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न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 ( Minimum Wages Act, 1948 )


 

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948

(1948 का अधिनियम संख्यांक 11)

[15 मार्च, 1948]

कतिपय नियोजनों में मजदूरी की न्यूनतम

दरों को नियत करने का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

कतिपय नियोजनों में मजदूरी की न्यूनतम दरों को नियत करने का उपबन्ध करना समीचीन है;

अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है: -

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 कहा जा सकेगा । 

(2) इसका विस्तार ॥। सम्पूर्ण भारत पर है । 

2. निर्वचन-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो- 

 [(क) कुमार" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसने अपनी आयु का चौदहवां वर्ष पूरा कर लिया है, किन्तु अपना अठारहवां वर्ष पूरा नहीं किया है; 

(कक) वयस्क" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसने अपनी आयु का अठारहवां वर्ष पूरा कर लिया है;]

(ख) समुचित सरकार" से-

(i) [केन्द्रीय सरकार द्वारा या किसी रेल प्रशासन] द्वारा या इनमें से किसी के प्राधिकार के अधीन चलाए गए किसी अनुसूचित नियोजन के सम्बन्ध में, या किसी खान, तेल-क्षेत्र या महापत्तन के, या किसी [केन्द्रीय अधिनियम] द्वारा स्थापित किसी निगम के सम्बन्ध में, केन्द्रीय सरकार; तथा 

(ii) किसी अन्य अनुसूचित नियोजन के सम्बन्ध में राज्य सरकार,

                अभिप्रेत है; 

 [(खख) बालक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसने अपनी आयु का चौदहवां वर्ष पूरा नहीं किया है;]

(ग) समक्ष प्राधिकारी" से वह प्राधिकारी अभिप्रेत है, जिसे समुचित सरकार ने, अपने शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अनुसूचित नियोजनों में नियोजित कर्मचारियों को लागू निर्वाह-व्यय सूचकांक को समय-समय पर अभिनिश्चित करने के लिए, नियुक्त किया है ।

(घ) निर्वाह-व्यय सूचकांक" से, किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में के, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जा चुकी हैं, कर्मचारियों के सम्बन्ध में, वह सूचकांक अभिप्रेत है, जिसे सक्षम प्राधिकारी ने ऐसे नियोजन में के कर्मचारियों को लागू होने वाला निर्वाह-व्यय सूचकांक, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अभिनिश्चित और घोषित किया है; 

(ङ) नियोजक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो अपनी ओर से या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से एक या अधिक कर्मचारियों को किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं, सीधे या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से, नियोजित करता है, और धारा 26 की उपधारा (3) में के सिवाय, उसके अन्तर्गत निम्नलिखित आते हैं: -  

(i) किसी ऐसे कारखाने में, जहां कोई ऐसा अनुसूचित नियोजन, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं, चलता है, वह व्यक्ति जो, [कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 7 की उपधारा (1) के खण्ड (च)] के अधीन कारखाने के प्रबन्धक के रूप में नामित है; 

(ii) भारत में की किसी सरकार के नियंत्रण के अधीन के किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं वह व्यक्ति या प्राधिकारी, जिसे कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए उस सरकार ने नियुक्त किया है, या जहां कि इस प्रकार कोई व्यक्ति या प्राधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है वहां विभागाध्यक्ष; 

(iii) किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन के किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं, वह व्यक्ति, जिसे कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए उस प्राधिकारी ने नियुक्त किया है, या जहां कि इस प्रकार कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं किया गया है वहां उस स्थानीय प्राधिकारी का मुख्य कार्यपालक आफिसर; 

(iv) किसी अन्य दशा में, जिसमें कि कोई ऐसा अनुसूचित नियोजन चलता है, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं, कोई ऐसा व्यक्ति, जो कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए या मजदूरी का संदाय करने के लिए स्वामी के प्रति उत्तरदायी है; 

(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; 

(छ) अनुसूचित नियोजन" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट नियोजन या वह प्रसंस्करण या काम की शाखा, जो ऐसे नियोजन का भाग हो, अभिप्रेत है; 

(ज) मजदूरी" से धन के रूप में अभिव्यक्त हो सकने वाला वह सभी पारिश्रमिक अभिप्रेत है जो यदि नियोजन-संविदा के अभिव्यक्त या विवक्षित निबन्धनों की पूर्ति हो गई होती तो नियोजित व्यक्ति को उसके नियोजन की बाबत या ऐसे नियोजन में किए गए काम की बाबत संदेय होता [और इसके अन्तर्गत गृहभाटक भत्ता आता है], किन्तु निम्नलिखित इसके अन्तर्गत नहीं आते- 

(i) (क) गृह-वास-सुविधा का, रोशनी, जल और चिकित्सीय परिचर्या के प्रदाय का, अथवा 

(ख) समुचित सरकार के साधारण या विशेष आदेश द्वारा अपवर्जित किसी अन्य सुख-सुविधा या सेवा का मूल्य; 

(ii) कोई ऐसा अभिदाय, जिसका संदाय नियोजक ने किसी पेंशन निधि या भविष्य-निधि में या सामाजिक बीमे की किसी स्कीम के अधीन किया है;

