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डिजाइन अधिनियम, 2000 ( Designs Act, 2000 )


 

डिजाइन अधिनियम, 2000

(2000 का अधिनियम संख्यांक 16)

[25 नवम्बर, 2000]

डिजाइनों के संरक्षण से संबंधित विधि

का समेकन और संशोधन

करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम डिजाइन अधिनियम, 2000 है ।

                (2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी, और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवर्तन में आने के प्रति निर्देश है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो,-

(क) वस्तु" से विनिर्माण की कोई वस्तु और कोई पदार्थ अभिप्रेत है चाहे वह कृत्रिम या प्राकृतिक हो या अंशतः कृत्रिम और अंशतः प्राकृतिक हो; और इसके अंतर्गत विनिर्माण की किसी वस्तु का कोई ऐसा भाग है जो पृथक् रूप से बनाया जा सकता है और विक्रय किया जा सकता है;

(ख) नियंत्रक" से धारा 3 में निर्दिष्ट पेटेन्ट, डिजाइन और व्यापार चिह्न महानियंत्रक, अभिप्रेत है;

(ग) प्रतिलिप्यधिकार" से किसी वर्ग में, जिसमें डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, किसी वस्तु पर डिजाइन के प्रयोग का अनन्य अधिकार अभिप्रेत है;

(घ) डिजाइन" से किसी वस्तु पर किसी औद्योगिक प्रसंस्करण या साधनों द्वारा दो विमितीय या तीन विमितीय अथवा दोनों रूपों में लगाई गई, आकृति, विन्यास, पैटर्न, अलंकरण या रेखाओं या रंगों के सम्मिश्रण की केवल विशिष्टता अभिप्रेत है, चाहे वह हाथ, यंत्र या रासायनिक विधि से पृथक् या मिश्रित रूप से लगाई गई हो और जो परिरूपित वस्तु के रूप में देखने में अच्छी लगती है या केवल देखने से उनका भान किया जाता है, किन्तु इसके अंतर्गत सन्निर्माण का ऐसा कोई ढंग या सिद्धांत या कोई अन्य बात नहीं है जो सारतः यांत्रिक युक्ति मात्र है और इसके अंतर्गत व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (फ) में परिभाषित कोई व्यापार चिह्न या भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 479 में परिभाषित सम्पत्ति चिह्न या प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम, 1957           (1957 का 14) की धारा 2 के खंड (ङ) में परिभाषित कोई कलात्मक कृति नहीं है;

(ङ) उच्च न्यायालय" का वही अर्थ होगा जो पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) की धारा 2 के खंड (प) में है;

(च) विधिक प्रतिनिधि" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो मृत व्यक्ति की संपदा का विधि की दृष्टि में प्रतिनिधित्व करता है;

(छ) डिजाइन के संबंध में मूल" से ऐसी डिजाइन के रचयिता से प्रारंभ होना अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत ऐसे मामले भी हैं जो, यद्यपि, स्वयं में पुराने हैं किन्तु अपने उपयोजन में नए हैं;

(ज) पेटेन्ट कार्यालय" से पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) की धारा 74 में निर्दिष्ट कार्यालय अभिप्रेत है;

(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ञ) नई या मूल डिजाइन का स्वत्वधारी" से-

(i) जहां डिजाइन का रचयिता, समुचित प्रतिफल के लिए किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई कार्य निष्पादित करता है वहां, ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके लिए इस प्रकार डिजाइन निष्पादित की गई है;

(ii) जहां कोई व्यक्ति किसी डिजाइन को या किसी वस्तु पर डिजाइन के प्रयोग करने के अधिकार को अनन्य रूप से किसी अन्य व्यक्ति से या अन्यथा अर्जित कर लेता है, वहां डिजाइन या उसके प्रयोग के अधिकार की बाबत और उस विस्तार तक जिस तक डिजाइन या अधिकार इस प्रकार अर्जित किया गया है, ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने डिजाइन या उसके प्रयोग का अधिकार इस प्रकार अर्जित किया है; और

(iii) किसी अन्य दशा में डिजाइन का रचयिता अभिप्रेत है; और जहां डिजाइन की संपत्ति या डिजाइन के प्रयोग का अधिकार, मूल स्वत्वधारी से किसी अन्य व्यक्ति पर न्यागत हुआ है, वहां ऐसा अन्य व्यक्ति इसके  अंतर्गत है ।

अध्याय 2

डिजाइनों का रजिस्ट्रीकरण

3. नियंत्रक और अन्य अधिकारी-(1) व्यापार और पण्य वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) की धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिह्न महानियंत्रक इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए डिजाइन    नियंत्रक होगा ।

                (2) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, उतनी संख्या में परीक्षक और अन्य अधिकारी ऐसे पदनामों के साथ, जो वह ठीक समझे, नियुक्त कर सकेगी ।

                (3) उपधारा (2) के अधीन नियुक्त अधिकारी, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन नियंत्रक के ऐसे कृत्यों का नियंत्रक के अधीक्षण और निदेशों के अधीन निर्वहन करेंगे जिन्हें वह, समय-समय पर लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा निर्वहन करने के लिए उन्हें प्राधिकृत करे ।

                (4) नियंत्रक, उपधारा (3) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, लिखित आदेश द्वारा और उन कारणों से जो उस आदेश में लेखबद्ध किए जाएं, उपधारा (2) के अधीन नियुक्त किसी अधिकारी के समक्ष लंबित किसी मामले को वापस मंगा सकेगा और उस मामले पर स्वयं या तो नए सिरे या उस प्रक्रम से, जिस पर उसे वापस मंगाया गया था, विचार कर सकेगा अथवा उसे उपधारा (2) के अधीन नियुक्त किसी अन्य अधिकारी को अंतरित कर सकेगा और वह अधिकारी अंतरण आदेश में विशेष निदेशों के अधीन रहते हुए उस मामले पर या तो नए सिरे से या उस प्रक्रम से जिस पर उसे अंतरित किया गया था, कार्यवाही कर सकेगा ।

4. कतिपय डिजाइनों के रजिस्ट्रीकरण पर प्रतिषेध-ऐसी कोई डिजाइन जो,-

                                (क) नई या मूल डिजाइन नहीं है; या

                (ख) फाइल करने की तारीख से पूर्व या जहां लागू हो वहां, रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की पूर्विकता की तारीख से पूर्व मूर्त रूप में प्रकाशन द्वारा या उपयोग द्वारा अथवा किसी अन्य रीति से भारत में या किसी अन्य देश में कहीं भी जनता के समक्ष प्रकट कर दी गई है;

                (ग) ज्ञात डिजाइनों या ज्ञात डिजाइनों के संयोजन स्पष्टतः प्रभेदनीय नहीं हैं;

                (घ) जिसके अंतर्गत कलंकात्मक या अश्लील विषय सम्मिलित या अन्तर्विष्ट हैं,

रजिस्ट्रीकृत नहीं की जाएगी ।

5. डिजाइनों के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन-(1) नियंत्रक, किसी ऐसे व्यक्ति के आवेदन पर, जो किसी ऐसी नई या मूल डिजाइन का, जो किसी देश में पहले प्रकाशित नहीं हुई है और जो लोक व्यवस्था और नैतिकता के विपरीत नहीं है, स्वत्वधारी होने का दावा करता है, इस अधिनियम के अधीन डिजाइन को रजिस्टर कर सकेगा :

परन्तु नियंत्रक ऐसे रजिस्ट्रीकरण से पूर्व आवेदन को धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त परीक्षक द्वारा इस बारे में परीक्षा किए जाने के लिए निर्दिष्ट करेगा कि ऐसा डिजाइन इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जा सकता है अथवा नहीं और ऐसे निर्देश पर परीक्षक की रिपोर्ट पर विचार करेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन विहित प्ररूप में होगा और विहित रीति से पेटेन्ट कार्यालय में फाइल किया जाएगा और उसके साथ विहित फीस दी जाएगी ।

(3) एक ही डिजाइन एक से अधिक वर्गों में रजिस्टर नहीं की जा सकेगी और ऐसी दशा में, जिसमें कि किसी डिजाइन के वर्ग की बाबत संदेह हो कि उक्त डिजाइन किस वर्ग में रजिस्टर की जानी चाहिए, तो ऐसे प्रश्न का विनिश्चय नियंत्रक कर सकेगा ।

(4) नियंत्रक, यदि ठीक समझता है तो रजिस्ट्रीकरण के लिए उसे प्रस्तुत किए गए डिजाइन को रजिस्टर करने से इंकार कर सकेगा, किन्तु ऐसे इंकार से व्यथित कोई व्यक्ति, उच्च न्यायालय को अपील कर सकेगा ।

(5) यदि किसी आवेदन को आवेदक के किसी व्यतिक्रम या उपेक्षा के कारण, उस रूप में पूरा नहीं किया गया है जिससे कि विहित समय के भीतर उसका रजिस्ट्रीकरण किया जा सके, तो उस आवेदन को परित्यक्त किया गया समझा जाएगा ।

