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औद्योगिक विकास बैंक (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003 ( Industrial Development Bank (Transfer of Undertaking and Repeal) Act, 2003 )


 

औद्योगिक विकास बैंक (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003

(2003 का अधिनियम संख्यांक 53)

[30 दिसम्बर, 2003]

भारतीय औद्योगिक विकास बैंक के उपक्रम का बैंककारी कारबार करने के

लिए कंपनी अधिनियम, 1956 के अधीन कंपनी के रूप में बनाई और

रजिस्ट्रीकृत की जाने वाली कंपनी को अंतरण करने और उसमें

निहित करने और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध करने तथा भारतीय औद्योगिक

विकास बैंक अधिनियम, 1964 का

निरसन करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के चौवनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम औद्योगिक विकास बैंक (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003 है ।

(2) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्दीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

() नियत दिन" से ऐसी तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन, अधिसूचना द्वारा, नियत करे ;

(ख) कंपनी" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाया और रजिस्ट्रीकृत किया जाने वाला भारतीय औद्योगिक विकास बैंक लिमिटेड अभिप्रेत है ;

(ग) विकास बैंक" से भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अभिप्रेत है ;

(घ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;

() रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है

अध्याय 2

विकास बैंक के उपक्रम का कंपनी को अंतरण और उसमें निहित होना

3. विकास बैंक के उपक्रम का कंपनी में निहित होना-(1) ऐसी तारीख को, जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, विकास बैंक का उपक्रम कंपनी को अंतरित और उसमें निहित हो जाएगा ।

(2) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) में निर्दिष्ट कंपनी बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 के खंड (ग) के अर्थ के भीतर बैंककारी कंपनी समझी जाएगी और वह उस रूप में ऐसे कारबार के अतिरिक्त जो विकास बैंक द्वारा किया जा सकेगा या उसके द्वारा संव्यवहृत किया जा सकेगा, बैंककारी कारबार उस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार करेगी :

परंतु ऐसी कंपनी से-

() बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 22 के अधीन अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करने की ;

(ख) नियत दिन से पांच वर्ष की अवधि तक उक्त अधिनियम की धारा 24 के अधीन बनाए रखने के लिए अपेक्षित आस्तियों का प्रतिशत बनाए रखने की, अपेक्षा नहीं की जाएगी ।

(3) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का10) के उपबंध उस सीमा तक जहां तक वे इस अधिनियम के किसी उपबंध के विरुद्ध नहीं हैं, ऐसी कंपनी को लागू होंगे ।

(4) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट उस अधिनियम का कोई उपबंध-

(क) कंपनी को लागू नहीं होगा, या

() केवल ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों के साथ, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कंपनी को लागू होगा

(5) उपधारा (4) के अधीन जारी की जाने वाली प्रस्तावित प्रत्येक अधिसूचना की एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसूचना का अनुमोदन न करने के लिए सहमत हो जाएं या उक्त अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो, यथास्थिति, अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी या ऐसे उपांतरित रूप में जारी की जाएगी जिस पर दोनों सदन सहमत हों ।

4. उपक्रम के कंपनी को अंतरण या उसमें निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) केन्द्रीय सरकार, विकास बैंक की शेयरधारक होने के कारण और विकास बैंक का नियत दिन से ठीक पूर्व प्रत्येक अन्य शेयरधारक नियत दिन से ही कंपनी का ऐसे शेयरधारक द्वारा धारित शेयरों के अंकित मूल्य की सीमा तक शेयरधारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत समझा जाएगा