(iii) कोई यात्रा-भत्ता या किसी यात्रा-रियायत का मूल्य; 

(iv) नियोजित व्यक्ति को ऐसे विशेष व्यय चुकाने के लिए संदत्त कोई राशि, जो उसे अपने नियोजन की प्रकृति के कारण उठाने पड़ें; अथवा 

(v) सेवोन्मोचन पर संदेय उपदान । 

(झ) कर्मचारी" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जा चुकी हैं, कोई कुशल या अकुशल, शारीरिक या लिपिकीय काम, भाड़े या इनाम पर करने के लिए नियोजित है, और इसके अन्तर्गत ऐसा बाह्य कर्मकार आता है जिसे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई वस्तुएं या सामग्री उस अन्य व्यक्ति के व्यवसाय या कारबार के प्रयोजन के लिए विक्रयार्थ तैयार करने, साफ करने, धोने, परिवर्तित करने, अलंकृत करने, परिरूपित करने, मरम्मत करने, अनुकूलित करने या अन्यथा प्रसंस्कृत करने के लिए उस दशा में दे दी जाती है जिसमें कि वह प्रसंस्करण या तो उस बाह्य कर्मकार के घर में या किसी ऐसे अन्य परिसर में किया जाता है, जो उस अन्य व्यक्ति के नियंत्रण और प्रबन्ध के अधीन न हो; और इसके अन्तर्गत ऐसा कर्मचारी भी आता है जिसे समुचित सरकार ने कर्मचारी घोषित किया है; किन्तु इसके अन्तर्गत  [संघट के सशस्त्र बल का कोई सदस्य नहीं आता है । 

3. मजदूरी की न्यूनतम दरों का नियत किया जाना- [(1) समुचित सरकार, एत्स्मिन्पश्चात् उपबन्धित रीति से-

 [(क) उस मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत करेगी जो अनुसूची के भाग 1 या भाग 2 में विनिर्दिष्ट किसी नियोजन में और ऐसे नियोजन में, जो दोनों में से किसी भी भाग में धारा 27 के अधीन अधिसूचना द्वारा जोड़ा गया हो, नियोजित कर्मचारियों को संदेय है:

परन्तु समुचित सरकार, अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट किसी नियोजन में नियोजित कर्मचारियों की बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें सम्पूर्ण राज्य के लिए इस खण्ड के अधीन नियत करने के बजाय ऐसी दरें उस राज्य के किसी भाग के लिए या सम्पूर्ण राज्य में या उसके भाग में ऐसे नियोजन के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग या वर्गों के लिए नियत कर सकेगी;] 

(ख) इस प्रकार नियत मजदूरी की न्यूनतम दरों का पुनर्विलोकन पांच वर्ष से अनधिक के ऐसे अन्तरालों पर करेगी जैसे वह ठीक समझे और, यदि आवश्यक हो तो, उन न्यूनतम दरों को पुनरीक्षित करेगी: 

 [परन्तु जहां कि समुचित सरकार ने किसी अनुसूचित नियोजन की बाबत अपने द्वारा नियत की गई मजदूरी की न्यूनतम दरों का पुनर्विलोकन किसी कारण से पांच वर्षों के किसी अन्तराल के भीतर नहीं किया है, वहां इस खण्ड में अन्तर्विष्ट किसी भी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह उसे इस बात से निवारित करती है कि न्यूनतम दरों का पुनर्विलोकन और यदि आवश्यक हो तो पुनरीक्षण पांच वर्ष की उक्त कालावधि के अवसान के पश्चात् करे, और पांच वर्ष की उक्त कालावधि के अवसान से अव्यवहित पूर्व प्रवृत्त न्यूनतम दरें, जब तक कि उनका ऐसे पुनरीक्षण नहीं किया जाता है, प्रवृत्त बनी रहेंगी ।  

(1क) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, समुचित सरकार किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन की बाबत, जिसमें ऐसे नियोजन में लगे हुए कर्मचारी उस सम्पूर्ण राज्य में एक हजार से कम हों, मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत करने से विरत रह सकेगी, किन्तु यदि समुचित सरकार किसी भी समय  ॥। ऐसी जांच के पश्चात् जिसे वह इस निमित्त करे या कराए, इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत यह मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत करने से विरत रही है, कर्मचारियों की संख्या एक हजार या उससे अधिक हो गई है, तो वह ऐसे नियोजन में के कर्मचारियों को संदेय मजदूरी की न्यूनतम दरें  [ऐसे निष्कर्ष के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र] नियत करेगी ।]

(2) समुचित सरकार-

(क) कालानुपाती काम के लिए मजदूरी की न्यूनतम दर (जिसे एत्स्मिन्पश्चात् न्यूनतम कालानुपाती दर" कहा गया है),

(ख) मात्रानुपाती काम के लिए मजदूरी की न्यूनतम दर (जिसे एत्स्मिन्पश्चात् न्यूनतम मात्रानुपाती कालानुपाती दर" कहा गया है),

(ग) ऐसे कर्मचारियों की, जो मात्रानुपाती काम पर नियोजित हैं, कालानुपाती काम के आधार पर मजदूरी की न्यूनतम दरें सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए उन कर्मचारियों की दशा में लागू होने के लिए पारिश्रमिक की न्यूनतम दर (जिसे एत्स्मिन्पश्चात् प्रत्याभूत कालानुपाती दर" कहा गया है),