(6) जब किसी डिजाइन को रजिस्ट्रीकृत किया जाता है तो उसे उसी रूप में रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा जैसी वह रजिस्ट्रीकरण के आवेदन की तारीख को है ।

6. रजिस्ट्रीकरण विशिष्ट वस्तु की बाबत ही होगा-(1) डिजाइन वस्तुओं के विहित वर्ग में सम्मिलित किसी या सभी वस्तुओं की बाबत रजिस्ट्रीकृत किया जा सकेगा ।

(2) उस वर्ग के बारे में जिसके अंतर्गत कोई वस्तु आती है, उद्भूत किसी प्रश्न का अवधारण नियंत्रक द्वारा किया जाएगा जिसका उस मामले में विनिश्चय अंतिम होगा ।

(3) जहां कोई डिजाइन वस्तुओं के किसी वर्ग में सम्मिलित किसी वस्तु की बाबत रजिस्ट्रीकृत किया गया है, वहां वस्तुओं के उस वर्ग में सम्मिलित किसी एक या अधिक अन्य वस्तुओं की बाबत उसे रजिस्टर किए जाने के लिए डिजाइन के स्वत्वधारी का आवेदन नामंजूर नहीं किया जाएगा और न ही उसका रजिस्ट्रीकरण-

(क) इस आधार पर कि डिजाइन नया या मूल नहीं है, केवल इस कारण अविधिमान्य किया जाएगा कि वह इस प्रकार पहले रजिस्ट्रीकृत है, या

(ख) इस आधार पर कि डिजाइन भारत में या किसी अन्य देश में पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है केवल इस कारण अविधिमान्य किया जाएगा कि उसका प्रयोग ऐसी वस्तु पर किया गया है जिसकी बाबत वह पहले से ही रजिस्ट्रीकृत थी :

परन्तु ऐसे पश्चात्वर्ती रजिस्ट्रीकरण के कारण डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार की अवधि, पूर्ववर्ती रजिस्ट्रीकरण के कारण उत्पन्न अवधि को विस्तारित नहीं करेगी ।

                (4) जहां कोई व्यक्ति किसी वस्तु की बाबत डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करता है, और-

(क) या तो वह डिजाइन किसी अन्य वस्तु की बाबत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पूर्व में रजिस्ट्रीकृत करा लिया गया   है; या

(ख) या तो डिजाइन में, जिसकी बाबत आवेदन, उसी या किसी अन्य वस्तु की बाबत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपांतरणों या फेरफारों  सहित पूर्व में रजिस्ट्रीकृत कराया गया डिजाइन सम्मिलित है, उस वस्तु की प्रकृति को परिवर्तित करने के लिए अथवा उसकी पहचान को सारभूत रूप से प्रभावित करने के लिए पर्याप्त नहीं है,

तब, किसी भी समय जब आवेदन लंबित हो, आवेदक पूर्व में रजिस्ट्रीकृत डिजाइन का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी हो जाता है वहां इस धारा के पूर्वगामी उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो आवेदन किए जाने के समय आवेदक उस डिजाइन का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी था ।

7. रजिस्ट्रीकृत डिजाइन की विशिष्टियों का प्रकाशन-नियंत्रक, डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् यथाशीघ्र उस डिजाइन की विहित विशिष्टियों को ऐसी रीति से प्रकाशित करवाएगा जो विहित की जाए और तत्पश्चात् डिजाइन जनता के लिए निरीक्षण के लिए खुला रहेगा ।

8. आवेदन, आदि के प्रतिस्थापन के संबंध में आदेश करने की नियंत्रक की शक्ति-(1) यदि नियंत्रक का, डिजाइन के रजिस्ट्रीकृत किए जाने से पूर्व किसी समय विहित रीति में किए गए दावे पर यह समाधान हो जाता है कि डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदक या आवेदकों में से किसी आवेदक द्वारा लिखित में किए गए किसी समनुदेशन या करार के अथवा विधि के प्रवर्तन के आधार पर, यदि डिजाइन तब रजिस्ट्रीकृत की जाती है, तो दावेदार उसके लिए या उसमें आवेदक के हित के लिए या डिजाइन के अविभक्त अंश या उसके हित के लिए हकदार हो जाएगा तो नियंत्रक, इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यह निदेश दे सकेगा कि उस आवेदन पर दावेदार के नाम से या दावेदारों के नाम से और आवेदक या अन्य संयुक्त आवेदक अथवा आवेदकों के नाम से तद्नुसार जैसा कि मामले में अपेक्षित हो, कार्यवाही की जाएगी ।

                (2) पूर्वोक्त प्रकार का ऐसा कोई निदेश, डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए दो अथवा अधिक संयुक्त आवेदकों में से किसी एक आवेदक द्वारा किए गए किसी समनुदेशन या करार के आधार पर, अन्य संयुक्त आवेदक या आवेदकों की सहमति के सिवाय, नहीं    दिया जाएगा ।

                (3) पूर्वोक्त प्रकार का कोई निदेश डिजाइन के फायदे के समनुदेशन के लिए किसी समनुदेशन या करार के आधार पर तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि-

                                (क) डिजाइन की रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की संख्या के प्रति निर्देश से उसमें पहचान नहीं की गई है; या

                (ख) नियंत्रक को उस व्यक्ति द्वारा अभिस्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई है जिसके द्वारा समनुदेशन या करार किया गया था कि उक्त समनुदेशन या करार डिजाइन के संबंध में है जिसकी बाबत आवेदन किया जाता है; या

                (ग) डिजाइन की बाबत दावेदार के अधिकार न्यायालय के विनिश्चय द्वारा अंतिम रूप से स्थापित नहीं कर दिए गए हैं; या

                (घ) नियंत्रक आवेदन पर कार्यवाही किए जाने के लिए या उस रीति को विनियमित करने के लिए निदेश नहीं देता जिसमें उस पर उपधारा (5) के अधीन कार्यवाही की जाए ।

(4) जहां डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए दो या अधिक संयुक्त आवेदकों में से किसी आवेदक की डिजाइन को रजिस्ट्रीकृत किए जाने से पूर्व किसी समय मृत्यु हो जाती है वहां पर नियंत्रक, उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों द्वारा इस निमित्त किए गए अनुरोध पर और मृतक के विधिक प्रतिनिधि की सहमति से यह निदेश दे सकेगा कि आवेदन पर उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों के नाम में ही कार्यवाही की जाए ।

(5) यदि डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए संयुक्त आवेदकों के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है, कि आवेदन पर कार्यवाही की जाए या नहीं या किसी रीति में की जाए तो नियंत्रक किसी पक्षकार द्वारा विहित रीति में उसे किए गए आवेदन पर और संबद्ध सभी पक्षकारों को सुने जाने का अवसर देने के पश्चात् ऐसे निदेश दे सकेगा जिन्हें वह आवेदन पर पक्षकारों में से एक या दो के नाम में ही कार्यवाही किए जाने और उस रीति को विनियमित करने, जिसमें उस पर कार्यवाही की जाए अथवा दोनों प्रयोजनों के लिए समर्थ बनाने के लिए, जैसा अपेक्षित हो, ठीक समझे ।

9. रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र-(1) नियंत्रक, डिजाइन के रजिस्ट्रीकृत हो जाने पर डिजाइन के स्वत्वधारी को, रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र देगा ।

(2) नियंत्रक, मूल प्रमाणपत्र के खो जाने की दशा में या किसी ऐसी अन्य दशा में, जिसे वह समीचीन समझता है, प्रमाणपत्र की एक या अधिक प्रतियां दे सकेगा ।

10. डिजाइनों का रजिस्टर-(1) पेटेन्ट कार्यालय में डिजाइन नामक एक पुस्तक रखी जाएगी । इसमें रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों के स्वत्वधारियों के नाम और पते समनुदेशनों की अधिसूचनाएं और रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों के पारेषण और ऐसी अन्य बातें जो विहित की जाएं, दर्ज की जाएंगी और ऐसा रजिस्टर पूर्णतः या भागतः कम्प्यूटर प्रणालियों या डिस्केटों पर ऐसे रक्षोपायों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, रखा जा सकेगा ।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन रजिस्टर पूर्णतः या भागतः कंप्यूटर प्रणालियों या डिस्केटों में रखा जाता है, वहां इस अधिनियम में रजिस्टर में प्रविष्टि के प्रति किसी निर्देश का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा जैसे कंप्यूटर प्रणालियों या डिस्केटों में इस प्रकार रखी गई किसी प्रविष्टि के प्रति निर्देश हो ।

(3) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान डिजाइन रजिस्टर, इस अधिनियम के अधीन रखे गए डिजाइन रजिस्टर में सम्मिलित हो जाएगा और उसका भाग होगा ।