(2) विकास बैंक के उपक्रम के, जो धारा 3 के अधीन कंपनी को अंतरित हो गया है और उसमें निहित हो गया है, बारे में यह समझा जाएगा कि उसके अंतर्गत सभी कारबार, आस्तियां, अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा किसी भी प्रकृति की और कहीं भी स्थित जंगम और स्थावर, वास्तविक और व्यक्तिगत, मूर्त और अमूर्त, कब्जाधीन या आरक्षण में की, वर्तमान या समाश्रित सभी संपत्तियां हैं, जिनके अंतर्गत भूमि, भवन, यान, नकद अतिशेष, निक्षेप, विदेशी मुद्रा, प्रकटित और अप्रकटित आरक्षितियां, आरक्षित निधि, विशेष आरक्षित निधि, हितकारी आरक्षित निधि, कोई अन्य निधि, स्टाक, विनिधान, शेयर, बंधपत्र, डिबेंचर, प्रतिभूति, किसी औद्योगिक समुत्थान का प्रबंध, किसी व्यक्ति या औद्योगिक समुत्थान को दिए गए ऋण, अग्रिम और प्रत्याभूतियां, अभिधृतियां, पट्टे और बही ऋण तथा ऐसी संपत्ति से उत्पन्न होने वाले वे सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व भारत में या भारत के बाहर, यथास्थिति, उपक्रम के संबंध में विकास बैंक के स्वामित्व, कब्जे या शक्ति में थे और उससे संबंधित सभी लेखा बहियां, रजिस्टर, अभिलेख और दस्तावेज हैं और यह भी समझा जाएगा कि उनके अंतर्गत, ऐसे सभी उधार, दायित्व और बाध्यताएं भी हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों, जो उसके उपक्रम की बाबत भारत में या भारत के बाहर विकास बैंक की उस समय अस्तित्व में थीं ।

(3) सभी संविदाएं, विलेख, बंधपत्र, प्रत्याभूतियां, मुख्तारनामे, अन्य लिखतें और काम करने के बारे में ठहराव, जो नियत दिन के ठीक पूर्व अस्तित्वशील हैं और विकास बैंक को प्रभावित कर रहे हैं, विकास बैंक के विरुद्ध प्रभावी नहीं रहेंगे या प्रवर्तनीय नहीं होंगे और कंपनी के विरुद्ध या उसके पक्ष में, जिसमें विकास बैंक इस अधिनियम के आधार पर निहित हुए हैं, पूर्ण बल और प्रभाव रखेंगे और पूर्ण रूप से तथा प्रभावी तौर पर इस प्रकार प्रवर्तनीय होंगे मानो विकास बैंक की बजाय वहां कंपनी को नामित किया गया था या वह उसमें एक पक्षकार थी ।

(4) कोई कार्यवाही या वाद हेतुक, जो नियत दिन के ठीक पूर्व विकास बैंक के संबंध में उसके द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित या विद्यमान था, नियत दिन से, कंपनी या उसके विरुद्ध जिसमें इस अधिनियम के आधार पर विकास बैंक का उपक्रम निहित हो गया है, उसी प्रकार जारी रहेगा और प्रवर्तित किया जाएगा जिस प्रकार वह विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध तब प्रवर्तित किया गया होता जब यह अधिनियम अधिनियमित न किया गया होता और विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं रहेगा ।

5. विकास बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बारे में उपबंध-(1) विकास बैंक का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, (बोर्ड के निदेशक या अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या किसी अन्य पूर्णकालिक निदेशक को छोड़कर) जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके नियोजन में कार्यरत हैं, जहां तक ऐसा अधिकारी या कर्मचारी उस उपक्रम के संबंध में नियोजित है, जो इस अधिनियम के कारण कंपनी में निहित हो गया है, नियत दिन से कंपनी का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा और उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर, उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर, उन्हीं बाध्यताओं के साथ छुट्टी तथा छुट्टी भाड़ा रियायत, कल्याण स्कीम, चिकित्सा प्रसुविधा स्कीम, बीमा, भविष्य निधि, अन्य निधि, सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, उपदान और अन्य फायदों के बारे में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ उसमें अपना पद या सेवा धारण करेगा जो वह विकास बैंक के अधीन उस दशा में धारण करता यदि उसका उपक्रम कंपनी में निहित नहीं हुआ होता और वह कंपनी के, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में ऐसा करता रहेगा या नियत दिन से छह मास की अवधि के समाप्त हो जाने तक, यदि ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस अवधि के भीतर कंपनी का अधिकारी या अन्य कर्मचारी न बने रहने का विकल्प देता है, ऐसा करता रहेगा ।