(घ) उस न्यूनतम दर के स्थान में, जो कर्मचारी द्वारा किए गए अतिकालिक काम की बाबत अन्यथा लागू हो, लागू होने के लिए न्यूनतम दर (चाहे वह कालानुपाती दर हो या मात्रानुपाती दर), (जिसे एत्स्मिन्पश्चात्, अतिकालिक दर" कहा गया है),

नियत कर सकेगी ।

 [(2क) जहां कि किसी अनुसूचित नियोजन में नियोजित कर्मचारियों में से किसी को संदेय मजदूरी की दरों से सम्बद्ध किसी औद्योगिक विवाद की बाबत कोई कार्यवाही, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के अधीन किसी अधिकरण या राष्ट्रीय अधिकरण के समक्ष या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन वैसे ही किसी प्राधिकारी के समक्ष लम्बित है या किसी अधिकरण, राष्ट्रीय अधिकरण या ऐसे प्राधिकारी द्वारा किया गया कोई अधिनिर्णय प्रवर्तन में है, और उस अनुसूचित नियोजन की बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत या पुनरीक्षित करने वाली अधिसूचना, ऐसी कार्यवाही के लम्बित रहने या अधिनिर्णय के प्रवृत्त रहने के दौरान निकाली जाए वहां, इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मजदूरी की वे न्यूनतम दरें, जो इस प्रकार नियत या इस प्रकार पुनरीक्षित की जाएं, उस कालावधि के दौरान जिसमें वह कार्यवाही लम्बित है और उसमें किया गया अधिनिर्णय प्रवर्तन में है, अथवा, यथास्थिति, जहां कि अधिसूचना किसी अधिनिर्णय के प्रवर्तन की कालावधि के दौरान निकाली जाए वहां उस कालावधि के दौरान, उन कर्मचारियों को लागू नहीं होगी, और जहां कि ऐसी कार्यवाही या अधिनिर्णय का सम्बन्ध उस अनुसूचित नियोजन में लगे हुए सभी कर्मचारियों को संदेय मजदूरी की दरों से हो वहां मजदूरी की कोई भी न्यूनतम दरें उस नियोजन की बाबत उक्त कालावधि के दौरान नियत या पुनरीक्षित नहीं की जाएंगी ।] 

(3) इस धारा के अधीन मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत करने या पुनरीक्षित करने में, -

(क) मजदूरी की विभिन्न न्यूनतम दरें- 

(i) विभिन्न अनुसूचित नियोजनों के लिए, 

(ii) एक ही अनुसूचित नियोजन में काम के विभिन्न वर्गों के लिए,

(iii) वयस्थों, कुमारों, बालकों और शिक्षुओं के लिए, 

(iv) विभिन्न परिक्षेत्रों के लिए,

नियत की जा सकेंगी; 

 [(ख) मजदूरी की न्यूनतम दरें निम्नलिखित मजदूरी-कालावधियों में से किसी एक या अधिक के हिसाब से, अर्थात्-

(i) घण्टे के हिसाब से, 

(ii) दिन के हिसाब से, 

(iii) मास के हिसाब से, अथवा 

(iv) ऐसी अन्य दीर्घतर मजदूरी-कालावधि के हिसाब से, जैसी विहित की जाए,

नियत की जा सकेगी और जहां कि ऐसी दर दिन के हिसाब से या मास के हिसाब से नियत की जाए वहां, यथास्थिति, एक मास की या एक दिन की मजदूरी की गणना की रीति उपदर्शित की जा सकेगी:]

परन्तु जहां कि कोई मजदूरी-कालावधियां मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) की धारा 4 के अधीन नियत की जा चुकी हैं, वहां न्यूनतम मजदूरी तदनुसार नियत की जाएगी ।

4. मजदूरी की न्यूनतम दर-(1) अनुसूचित नियोजनों की बाबत धारा 3 के अधीन समुचित सरकार द्वारा नियत या पुनरीक्षित की गई मजदूरी की न्यूनतम दर निम्नलिखित से मिल कर बन सकेगी- 

(i) मजदूरी की मूल दर और ऐसे कर्मकारों को लागू निर्वाह-व्यय सूचकांक में हुए फेरफार के यथासाध्य अनुसार होने के लिए ऐसे अन्तरालों पर और ऐसी रीति से, जिसे समुचित सरकार निदिष्ट करे, समायोजित की जाने वाली दर पर विशेष भत्ता (जिसे एत्स्मिन्पश्चात् निर्वाह-व्यय भत्ता" कहा गया है); अथवा

(ii) निर्वाह-व्यय भत्ते सहित या बिना, मजदूरी की मूल दर और आवश्यक वस्तुओं के रियायती दरों पर प्रदायों की बाबत, जहां कि वे इस प्रकार प्राधिकृत किए गए हों, रियायत का नकद मूल्य; अथवा 

(iii) ऐसी सर्व-समावेशी दर जिसमें मूल दर की, निर्वाह-व्यय भत्ते की और यदि कोई रियायतें दी गई हों तो उनके नकद मूल्य की गुंजाइश रखी गई हो । 

