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संसद के अधिनियम ( Private Security Agencies (Regulation) Act, 2005 )


 

संसद के अधिनियम

प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005

(2005 का अधिनियम संख्यांक 29)

[23 जून, 2005]

प्राइवेट सुरक्षा अभिकरणों के विनियमन और

उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के छपनवे वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: –

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ – (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005 हैं ।

(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत पर हैं ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।

2. परिभाषाये – इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, –

 (क) “बख्तरबंद कार सेवा” से बख्तरबंद कार के साथ सशस्त्र रक्षकों के अभिनियोजन द्वारा प्रदान की गई सेवा और ऐसी अन्य संबंधित सेवाएं अभिप्रेत हैं, जो समय-समय पर, यथस्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएं;

(ख) “नियंत्रक प्राधिकारी” से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त नियंत्रक प्राधिकारी अभिप्रेत हैं;

(ग) “अनुज्ञप्ति” से धारा 7 की उपधारा (5) के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्ति अभिप्रेत हैं;

(घ) “अधिसूचना” से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत हैं;         

(ङ) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत हैं;

(च) “प्राइवेट सुरक्षा” से, किसी व्यक्ति या संपत्ति अथवा दोनों की संरक्षा या रक्षा करने के लिए लोक सेवक से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत बख्तरबंद कार सेवा की व्यवस्था भी हैं;

(छ) “प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण” से किसी औद्योगिक या कारबार उपक्रम या किसी कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति या संपत्ति को प्राइवेट सुरक्षा सेवाएं जिनके अंतर्गत प्राइवेट सुरक्षा गार्डों या उनके पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण देना भी हैं, उपलब्ध कराने या प्राइवेट सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने के कारबार में लगा हुआ, सरकारी अभिकरण, विभाग या संगठन से भिन्न, कोई व्यक्ति या व्यक्तियों निकाय अभिप्रेत हैं;

(ज) “प्राइवेट सुरक्षा गार्ड” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत हैं जो किसी अन्य व्यक्ति या संपत्ति या दोनों को शस्त्र सहित या उनके बिना प्राइवेट सुरक्षा प्रदान कर रहा हैं और उसके अंतर्गत पर्यवेक्षक भी हैं;

(झ) संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, “राज्य सरकार” के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक भी हैं ।

3. नियंत्रक प्राधिकारी की नियुक्ति – (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, उस राज्य के गृह विभाग में संयुक्त सचिव से अन्यून पंक्ति के किसी अधिकारी या समतुल्य अधिकारी को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए नियंत्रक प्राधिकारी के रूप में पदाभिहित करेगी ।

(2) राज्य सरकार, नियंत्रक प्राधिकारी द्वारा कॄत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए, उसे ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारिवॄंद उपलब्ध करा सकेगी, जिन्हें राज्य सरकार आवश्यक समझे ।

4. व्यक्तियों या प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण द्वारा अनुज्ञप्ति के बिना प्राइवेट सुरक्षा गार्ड रखना या उपलब्ध कराना – कोई भी व्यक्ति प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण का कारबार तभी करेगा या प्रारंभ करेगा, जब उसके पास इस अधिनियम के अधीन जारी की गई अनुज्ञप्ति हो:

परंतु ऐसा कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पूर्व प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण का कारबार कर रहा हैं, ऐसे प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की अवधि तक और यदि उसने एक वर्ष की उक्त अवधि के भीतर ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन कर दिया हैं तो ऐसे आवेदन के निपटारे तक, ऐसा कारबार करता रहेगा:

परन्तु यह और कि कोई प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण विदेश में प्राइवेट सुरक्षा नियंत्रक प्राधिकारी की अनुज्ञा अभिप्राप्त किए बिना प्रदान नहीं करेगा जो ऐसी अनुज्ञा देने के पूर्व केन्द्रीय सरकार से परामर्श करेगा ।

5. अनुज्ञप्ति के लिए पात्रता – इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति जारी करने के लिए किसी व्यक्ति से आवेदन पर केवल उसके पूर्ववत के सम्यक् सत्यापन के पश्चात ही विचार किया जाएगा ।