(2) जहां विकास बैंक का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी उपधारा (1) के अधीन कंपनी के नियोजन में या सेवा में रहने का विकल्प लेता है तो ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद त्याग दिया है

(3) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, विकास बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का कंपनी को अंतरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा

(4) ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो नियत दिन के पूर्व विकास बैंक की सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं और जो किन्हीं प्रसुविधाओं, अधिकारों या विशेषाधिकारों के हकदार हैं, कंपनी से ऐसी प्रसुविधाएं, अधिकार और विशेषाधिकार पाने के हकदार होंगे

(5) अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के कल्याण के लिए सृजित विकास बैंक की भविष्य निधि या उपदान निधि का न्यास और कोई अन्य निकाय कंपनी में वैसे ही अपने कृत्यों का निर्वहन करते रहेंगे जैसे कि वे भारतीय औद्योगिक विकास बैंक में किया करते थे और भविष्य निधि या उपदान निधि के संबंध में दी गई कोई कर-छूट कंपनी की बाबत लागू रहेगी

(6) इस अधिनियम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या विकास बैंक के विनियमों में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड का निदेशक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या कोई अन्य पूर्णकालिक निदेशक या कोई अन्य व्यक्ति, जो विकास बैंक के कारबार और कार्यकलापों के संपूर्ण या सारवान् भाग का प्रबंध करने का हकदार है, विकास बैंक के विरुद्ध पद की हानि या विकास बैंक के साथ उसके द्वारा की गई किसी प्रबंध संविदा के समय से पूर्व पर्यवसान की बाबत किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।

अध्याय 3

प्रकीर्ण

6. कंपनी को रियायतों आदि का दिया गया समझा जाना-नियत दिन से ही तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विकास बैंक के कार्यकलाप और कारबार के संबंध में विकास बैंक को अनुदत्त सभी वित्तीय और अन्य रियायतें, अनुज्ञप्तियां, फायदे, विशेषाधिकार और छूटें कंपनी को अनुदत्त समझी जाएंगी ।

7. कर छूट या फायदे का प्रभावशील बने रहना-(1) आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन जहां किसी कर से कोई छूट दी गई है या उसकी बाबत कोई निर्धारण किया गया है या किसी मुजरे के रूप में कोई फायदा दिया गया है कोई ह्रास, विनिधान भत्ता या कोई अन्य भत्ता अग्रनीत किया गया है या किसी हानि को विस्तारित किया गया है या विकास बैंक को उपलब्ध है तो ऐसी छूट, निर्धारण या फायदा उस कंपनी के संबंध में भी जारी रहेगा

(2) जहां आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के किसी उपबंध के अधीन विकास बैंक द्वारा किए गए किसी संदाय को स्रोत पर कर की कटौती से छूट प्राप्त है, वहां ऐसी छूट उसी रूप में जारी रहेगी मानो उक्त अधिनियम के उपबंध विकास बैंक को लागू कर दिए गए हैं या कंपनी के संबंध में प्रवृत्त थे ।

(3) धारा 3 के निबंधनों के अनुसार विकास बैंक के उपक्रम के अंतरण और उनमें निहित किए जाने का अर्थ पूंजी अभिलाभ के प्रयोजनों के लिए आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अर्थान्तर्गत अंतरण के रूप में नहीं लगाया जाएगा ।

8. प्रत्याभूति का बना रहना-किसी ऋण, पट्टे, वित्त या अन्य सहायता के संबंध में विकास बैंक के लिए या उसके पक्ष में दी गई कोई प्रत्याभूति कंपनी के संबंध में प्रवृत्त बनी रहेगी ।

9. शेयरों, बंधपत्रों और डिबेंचरों को अनुमोदित प्रतिभूतियां माना जाएगा-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कंपनी के शेयर, बंधपत्र और डिबेंचर भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) और बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित प्रतिभूतियां समझे जाएंगे ।

10. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति में अंतर्विष्ट किसी बात से असंगत होते हुए भी या इस अधिनियम से भिन्न किसी लिखत में किसी अधिनियमिति के कारण प्रभाव में होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

11. अन्य विधियों का लागू होना वर्जित नहीं होगा-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके अल्पीकरण में ।

12. कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन-इस अधिनियम की अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियां उसमें उपबंधित रीति से संशोधित की जाएंगी ।

13. अधिनियमों, नियमों, विनियमों या अधिसूचनाओं में विकास बैंक के स्थान पर कंपनी का प्रतिस्थापन-नियत दिन को प्रवृत्त प्रत्येक अधिनियम, नियम, विनियम या अधिसूचना में,-

(क) भारतीय औद्योगिक विकास बैंक" शब्दों के स्थान पर, जहां-तहां वे आते हैं, औद्योगिक विकास बैंक    (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 के खंड (ख) में निर्दिष्ट भारतीय औद्योगिक विकास बैंक लिमिटेड" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;

(ख) विकास बैंक" शब्दों के स्थान पर, जहां-जहां वे आते हैं, औद्योगिक विकास बैंक (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 के खंड (ख) में निर्दिष्ट भारतीय औद्योगिक विकास बैंक लिमिटेड" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;

(ग) विकास बैंक से भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अभिप्रेत है" शब्दों और अंकों के स्थान पर औद्योगिक विकास बैंक (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 के खंड (ख) में निर्दिष्ट भारतीय औद्योगिक विकास बैंक लिमिटेड" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;

() भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक" शब्दों और अंकों के स्थान पर, औद्योगिक विकास बैंक (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 के खंड () में निर्दिष्ट भारतीय औद्योगिक विकास बैंक लिमिटेड" शब्द, कोष्ठक, अक्षर और अंक रखे जाएंगे

14. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हैं :

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात्, यथाशक्यशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा

15. 1964 के अधिनियम 18 का निरसन और व्यावृत्ति-(1) भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) के निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अधिनियम की धारा 30क के उपबंध विकास बैंक द्वारा किसी औद्योगिक समुत्थान के साथ नियत दिन तक किए गए ठहराव के संबंध में लागू बने रहेंगे और कंपनी उन पर कार्रवाई करने तथा उन्हें पूर्णतः और वास्तविक रूप से प्रवृत्त करने की हकदार होगी मानो यह अधिनियम अधिनियमित ही न किया गया हो ।

अनुसूची

(धारा 12 देखिए)

कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन

भाग 1

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 का संशोधन

(1934 का 2)

संशोधन

1. धारा 2 के खंड (खध्त्त्) का लोप किया जाएगा ।

2. धारा 17 में, -

(क) उपधारा (4छ) और उपधारा (4ज) में, विकास बैंक या" शब्दों का लोप किया जाएगा;

(ख) उपधारा (4झ), उपधारा (8क) और उपधारा (12ख) में विकास बैंक" शब्दों का लोप किया जाएगा ।

3. धारा 42 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के खंड (), उपखंड (ii) में, या विकास बैंक से" शब्दों का लोप किया जाएगा

4. धारा 45झ के खंड (खख) के उपखण्ड (iv) की मद (क) का लोप किया जाएगा ।

5. धारा 46ग की उपधारा (2) के खंड (क) और खंड (ख) का लोप किया जाएगा ।

भाग 2

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 का संशोधन

(1949 का 10)

संशोधन

1. धारा 5 के खंड (चचक) का लोप किया जाएगा ।

2. धारा 34क की उपधारा (3) में, विकास बैंक" शब्दों का लोप किया जाएगा ।

3. धारा 36कघ की उपधारा (3) में, विकास बैंक" शब्दों का लोप किया जाएगा ।

भाग 3

औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 का संशोधन

(1947 का 14)

संशोधन

धारा 2 के खंड (खख) में, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक" शब्दों का लोप किया जाएगा ।