(2) निर्वाह-व्यय भत्ता और आवश्यक वस्तुओं के रियायती दरों पर प्रदायों की बाबत रियायतों का नकद मूल्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसे अन्तरालों पर और ऐसे निदेशों के अनुसार, जैसे समुचित सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं या दिए जाएं, संगणित किए जाएंगे । 

 [5. न्यूनतम मजदूरी नियत करने और पुनरीक्षित करने की प्रक्रिया-(1) किसी अनुसूचित नियोजन की बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन प्रथम बार नियत करने में या इस प्रकार नियत की गई मजदूरी की न्यूनतम दरों को पुनरीक्षित करने में समुचित सरकार या तो- 

(क) यथास्थिति, ऐसे नियत किए जाने की या पुनरीक्षण की बाबत जांच करने और अपने को सलाह देने के लिए इतनी समितियां और उप-समितियां नियुक्त करेगी जितनी वह आवश्यक समझे, अथवा 

(ख) अपनी प्रस्थापनाओं को उन व्यक्तियों की जानकारी के लिए, जिनका उनसे प्रभावित होना सम्भाव्य है, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्रकाशित करेगी और अधिसूचना की तारीख से कम से कम दो मास के पश्चात् की कोई ऐसी तारीख विनिर्दिष्ट करेगी जिसको उन प्रस्थापनाओं पर विचार किया जाएगा । 

(2) समुचित सरकार, यथास्थिति, उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन नियुक्त समिति या समितियों की सलाह पर या उस उपधारा के खण्ड (ख) के अधीन की अधिसूचना में विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व उसे प्राप्त सब अभ्यावेदनों पर विचार करने के पश्चात् हर एक अनुसूचित नियोजन की बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यथास्थिति, नियत या पुनरीक्षित करेगी और जब तक कि ऐसी अधिसूचना अन्यथा उपबन्ध न करे, वह निकाले जाने की तारीख से तीन मास के अवसान पर प्रवृत्त होगी:

परन्तु जहां कि समुचित सरकार मजदूरी की न्यूनतम दरों को उपधारा (1) के खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट ढंग से पुनरीक्षित करने की प्रस्थापना करती है वहां समुचित सरकार सलाहकार बोर्ड से भी परामर्श करेगी ।]  

6. [सलाहकार समितियां तथा उप-समितियां ]-न्यूनतम मजदूरी (संशोधन) अधिनियम, 1957 (1957 का अधिनियम सं० 30) की धारा 5 द्वारा निरसित । 

7. सलाहकार बोर्ड- [धारा 5 के अधीन नियुक्त की गई समितियों और उप-समितियोंट के काम को समन्वित करने और मजदूरी की न्यूनतम दरों को नियत और पुनरीक्षित करने के विषय में समुचित सरकार को साधारणतया सलाह देने के प्रयोजन के लिए समुचित सरकार एक सलाहकार बोर्ड नियुक्त करेगी । 

8. केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड-(1) इस अधिनियम के अधीन मजदूरी की न्यूनतम दरों को नियत और पुनरीक्षित करने के विषयों पर और अन्य विषयों पर केन्द्रीय और राज्य सरकारों को सलाह देने के प्रयोजन के लिए तथा सलाहकार बोर्डों के काम को समन्वित करने के लिए एक केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड केन्द्रीय सरकार नियुक्त करेगी । 

(2) केन्द्रीय सरकार बोर्ड नियोजकों का और अनुसूचित नियोजनों में के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐसे व्यक्तियों से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे और जो संख्या में बराबर होंगे, और अपने सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अनधिक स्वतंत्र व्यक्तियों से मिल कर बनेगा; केन्द्रीय सरकार ऐसे स्वतंत्र व्यक्तियों में से एक को बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करेगी । 

9. समितियों, इत्यादि की संरचना-समितियों, उप-समितियों में से हर एक ॥। और सलाहकार बोर्ड नियोजकों और अनुसूचित नियोजनों के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐसे व्यक्तियों से, जो समुचित सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे और जो संख्या में बराबर होंगे और अपने सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अनधिक स्वतंत्र व्यक्तियों से मिलकर बनेगा; समुचित सरकार ऐसे स्वतंत्र व्यक्तियों में से एक को अध्यक्ष नियुक्त करेगी । 

 [10. गलतियों का शुद्ध किया जाना-(1) समुचित सरकार इस अधिनियम के अधीन मजदूरी की न्यूनतम दरों को नियत या पुनरीक्षित करने वाले आदेश में की लेखन या गणित सम्बन्धी भूलों को, या किसी आकस्मिक भूल या लोप से उसमें हुई गलतियों को, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी भी समय शुद्ध कर सकेगी ।

(2) ऐसी हर अधिसूचना निकाले जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र सलाहकार बोर्ड के समक्ष जानकारी के लिए रख दी जाएगी ।] 

11. वस्तु रूप में मजदूरी-(1) इस अधिनियम के अधीन संदेय न्यूनतम मजदूरी नकद दी जाएगी । 