6. वे व्यक्ति जो अनुज्ञप्ति के लिए पात्र नहीं हैं – (1) इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति जारी करने के लिए ऐसे व्यक्ति के संबंध में विचार नहीं किया जाएगा, यदि वह, –

“(क) किसी कंपनी के संप्रवर्तन, उसके बनाने या प्रबंध के संबंध में किसी अपराध के लिए (उसके द्वारा कंपनी के संबंध में किया गया कोई कपट या अपकरण) सिद्धदोष किया गया हैं, जिसके अंतर्गत अनुन्मोचित दिवालिया भी हैं; या

(ख) किसी सक्षम न्यायालय द्वारा किसी अपराध के लिए सिद्धदोष किया गया हैं, जिसके लिए विहित दंड दो वर्ष से अन्यून का कारावास हैं; या

(ग) किसी ऐसे संगठन या संगम से संपर्क रखता हैं जिसे उसके ऐसे क्रियाकलापो के कारण किसी विधि के अधीन प्रतिबंधित कर दिया गया हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या लोक व्यवस्था के लिए खतरा हैं यह ऐसे व्यक्ति के बारे में यह जानकारी हैं कि वह उन क्रियाकलापों में लिप्त हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा या लोक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं; या

(घ) अवचार या नैतिक अधमता के आधार पर सरकारी सेवा से पदच्युत किया गया हैं या हटाया गया हैं ।

(2) इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति जारी करने के लिए, किसी कंपनी, फर्म या व्यक्तियों के संगम पर विचार नहीं किया जाएगा, यदि, वह भारत में रजिस्ट्रीकृत नहीं हैं या जिसका स्वत्वधारी या बहुमत शेयर धारक, भागीदार या निदेशक ऐसा हैं जो भारत का नागरिक नहीं हैं ।

7. अनुज्ञप्ति अनुदत्त किए जाने के लिए आवेदन – (1) किसी प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण को अनुज्ञप्ति अनुदत्त किए जाने के लिए आवेदन नियंत्रक प्राधिकारी को ऐसे प्ररुप में किया जाएगा, जो विहित किया जाए ।

(2) आवेदक धारा 6 में अंतर्विष्ट उपबन्धों के संबंध में ब्यौरे समाविष्ट करते हुए एक शपथपत्र प्रस्तुत करेगा, धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित अपने प्राइवेट सुरक्षा गार्डों और पर्यवेक्षकों के लिए प्रशिक्षण की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, धारा 11 के अधीन और पुलिस में रजिस्ट्रीकृत या न्यायालय में लंबित मामलों की, जिनमें आवेदक लिप्त हैं, शर्तों को पूरा करेगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन के साथ –

(क) यदि प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण किसी राज्य के एक जिले में कार्य कर रहा हैं तो पांच हजार रुपए की फीस होगी;

(ख) यदि अभिकरण किसी राज्य के एक से अधिक किंतु पांच जिलों तक में कार्य कर रहा हैं तो दस हजार रुपए की फीस होगी; और

(ग) यदि वह संपूर्ण राज्य में कार्य कर रहा हैं तो पच्चीस हजार रुपए की फीस होगी ।

(4) नियंत्रक प्राधिकारी, उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, ऐसी जांच करने के पश्चात जिसे वह आवश्यक समझे, और संबद्ध पुलिस प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने के पश्चात लिखित आदेश द्वारा, आवेदन की पूर्ण विशिष्टियों और विहित फीस के साथ प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर या तो अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा या अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इनकार कर सकेगा:

परन्तु आवेदन अस्वीकार किए जाने का कोई आदेश तभी किया जाएगा जब –

आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दे दिया गया हो; और

(ख) वे आधार, जिन पर अनुज्ञप्ति से इनकार किया जाता हैं, आदेश में वर्णित किए गए हों ।

(5) इस धारा के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्ति –

(क) पांच वर्ष की अवधि के लिए विधिमान्य रहेगी, जब तक कि उसे धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन रद्द नहीं कर दिया जाता;

(ख) पांच वर्ष की समाप्ति के पश्चात, ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए, समय-समय पर पांच वर्ष की एक और अवधि के लिए नवीकृत की जा सकेगी; और

