कृषि उपज (श्रेणीकरण और चिह्नांकन) अधिनियम, 1937
(1937 का अधिनियम संख्यांक 1)
[24 फरवरी, 1937]
कृषि उपज [और अन्यट उपज के श्रेणीकरण और चिह्नांकन के लिए उपबन्ध करने के लिए अधिनियम
कृषि उपज 2[और अन्य] उपज के श्रेणीकरण और चिह्नांकन के लिए उपबन्ध करना समीचीन है;
अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता हैः-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कृषि उपज (श्रेणीकरण और चिह्नांकन) अधिनियम, 1937 है ।
[(2) इसका विस्तार *** सम्पूर्ण भारत पर है ।]
2. स्पष्टीकरण-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ से प्रतिकूल प्रतीत न हो,-
(क) “कृषि उपज" के अन्तर्गत कृषि या उद्यानकृषि की सभी उपज और ऐसी किसी उपज से पूर्णतः या भागतः विनिर्मित सभी खाद्य या पेय पदार्थ और ऊन और जानवरों की खालें आती हैं;
(ख) “कूटकृत" का वही अर्थ है जो भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 28 में है;
(ग) “आवेष्टक" के अन्तर्गत कोई बर्तन, बक्सा, क्रेट, रैपर, ट्रे या अन्य पात्र हैं;
(घ) “श्रेणी अभिधान" से ऐसा अभिधान अभिप्रेत है, जो किसी अनुसूचित वस्तु की क्वालिटी उपदर्शित करने के लिए विहित है;
(ङ) “श्रेणी अभिधान चिह्न" से ऐसा चिह्न अभिप्रेत है, जो किसी विशिष्ट श्रेणी अभिधान को प्रतिदर्शित करने के लिए विहित है;
(च) किसी वस्तु के सम्बन्ध में क्वालिटी" के अन्तर्गत उस वस्तु की अवस्था और दशा भी है;
(छ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ज) अनुसूचित वस्तु" से कोई ऐसी वस्तु अभिप्रेत है जो अनुसूची में सम्मिलित की गई है; ***
(झ) कोई पदार्थ किसी श्रेणी अभिधान चिह्न से चिह्नांकित उस दशा में कहा जाता है जब स्वयं वह पदार्थ श्रेणी अभिधान चिह्न से चिह्नांकित है या कोई आवेष्टक, जिसमें ऐसा पदार्थ रखा हुआ है या कोई लेबल, जो ऐसे पदार्थ से संलग्न किया गया है, इस प्रकार चिह्नांकित है;
[(ञ) किसी वस्तु को मिथ्या श्रेणीकरण किया गया श्रेणीकृत कहा जाएगा, यदि-
(i) वह वस्तु उस श्रेणी अभिधान के लिए विहित क्वालिटी की नहीं है जो उस पर चिह्नांकित है;
(ii) श्रेणीकरण के लिए दी गई वस्तु की संरचना, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार वस्तु के विश्लेषण और श्रेणी अभिधान के अवधारण के लिए नमूना लिए जाने के पश्चात् किसी भी रीति से परिवर्तित की जाती है;
(iii) वस्तु किसी रीति से बिगाड़ दी जाती है; और
(iv) उसके श्रेणी अभिधान के लिए विहित क्वालिटी के लिए उसके लेबल पर या विज्ञापन के माध्यम से या किसी अन्य रीति से, कोई मिथ्या दावा किया जाता है ।]
3. श्रेणी अभिधानों का विहित किया जाना- [(1)] केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा पूर्व प्रकाशन के पश्चात् [इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-]
(क) किसी अनुसूचित वस्तु की क्वालिटी उपदर्शित करने के लिए श्रेणी अभिधान नियत करना;
(ख) हर श्रेणी अभिधान द्वारा उपदर्शित क्वालिटी को परिभाषित करना;
(ग) विशिष्ट श्रेणी अभिधानों को प्रतिदर्शित करने के लिए श्रेणी अभिधान चिह्न विनिर्दिष्ट करना;
(घ) किसी पदार्थ को, जिसके सम्बन्ध में कोई श्रेणी अभिधान चिह्न विहित किया गया है या किसी आवेष्टक को, जिसमें ऐसा पदार्थ रखा हुआ है या किसी लेबल को जो ऐसे पदार्थ से संलग्न किया गया है, ऐसे चिह्न से चिह्नांकित करने के लिए, किन्हीं विहित शर्तों के अधीन, किसी व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय को प्राधिकृत करना;
(ङ) खण्ड (घ) में निर्दिष्ट शर्तों को विनिर्दिष्ट करना जिनके अन्तर्गत किसी पदार्थ के सम्बन्ध में चिह्नांकित करने की रीति, प्रयुक्त किए जाने वाले आवेष्टक के स्वरूप और प्रत्येक आवेष्टक के भार, संख्या या अन्य आधार पर रखे जाने वाले परिमाण से सम्बद्ध शर्तें भी हैं;