(2) जहां कि मजदूरी पूर्णतः या भागतः वस्तु रूप में देने की रूढ़ि रही है, वहां समुचित सरकार, इस राय की होने पर कि मामले की परिस्थितियों में यह आवश्यक है, न्यूनतम मजदूरी का पूर्णतः या भागतः वस्तु रूप में दिया जाना, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत कर सकेगी । 

(3) यदि समुचित सरकार की यह राय हो कि आवश्यक वस्तुओं का प्रदाय रियायती दरों पर किए जाने के लिए उपबन्ध किया जाना चाहिए तो समुचित सरकार ऐसे प्रदायों के रियायती दरों पर किए जाने का उपबन्ध शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत कर सकेगी । 

(4) उस वस्तु रूप में मजदूरी का और आवश्यक वस्तुओं के रियायती दरों पर उन प्रदायों की बाबत रियायतों का जो उपधाराओं (2) और (3) के अधीन प्राधिकृत है, नकद मूल्य विहित रीति से प्राक्कलित किया जाएगा ।  

12. मजदूरी की न्यूनतम दरों का संदाय-(1) जहां कि किसी अनुसूचित नियोजन की बाबत धारा 5 के अधीन  ॥। कोई अधिसूचना प्रवृत्त है, वहां नियोजक अपने अधीन के अनुसूचित नियोजन में लगे हुए हर कर्मचारी को, ऐसी कटौतियां की जाने के सिवाय जो प्राधिकृत की जाएं, कटौतियां किए बिना, मजदूरी ऐसी दर पर, जो उस नियोजन में कर्मचारियों के उस वर्ग के लिए ऐसी अधिसूचना द्वारा नियत मजदूरी की न्यूनतम दर से कम न हो, ऐसे समय के भीतर और ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जो विहित की जाएं, संदत्त करेगा । 

(2) इस धारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) के उपबन्धों पर प्रभाव नहीं डालेगी ।

13. प्रसामान्य कार्य-दिवस के लिए घंटे नियत करना- [(1)] किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन के बारे में जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं, समुचित सरकार-

(क) काम के उन घंटों की संख्या, जिनके अन्तर्गत एक या अधिक विनिर्दिष्ट अन्तराल हो सकेंगे, और जो प्रसामान्य कार्य-दिवस गठित करेंगे, नियत कर सकेगी;

(ख) सात दिन की हर कालावधि में एक विश्राम-दिन के लिए, जो सभी कर्मचारियों के लिए या कर्मचारियों के किसी भी विनिर्दिष्ट वर्ग के लिए अनुज्ञात होगा और ऐसे विश्राम-दिनों की बाबत पारिश्रमिक दिए जाने का उपबन्ध कर सकेगी; 

(ग) विश्राम-दिन को काम करने के लिए ऐसी दर से संदाय का उपबन्ध कर सकेगी जो अतिकालिक दर से कम नहीं होगी । 

 [(2) उपधारा (1) के उपबन्ध निम्नलिखित वर्गों के कर्मचारियों के सम्बन्ध में उतने ही विस्तार तक और ऐसी शर्तों के अध्यधीन लागू होंगे जो विहित की जाएं-

(क) अर्जेन्ट काम पर लगे हुए या किसी ऐसे आपात में रखे गए, जिसकी पूर्व कल्पना नहीं हो सकती थी या जिसका निवारण नहीं किया जा सकता था, कर्मचारी; 

(ख) ऐसे कर्मचारी, जो तैयारी करने से सम्बन्धित या पूरक काम की प्रकृति वाले ऐसे काम में लगे हुए हैं जिसे सम्पृक्त नियोजन में साधारणतः काम करने के लिए नियत की गई सीमाओं के अवश्य ही बाहर किया जाना है; 

(ग) ऐसे कर्मचारी जिनका नियोजन आवश्यक रूप से आन्तरायिक है; 

(घ) ऐसे काम में लगे हुए कर्मचारी, जिसे कर्तव्यकाल समाप्त होने के पूर्व ही तकनीकी कारणों से पूरा करलिया जाना है; 

(ङ) ऐसे काम में लगे हुए कर्मचारी, जिसे प्राकृतिक शक्तियों की अनियमित क्रिया पर निर्भर समयों पर किए जाने के सिवाय नहीं किया जा सकता । 

(3) कर्मचारी का नियोजन उपधारा (2) के खण्ड (ग) के प्रयोजनों के लिए उस दशा में आवश्यक रूप से आन्तरायिक होता है जिसमें कि उसका ऐसा होना समुचित सरकार ने इस आधार पर घोषित किया है कि कर्मचारी के कर्तव्य के दैनिक घंटों के, या यदि कर्मचारी के लिए कर्तव्य के कोई दैनिक घंटे उस रूप में नहीं हैं तो कर्तव्य के घंटों के अन्तर्गत प्रसामान्यतः निष्क्रियता की ऐसी कालावधियां आती हैं, जिनके दौरान कर्मचारी कर्तव्यारूढ़ तो हो किन्तु उससे शारीरिक क्रिया या अविरत ध्यान के संप्रदर्शन की अपेक्षा नहीं की जाती ।]