(4) डिजाइन रजिस्टर उन किन्हीं बातों का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा जो इस अधिनियम द्वारा उसमें दर्ज किए जाने के लिए निर्दिष्ट या प्राधिकृत हों ।

अध्याय 3

रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों में प्रतिलिप्यधिकार

11. रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् प्रतिलिप्यधिकार-(1) जब कोई डिजाइन रजिस्टर कर ली जाती है तब डिजाइन के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए रजिस्ट्रीकरण की तारीख से दस वर्ष की अवधि तक, डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार होगा ।

                (2) यदि उक्त दस वर्ष की अवधि की समाप्ति के पूर्व, प्रतिलिप्यधिकार की अवधि के विस्तार के लिए आवेदन, नियंत्रक को विहित रीति से किया जाता है तो, नियंत्रक विहित फीस के संदाय पर दस वर्ष की मूल अवधि की समाप्ति से आगामी पांच वर्ष की दूसरी अवधि तक प्रतिलिप्यधिकार की अवधि का विस्तार करेगा ।

12. व्यपगत डिजाइन का प्रत्यावर्तन-(1) जहां कोई डिजाइन धारा 11 के उपधारा (2) के अधीन प्रतिलिप्यधिकार के विस्तार के लिए फीस का संदाय करने में असफल रहने के कारण प्रभाव में नहीं रही है तो ऐसी डिजाइन का स्वत्वधारी या उसका विधिक प्रतिनिधि और जहां डिजाइन दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से धारित थी, तो वहां नियंत्रक की अनुमति से उनमें से एक या अधिक व्यक्ति संयुक्त रूप से उस तारीख से एक वर्ष के भीतर जिसको डिजाइन प्रभाव में नहीं रही, डिजाइन के प्रत्यावर्तन के लिए विहित रीति से ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए, आवेदन कर सकेंगे ।

                (2) इस धारा के अधीन आवेदन में विहित रीति से सत्यापित कथन होगा जिसमें उन परिस्थितियों का पूरा विवरण होगा जिनके कारण विहित फीस का संदाय करने में असफलता हुई थी और नियंत्रक आवेदक से ऐसे और साक्ष्य की, जिसे वह आवश्यक समझे, अपेक्षा कर सकेगा ।

13. व्यपगत डिजाइनों के प्रत्यावर्तन के लिए आवेदन के निपटारे के लिए प्रक्रिया-(1) यदि उन मामलों में जिनमें आवेदक ऐसी इच्छा व्यक्त करे या नियंत्रक ठीक समझे, आवेदक को सुनने के पश्चात् नियंत्रक का यह समाधान हो जाता है कि प्रतिलिप्यधिकार की अवधि के विस्तार के लिए फीस के संदाय में असफलता अनाशयित थी और आवेदन करने में कोई असम्यक् विलम्ब नहीं हुआ है तो नियंत्रक प्रतिलिप्यधिकार की अवधि के विस्तार के लिए विहित अतिरिक्त फीस के साथ किसी असंदत्त फीस के संदाय पर डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण को प्रत्यावर्तित करेगा ।

                (2) नियंत्रक, यदि वह डिजाइन को प्रत्यावर्तित करने के लिए शर्त के रूप में उचित समझे तो यह अपेक्षा कर सकेगा कि कोई भी प्रविष्टि किसी भी दस्तावेज या विषय के रजिस्टर में की जाएगी जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रजिस्टर में प्रविष्ट की जानी है किन्तु वह इस प्रकार प्रविष्ट नहीं की गई है ।

14. ऐसे व्यपगत डिजाइन के, जो प्रत्यावर्तित कर दिया गया है, स्वत्वधारी के अधिकार-(1) जहां डिजाइन का रजिस्ट्रीकरण प्रत्यावर्तित कर दिया गया है, वहां रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के अधिकार ऐसे उपबंधों के, जो विहित किए जाएं, और ऐसे अन्य उपबंधों के अध्यधीन होंगे जिन्हें नियंत्रक उन व्यक्तियों के संरक्षण या उनको प्रतिकर के लिए अधिरोपित करना उचित समझे, जिन्होंने उस तारीख से जिसको डिजाइन का रजिस्ट्रीकरण प्रभाव में नहीं रहा और डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के प्रत्यावर्तन की तारीख के बीच डिजाइन का उपयोजन करने के फायदे स्वयं प्राप्त करना आरंभ कर दिया होता या वे फायदे स्वयं प्राप्त करने के लिए संविदा द्वारा या अन्यथा निश्चित कदम उठाए हैं ।

                (2) उस तारीख से जिसको डिजाइन का रजिस्ट्रीकरण प्रभाव में नहीं रहा है और डिजाइन के प्रत्यावर्तन की तारीख के बीच ऐसे रजिस्ट्रीकृत डिजाइन की चोरी अथवा ऐसे डिजाइन के प्रतिलिप्यधिकार के उल्लंघन की बाबत कोई भी वाद अथवा अन्य कार्यवाही प्रारंभ नहीं की जाएगी ।

15. विक्रय के पश्चात् परिदान के पूर्व की अपेक्षाएं-(1) जहां विक्रय के पश्चात् किन्हीं ऐसी वस्तुओं के परिदान के पूर्व, जिन पर किसी रजिस्ट्रीकृत डिजाइन का प्रयोग किया गया है, वहां स्वत्वधारी-

(क) (यदि रजिस्ट्रीकरण के लिए किए गए आवेदन में सही रूपण या नमूने प्रस्तुत नहीं किए गए थे) डिजाइन के सही रूपणों या नमूनों की विहित संख्या नियंत्रक को प्रस्तुत करेगा; और यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है, तो नियंत्रक स्वत्वधारी को ऐसा करने की सूचना देने के पश्चात् उसका नाम रजिस्टर से निकाल सकेगा और तदुपरि उसका डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार समाप्त हो जाएगा; और

(ख) प्रत्येक ऐसी वस्तु को ऐसे विहित चिह्न से या विहित शब्दों या आकृतियों से, जो यह द्योतन करती हों कि डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, चिह्नित करवाएगा और यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है तो स्वत्वधारी डिजाइन में अपने प्रतिलिप्यधिकार के अतिलंघन की बाबत कोई शास्ति या नुकसानी वसूल करने का हकदार तब तक नहीं होगा जब तक कि वह यह दर्शित नहीं कर देता है कि वस्तु का चिह्नांकन सुनिश्चित करने के लिए उसने सभी समुचित उपाय किए थे, या तब तक जब तक कि वह यह दर्शित नहीं कर देता है कि ऐसा अतिलंघन, दोषी व्यक्ति के डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार के विद्यमान होने की बाबत जानकारी या सूचना प्राप्त होने के पश्चात् हुआ था ।

                (2) जहां, किसी व्यापार या उद्योग द्वारा या उसकी ओर से केन्द्रीय सरकार को कोई अभ्यावेदन इस बात के लिए किया गया है कि व्यापार या उद्योग के हित में किसी वस्तु के किसी वर्ग या वर्णन के संबंध में चिह्नांकन की बाबत इस धारा की किन्हीं अपेक्षाओं से अभिमुक्त या उपान्तरित करना समीचीन है, वहां केन्द्रीय सरकार, यदि ठीक समझती है तो वह, इस अधिनियम के अधीन नियम द्वारा ऐसे वर्ग या वर्णन की वस्तुओं की बाबत, ऐसी अपेक्षाओं से, ऐसे विस्तार तक और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो वह ठीक समझे, अभिमुक्त या उपान्तरित कर सकेगी ।

16. प्रतिलिप्यधिकार पर प्रकटन का प्रभाव-स्वत्वधारी द्वारा, किसी ऐसे अन्य व्यक्ति को, ऐसी परिस्थितियों में जिनमें उस अन्य व्यक्ति को डिजाइन के सद्भावपूर्वक उपयोग या प्रकाशन के लिए प्रतिकूल बना देगी, डिजाइन का प्रकटन और डिजाइन के स्वत्वधारी से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सद्भाव को भंग करते हुए किसी डिजाइन का प्रकटन और ऐसे माल के लिए, प्रथम और गोपनीय आदेश का प्रतिग्रहण, जिन पर रजिस्ट्रीकरण के लिए आशयित नई या मूल टेक्सटाइल डिजाइन हो, डिजाइन का प्रकाशन नहीं समझा जाएगा जो उसके प्रतिलिप्यधिकार को अविधिमान्य करने के लिए पर्याप्त हो, यदि उसका रजिस्ट्रीकरण उसके प्रकटीकरण या प्रतिग्रहण के पश्चात् प्राप्त किया गया हो ।

17. रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों का निरीक्षण-(1) किसी डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार के विद्यमान रहने के दौरान कोई व्यक्ति, ऐसी जानकारी देने पर जिससे नियंत्रक डिजाइन की पहचान करने में समर्थ हो सके और विहित फीस के संदाय पर, विहित रीति में डिजाइन का निरीक्षण कर सकेगा ।