(च) श्रेणी अभिधान चिह्न उभारने के लिए आवश्यक किसी उपकरण के विनिर्माण या उपयोग के सम्बन्ध में या श्रेणी अभिधान चिह्न से चिह्नांकित किसी आवेष्टक या लेबल के विनिर्माण या उपयोग के सम्बन्ध में [या श्रेणी अभिधान चिह्नों से चिह्नांकित पदार्थों की क्वालिटी के नियंत्रण के लिए ऐसे पदार्थों के निरीक्षण और नमूनों के परीक्षण सहित किए गए उपायों के सम्बन्ध में या किसी वर्ग की ऐसी वस्तुओं के विक्रय की उन्नति के लिए किए गए प्रचार कार्य के सम्बन्ध में हुए किन्हीं व्ययों के चुकाने के लिए उपबन्ध करना; ***
(छ) किसी श्रेणी अभिधान चिह्न से, विहित शर्तों के अनुसार चिह्नांकित करने से अन्यथा चिह्नांकित उपज के अधिहरण और व्ययन के लिए उपबन्ध करना;
[(ज) कोई अन्य विषय, जिसका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए ।]
[ [(3)] इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम के कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उनके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
5[3क. प्रवेश, निरीक्षण और तलाशी की शक्तियां-(1) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी प्राधिकरण का कोई अधिकारी जो राजपत्रित रैंक या समतुल्य रैंक का अधिकारी है और जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया है, यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है तो, किसी उचित समय पर किसी परिसर में प्रवेश कर सकेगा और उस कृषि उपज का, जिसके संबंध में ऐसा उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है, आवश्यक निरीक्षण कर सकेगा और उसके लिए तलाशी ले सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक प्राधिकरण दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 93 में निर्दिष्ट वारण्ट समझा जाएगा ।
3ख. कृषि उपज के अभिग्रहण के लिए प्राधिकृत अधिकारी की शक्तियां-(1) धारा 3क की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी किसी ऐसी कृषि उपज को जिसके संबंध में इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन अपराध किया जा रहा है या किया गया प्रतीत होता है या जो ऐसा अपराध किए जाने में प्रयोग किए जाने के लिए आशयित है या संभावित है, अभिगृहीत और प्रतिधृत कर सकेगाः
परन्तु जहां इस उपधारा के अधीन अभिगृहीत कोई कृषि उपज शीघ्रतया या प्रकृत्या क्षयशील है वहां इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी ऐसी उपज का, ऐसी रीति से जो विहित की जाए, व्ययन कर सकेगा ।
(2) इस धारा के अधीन किए गए प्रत्येक अभिग्रहण को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 ( 1974 का 2) की धारा 102 के उपबन्ध लागू होंगे ।]
4. अप्राधिकृत रूप से श्रेणी अभिधान चिह्नों से चिह्नांकित करने के लिए शास्ति-जो कोई धारा 3 के अधीन बनाए गए नियम द्वारा प्राधिकृत न होते हुए किसी अनुसूचित पदार्थ को श्रेणी अभिधान से चिह्नांकित करेगा, वह [कारावास से, जो अधिक से अधिक छम माह तक का हो सकेगा और जुर्माने से, जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।]
5. श्रेणी अभिधान चिह्न के कूटकरण के लिए शास्ति-जो कोई किसी श्रेणी अभिधान चिह्न का कूटकरण करेगा या जिसके कब्जे में किसी श्रेणी अभिधान चिह्न के कूटकरण के प्रयोजन के लिए कोई सांचा, प्लेट या अन्य उपकरण होगा, वह [कारावास से, जो अधिक से अधिक तीन वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से, जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगाट दण्डनीय होगा ।
[5क. मिथ्या श्रेणीकरण की गई वस्तुओं का विक्रय करने के लिए शास्ति-जो कोई भी किसी ऐसी अनुसूचित वस्तु का, जो कुश्रेणीकृत है, विक्रय करेगा, वह कारावास से, जो अधिक से अधिक छह मास तक का हो सकेगा और जुर्माने से, जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