14. अतिकाल-(1) जहां कि ऐसा कर्मचारी, जिसकी मजदूरी की न्यूनतम दर इस अधिनियम के अधीन घंटे, दिन या ऐसी दीर्घतर मजदूरी-कालावधि के हिसाब से, जैसी विहित की जाए, नियत की गई है, किसी भी दिन उतने घंटों से, जितनों से प्रसामान्य कार्य-दिवस गठित होता है, अधिक समय काम करता है, वहां नियोजक उसे काम के हर ऐसे घंटे के लिए या घंटे के भाग के लिए जिसमें उसने इस प्रकार आधिक्य में काम किया हो, इस अधिनियम के अधीन नियत की गई अतिकालिक दर और समुचित सरकार की किसी तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन नियत की गई अतिकालिक दर में से जो भी अधिक हो उस दर पर संदाय करेगा । 

(2) इस अधिनियम में की कोई बात भी किसी ऐसी दशा में, जिसमें [कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 59] के उपबन्ध लागू होते हैं, उन उपबन्धों के प्रवर्तन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी । 

15. ऐसे कर्मकार की मजदूरी जो प्रसामान्य कार्य-दिवस से कम काम करता है-यदि ऐसा कर्मचारी, जिसकी मजदूरी की न्यूनतम दर इस अधिनियम के अधीन दिनों के हिसाब से नियत की गई है, किसी भी दिन जिसको वह नियोजित किया गया था, प्रसामान्य कार्य-दिवस गठित करने वाले घंटों की अपेक्षित संख्या से कम किसी कालावधि के लिए काम करता है तो वह, एत्स्मिन्पश्चात् जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, उस दिन अपने द्वारा किए गए काम की बाबत मजदूरी पाने के लिए ऐसे हकदार होगा मानो उसने पूरे प्रसामान्य कार्य-दिवस काम किया हो :

परन्तु-

(i) किसी ऐसी दशा में, जिसमें काम करने में उसकी असफलता उसके रजामन्द न होने के कारण, न कि उसके लिए काम का उपबन्ध करने के बारे में नियोजक के लोप के कारण, कारित हुई है, तथा 

(ii) अन्य ऐसी दशाओं और परिस्थितियों में, जैसी विहित की जाएं,

वह पूरे प्रसामान्य कार्य-दिवस के लिए मजदूरी पाने का हकदार न होगा ।

16. दो या अधिक वर्गों के काम के लिए मजदूरी-जहां कि कर्मचारी ऐसे दो या अधिक वर्गों का काम करता है, जिसमें से हर एक के लिए मजदूरी की भिन्न न्यूनतम दर लागू हैं, वहां नियोजक, ऐसे कर्मचारी को, ऐसे हर वर्ग के काम में क्रमशः लगे समय के लिए उस न्यूनतम दर से अन्यून दर पर मजदूरी देगा जो ऐसे हर एक वर्ग के काम की बाबत प्रवृत्त है । 

17. मात्रानुपाती काम के लिए न्यूनतम कालानुपाती दर-जहां कि कर्मचारी ऐसे मात्रानुपाती काम पर नियोजित है जिसके लिए न्यूनतम कालानुपाती दर, न कि न्यूनतम मात्रानुपाती दर, इस अधिनियम के अधीन नियत की गई है वहां नियोजक ऐसे कर्मचारी को ऐसी मजदूरी देगा जो न्यूनतम कालानुपाती दर से कम न हो ।

18. रजिस्टरों और अभिलेखों का रखा जाना-(1) हर नियोजक अपने द्वारा नियोजित कर्मचारियों की, उनके द्वारा किए गए काम की, उनको संदत्त मजदूरी की, उनके द्वारा दी गई रसीदों की ऐसी विशिष्टियां और अन्य ऐसी विशिष्टियों वाले ऐसे रजिस्टर और अभिलेख ऐसे प्ररूप में रखेगा जैसा विहित किया जाए । 

(2) हर नियोजक उस कारखाने, कर्मशाला या स्थान में, जहां अनुसूचित नियोजन में के कर्मचारी नियोजित किए जाएं, या बाह्य कर्मकारों की दशा में ऐसे कारखाने, कर्मशाला या स्थान में, जो उन्हें बाह्य-कर्म देने के लिए उपयोग में लाया जाए, ऐसी रीति से, जैसी विहित की जाए, विहित प्ररूप में ऐसी सूचनाएं प्रदर्शित करता रहेगा जिनमें विहित विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी । 

(3) समुचित सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उन कर्मचारियों को जो किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जा चुकी हैं, नियोजित हैं, मजदूरी-पुस्तिकाओं या मजदूरी-पर्चियों के दिए जाने के लिए उपबन्ध कर सकेगी और वह रीति विहित कर सकेगी जिससे नियोजक या उसके अभिकर्ता द्वारा ऐसी मजदूरी-पुस्तिकाओं या मजदूरी-पर्चियों में प्रविष्टियां की जाएंगी और अधिप्रमाणीकृत की जाएंगी । 

19. निरीक्षक-(1) समुचित सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें वह ठीक समझे इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी और उन स्थानीय सीमाओं को परिनिश्चित कर सकेगी, जिनके अन्दर वे अपने कृत्यों का प्रयोग करेंगे । 

(2) इस निमित्त बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि निरीक्षक उन स्थानीय सीमाओं के अन्दर जिनके लिए वह नियुक्त किया गया है- 