                (2) कोई व्यक्ति, नियंत्रक को आवेदन करने पर और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए, किसी रजिस्ट्रीकृत डिजाइन की प्रमाणित प्रति अभिप्रात कर सकेगा ।

18. प्रतिलिप्यधिकार के विद्यमान होने के बारे में जानकारी-ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने वाले किसी ऐसे व्यक्ति के अनुरोध पर जो नियंत्रक को किसी डिजाइन को पहचानने के लिए समर्थ बना सके, विहित फीस के संदाय पर नियंत्रक ऐसे व्यक्ति को सूचित करेगा चाहे डिजाइन की बाबत रजिस्ट्रीकरण उस समय भी विद्यमान हो या नहीं और यदि ऐसा है, तो वह वस्तुओं के किसी प्रकार के वर्ग की बाबत है, और वह रजिस्ट्रीकरण की तारीख और रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के नाम और पते भी देगा ।

19. रजिस्ट्रीकरण का रद्द किया जाना-(1) कोई भी हितबद्ध व्यक्ति किसी डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के रद्द किए जाने के लिए डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् किसी भी समय, निम्नलिखित आधारों में से किसी भी आधार पर नियंत्रक को याचिका प्रस्तुत कर सकेगा, अर्थात्ः-

                                (क) डिजाइन पहले से ही भारत में रजिस्ट्रीकृत की जा चुकी है; या

                                (ख) रजिस्ट्रीकरण की तारीख से पहले ही डिजाइन भारत में या किसी अन्य देश में प्रकाशित की जा चुकी है; या

                                (ग) डिजाइन कोई नई डिजाइन नहीं है या मूल डिजाइन नहीं है; या

                                (घ) डिजाइन इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए जाने योग्य नहीं है; या

                                (ङ) यह धारा 2 के खंड (घ) में यथा परिभाषित डिजाइन नहीं है ।

                (2) इस धारा के अधीन नियंत्रक के किसी आदेश के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय को की जाएगी और नियंत्रक किसी ऐसी याचिका को किसी भी समय उच्च न्यायालय को निर्दिष्ट कर सकेगा और उच्च न्यायालय इस प्रकार निर्दिष्ट किसी याचिका पर विनिश्चय करेगा ।

20. डिजाइनों से सरकार का आबद्ध होना-किसी रजिस्ट्रीकृत डिजाइन का, सरकार के विरुद्ध उसके समस्त आशयों के बारे में वैसा ही प्रभाव होगा जैसा कि उसका प्रभाव किसी व्यक्ति के विरुद्ध होता है और पेटेन्ट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) के अध्याय 17 के उपबंध रजिस्ट्रीकृत डिजाइन को वैसे ही लागू होंगे जैसे कि वे पेटेन्टों को लागू होते हैं ।

अध्याय 4

औद्योगिक और अन्तरराष्ट्रीय प्रदर्शनियां

21. प्रदर्शनियों के बारे में उपबन्ध-किसी डिजाइन की प्रदर्शनी या किसी ऐसी वस्तु की प्रदर्शनी जिसे कोई डिजाइन लागू होती है, किसी ऐसे औद्योगिक या अन्य प्रदर्शनी में प्रदर्शित करना, जिसके लिए केन्द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस धारा के उपबंधों का विस्तार किया है, या प्रदर्शनी की अवधि के दौरान किसी डिजाइन के वर्जन का प्रकाशन या स्वत्वधारी के ज्ञान या सहमति के बिना, प्रदर्शनी की अवधि के दौरान या उसके पश्चात् किसी व्यक्ति द्वारा, किसी अन्य स्थान पर किसी डिजाइन या वस्तु का प्रदर्शन या किसी डिजाइन के वर्णन का प्रकाशन, डिजाइन को रजिस्ट्रीकृत किए जाने से नहीं रोकेगा या उसके रजिस्ट्रीकरण को अविधिमान्य नहीं होने देगा :

                परन्तु यह कि-

(क) किसी डिजाइन या वस्तु का प्रदर्शन करने वाला या किसी डिजाइन का वर्णन करने वाला प्रदर्शक, प्रकाशन की पूर्व सूचना, विहित प्ररूप में नियंत्रक को, देता है; और

(ख) रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन, डिजाइन या वस्तु या डिजाइन के वर्णन के प्रकाशन के प्रथम प्रदर्शन की तारीख से छह मास के भीतर करता है ।

अध्याय 5

विधिक कार्यवाहियां

22. रजिस्ट्रीकृत डिजाइन की चोरी-(1) किसी डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार के विद्यमान रहने के दौरान, किसी व्यक्ति के लिए-

(क) विक्रय के प्रयोजन के लिए वस्तुओं के किसी वर्ग की किसी ऐसी वस्तु को जिसकी डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, उस डिजाइन या उसकी कपटपूर्ण या वास्तविक अनुकृति को रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी की अनुज्ञा या लिखित सहमति के सिवाय प्रयोग करना या प्रयोग करवाना या ऐसी डिजाइन के प्रयोग को समर्थ बनाने के लिए कोई बात करना, विधिपूर्ण नहीं    होगा; या

(ख) रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी की सहमति के बिना, विक्रय के प्रयोजनों के लिए, वस्तुओं के किसी वर्ग से संबंधित किसी ऐसी वस्तु का जिसमें डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, आयात करना और उस डिजाइन या उसकी कपटपूर्ण या वास्तविक अनुकृति का प्रयोग करना, विधिपूर्ण नहीं होगा; या

(ग) यह जानते हुए कि डिजाइन या उसकी कपटपूर्ण या वास्तविक अनुकृति को, वस्तुओं के किसी वर्ग की, जिसकी डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, किसी वस्तु के लिए, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी की सहमति के बिना प्रयोग में लाया गया है, उस वस्तु के विक्रय के लिए उसको प्रकाशित या प्रकट करना या उसका प्रकाशन कराना या उसे प्रकट कराना विधिपूर्ण नहीं होगा ।

                (2) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के उल्लंघन में कोई कार्य करेगा तो वह प्रत्येक उल्लंघन के लिए-

(क) डिजाइन के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को पच्चीस हजार रुपए से अनधिक राशि का, जो संविदा ऋण के रूप में वसूलीय होगी, संदाय करने के लिए; या

(ख) यदि स्वत्वधारी ऐसे किसी उल्लंघन के लिए नुकसानी की वसूली के लिए और ऐसे उल्लंघन की पुनरावृत्ति के विरुद्ध आदेश के लिए कोई वाद लाएगा तो ऐसी नुकसानी के संदाय करने के लिए जैसी अधिनिर्णीत की जाए, और तद्नुसार व्यादेश द्वारा अवरुद्ध किए जाने के लिए,

दायी होगा :

                परन्तु खंड (क) के अधीन किसी डिजाइन की बाबत वसूलीय कुल राशि पचास हजार रुपए से अधिक नहीं होगी :

                परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अनुतोष के लिए कोई भी वाद या कोई अन्य कार्यवाही जिला न्यायाधीश के न्यायालय से निम्न किसी न्यायालय में संस्थित नहीं की जाएगी ।

                (3) उपधारा (2) के अधीन अनुतोष के लिए किसी भी वाद या किसी अन्य कार्यवाही में ऐसा प्रत्येक आधार प्रतिरक्षा के आधार के रूप में उपलब्ध होगा जिस पर धारा 19 के अधीन डिजाइन का रजिस्ट्रीकरण रद्द किया जा सकेगा ।

                (4) उपधारा (2) के दूसरे परंतुक में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई ऐसा आधार, जिस पर धारा 19 के अधीन डिजाइन का रजिस्ट्रीकरण रद्द किया जा सकेगा, उपधारा (2) के अधीन अनुतोष के लिए किसी वाद या अन्य कार्यवाही में उपधारा (3) के अधीन प्रतिरक्षा के रूप में लिया गया है वहां ऐसा वाद या ऐसी अन्य कार्यवाही उस न्यायालय द्वारा, जिसमें उक्त वाद या ऐसी अन्य कार्यवाही लम्बित है, विनिश्चय के लिए उच्च न्यायालय को अन्तरित कर दी जाएगी ।

                (5) जब न्यायालय किसी वाद में उपधारा (2) के अधीन डिक्री देता है तब वह डिक्री की एक प्रति नियंत्रक को भेजेगा जो डिजाइनों के रजिस्टर में उसे दर्ज कराएगा ।

23. डिजाइनों के पेटेन्टों के संबंध में अधिनियम के कुछ उपबंधों का लागू होना-किसी पेटेन्ट की विधिमान्यता के प्रमाणपत्रों के संबंध में और किन्हीं पेटेन्टों द्वारा विधिक कार्यवाहियों की निराधार धमकियों के मामले में उपचार के संबंध में पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) के उपबंध, रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों के मामलों में उसी रीति से लागू होंगे जैसे कि वे पेटेंटों के मामलों में पेटेंट के प्रति निर्देशों के स्थान पर डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार के प्रति निर्देश, और पेटेन्टों के प्रति निर्देशों के स्थान पर स्वत्वधारी के प्रति निर्देश, तथा आविष्कार के प्रति निर्देशों के स्थान पर डिजाइनों के प्रति निर्देश के रूप में लागू होते हैं ।