5ख. कतिपय वस्तुओं की बाबत श्रेणी अभिधान अनिवार्यतः विहित करने की शक्ति-(1) जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि लोकहित में या उपभोक्ताओं के संरक्षण के लिए यह आवश्यक है कि किसी अनुसूचित वस्तु या वस्तुओं के वर्ग का विक्रय या वितरण तब तक नहीं किया जाए जब तक कि ऐसी वस्तु या वस्तुओं का वर्ग श्रेणी अभिधान चिह्न से चिह्नांकित न हों वहां, वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस आशय की घोषणा कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में वह क्षेत्र या वे क्षेत्र विनिर्दिष्ट किया जाएगा या किए जाएंगे, जिसके या जिनके संबंध में अधिसूचना प्रभावी होगी ।
(3) जहां किसी क्षेत्र या किन्हीं क्षेत्रों की बाबत उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी की जाती है, वहां कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार के सिवाय, उस क्षेत्र या उन क्षेत्रों में किसी अनुसूचित वस्तु या उसके वर्ग का विक्रय या वितरण नहीं करेगा या उसे विक्रय या वितरण के लिए प्रस्थापित नहीं करेगा ।
(4) जो कोई भी इस धारा के उपबंधों का उल्लंघन करेगा वह कारावास से जो अधिक से अधिक छह मास तक का हो सकेगा और जुर्माने से, जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
5ग. अभियोजन का संस्थित किया जाना-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान निम्नलिखित के लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं, अर्थात्ः-
(क) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या उसके द्वारा लिखित रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी; या
(ख) व्यथित व्यक्ति; या
(ग) कोई मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम, चाहे व्यथित व्यक्ति उस संगम का सदस्य हो या न हो ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए “मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत स्वैच्छिक उपभोक्ता संगम अभिप्रेत है ।]
6. अधिनियम का विस्तारण-केन्द्रीय सरकार उनसे, जिनके हितों के प्रभावित होने की संभाव्यता है, ऐसा परामर्श करके, जैसा वह उचित समझती है, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकेगी कि इस अधिनियम के उपबन्ध कृषि उपज के ऐसे पदार्थ को जो अनुसूची में सम्मिलित नहीं किया हुआ है [अथवा कृषि उपज के पदार्थ से भिन्न किसी पदार्थ का लागू होंगे] और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन पर ऐसे पदार्थ को अनुसूची में सम्मिलित समझा जाएगा ।
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अनुसूची
(धारा 2 देखिए)
1. फल
2. सब्जियां
3. अंडे
4. डेरी उत्पाद
5. तम्बाकू
6. काफी
7. चमड़ा और खालें
8. फलों से बनी चीजें
9. आटा
10. तिलहन
11. वनस्पति तेल (हाइड्रोजनीकृत तेल और वनस्पति वसा सहित)
12. कपास
13. चावल
14. लाख
15. गेहूं
16. सन
17. गुड़
18. हरीतकी
19. बूरा
20. ऊन और बकरी के बाल
21. सुअर के बाल
22. राल और तारपीन
23. सुपारी
24. वाष्पशील तेल
25. काजू
26. इलायची
27. काली मिर्च
28. अदरक
29. शहद
30. करी पाउडर
31. सेमल की रूई
32. कच्चा जूट
33. धान
34. मोटा अनाज
35. मेस्टा
36. मिर्च
37. हल्दी
38. टैपियोका चिप और टैपियोका आटा
39. सीसल और ऐलो के रेशे
40. खली
41. (काली मिर्च, अदरक, काजू, इलायची, मिर्च और हल्दी को, जिनको अधिनियम के उपबन्ध पहले ही लागू हो गए हैं, छोड़कर) मसाले और गर्म मसाले
42. दालें
43. अखरोट
44. जानवरों (पशु, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर) के कैसिंग
45. गुवार का गोंद
46. करया गोंद
47. सेन्ना की पत्तियां और फलियां
48. पंखिया ताड़ के रेशे
49. कत्था
50. तेन्दु की पत्तियां
51. सिंघाड़ा
52. कुकुरमुत्ता
53. पोस्त दाना
54. काजू के कोश का तेल (द्रव)
55. मधु मक्खी का मोम
56. चना (साइंसर एरियटिनम)
57. ज्वार (सोरघम वल्गारे)
58. मक्का (जिया मेज)
59. जौ (होरडियम वल्गारे)
60. रागी (एलूसाई कोरोकाना)
61. बाजरा (पेनीसेटम टाइफोउड्स)
62. शिकाकाई पाउडर
63. एसाफोएटिडा सम्मिश्रण
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