(क) ऐसे सहायकों के साथ (यदि कोई हों), जो सरकार की या किसी स्थानीय या अन्य लोक प्राधिकारी की सेवा में के व्यक्ति होंगे, और जिन्हें वह ठीक समझे, किसी ऐसे परिसर या स्थानों में, जहां पर किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जा चुकी हैं, कर्मचारियों को नियोजित किया जाता है या बाह्य कर्मकारों को काम दिया जाता है, किसी रजिस्टर, मजदूरी के अभिलेख या सूचनाओं की, जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के द्वारा या अधीन रखे या प्रदर्शित किए जाने के लिए अपेक्षित हैं, परीक्षा करने के प्रयोजन के लिए सभी युक्तियुक्त समयों पर प्रवेश कर सकेगा और यह अपेक्षा कर सकेगा कि उन्हें निरीक्षण के लिए पेश किया जाए; 

(ख) किसी ऐसे व्यक्ति की परीक्षा कर सकेगा जिसे वह ऐसे किसी परिसर या स्थान में पाए और जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त हेतुक हो कि वह उसमें नियोजित कर्मचारी है या ऐसा कर्मचारी है जिसे उसमें काम दिया जाता है; 

(ग) किसी ऐसे व्यक्ति से जो बाह्य-कर्म देता है, और किन्हीं बाह्य-कर्मकारों से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे ऐसे व्यक्तियों के नामों और पतों के बारे में जिनको, जिनके लिए और जिनसे काम दिया या प्राप्त किया जाता है और उस काम के लिए किए जाने वाले संदायों के बारे में कोई ऐसी जानकारी दे, जिसे देना उसकी शक्ति में हो;

 [(घ) ऐसे रजिस्टर, मजदूरी के अभिलेख या सूचनाओं या उनके प्रभागों को जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन के ऐसे अपराध के बारे में सुसंगत समझे जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि वह किसी नियोजक द्वारा किया गया है, अभिगृहीत कर सकेगा या उनकी प्रतिलिपियां ले सकेगा; तथाट

(ङ) अन्य ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा, जैसी विहित की जाएं । 

(3) हर निरीक्षक भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ के अन्दर लोक सेवक समझा जाएगा । 

 [(4) कोई भी व्यक्ति, जिससे कोई दस्तावेज या वस्तु पेश करने या कोई जानकारी देने की अपेक्षा उपधारा (2) के अधीन किसी निरीक्षक द्वारा की गई हो ऐसा करने के लिए भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 175 और धारा 176 के अर्थ के अन्दर वैध रूप से आबद्ध समझा जाएगा ।] 

20. दावे-(1) समुचित सरकार  [किसी कर्मकार प्रतिकर आयुक्त को या केन्द्रीय सरकार के किसी ऐसे आफिसर को, जो किसी प्रदेश के लिए श्रम आयुक्त के रूप में कृत्यों का प्रयोग करता है या राज्य सरकार के किसी ऐसे आफिसर को, जो श्रम आयुक्त की पंक्ति से नीचे का न हो, या किसीट अन्य ऐसे आफिसर को, जिसे सिविल न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में या साम्बलिक मजिस्ट्रेट के रूप में काम करने का अनुभव प्राप्त है, किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में नियोजित कर्मचारियों को या ऐसे कर्मचारियों को, जिन्हें उस क्षेत्र में संदाय किया जाता है, मजदूरी की न्यूनतम दरों से कम पर किए गए संदाय से उद्भूत होने वाले या विश्राम-दिनों के लिए  [या ऐसे दिनों में किए गए काम के लिए धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन पारिश्रमिक के संदाय की बाबत, या धारा 14 के अधीन अतिकालित दर परट मजदूरी के सभी दावों की उस क्षेत्र के लिए सुनवाई और उनका विनिश्चय करने के लिए प्राधिकारी, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त कर सकेगी ।]

(2) [जहां कि कर्मचारी का उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति का कोई दावा होट, वहां वह कर्मचारी स्वयं, या उसकी ओर से कार्य करने के लिए लिखिए रूप में प्राधिकृत रूप में प्राधिकृत कोई विधि-व्यवसायी या रजिस्ट्रीकृत व्यवसाय संघ का कोई पदधारी, या कोई निरीक्षक, या कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्राधिकारी की अनुज्ञा से कार्य कर रहा है, उपधारा (3) के अधीन के किसी निदेश के लिए आवेदन ऐसे प्राधिकारी से कर सकेगा: 

परन्तु ऐसा हर आवेदन उस तारीख से, जिसकी न्यूनतम मजदूरी 1[या अन्य रकम] संदेय हुई थी, छह मास के भीतर उपस्थापित किया जाएगा:

परन्तु यह और भी कि यदि आवेदक उस प्राधिकारी का समाधान कर देता है कि ऐसी कालावधि के भीतर आवेदन न करने के लिए उसके पास पर्याप्त हेतुक था तो आवेदन छह मास की उक्त कालावधि के पश्चात् भी ग्रहण किया जा सकेगा ।  