अध्याय 6

साधारण

फीसें

24. फीसें-(1) इस अधिनियम के अधीन डिजाइनों के रजिस्ट्रीकरण और उसके आवेदन के लिए और डिजाइनों से संबंधित अन्य विषयों की बाबत ऐसी फीसें जो विहित की जाएं, संदत्त की जाएंगी ।

                (2) वह कार्यवाही जिसकी बाबत कोई फीस इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन संदेय है, तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक फीस का संदाय नहीं कर दिया जाए ।

पेटेन्ट कार्यालय के रजिस्टरों और अन्य दस्तावेजों के बारे में उपबंध

25. न्यास की सूचना को रजिस्टरों में दर्ज किया जाना-किसी न्यास की कोई अभिव्यक्त, विवक्षित या आन्वयिक सूचना या नियंत्रक द्वारा प्राप्त सूचना इस अधिनियम के अधीन रखे गए किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं की जाएगी ।

26. रजिस्टरों का निरीक्षण और उनसे उद्धरणों आदि का दिया जाना-इस अधिनियम के अधीन रखा गया प्रत्येक रजिस्टर इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए सभी सुविधाजनक समयों पर लोक निरीक्षण के लिए खुला रहेगा; और ऐसे किसी रजिस्टर की किसी प्रविष्टि की प्रमाणित प्रति पेटेन्ट कार्यालय की मुद्रा सहित उसकी अपेक्षा करने वाले व्यक्ति को, विहित फीस के संदाय पर दी जाएगी :

परन्तु जहां ऐसा रजिस्टर पूर्णतः या भागतः कंप्यूटर में रखा जाता है, वहां इस धारा के अधीन ऐसे रजिस्टर का निरीक्षण कंप्यूटर में इस प्रकार रखे गए रजिस्टर में सुसंगत प्रविष्टि के कंप्यूटर प्रिन्ट आऊट का निरीक्षण करके किया जाएगा ।

27. नियत्रंक की रिपोर्टों को विशेषाधिकार प्राप्त होना-इस अधिनियम के अधीन धारा 45 में निर्दिष्ट रिपोर्ट से भिन्न नियंत्रक की रिपोर्टों को या नियंत्रक को की गई रिपोर्टों को किसी भी दशा में प्रकाशित नहीं किया जाएगा या उन्हें लोक निरीक्षण के लिए उपलब्ध नहीं किया जाएगा ।

28. विनिर्देशों, रेखा-चित्रों आदि के प्रकाशन का उस दशा में प्रतिषेध जिसमें आवेदन का परित्याग कर दिया गया हो-जहां किसी डिजाइन के लिए किसी आवेदन का परित्याग कर दिया गया है या उसे नामंजूर कर दिया गया है वहां आवेदन और आवेदन के संबंध में छोड़े गए रेखाचित्रों, फोटोचित्रों, अनुरेखणों, रूपणों या नमूनों को किसी भी समय लोक निरीक्षण के लिए उपलब्ध नहीं किया जाएगा या नियंत्रक द्वारा उन्हें प्रकाशित नहीं किया जाएगा ।

29. लेखन भूलों को ठीक करने की नियंत्रक की शक्ति-नियंत्रक, विहित फीस के साथ लिखित रूप से अनुरोध किए जाने पर किसी डिजाइन के रूपण या किसी डिजाइन के स्वत्वधारी के नाम या पते में या किसी अन्य विषय में जो डिजाइनों के रजिस्टरों में दर्ज किया गया है, किसी लेखन भूल को ठीक कर सकेगा ।

30. समनुदेशनों और पारेषणों का रजिस्टरों में दर्ज किया जाना-(1) जहां कोई व्यक्ति समनुदेशन, पारेषण या विधि के अन्य प्रवर्तन द्वारा किसी रजिस्ट्रीकृत डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार का हकदार हो जाता है, वहां वह अपने हक को रजिस्टर किए जाने के लिए नियंत्रक को विहित प्ररूप में आवेदन कर सकेगा और नियंत्रक ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर और हक के सबूत की बाबत अपना समाधान कर लेने पर ऐसी डिजाइन के स्वत्वधारी के रूप में उसे रजिस्टर में दर्ज करेगा और समनुदेशन, पारेषण या हक पर प्रभाव डालने वाली अन्य लिखत को रजिस्टर में विहित रीति से दर्ज कराएगा ।

                (2) जहां कोई व्यक्ति बंधकदार, अनुज्ञप्तिधारी या अन्यथा किसी रूप में किसी रजिस्ट्रीकृत डिजाइन में किसी हित का हकदार हो जाता है, वहां वह अपने हक को रजिस्टर करने के लिए नियंत्रक को विहित प्ररूप में आवेदन कर सकेगा और नियंत्रक ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर और हक के सबूत की बाबत अपना समाधान कर लेने पर डिजाइनों के रजिस्टर में हित की सूचना, ऐसे हित को सृजित करने वाली लिखत की विशिष्टियों सहित, यदि कोई हो, विहित रीति से दर्ज कराएगा ।

                (3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए डिजाइन या डिजाइन में किसी अंश का समनुदेशन, डिजाइन का बंधक, उसकी अनुज्ञप्ति या उसमें किसी अन्य हित का सृजन तभी विधिमान्य होगा जब कि वह लिखित में हो और संबद्ध पक्षकारों के बीच करार ऐसे लिखत के प्ररूप में किया जाता है, जिसमें उनके अधिकारों और दायित्वों को शासित करने वाले सभी निबंधन और शर्तें अन्तर्विष्ट हों और ऐसी लिखत के अधीन हक के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन, नियंत्रक को विहित रीति में उक्त लिखत के निष्पादन से छह मास के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो कुल छह मास से अधिक नहीं होगी, जितनी नियंत्रक विहित रीति से किए गए आवेदन पर अनुज्ञात करे, फाइल किया गया हो :

                परन्तु लिखत उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन रजिस्टर में उसकी विशिष्टियों की प्रविष्टि होने पर उसके निष्पादन की तारीख से प्रभावी होगी ।

                (4) किसी डिजाइन के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को, इस अधिनियम के उपबंधों और किन्हीं ऐसे अधिकारों के अधीन रहते हुए, जो रजिस्टर से किसी अन्य व्यक्ति में निहित हुए प्रतीत होते हैं, डिजाइन को समनुदेशित करने, अनुज्ञप्ति मंजूर करने के बारे में या अन्यथा व्यवहार करने और ऐसे समनुदेशन, अनुज्ञप्ति या व्यवहार के किसी प्रतिफल के लिए प्रभावी रसीदें देने की पूर्ण रूप से शक्ति होगी :

                परन्तु डिजाइन की बाबत किसी साम्या को उसी रीति से लागू किया जा सकेगा जैसी कि वह किसी जंगम सम्पत्ति की बाबत लागू की जाती है ।

                (5) धारा 31 के अधीन किए गए किसी आवेदन के मामले के सिवाय, किसी ऐसे दस्तावेज या लिखत को, जिनकी बाबत उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसरण में रजिस्टर में कोई प्रविष्टि नहीं की गई है, किसी न्यायालय में किसी डिजाइन के प्रतिलिप्यधिकार या उसमें किसी हित के हक के सबूत की बाबत साक्ष्य के रूप में तब तक ग्रहण नहीं किया जाएगा जब तक कि न्यायालय, ऐसे कारणों से, जो अभिलिखित किए जाएं, अन्यथा निदेश न दे ।

31. रजिस्टर की परिशुद्धि-(1) यदि कोई व्यक्ति डिजाइनों के रजिस्टर में किसी प्रविष्टि को अन्तःस्थापित न करने से या उसके लोप किए जाने या किसी पर्याप्त हेतुक के बिना ऐसे किसी रजिस्टर में की गई किसी प्रविष्टि से या ऐसे रजिस्टर में गलत तौर से रह गई किसी प्रविष्टि से या ऐसे रजिस्टर में किसी प्रविष्टि में किसी गलती से या उसमें किसी त्रुटि से, व्यथित है तो विहित रीति से उसके द्वारा किए गए आवेदन पर नियंत्रक रजिस्टर में कोई प्रविष्टि करने, उसे हटाने या उसमें परिवर्तन करने के लिए ऐसे आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे और तद्नुसार रजिस्टर को परिशुद्ध कर सकेगा ।

(2) नियंत्रक, इस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में ऐसे किसी प्रश्न का विनिश्चय कर सकेगा जो रजिस्टर की परिशुद्धि के संबंध में विनिश्चित करना आवश्यक या समीचीन है ।