(ग) ऐसी शर्तों के अध्यधीन होंगी, जो विहित की जाएं ।

8. अनुज्ञप्ति का नवीकरण – (1) अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए आवेदन नियंत्रक प्राधिकारी को, अनुज्ञप्ति की विधिमान्यता की अवधि की समाप्ति की तारीख से कम-से-कम पैंतालीस दिन पूर्व ऐसे प्ररुप में, जो विहित किया जाए, किया जाएगा और उसके साथ अपेक्षित फीस और इस अधिनियम की धारा 6, धारा 7 तथा धारा 11 के अधीन अपेक्षित अन्य दस्तावेज भी होंगे ।

 (2) नियंत्रक प्राधिकारी अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए आवेदन पर सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के अंदर आदेश पारित करेगा ।

(3) नियंत्रक प्राधिकारी, उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर ऐसी जांच करने के पश्चात जिसे वह आवश्यक समझे और लिखित आदेश द्वारा, अनुज्ञप्ति का नवीकरण कर सकेगा या उसका नवीकरण करने से इनकार कर सकेगा:

परन्तु इनकार करने का कोई आदेश, आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के पश्चात ही किया जाएगा ।

9. प्रचालन प्रारंभ करने और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की शर्तें – (1) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण, अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करने के छह मास के भीतर अपने क्रियाकलाप प्रारंभ करेगा ।

(2) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण अपने प्राइवेट सुरक्षा गार्डों और पर्यवेक्षकों को ऐसा प्रशिक्षण और कुशलताएँ, जो विहित किए जाएं, देना सुनिश्चित करेगा:

परन्तु इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण का कारबार करने वाला व्यक्ति, ऐसे प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर अपने सुरक्षा गार्डों और पर्यवेक्षकों के लिए अपेक्षित प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा ।

(3) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण, अनुज्ञप्ति जारी किए जाने की तारीख से साठ दिन के भीतर ऐसी संख्या में, जो विहित की जाए, पर्यवेक्षकों को नियोजित करेगा ।

(4) कोई प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण पर्यवेक्षक के रूप में किसी व्यक्ति को तभी नियोजित करेगा या रखेगा जब वह धारा 10 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करता हो ।

(5) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण, प्राइवेट सुरक्षा गार्डों के किसी पर्यवेक्षक की नियुक्ति करते समय उस व्यक्ति को, जिसके पास सेना, नौसेना, वायु सेना, संघ के किसी अन्य सशस्त्र बल या राज्य पुलिस, जिसके अंतर्गत सशस्त्र पुलिस और होम गार्ड भी हैं; तीन वर्ष से अन्यून की अवधि की सेवा का अनुभव हो, अधिमानता देगा ।

10. प्राइवेट सुरक्षा गार्ड बनने के लिए पात्रता – (1) कोई प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण प्राइवेट सुरक्षा गार्ड के रूप में किसी व्यक्ति को तभी नियोजित करेगा या रखेगा, जब –

(क) वह भारत का नागरिक हो या ऐसे अन्य देश का नागरिक हो जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ;

(ख) उसने अट्ठारह वर्ष की आयु पूरी कर ली हो किंतु पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त की हो;

(ग) उसने अभिकरण का अपने चरित्र और पूर्ववृत्त के बारे में ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, समाधान कर दिया हो;

(घ) उसने विहित सुरक्षा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण न किया हो;

(ङ) वह ऐसे शारीरिक मानदंडों को पूरा करता हो जो विहित किए जाएं; और

(च) वह ऐसी अन्य शर्तों को, जो विहित की जाएं, पूरा करता हो ।

(2) ऐसा कोई भी व्यक्ति सक्षम न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किया गया हैं या जिसे संघ के किसी सशस्त्र बल, किसी राज्य पुलिस संगठन, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण में, सेवा करते समय अवचार या नैतिक अधमता के आधारों पर सेवा से पदच्युत किया गया हैं या हटाया गया हैं, प्राइवेट सुरक्षा गार्ड या पर्यवेक्षक के रूप में नियोजित या लगाया नहीं जाएगा ।

