम की अधिक अच्छी परिस्थितियां प्राप्त कराने के लिए तथा उन सुख-सुविधाओं और प्रोत्साहनों की व्यवस्था तथा अभिवृद्धि के लिए व्ययों को पूरा करने के लिए ]

32. पूल निधि-(1) पूल निधि में वे सब धनराशियां जमा की जाएंगी, जो बोर्ड द्वारा अधिशेष पूल में कॉफी के विक्रयों से वसूल की गई हों

(2)  [पूल निधि] केवल निम्नलिखित के लिए उपयोगित की जाएगीः-

() सम्पदाओं के रजिस्ट्रीकृत स्वामियों को वे संदाय करना, जो अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए उनके द्वारा परिदत्त कॉफी के मूल्य के आनुपातिक है;

() अधिशेष पूल में जमा की गई कॉफी के भंडारकरण, संसाधन और विपणन तथा अधिशेष पूल के प्रशासन                  के खर्चे;

                () अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त की गई कॉफी का क्रयः

 [परन्तु जहां इस उपधारा के खण्डों की अपेक्षाओं की पूर्ति हो जाने के पश्चात् पूल निधि में कोई अतिरिक्त रकम रह जाती है, वहां बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, ऐसी सम्पूर्ण अतिरिक्त रकम या उसका कोई भाग साधारण निधि के जमा खाते में अन्तरित कर सकेगा ]

 [32. गांधी राष्ट्रीय स्मारक निधि को दान करने की बोर्ड की शक्ति-धारा 32 में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड पूल निधि का कोई भाग गांधी राष्ट्रीय स्मारक निधि के नाम से ज्ञात निधि को दान करने के लिए उपयोजित कर सकेगा ]

33. उधार लेने की शक्ति-बोर्ड किन्हीं विहित शर्तों के अधीन रहते हुए, साधारण निधि या पूल निधि की प्रतिभूति पर, ऐसे किन्हीं प्रयोजनों के लिए, जिनके लिए वह ऐसी निधि में से धन खर्च करने के लिए प्राधिकृत है, अथवा अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त की गई या परिदत्त की गई मानी गई कॉफी की प्रतिभूति पर, किन्हीं ऐसे प्रयोजनों के लिए, जिनके लिए वह पूल निधि में से धन खर्च करने के लिए प्राधिकृत है, उधार ले सकेगा

34. रजिस्ट्रीकृत स्वामियों को संदाय-(1) बोर्ड ऐसे समयों पर, जिन्हें वह ठीक समझे, उन रजिस्ट्रीकृत स्वामियों को, जिन्होंने अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए कॉफी परिदत्त की है, पूल निधि में से ऐसे संदाय करेगा जो वह उचित समझे

(2) किसी एक रजिस्ट्रीकृत स्वामी को उपधारा (1) के अधीन किए गए सभी संदायों की धनराशि का, सब रजिस्ट्रीकृत स्वामियों को किए गए संदायों की धनराशि से वही अनुपात होगा जो उसके द्वारा वर्ष की फसल में से अधिशेष पूल को परिदत्त कॉफी के मूल्य का, उस वर्ष की फसल में से अधिशेष पूल को परिदत्त सब कॉफी के मूल्य से हैः

 [परन्तु उपधारा (1) के अधीन किए गए सब संदायों की धनराशि की तथा वर्ष की फसल में से अधिशेष पूल को परिदत्त की गई कॉफी के मूल्य की संगणना करने में, क्रमशः ऐसा कोई संदाय जो रजिस्ट्रीकृत स्वामी द्वारा अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त की गई कॉफी के लिए तुरन्त तय करके अंतिम संदाय के रूप में उसके द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, तथा ऐसी किसी कॉफी का मूल्य अपवर्जित कर दिए जाएंगे ]

शास्तियां और प्रक्रिया

35. रजिस्ट्रीकरण कराने में असफलता-कॉफी सम्पदा का कोई स्वामी जो धारा 14 के अनुसार रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने में असफल रहेगा, जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा और अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम मास के पश्चात् हर एक ऐसे मास के लिए, जिसके दौरान ऐसी असफलता बनी रहती है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

36. धारा 16, 17 और 18 के उल्लंघन-(1) कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी, जो धारा 16 की उपधारा (2) या धारा 17 या धारा 18 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, कोई अनुज्ञप्त संसाधक  [या व्यवहारीट जो धारा 16 की उपधारा (2)  *** के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