(3) इस धारा के अधीन नियंत्रक द्वारा किए गए किसी आदेश के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय को की जाएगी; और नियंत्रक इस धारा के अधीन किसी आवेदन को उच्च न्यायालय के विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट कर सकेगा और उच्च न्यायालय इस प्रकार निर्दिष्ट आवेदन को निपटाएगा ।

(4) उच्च न्यायालय द्वारा किसी रजिस्टर को परिशुद्ध करने के लिए किए गए किसी आदेश में यह निदेश दिया जाएगा कि नियंत्रक को परिशुद्धि की सूचना की तामील विहित रीति से की जाए । नियंत्रक ऐसी सूचना की प्राप्ति पर रजिस्टर को तद्नुसार परिशुद्ध करेगा ।

(5) इस धारा की कोई भी बात नियंत्रक को किसी डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने की बाबत कोई ऐसा आदेश, जो धारा 19 में उपबन्धित है, करने के लिए सशक्त करने वाली नहीं समझी जाएगी ।

अध्याय 7

नियंत्रक की शक्तियां और कर्तव्य

32. अधिनियम के अधीन कार्यवाहियों में नियंत्रक की शक्तियां-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, नियंत्रक को, इस अधिनियम के अधीन अपने समक्ष किन्हीं कार्यवाहियों में साक्ष्य ग्रहण करने, शपथ दिलाने, साक्षियों को हाजिर कराने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण और उन्हें पेश करने के लिए विवश करने, साक्षियों की परीक्षा करने के लिए कमीशन निकालने और खर्च अधिनिर्णीत करने के प्रयोजन के लिए सिविल न्यायालय की शक्तियां होंगी और ऐसा अधिनिर्णय, अधिकारिता रखने वाले किसी न्यायालय में इस प्रकार निष्पादन योग्य होगा मानो वह उस न्यायालय की डिक्री हो ।

33. नियंत्रक द्वारा वैवेकिक शक्ति का प्रयोग-जहां इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन नियंत्रक को वैवेकिक शक्ति दी जाती है, वहां वह किसी डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदक के प्रतिकूल उस शक्ति का प्रयोग आवेदक को सुनवाई का अवसर दिए बिना (यदि विहित समय के भीतर आवेदक द्वारा ऐसी अपेक्षा की गई हो) नहीं करेगा ।

34. केन्द्रीय सरकार से निदेश प्राप्त करने की नियंत्रक की शक्ति-नियंत्रक, इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी उपबंध के प्रबन्ध के संबंध में कोई शंका या कठिनाई उत्पन्न होने की दशा में, केन्द्रीय सरकार को इस विषय में निदेश प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेगा ।

35. कुछ मामलों में डिजाइन को रजिस्ट्रीकृत करने से इन्कार करना-(1) नियंत्रक ऐसी डिजाइन को रजिस्ट्रीकृत करने से इन्कार कर सकेगा जिसका उपयोग उसकी राय में किसी लोक व्यवस्था या नैतिकता के प्रतिकूल है ।

(2) इस धारा के अधीन नियंत्रक द्वारा किए गए किसी आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय को अपील की जाएगी ।

36. उच्च न्यायालय को अपीलें-(1) जहां, इस अधिनियम द्वारा यह घोषित किया गया है कि नियंत्रक द्वारा कोई अपील उच्च न्यायालय को की जानी है, वहां नियंत्रक द्वारा किए गए आदेश की तारीख से तीन मास के भीतर अपील की जाएगी ।

(2) उक्त तीन मास की अवधि की संगणना करने में, वह समय (यदि कोई हो) जो ऐसे आदेश की प्रति, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, मंजूर करने में लगा हो, अपवर्जित किया जाएगा ।

(3) उच्च न्यायालय, यदि ठीक समझता है तो ऐसी अपीलों का विनिश्चय करने के लिए किसी विशेषज्ञ की सहायता ले सकेगा और उच्च न्यायालय का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

(4) उच्च न्यायालय अपने समक्ष इस अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों के संचालन और उनकी प्रक्रिया के बारे में इस अधिनियम से संगत नियम बना सकेगा ।

अध्याय 8

साक्ष्य, आदि

37. नियंत्रक के समक्ष साक्ष्य-धारा 44 के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन नियंत्रक के समक्ष किसी कार्यवाही में, नियंत्रक के प्रतिकूल निदेशों के अभाव में, साक्ष्य शपथ-पत्र द्वारा दिया जाएगा; किन्तु यदि किसी ऐसे मामले में, जिसमें नियंत्रक ऐसा करना ठीक समझता है, तो वह शपथ-पत्र द्वारा साक्ष्य के बदले में या उसके अतिरिक्त, मौखिक साक्ष्य ले सकेगा या किसी पक्षकार को, उसके शपथ-पत्र की अन्तर्वस्तु के आधार पर, प्रतिपरीक्षा किए जाने के लिए अनुज्ञात कर   सकेगा ।

38. नियंत्रक के प्रमाणपत्र का साक्ष्य होना-किसी ऐसी प्रविष्टि, विषय या बात की बाबत जिस पर नियंत्रक का हस्ताक्षर होना तात्पर्यित हो, कोई ऐसा प्रमाणपत्र, जिसके बनाने या करने के लिए इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों द्वारा उसे प्राधिकृत किया गया है, इस बात का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा कि उक्त प्रविष्टि की गई है और उसकी अंतर्वस्तु और उस विषय का या उस बात का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा कि वह बात कर दी गई है या नहीं की गई है ।

39. पेटेन्ट कार्यालय में दस्तावेजों का साक्ष्य-पेटेन्ट कार्यालय के ऐसे दस्तावेजों की मुद्रित या लिखित प्रतियां या उनके उद्धरण जिनका नियंत्रक द्वारा प्रमाणित किया जाना और पेटेन्ट कार्यालय की मुद्रा से मुद्रांकित होना तात्पर्यित है और पेटेन्ट कार्यालय में रखे गए सभी रजिस्टरों की या उनके उद्धरण तथा वहां रखी गई अन्य पुस्तकें, भारत में सभी न्यायालयों में और सभी कार्यवाहियों में किसी अतिरिक्त सबूत या मूल प्रतियों को पेश किए बिना, साक्ष्य के रूप में ग्रहण की जाएंगी :

                परन्तु किसी न्यायालय को, यदि साक्ष्य में पेश की गई प्रतियों की यथार्थता या अधिप्रमाणिकता के बारे में कोई शंका है तो वह मूल प्रतियों को या ऐसे अतिरिक्त सबूत को पेश करने के लिए अपेक्षा कर सकेगा जैसा वह आवश्यक समझे ।

40. आवेदनों और सूचनाओं का डाक द्वारा भेजा जाना-पेटेन्ट कार्यालय में या नियंत्रक को या इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य व्यक्ति को कोई आवेदन या कोई सूचना या अन्य प्राधिकृत दस्तावेज जिनका रखा जाना, बनाया जाना या दिया जाना अपेक्षित है, डाक द्वारा भेजे जा सकेंगे ।

41. शिशु, पागल आदि द्वारा घोषणा-(1) यदि कोई व्यक्ति, बाल्यावस्था, पागलपन या अन्य प्रकार की निःशक्तता के कारण, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित या अनुज्ञात, कोई कथन करने या किसी बात के करने में असमर्थ है, तो ऐसे निःशक्त व्यक्ति का विधिपूर्ण संरक्षक, सुपुर्ददार या प्रबन्धक (यदि कोई हो) या यदि कोई व्यक्ति नहीं है तो, उसकी सम्पत्ति की बाबत अधिकारिता रखने वाले किसी न्यायालय द्वारा नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति ऐसा कथन या वह कथन कर सकेगा जो कथन के इतने निकट और समरूप हो जितनी परिस्थितियां अनुज्ञात करें और निःशक्त व्यक्ति के नाम में और उसकी ओर से ऐसी बात कर सकेगा ।

                (2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए न्यायालय द्वारा, निःशक्त व्यक्ति की ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की या ऐसा कथन करने या ऐसी बात करने में हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति की अर्जी पर, कोई नियुक्ति की जा सकेगी ।

42. कतिपय निर्बंधनात्मक शर्तों का परिवर्जन-(1) ऐसी किसी शर्त को-

(i) ऐसी किसी वस्तु के, जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, विक्रय या पट्टे की किसी संविदा में अथवा उनके संबंध में; या

(ii) ऐसी किसी वस्तु के, जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, विनिर्माण या उपयोग के लिए अनुज्ञप्ति में; या

(iii) ऐसी वस्तु के जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, पैक करने के लिए अनुज्ञप्ति में,

अंतःस्थापित करना विधिपूर्ण नहीं होगा, जिसका प्रभाव,-

(क) ऐसी किसी वस्तु से भिन्न कोई वस्तु जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, विक्रेता, पट्टाकर्ता या अनुज्ञापक या उसके नामनिर्देशितियों से अर्जित करने की क्रेता, पट्टेदार या अनुज्ञप्तिधारक से अपेक्षा करना अथवा उससे अर्जित करने से प्रतिषिद्ध करना या किसी रीति से या किसी सीमा तक किसी व्यक्ति से अर्जित करने के उसके अधिकार को निर्बंधित करना या विक्रेता, पट्टाकर्ता या अनुज्ञापक या उसके नामनिर्देशितियों के सिवाय उसको अर्जित करने से प्रतिषिद्ध करना; या