(3) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण, किसी व्यक्ति को प्राइवेट सुरक्षा गार्ड के रूप में नियोजित करते समय, ऐसे व्यक्ति को अधिमानता दे सकेगा, जिसने निम्नलिखित में किसी एक या अधिक में उसके सदस्य के रूप में सेवा की हैं: –

सेना;

नौसेना;

वायु सेना;

संघ का कोई अन्य सशस्त्र बल;

पुलिस, जिसके अंतर्गत राज्यों की सशस्त्र पुलिस भी हैं; और

होमगार्ड ।

11. अनुज्ञप्ति की शर्तें – (1) राज्य सरकार उन शर्तों को विहित करने के लिए नियम विरचित कर सकेगी जिन पर इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जाएगी और ऐसी शर्तों में अपेक्षाएं, जो उस प्रशिक्षण के विषय में जिनसे अनुज्ञप्तिधारी को लेना हैं, उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों, जिनसे अभिकरण बना हैं, का ब्यौरा नियंत्रक प्राधिकारी को समय-समय पर उनके पते में किसी परिवर्तन, प्रबंध में परिवर्तन के संबंध में और उनके द्वारा नियोजित या नियुक्त, यथाास्थिति, प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण या प्राइवेट सुरक्षा गार्ड के कर्त्तव्य के पालन के अनुक्रम में उनके विरुद्ध ऐसे किसी दांड़िक आरोप के संबंध में दी जाने वाली सूचना की बाध्यता भी हैं ।

(2) राज्य सरकार धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण द्वारा अपेक्षित प्रशिक्षण दिए जाने के बारे में सत्यापन करने और ऐसे प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण की जिसने अपेक्षित प्रशिक्षण सुनिश्चित करने की शर्तों का पालन नहीं किया हो, अनुज्ञप्ति को जारी रखने का या अन्यथा के पुनर्विलोकन करने का नियमों में उपबंध कर सकेगी ।

12. अनुज्ञप्ति का प्रदर्शित किया जाना – प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण अपनी अनुज्ञप्ति या उसकी प्रति अपने कारबार के सहज दृश्य स्थान पर परदर्शित करेगा ।

13. अनुज्ञप्ति का रद्दकरण और निलंबन – (1) नियंत्रक प्राधिकारी किसी अनुज्ञप्ति को निम्नलिखित किसी एक या अधिक आधारों पर रद्द कर सकेगा, अर्थात्: –

(क) कि अनुज्ञप्ति तात्विक तथ्यों के व्यपदेशन पर या उनको छिपाकर अभिप्राप्त की गई हैं;

(ख) कि अनुज्ञप्तिधारी ने मिथ्या दस्तावेजों या फोटोग्राफों का उपयोग किया है;

(ग) कि अनुज्ञप्तिधारी ने इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों या अनुज्ञप्ति की किसी शर्त का अतिक्रमण किया हैं;

(घ) कि अनुज्ञप्तिधारी ने किसी औद्योगिक या कारबार उपक्रम या कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति के यहां प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण के रूप में अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उसके द्वारा अभिप्राप्त की गई जानकारी का दुरुपयोग किया हैं;

(ङ) कि अनुज्ञप्तिधारी ने, किसी शीर्षनामा विज्ञापन या किसी अन्य मुद्रित सामग्री का उपयोग करके या किसी अन्य रीति से यह व्यपदेशन किया हैं कि प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण सरकार का एक अभिकरण हैं या ऐसा अभिकरण उस नाम से भिन्न किसी नाम का उपयोग कर रहा हैं जिस नाम से उसे अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई हैं;

(च) कि अनुज्ञप्तिधारी लोक सेवक के रूप में प्रतिरूपण कर रहा हैं या किसी व्यक्ति को उस रूप में प्रतिरूपण करने के लिए दे रहा हैं या सहायता कर रहा हैं या दुष्प्रेरित कर रहा हैं;

(छ) कि प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण विनिर्दिष्ट समयावधि के भीतर अपने क्रियाकलाप प्रारंभ करने में या पर्यवेक्षक नियुक्त करने में असफल रहा था;

(ज) कि अनुज्ञप्तिधारी किसी व्यक्ति को करार की गई सेवाएं प्रदान करने में जानबूझकर असफल रहा हैं या उसने सेवाएं प्रदान करने से इनकार कर दिया हैं;