(2) जब कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी इस धारा के अधीन सिद्धदोष ठहराया जाता है, तो बोर्ड तत्पश्चात् ऐसे रजिस्ट्रीकृत स्वामी को धारा 34 के अधीन किए जाने वाले किसी संदाय में से उतनी धनराशि काट सकेगा, जो उसके द्वारा विधि-विरुद्धतया विक्रय की गई किसी कॉफी के बोर्ड द्वारा यथाप्राक्कलित मूल्य के बराबर है

37. अननुज्ञप्त संसाधन स्थापन-यदि कोई संसाधन स्थापन अनुज्ञप्ति के बिना उस रूप में कार्य करेगा तो स्वामी जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

 [37. धारा 23 (1) का उल्लंघन-कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी, जो धारा 23 की उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित विवरणी उस उपधारा की अपेक्षानुसार देने में असफल रहेगा, जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ]

38. मिथ्या विवरणियां-कोई व्यक्ति, जो धारा 23 के अधीन दी जाने वाली किसी विवरणी में या धारा 29 के अधीन की जाने वाली किसी रिपोर्ट में कोई ऐसा कथन करेगा, जो मिथ्या है और जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

 [38. धारा 25 का उल्लंघन-कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी या अनुज्ञप्त संसाधक, जो बोर्ड को किसी कॉफी का परिदान करने में, जैसा कि धारा 25 की उपधारा (1) और (2) के द्वारा या अधीन अपेक्षित है, असफल रहेगा, जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा, तथा वह न्यायालय, जिसके द्वारा ऐसा व्यक्ति सिद्धदोष ठहराया जाता है, किसी ऐसी कॉफी के, जिसकी बाबत वह अपराध किया गया था, बोर्ड को अधिहरण और परिदान का आदेश दे सकेगा

38. अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने से विधारित की गई कॉफी का अभिग्रहण करने की शक्तियां-यदि बोर्ड का समाधान हो जाता है कि कोई कॉफी, जिसका धारा 25 के उपबंधों के अधीन अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदत्त किया जाना अपेक्षित है, ऐसे परिदान से अन्यथा व्ययनित की जा रही है या व्ययनित की जानी सम्भाव्य है, तो बोर्ड ऐसी कॉफी के अभिग्रहण का आदेश दे सकेगा, और बोर्ड के किसी अधिकारी को प्राधिकृत कर सकेगा, कि वह अधिशेष पूल में सम्मिलित की जाने के लिए परिदान के लिए उसका अभिग्रहण कर ले, तथा ऐसा प्राधिकरण कॉफी का कब्जा लेने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए ऐसे अधिकारी के लिए पर्याप्त आधार होगा ]

39. बाधा-जो कोई बोर्ड के किसी सदस्य या अधिकारी या बोर्ड द्वारा या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को, इस अधिनियम के अधीन उस पर अधिरोपित या उसे सौंपे गए किसी कर्तव्य के निर्वहन में बाधित करेगा या जो किन्हीं अभिलेखों पर नियंत्रण या उन्हें अभिरक्षा में रखते हुए, उनके पेश करने की अपेक्षा की जाने पर, ऐसा करने में असफल रहेगा, अथवा बोर्ड के सदस्य या अधिकारी द्वारा या ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो ऐसे अभिलेखों का निरीक्षण करने या जानकारी की मांग करने के लिए बोर्ड द्वारा या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत है, विधिपूर्वक मांगी गई जानकारी देने से इन्कार करेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

 [39. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी हो, तो हर व्यक्ति, जो अपराध किए जाने के समय कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित दण्ड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी

(2) उपधारा (1) में, किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी अपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

() “कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा

() फर्म के संबंध में, “निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ]

40. अपराधों का संज्ञान-(1)  [महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट] के न्यायालय से भिन्न कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं करेगा

(2) कोई भी न्यायालय धारा 35 के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए, परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं,  [अथवा धारा 16 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अपराध का संज्ञान, या तो राज्य सरकार द्वारा या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किए परिवाद पर ही करेगा], अन्यथा नहीं, अथवा किसी अन्य धारा के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान, बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से किए गए परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहींः

 [परन्तु केन्दीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि ऐसे मामलों या ऐसे वर्गों के मामलों में, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, परिवादों के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक नहीं होगी ]   