(ख) ऐसी किसी वस्तु से भिन्न किसी वस्तु को, जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है और जो विक्रेता, पट्टाकर्ता या अनुज्ञापक या उसके नामनिर्देशिती द्वारा प्रदाय नहीं की गई है, क्रेता, पट्टेदार या अनुज्ञप्तिधारी को उपयोग करने से प्रतिषिद्ध करना अथवा क्रेता, पट्टेदार या अनुज्ञप्तिधारी के अधिकार को किसी रीति से या किसी सीमा तक निर्बंधित करना,

और ऐसी कोई शर्त शून्य होगी ।

                (2) उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी शर्त का केवल इस तथ्य के कारण उस उपधारा के अन्तर्गत आने वाली शर्त के रूप में बने रहना समाप्त नहीं होगा कि उस शर्त को अंतर्विष्ट करने वाला करार पृथक्तः किया गया है भले ही वह उस वस्तु के, जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, विक्रय, पट्टे या अनुज्ञप्ति से संबंधित संविदा से पूर्व किया गया हो या उसके पश्चात् ।

                (3) धारा 22 के उल्लंघन में किसी कार्य के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही में यह साबित करना एक प्रतिरक्षा होगा कि ऐसे उल्लंघन के समय रजिस्ट्रीकृत डिजाइन के संबंध में संविदा प्रवृत्त थी और उसमें इस धारा द्वारा विधिविरुद्ध घोषित की गई शर्त अन्तर्विष्ट थी :

                परन्तु यदि वादी संविदा में पक्षकार नहीं है और न्यायालय के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि निर्बंधनात्मक शर्त उक्त संविदा में उसकी अभिव्यक्त या विवक्षित जानकारी और सहमति के बिना अंतःस्थापित की गई थी तो यह उपधारा लागू  नहीं होगी ।

                (4) इस धारा में की कोई बात-

(क) संविदा में ऐसी किसी शर्त को प्रभावित नहीं करेगी जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को उस विशिष्ट व्यक्ति के माल से भिन्न माल का विक्रय करने से प्रतिषिद्ध करती हो;

(ख) संविदा को विधिमान्य नहीं करेगी यदि यह धारा न होती तो अविधिमान्य होती;

(ग) किसी ऐसी वस्तु के, जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, पट्टे के लिए संविदा या उपयोग करने के लिए अनुज्ञप्ति में ऐसी शर्त को प्रभावित नहीं करेगी, जिसके द्वारा पट्टाकर्ता या अनुज्ञापक ऐसी किसी वस्तु के, जिसकी बाबत डिजाइन रजिस्ट्रीकृत है, ऐसे नए पुर्जों का प्रदाय करने के अधिकार को, जो उस वस्तु की मरम्मत के लिए रखने या पास रखने के लिए अपेक्षित हो, अपने लिए या अपने नामनिर्देशिती के लिए आरक्षित रखती हो ।

                (5) इस धारा के उपबंध इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व की गई संविदाओं को भी लागू होंगे और जहां तक, इस धारा द्वारा विधिविरुद्ध घोषित की गई कोई निर्बंधनात्मक शर्तें ऐसे प्रारंभ से एक वर्ष के पर्यवसान के पश्चात् प्रवृत्त रहती हैं ।

 

अध्याय 9

अभिकरण

43. अभिकरण-(1) इस अधिनियम के अधीन नियंत्रक को किए जाने वाले सभी आवेदन और दी जाने वाली सभी संसूचनाएं विधिक व्यवसायी द्वारा या नियंत्रक के समाधानप्रद रूप में प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा या उसके माध्यम से हस्ताक्षरित की जा सकेंगी और नियंत्रक के समक्ष सभी हाजिरी विधि व्यवसायी द्वारा या ऐसे अभिकर्ता द्वारा या उसके माध्यम से हो सकेगी जिसके नाम और पते की पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) की धारा 125 के अधीन रखे गए पेटेंट अभिकर्ता के रजिस्टर में प्रविष्टि की गई है ।

                (2) नियंत्रक, यदि उचित समझता है, तो वह-

                                (क) यह अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसा कोई अभिकर्ता भारत का निवासी हो;

                (ख) किसी ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में निवास नहीं कर रहा है यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह भारत में निवास करने वाले किसी व्यक्ति को अभिकर्ता के रूप में नियोजित करे;

                (ग) किसी आवेदक से या अन्य किसी व्यक्ति से हस्ताक्षर करने की या उसकी उपस्थिति की अपेक्षा कर सकेगा ।

अध्याय 10

केन्द्रीय सरकार की शक्तियां, आदि

44. यूनाइटेड किंगडम और अन्य अभिसमय देशों या देशों के समूह या अन्तरशासनात्मक संगठन के साथ व्यतिकारी ठहराव-(1) ऐसा कोई व्यक्ति, जिसने किसी डिजाइन के संरक्षण के लिए यूनाइटेड किंगडम या अन्य अभिसमय देशों में से किसी देश या देशों के किसी समूह या उन देशों के जो अन्तरशासनात्मक संगठनों के सदस्य हैं, आवेदन किया है या उस व्यक्ति का विधिक प्रतिनिधि या उसका समनुदेशिती या तो अकेले या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्ततः, यह दावा करने का हकदार होगा कि इस अधिनियम के अधीन उक्त डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए उसे अन्य आवेदकों के मुकाबले में पूर्विकता दी जाए और उस आवेदन की वही तारीख होगी जो, यथास्थिति, यूनाइटेड किंगडम या ऐसे अन्य अभिसमय देशों में से किसी देश में या ऐसे देशों के समूह अथवा उन देशों, जो अन्तरशासनात्मक संगठनों के सदस्य हैं, में किए गए आवेदन की तारीख थी :

परन्तु यह कि-

(क) ऐसा आवेदन, यथास्थिति, यूनाइटेड किंगडम या ऐसे अन्य अभिसमय देशों में से किसी देश, देशों के समूह या ऐसे देशों में जो अन्तरशासनात्मक संगठनों के सदस्य हैं, में संरक्षण के लिए किए गए आवेदन से छह मास के भीतर किया जाता है; और

(ख) इस धारा की कोई बात डिजाइन के स्वत्वधारी को, ऐसी वास्तविक तारीख से पूर्व हुए डिजाइनों की चोरी के लिए, जिसके डिजाइन भारत में रजिस्ट्रीकृत हैं, नुकसानी की वसूली का हकदार नहीं बनाएगी ।

                (2) किसी डिजाइन का रजिस्ट्रीकरण केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगा कि भारत में उस डिजाइन का, इस धारा में विनिर्दिष्ट ऐसी अवधि के दौरान जिसके भीतर आवेदन किया जा सकेगा, प्रदर्शन या उपयोग अथवा उसके वर्णन या रूपण का प्रकाशन किया गया है ।

                (3) इस धारा के अधीन डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन उसी रीति से किया जाना आवश्यक है जैसी इस अधिनियम के अधीन मामूली आवेदन करने के लिए है ।

                (4) जहां, केन्द्रीय सरकार की जानकारी में यह बात लाई जाती है कि यूनाइटेड किंगडम या ऐसे किसी अन्य अभिसमय देश या ऐसे देश के, जो ऐसे देशों के किसी समूह या अंतरशासनात्मक संगठनों का सदस्य है, के विधान-मंडल ने, जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, भारत में रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों के संरक्षण के लिए समाधानप्रद रूप में उपबंध कर दिया है, वहां केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस धारा के उपबंध ऐसे परिवर्तनों या परिवर्धनों सहित, यदि कोई हों, जो ऐसी अधिसूचना में उपवर्णित किए जाएं, यथास्थिति, यूनाइटेड किंगडम या उस अन्य अभिसमय देश अथवा ऐसे देश में, जो ऐसे देशों के किसी समूह या अंतरशासनात्मक संगठनों का सदस्य है, रजिस्ट्रीकृत डिजाइनों के संरक्षण के लिए लागू होंगे ।

                स्पष्टीकरण 1-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए अभिसमय देश", देशों का समूह" या अंतरशासनात्मक संगठन" पद का अभिप्राय क्रमशः ऐसे देशों, देशों के समूह अथवा अंतरशासनात्मक संगठन से है जिसे 1967 में स्टाकहॉम में यथापुनरीक्षित और 1979 में यथासंशोधित औद्योगिक सम्पत्ति के संरक्षण के लिए पेरिस अभिसमय, 1883 अथवा वह अंतिम अधिनियम, जिसमें विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के लिए उपबंधित बहुपक्षीय व्यापार बातचीत के उरुगुवै राउण्ड के परिणाम अंतर्विष्ट हैं, लागू होता है ।

