राजनयिक और कौंसलीय आफिसर (शपथ और फीस)
(जम्मू-कश्मीर पर विस्तारण) अधिनियम, 1973
(1973 का अधिनियम संख्यांक 2)
[13 मार्च, 1973]
राजनयिक और कौंसलीय आफिसर (शपथ और फीस) अधिनियम, 1948
का जम्मू-कश्मीर राज्य पर विस्तार करने का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौबीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राजनयिक और कौंसलीय आफिसर (शपथ और फीस) (जम्मू-कश्मीर पर विस्तारण) अधिनियम, 1973 है ।
(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा ।
2. 1948 के अधिनियम 41 का विस्तार-राजनयिक और कौंसलीय आफिसर (शपथ और फीस) अधिनियम, 1948 का (जिसे इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम कहा गया है) इसके द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य पर विस्तार किया जाता है और वह जम्मू-कश्मीर राज्य में तथा उसके संबंध में प्रवृत्त होगा और तदनुसार,-
(क) मूल अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्ध जम्मू-कश्मीर राज्य को और उसके संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी अन्य राज्य को और उसके संबंध में लागू होते हैं;
(ख) मूल अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (घ) का लोप कर दिया जाएगा ।
[3. धारा 8 का संशोधन-मूल अधिनियम की धारा 8 की उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।ञ्ज्।ट
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