(झ) कि अनुज्ञप्तिधारी ने ऐसा कार्य किया हैं जो किसी न्यायालय के आदेश या किसी विधिपूर्ण प्राधिकारी के आदेश के अतिक्रमण में हैं या वह ऐसे किसी आदेश का अतिक्रमण करने के लिए किसी व्यक्ति को सलाह दे रहा हैं, प्रोत्साहित कर रहा हैं या सहायता दे रहा हैं;

(ञ) कि अनुज्ञप्तिधारी ने अनुसूची में दिए गए अधिनियमों के उपबन्धों का जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उपांतरित किए जा सकेंगे, अतिक्रमण किया हैं;

(ट) कि इस बात के अनेक उदाहरण रहे हैं जब प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राइवेट सुरक्षा गार्ड: –

प्राइवेट सुरक्षा प्रदान करने में असफल रहा हैं या रहे हैं या ऐसी सुरक्षा प्रदान न करने में घोर उपेक्षा के दोषी थे;

उन्होंने न्यास भंग किया हैं या उस संपत्ति या उसके किसी भाग का दुर्विनियोग किया हैं जिसकी संरक्षा करने की उनसे प्रत्याशा की गई थी;

आदतन नशे में या अनुशासनहीन पाए गए थे;

अपराध करने में लिप्त पाए गए थे; या

उन्होंने उनके प्रभार में करने गए व्यक्ति या संपत्ति के विरुद्ध अपराध की मौनानुमति दी थी या उन्होंने उसके लिए दुष्प्रेरित किया था;

(ठ) कि अनुज्ञप्तिधारी ने ऐसा कोई कार्य किया हैं जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हुआ हैं या पुलिस को या अन्य प्राधिकारी को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता प्रदान न की या उसने ऐसी रीति से कार्य किया हैं जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा या लोक व्यवस्था या विधि व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं ।

(2) जहां नियंत्रक प्राधिकारी का, ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएं, यह समाधान हो जाता हैं कि उपर्युक्त उपधारा (1) में वर्णित आधारों में से किसी आधार पर अनुज्ञप्ति के रद्दकरण के प्रश्न के लंबित रहते हुए ऐसा करना आवश्यक हैं कि नियंत्रक प्राधिकारी, लिखित आदेश द्वारा, अनुज्ञप्ति के प्रचालन को तीस दिन से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित कर सकेगा और अनुज्ञप्तिधारी से ऐसे आदेश के जारी किए जाने की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर इस बारे में कारण दर्शित करने की अपेक्षा कर सकेगा कि अनुज्ञप्ति का निलंबन, रद्दकरण का प्रश्न अवधारित किए जाने तक क्यों न विस्तारित कर दिया जाए ।

(3) अनुज्ञप्ति के निलंबन या रद्दकरण का प्रत्येक आदेश लिखित में होगा और उसमें ऐसे निलंबन या रद्दकरण के कारण विनिर्दिष्ट किए जाएंगे तथा उसकी एक प्रति प्रभावित व्यक्ति को संसूचित की जाएगी ।

(4) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के रद्दकरण का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि संबद्ध व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

14. अपील – (1) धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने या धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन नवीकरण करने से इनकार करने के नियंत्रक प्राधिकारी के आदेश या धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञप्ति के निलंबन के आदेश या उस धारा की उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के रद्दकरण के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस आदेश के विरुद्ध अपील राज्य सरकार के गृह सचिव को ऐसे आदेश की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर कर सकेगा:

परंतु साठ दिन की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात भी अपील ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी राज्य सरकार का यह समाधान कर देता हैं कि उसके पास उस अवधि के भीतर अपील न कर पाने के लिए पर्याप्त कारण हैं ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपील ऐसे प्ररुप में होगी जो विहित किया जाए और उसके साथ उस आदेश की जिसके विरुद्ध अपील की गई हैं, एक प्रति होगी ।

(3) राज्य सरकार, अपील का निपटारा करने से पूर्व, अपीलार्थी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देगी ।

15. प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण द्वारा रजिस्टर का रखा जाना – (1) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण एक रजिस्टर रखेगा जिसमें –