भाग 4

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 का संशोधन

(1989 का 39)

संशोधन

धारा 2 में, -

(क) खंड (ज) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्: -

() लघु सेक्टर का औद्योगिक समुत्थान" से निम्नलिखित में लगा हुआ या लगने वाला कोई समुत्थान अभिप्रेत है, -

(i) माल का विनिर्माण, परिरक्षण या प्रसंस्करण;

(ii) पोत परिवहन;

(iii) खनन, जिसके अंतर्गत खानें का विकास भी है;

(iv) होटल उद्योग;

(v) सड़क या जलमार्ग द्वारा या वायुयान या रज्जुमार्ग या लिफ्ट द्वारा यात्रियों या माल का परिवहन;

(vi) विद्युत या किसी अन्य रूप की ऊर्जा का उत्पादन, भंडारण या वितरण;

(vii) किसी प्रकार की मशीनरी या उपस्कर या यानों या जलयानों या मोटरबोटों या ट्रेलरों या ट्रैक्टरों का अनुरक्षण, मरम्मत, परीक्षण या सर्विसिंग;

(viii) मशीनरी या शक्ति की सहायता से किसी वस्तु का समंजन करना, मरम्मत करना या पैक करना;

(ix) किसी औद्योगिक क्षेत्र या किसी औद्योगिक संपदा की स्थापना करना या उसका विकास करना;

(x) मछली पकड़ना या मछली पकड़ने या उसके अनुरक्षण के लिए तट की सुविधाएं उपलब्ध कराना;

(xi) औद्योगिक उन्नति के संवर्धन के लिए विशेष या तकनीकी जानकारी या अन्य सेवाएं प्रदान करना;

(xii) उद्योग के लिए इंजीनियरी, तकनीकी, वित्त, प्रबंध, विपणन या अन्य सेवाएं या सुविधाएं प्रदान करना;

(xiii) सेवा उद्योग जैसे किसी वस्तु के उपयोग, विक्रय परिवहन, परिदान या व्ययन की दृष्टि से उस वस्तु या पदार्थ को परिवर्तित करना, अलंकृत करना, पालिश करना, तैयार करना, तेल लगाना, सफाई करना, स्वच्छ करना या अन्य प्रकार से उसके साथ व्यवहार करना या उसे अनुकूल बनाना;

(xiv) चिकित्सा, स्वास्थ्य या अन्य सहायक सेवाएं प्रदान करना;

(xv) सूचना, प्रौद्योगिकी, दूरसंचार या इलैक्ट्रानिक से संबंधित सेवाएं प्रदान करना;

(xvi) जलयानों, पोतों और वायुयानों सहित औद्योगिक संयंत्रों, उपस्करों, मशीनरी या अन्य आस्तियों को पट्टे पर देना, उप-पट्टे पर देना या अवक्रय पर देना;

(xvii) कोई अन्य क्रियाकलाप जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इस निमित्त विनिर्दिष्ट करना; या

(xviii) किसी संकल्पना, प्रौद्योगिकी, डिजाइन, प्रसंस्करण या उत्पाद का अनुसंधान और विकास चाहे वह पूर्वोक्त विषयों में से किसी के संबंध में हो अथवा नहीं, जिसके अंतर्गत उपखंड (न्ध्त्त्) के अधीन कोई क्रियाकलाप या कोई अन्य विषय भी है जो उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 11ख के अधीन लघु उपक्रम समझा जाता है ।

स्पष्टीकरण-माल का प्रसंस्करण" पद के अंतर्गत किसी पदार्थ के साथ मानवीय, यांत्रिकी, रासायनिक, वैद्युत या कोई अन्य वैसी ही संक्रिया करके कोई वस्तु उत्पादित करने, तैयार करने या बनाने के लिए कोई कला या प्रक्रिया भी है ;(ix)

(ख) खंड (ठक) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्: -

(ठख) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;

(ठग) अनुसूचित बैंक" से तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित कोई बैंक अभिप्रेत है;

(ग) खंड (थ) का लोप किया जाएगा ।

 

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