साधारण

                41. [किसी सम्पदा द्वारा विक्रय की गई कॉफी की मात्रा अवधारित करने की बोर्ड की शक्ति ]-कॉफी (संशोधन) अधिनियम, 1961 (1961 का 48) की धारा 12 द्वारा निरसित

42. केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण-(1) बोर्ड के सभी कार्य सरकार के नियंत्रण के अधीन होंगे, जो बोर्ड द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई को रद्द, निलंबित या उपान्तरित, जैसा भी वह ठीक समझती है, कर सकेगी

(2) बोर्ड के अभिलेख, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा सभी युक्तियुक्त समयों पर निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे

43. केन्द्रीय सरकार को अपीलें-(1) बोर्ड के ऐसे आदेश से, जिसके द्वारा संसाधन स्थापन को अनुज्ञप्ति देने से इंकार किया गया है या उसकी अनुज्ञप्ति को रद्द किया गया है, व्यथित कोई व्यक्ति, आदेश के दिए जाने के साठ दिन के भीतर, केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा

(2) इस धारा के अधीन अपील करने वाला व्यक्ति पांच रुपए फीस का संदाय करेगा, जो केन्द्रीय राजस्वों के जमाखाते में                    डाली जाएगी

44. अभिलेखों का निरीक्षण- [केन्द्रीय सरकार द्वारा या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई भी व्यक्ति या अध्यक्ष द्वारा लिखित रूप में इस प्रकार प्राधिकृत बोर्ड का कोई भी सदस्य या बोर्ड का कोई भी अधिकारी, सभी युक्तियुक्त समयों पर], किसी ऐसी सम्पदा या किसी ऐसे संसाधन स्थापन  [या किसी ऐसे स्थान में, जहां कॉफी को विक्रय के लिए भण्डार में रखा जाता है या अभिदर्शित किया जाता है], प्रवेश कर सकेगा और उसमें रखे किन्हीं अभिलेखों को अपने द्वारा निरीक्षण के लिए पेश किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा अथवा  *** कॉफी के उत्पादन, भण्डारकरण या विक्रय से सम्बन्धित कोई भी जानकारी मांग सकेगा

45. बोर्ड के लेखे-(1) बोर्ड अपने द्वारा प्राप्त और व्यय किए गए सब धन के लेखे ऐसी रीति से रखेगा जो विहित की जाए

(2) साधारण निधि तथा मूल निधि के लिए लेखे अलग-अलग रखे जाएंगे

(3) बोर्ड प्रतिवर्ष लेखाओं की संपरीक्षा, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए गए संपरीक्षकों द्वारा कराएगा, तथा संपरीक्षकों को व्यय की किसी ऐसी मद को नामंजूर करने की शक्ति होगी जो, उनकी राय में, इस अधिनियम के अनुसार से अन्यथा उपगत की             गई है

(4) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड के आवेदन पर, व्यय की किसी ऐसी मद को मंजूर कर सकेगी जो संपरीक्षकों द्वारा उपधारा (3) के अधीन नामंजूर की गई है

46. बोर्ड के अभिलेखों का निरीक्षण और प्रतियों का अभिप्राप्त किया जाना-कोई रजिस्ट्रीकृत स्वामी,  *** विहित शर्तों के अधीन रहते हुए, बोर्ड द्वारा रखे गए अभिलेखों का निरीक्षण कर सकेगा और विहित फीस का संदाय करने पर, बोर्ड की किन्हीं कार्यवाहियों या आदेशों की प्रतियां अभिप्राप्त कर सकेगा

47. संविदाएं-कॉफी के विक्रय की सब संविदाएं, जहां तक वे इस अधिनियम के उपबन्धों से विसंवादी हैं, शून्य होंगीः

परन्तु इस धारा की कोई भी बात उन संविदाओं को लागू नहीं होगी जिनको भारतीय कॉफी बाजार विस्तारण अध्यादेश, 1940 (1940 का 13) की धारा 47 के अधीन वह अध्यादेश लागू नहीं था

 [47. विधिक कार्यवाहियों का वर्जन-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी ऐसी बात के लिए या उसके बारे में, जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित है, बोर्ड या बोर्ड के किसी अधिकारी के विरुद्ध होगी ]

48. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी

 [(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध करने के लिए बनाए जा सकेंगेः-