(क) उन व्यक्तियों के नाम और पते होंगे जो प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण का प्रबंध कर रहे हैं;

(ख) उसके नियंत्रणाधीन प्राइवेट सुरक्षा गार्डों और पर्यवेक्षकों के नाम, पते फोटोग्राफ और वेतन होंगे;

(ग) उन व्यक्तियों के नाम और पते होंगे जिनको उसने प्राइवेट सुरक्षा गार्ड या सेवाएं उपलब्ध कराई हैं; और

(घ) ऐसी अन्य विशिाष्टियां होंगी जो विहित की जाएं ।

(2) नियंत्रक प्राधिकारी, किसी प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण, पर्यवेक्षक या प्राइवेट सुरक्षा गार्ड से ऐसी जानकारी मांग सकेगा जिसे वह इस अधिनियम के सम्यक् अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक समझे ।

16. अनुज्ञप्ति आदि का निरीक्षण – नियंत्रक प्राधिकारी या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी किसी युक्तियुक्त समय पर, प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण के परिसर में प्रवेश कर सकेगा और उसके कारबार के स्थान, अभिलेखों, लेखाओं और अनुज्ञप्ति से संबंधित अन्य दस्तावेजों का निरीक्षण और जांच कर सकेगा तथा किसी दस्तावेज की प्रति ले सकेगा ।

17. फोटो पहचान पत्र का जारी किया जाना – (1) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को, उस प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण द्वारा, जिसने उस गार्ड को नियोजित या नियुक्त किया हैं, फोटो पहचान पत्र जारी किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन फोटो पहचान पत्र ऐसे प्ररुप में, जो विहित किया जाए, जारी किया जाएगा ।

(3) प्रत्येक प्राइवेट सुरक्षा गार्ड या पर्यवेक्षक अपने साथ उपधारा (1) के अधीन जारी किया गया फोटो पहचान पत्र रखेगा और नियंत्रक प्राधिकारी या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा निरीक्षण के लिए मांग किए जाने पर उसे प्रस्तुत करेगा ।

18. अप्राधिकृत व्यक्ति को जानकारी का प्रकटन – (1) कोई व्यक्ति जिसे प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण द्वारा प्राइवेट सुरक्षा गार्ड के रूप में नियोजित किया जाए या नियुक्त किया गया हैं या रखा गया हैं, नियोजक से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को, या ऐसी रीति में और ऐसे व्यक्ति को जिसे नियोजक निदेश दे, उस कार्य के संबंध में ऐसे नियोजन के दौरान उसके द्वारा अर्जित कोई जानकारी जो ऐसे नियोजक द्वारा समनुदेशित किया गया हो, सिवाय ऐसे प्रकटीकरण के जो इस अधिनियम के अधीन या पुलिस द्वारा किसी जांच या अन्वेषण के संबंध में या किसी प्राधिकारी द्वारा या विधि की प्रक्रिया में अपेक्षित हो, प्रकट नहीं करेगा ।

(2) प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण के समस्त प्राइवेट सुरक्षा गार्ड पुलिस को या ऐसे प्राधिकारी को उस अभिकरण के क्रियाकलापों से संबंधित किसी अन्वेषण की प्रक्रिया में आवश्यक सहायता देंगे ।

(3) यदि किसी विधि का अतिक्रमण किसी प्राइवेट सुरक्षा गार्ड की, उसके कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान जानकारी में आता हैं तो वह उसे अपने वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी में लाएगा, जो नियोजक या अभिकरण के माध्यम से या स्वयं पुलिस को जानकारी देगा ।

19. प्रत्यायोजन – राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि (धारा 25 के अधीन नियम बनाने की शक्तियों को छोडकर) ऐसी किसी शक्ति या कृत्य का, जिसका इस अधिनियम के अधीन, –

(क) उसके द्वारा प्रयोग का पालन किया जा सकेगा, या

(ख) नियंत्रक प्राधिकारी द्वारा प्रयोग या पालन किया जा सकेगा,

ऐसे विषय के संबंध में और ऐसी शर्तों, यदि कोई हों, के अधीन रहते हुए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी या नियंत्रक प्राधिकारी के अधीनस्थ अधिकारी द्वारा भी, जो ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयोग या पालन किया जा सकेगा ।