                स्पष्टीकरण 2-जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट संरक्षण के लिए एक से अधिक आवेदन यूनाइटेड किंगडम, या एक या अधिक अभिसमय देशों, देशों के समूह अथवा ऐसे देशों में, जो अंतरशासनात्मक संगठनों के सदस्य हैं, ऐसे ही संरक्षण के लिए किया गया है, वहां उस उपधारा के खंड (क) में निर्दिष्ट छह मास की अवधि की संगणना उस तारीख से की जाएगी जिसको ऐसे आवेदनों में से, यथास्थिति, पूर्वतर या पूर्वतम आवेदन किया गया है ।

45. नियंत्रक की रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के निष्पादन के संबंध में नियंत्रक द्वारा या उसके अधीन रिपोर्ट वर्ष में एक बार संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।

46. भारत की सुरक्षा का संरक्षण-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, नियंत्रक,-

                (क) इस अधिनियम के अधीन डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण या डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित किसी आवेदन से संबंधित ऐसी किसी जानकारी को प्रकट नहीं करेगा जिसे भारत की सुरक्षा के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली समझता है; और

                (ख) इस अधिनियम के अधीन ऐसी रजिस्ट्रीकृत डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करेगा जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, भारत की सुरक्षा के हित में विनिर्दिष्ट करे ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारत की सुरक्षा" पद से भारत की सुरक्षा के लिए आवश्यक ऐसा कोई कार्य अभिप्रेत है, जो युद्ध के लिए प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः सैनिक स्थापन के प्रयोजनों के लिए या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में युद्ध के या आपात-स्थिति के प्रयोजनों के लिए उपयोग की गई किसी वस्तु जो, इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी डिजाइन के उपयोजन से संबंधित है ।

47. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का प्ररूप, पेटेन्ट कार्यालय में इसे फाइल करने की रीति और उसके साथ फीस;

(ख) वह समय, जिसके भीतर धारा 5 की उपधारा (5) के अधीन रजिस्ट्रीकरण किया जाएगा;

(ग) धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए वस्तुओं का वर्गीकरण;

(घ) धारा 7 के अधीन प्रकाशित की जाने वाली डिजाइन की विशिष्टियां और उनके प्रकाशन की रीति;

(ङ) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन दावा करने की रीति;

(च) धारा 8 की उपधारा (5) के अधीन नियंत्रक को आवेदन करने की रीति;

(छ) वे अतिरिक्त विषय जिनका डिजाइन के रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाना अपेक्षित है और वे रक्षोपाय जो धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन कंप्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों में ऐसा रजिस्टर बनाए रखने में किए जाएंगे:

(ज) धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन प्रतिलिप्यधिकार की अवधि को विस्तारित करने के लिए आवेदन करने की रीति और उसके साथ संदत्त की जाने वाली फीस;

(झ) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन डिजाइन के प्रत्यावर्तन के लिए आवेदन करने की रीति और उसके साथ संदत्त की जाने वाली फीस;

(ञ) धारा 12 की उपधारा (2) के अधीन आवेदन में अन्तर्विष्ट कथन के सत्यापन की रीति;

(ट) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के प्रत्यावर्तन के लिए संदत्त की जाने वाली अतिरिक्त फीस;

(ठ) वे उपबंध, जिनके अधीन रहते हुए रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के अधिकार धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन होंगे;

(ङ) धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन नियंत्रक को दिए जाने वाले डिजाइन के सही रूपण या नमूनों की संख्या;

(ढ) वह चिह्न, शब्द या आकृति जो वस्तुओं पर यह द्योतन करने के लिए लगाई जाएंगी कि डिजाइन धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन रजिस्ट्रीकृत हैं;

(ण) वस्तुओं के किसी वर्ग या वस्तुओं के विवरण के संबंध में धारा 15 की अपेक्षाओं में से किसी से अभिमुक्त या उन्हें उपांतरित करने के लिए उस धारा की उपधारा (2) के अधीन चिह्नांकन की बाबत नियम;

(त) धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण के लिए संदत्त की जाने वाली फीस और उसकी रीति;

(थ) धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन किसी डिजाइन की प्रमाणित प्रति को अभिप्राप्त करने के लिए संदत्त की जाने वाली फीस;

(द) वह फीस जिसका संदाय करने पर नियंत्रक धारा 18 के अधीन जानकारी देगा;

(ध) धारा 21 के परन्तुक के खंड (क) के अधीन नियंत्रक को सूचना देने के लिए प्ररूप :

(न) डिजाइनों के रजिस्ट्रीकरण और उसके लिए आवेदन तथा धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन डिजाइनों से संबंधित अन्य विषयों की बाबत संदत्त की जाने वाली फीस;

(प) धारा 26 के अधीन रजिस्टर में की किसी प्रविष्टि की प्रमाणित प्रति देने के लिए संदत्त की जाने वाली फीस;

(फ) धारा 29 के अधीन किसी लेखन त्रुटि को ठीक करने के लिए लिखित में किए गए अनुरोध के साथ दी जाने वाली फीस;

(ब) वह प्ररूप जिसमें स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन दिया जाएगा और वह रीति जिसमें नियंत्रक धारा 30 की उपधारा (1) के अधीन हक को प्रभावित करने वाले समनुदेशन, पारेषण या अन्य लिखत की रजिस्टर में प्रविष्टि करवाएगा;

(भ) वह प्ररूप जिसमें हक के लिए आवेदन दिया जाएगा और वह रीति जिसमें नियंत्रक धारा 30 की उपधारा (2) के अधीन ऐसे हित का सृजन करने वाली लिखत, यदि कोई है, की विशिष्टियों के साथ डिजाइनों के रजिस्टर में हित की सूचना की प्रविष्टि करवाएगा;

(म) रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन फाइल करने की और धारा 30 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट समय के विस्तार के लिए आवेदन करने के लिए रीति;

(य) धारा 31 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्टर की परिशुद्धि के लिए नियंत्रक को आवेदन करने की रीति;

(यक) वह रीति जिसमें धारा 31 की उपधारा (4) के अधीन नियंत्रक पर परिशुद्धि की सूचना की तामील की जाएगी;

(यख) धारा 32 के अधीन नियंत्रक के समक्ष कार्यवाहियों को विनियमित करने वाले नियम;

(यग) वह समय जो धारा 33 के अधीन नियंत्रक द्वारा सुने जाने के लिए आवेदकों को अनुदत्त किया जाएगा;

(यघ) धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन अपील के साथ संदत्त की जाने वाली फीस;

(यङ) कोई अन्य विषय जिसका विहित किया जाना अपेक्षित हो या जो विहित किया जाए ।

                (3) इस धारा के अधीन नियम बनाने की शक्ति, नियमों के पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाने की शर्त के अधीन होगी ।

                (4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

अध्याय 11

निरसन और व्यावृत्ति

48. निरसन और व्यावृत्ति-(1) डिजाइन अधिनियम, 1911 (1911 का 2) निरसित किया जाता है ।

                (2) साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) में निरसनों से संबंधित उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, डिजाइन अधिनियम, 1911 (1911 का 2) के अधीन जारी की गई कोई अधिसूचना, बनाए गए नियम, किए गए आदेश, की गई अपेक्षा, किए गए रजिस्ट्रीकरण, दिए गए प्रमाणपत्र, जारी की गई सूचना, किए गए विनिश्चय, अवधारण, दिए गए निर्देश, किए गए अनुमोदन, प्राधिकार, दी गई सहमति, किए गए आवेदन, अनुरोध या अन्य बात जो इस अधिनियम के प्रवर्तन के समय प्रवृत्त है, प्रवर्तन में बनी रहेगी और ऐसे प्रभावी बनी रहेगी मानो वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन किया गया, जारी की गई, दिया गया या किया गया हो ।

                (3) इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम के प्रारंभ पर लंबित डिजाइन के रजिस्ट्रीकरण के लिए सभी आवेदनों को और उस पर पश्चात्वर्ती किसी कार्यवाही को और उसके अनुसरण में प्रदान किए गए किसी रजिस्ट्रीकरण को लागू होंगे ।

                (4) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ पर किसी न्यायालय में लंबित किसी कार्यवाही को उस न्यायालय में ऐसे जारी रखा जाएगा मानो यह अधिनियम पारित ही न किया गया हो ।

                (5) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व रजिस्ट्रीकृत डिजाइन में प्रतिलिप्यधिकार की समाप्ति की तारीख, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, पांच वर्ष की उस अवधि के ठीक बाद की तारीख होगी जिसके लिए वह रजिस्ट्रीकृत किया गया था, अथवा पांच वर्ष की उस अवधि के ठीक बाद की तारीख होगी जिसके लिए मूल अवधि के पर्यवसान से दूसरी अवधि के लिए प्रतिलिप्यधिकार की अवधि का विस्तार किया गया है ।

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