 [(i) बोर्ड का गठन, धारा 4 की उपधारा (2) के खण्ड () में विनिर्दिष्ट हर एक प्रवर्ग में से सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें, उनके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा उनमें हुई रिक्तियां भरने की रिति;

(ii) वे परिस्थितियां जिनमें और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा सदस्य हटाए जा सकेंगे;]

(iii) वह प्रक्रिया जो बोर्ड और उसकी समितियों के अधिवेशनों में कामकाज के संचालन के लिए अनुसरित की जाएगी और सदस्यों की वह संख्या, जो किसी अधिवेशन के लिए गणपूर्ति होगी;

(iv) बोर्ड द्वारा किए गए कारबार के अभिलेखों का बोर्ड द्वारा रखा जाना और केन्द्रीय सरकार को उसकी प्रतियों का प्रस्तुत किया जाना;

(v) बोर्ड के किसी न्यूनतम संख्या में अधिवेशनों का हर वर्ष किया जाना;

(vi) व्यय उपगत करने की बाबत बोर्ड, उसके अध्यक्ष और उसकी समितियों की शक्तियां;

(vii) वे शर्तें जिनके अधीन बोर्ड भारत के बाहर व्यय उपगत कर सकेगा;

(viii) बोर्ड की प्राप्तियों और व्यय के बजट प्राक्कलनों का तैयार किया जाना और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा वे प्राक्कलन मंजूर किए जाने होंगे;

(ix) बोर्ड की आय और व्यय के लेखे रखना और ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा;

(x) बोर्ड की निधियों का बैंकों में जमा किया जाना और ऐसी निधियों का विनिधान;

(xi) प्राक्कलित बचतों का किसी बजट शीर्ष के किसी अन्य बजट शीर्ष में पुनर्विनियोग;

(xii) वे शर्तें जिनके अधीन बोर्ड निधियां उधार ले सकेगा;

(xiii) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए और वह रीति जिससे बोर्ड द्वारा या उसके निमित्त संविदाएं की जा सकेंगी;

(xiv) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की किन्हीं शक्तियों और कर्तव्यों का बोर्ड की समिति या अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या सदस्यों या अधिकारियों को प्रत्यायोजन;

(xv) वह कर्मचारिवृन्द जो बोर्ड द्वारा नियोजित किया जा सकेगा तथा बोर्ड के (केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों से भिन्न) अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा छुट्टी और सेवा की अन्य शर्तें;

(xvi) बोर्ड और उसकी समितियों के सदस्यों के यात्रा भत्ते और अन्य भत्ते;

(xvii) बोर्ड और उसकी विभिन्न समितियों के रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों का रखा जाना;

(xviii) वह रीति जिससे कॉफी सम्पदाओं का  [खुले बाजार के लिए विक्रय कोटाट अवधारित किया जाएगा;

(xix) वह रीति जिससे बोर्ड कॉफी के क्रय और विक्रय की अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा;

(xx) बोर्ड द्वारा अभिकर्ताओं की नियुक्ति;

(xxi) वे शर्तें जिनकी पूर्ति संसाधन स्थापन को उस रूप में कार्य करने की अनुज्ञप्ति दी जा सकने के पहले संसाधन स्थापना द्वारा की जानी है;

(xxii) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड को दी जाने वाली किन्हीं विवरणियों या रिपोर्टों का प्ररूप और उनमें अन्तर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां;

(xxiii) बोर्ड द्वारा दी जाने वाली अनुज्ञप्तियों और अनुज्ञापत्रों का प्ररूप, उनके लिए आवेदन की रीति, उनके लिए संदेय फीसें, उनके अनुदत्त किए जाने की प्रक्रिया और उन्हें शासित करने वाली शर्तें;

(xiv) कॉफी या कॉफी के किसी उत्पाद की बाबत किसी जानकारी या आंकड़ों का संग्रहण;

(xxv) कोई अन्य (धारा 15 में विनिर्दिष्ट किसी विषय से भिन्न) विषय, जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित किया जाए

 [(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ]

 [49. 1935 के अधिनियम 14 का निरसन-भारतीय कॉफी उपकर अधिनियम, 1935 (1935 का 14) को निरसित किया जाता है ]

50. [निरसन और व्यावृत्तियां]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1947 (1948 का 2) की धारा 2 और अनुसूची                   द्वारा निरसित

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