20. कतिपय उपबन्धों के उल्लंघन के लिए दंड – (1) कोई व्यक्ति जो धारा 4 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दंडनीय होगा ।

(2) कोई व्यक्ति या प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण जो अधिनियम की धारा 9, धारा 10 और धारा 12 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, अनुज्ञप्ति के निलंबन या रद््दकरण के अतिरिक्त, जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

21. कतिपय वर्दियों के अप्राधिकृत उपयोग के लिए शास्ति – यदि कोई प्राइवेट सुरक्षा गार्ड या पर्यवेक्षक, सेना, वायुसेना, नौसेना या संघ के किसी अन्य सशस्त्र बल या पुलिस की वर्दी पहनेगा या ऐसी पोशाक पहनेगा जो उस वर्दी के समान हो या उस पर उस वर्दी के सुभिन्न चिह्न लगे हुए हों, तो वह और प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण का स्वत्वधारी, कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।

22. कंपनियों द्वारा अपराध – (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कंपनी द्वारा किया गया हैं वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाऐगी यदि वह यह साबित कर देता हैं कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध, किसी कंपनी द्वारा किया गया हैं और यह साबित हो जाता हैं कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया हैं या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता हैं, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के लिए, –

(क) “कंपनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी हैं; और

(ख) फर्म के संबंध में, “निदेशक” से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत हैं ।

23. संरक्षण – इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नियंत्रक प्राधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के विरुद्ध नहीं होगी ।

24. राज्यों द्वारा अंगीकार के लिए आदर्श नियमों की विरचना – केन्द्रीय सरकार, ऐसे सभी या किसी विषय, जिसके संबंध में राज्य सरकार इस अधिनियम के अधीन नियम बना सकेगी, के संबंध में आदर्श नियम विरचित कर सकेगी और जहां ऐसे आदर्श नियम राज्य सरकार द्वारा विरचित किए जा चुके हैं वहां धारा 25 के अधीन उस विषय के संबंध में कोई नियम बनाते समय, यथासाध्य, ऐसे आदर्श नियमों के अनुरूप बनाएगी।

25. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति – (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टता और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: –

(क) धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन चरित्र और पूर्ववृत्त के सत्यापन की प्रक्रिया; धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (घ) के अधीन प्रशिक्षण का प्रकार; धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ङ) के अधीन शारीरिक मानदंड और धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (च) के अधीन अन्य शर्तें;

(ख) धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन नियोजित किए जाने वाले पर्यवेक्षकों की संख्या;

(ग) धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के अनुदान के लिए आवेदन का प्ररुप;

(घ) वह प्ररुप जिसमें धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जाएगी और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 11 के अधीन ऐसी अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जाएगी;

(ङ) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए आवेदन का प्ररुप;

(च) अपील करने के लिए धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन प्ररुप;

(छ) धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्टर में रखी जाने वाली विशिष्टियां;

(ज) वह प्ररुप जिसमें धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन फोटो पहचान पत्र जारी किया जाएगा;

(झ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित हैं या विहित किया जाए ।

(3) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात यथाशीघ्र, जहां राज्य विधान-मंडल में दो सदन हैं वहां प्रत्येक सदन के समक्ष या जहां ऐसे विधान-मंडल का एक सदन हैं, वहां उस सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

(4) संघ राज्यक्षेत्रों के संबंध में, अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए बनाया गया प्रत्येक नियम, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष और जहां विधान सभा विद्यमान हैं वहां उस विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा ।

अनुसूची

[धारा 13(1)(ञ) देखिये]

(1)          मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) ।

(2)          औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) ।

(3)          न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 (1948 का 11) ।

(4)          कर्मचारी भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) ।

(5)          बोनस संदाय अधिनियम, 1965 (1965 का 21) ।

(6)          ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 (1970 का 37) ।

(7)          उपदान संदाय अधिनियम, 1972 (1972 का 39) ।

(8)          समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 (1976 25) ।

(9)          अंतररााज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा शर्त) अधिनियम, 1979 (1979 का 30) ।

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