 [(3) जब कि उपधारा (2) के अधीन कोई आवेदन ग्रहण कर लिया गया है, तब प्राधिकारी आवेदक की और नियोजक की सुनवाई करेगा, या उन्हें सुनवाई का अवसर देगा और यदि वह कोई अतिरिक्त जांच आवश्यक समझे तो उसे करने के पश्चात्, किसी ऐसी अन्य शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिसका नियोजक इस अधिनियम के अधीन दायी हो, निदेश दे सकेगा कि- 

(i) मजदूरी की न्यूनतम दरों से कम दर से किए गए संदाय से उद्भूत होने वाले दावे की दशा में, कर्मचारी को उतनी रकम का संदाय किया जाए जितनी से उसको संदेय न्यूनतम मजदूरी वास्तव में संदत्त रकम से अधिक हो और साथ ही ऐसे आधिक्य की रकम के दस गुने से अनधिक ऐसे प्रतिकर का संदाय भी किया जाए जितना वह प्राधिकारी ठीक समझे;

(ii) किसी अन्य दशा में, कर्मचारी को शोध्य रकम का संदाय, दस रुपए से अनधिक उतने प्रतिकर के संदाय सहित, जितना प्राधिकारी ठीक समझे, किया जाए,

और प्राधिकारी उन दशाओं में, जिनमें नियोजक द्वारा आधिक्य या शोध्य रकम का संदाय आवेदन के निपटाए जाने के पूर्व ही कर्मचारी को कर दिया जाता है, ऐसे प्रतिकर के संदाय का निदेश दे सकेगा ।] 

(4) यदि इस धारा के अधीन किसी आवेदन की सुनवाई करने वाले प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि वह आवेदन या तो विद्वेषपूर्ण या तंग करने वाला है, तो वह निदेश दे सकेगा कि आवेदन उपस्थापित करने वाला व्यक्ति नियोजक को पचास रुपए से अनधिक रकम की शास्ति दे । 

(5) इस धारा के अधीन दी जाने के लिए निर्दिष्ट कोई रकम, -

(क) यदि प्राधिकारी मजिस्ट्रेट है तो उस प्राधिकारी द्वारा ऐसे वसूल की जा सकेगी मानो वह मजिस्ट्रेट के रूप में उसके द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो; अथवा

(ख) यदि प्राधिकारी मजिस्ट्रेट नहीं है तो, किसी ऐसे मजिस्ट्रेट द्वारा, जिससे प्राधिकारी इस निमित्त आवेदन करे, ऐसे वसूल की जा सकेगी मानो वह उस मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो । 

(6) प्राधिकारी का इस धारा के अधीन हर निदेश अन्तिम होगा । 

(7) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त हर प्राधिकारी को साक्ष्य लेने और साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेजें पेश करने को विवश करने के प्रयोजन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन की सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी और ऐसा हर प्राधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) की धारा 195 के और अध्याय 35 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा । 

21. कितने ही कर्मचारियों के बारे में एक ही आवेदन-(1) ऐसे अनुसूचित नियोजन में, जिसकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जा चुकी हैं नियोजित कर्मचारियों में से कितनों ही की ओर से या उनकी बाबत धारा 20 के अधीन  [एक ही आवेदन ऐसे नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं,ट उपस्थापित किया जा सकेगा और ऐसी दशा में वह अधिकतम प्रतिकर, जो धारा 20 की उपधारा (3) के अधीन अधिनिर्णीत किया जा सकेगा, यथास्थिति, ऐसे आधिक्य की संकलित रकम के दस गुने से  [या प्रति व्यक्ति दस रुपएट से अधिक नहीं होगा । 

(2) प्राधिकारी ऐसे अनुसूचित नियोजनों में के, जिनकी बाबत मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जा चुकी हैं, कर्मचारियों की बाबत धारा 20 के अधीन उपस्थापित किए गए अलग-अलग लम्बित कितने भी आवेदनों पर कार्यवाही, उन्हें इस धारा की उपधारा (1) के अधीन उपस्थापित किया गया एक ही आवेदन मानकर कर सकेगा और उस उपधारा के उपबन्ध तद्नुसार लागू होंगे । 

 [22. कतिपय अपराधों के लिए शास्तियां-जो कोई नियोजक- 

(क) किसी कर्मचारी को उसके काम के वर्ग के लिए नियत की गई मजदूरी की न्यूनतम दरों से कम, या इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उसे शोध्य रकम से कम देगा, अथवा 

(ख) धारा 13 के अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा,

वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगा, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा:

परन्तु न्यायालय, धारा 20 के अधीन की गई किन्हीं कार्यवाहियों में अभियुक्त के विरुद्ध पहले से ही अधिनिर्णीत किसी प्रतिकर की रकम को इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए कोई जुर्माना अधिरोपित करने में ध्यान में रखेगा ।

22. अन्य अपराधों के दण्ड के लिए साधारण उपबन्ध-जो कोई नियोजक इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किसी आदेश के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, वह यदि ऐसे उल्लंघन के लिए उस अधिनियम द्वारा कोई भी अन्य शास्ति उपबन्धित नहीं है तो, जुर्माने से जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

22. अपराधों का संज्ञान-(1) कोई भी न्यायालय किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध किसी परिवाद का संज्ञान- 

(क) धारा 22 के खण्ड (क) के अधीन किसी अपराध के लिए तब के सिवाय नहीं करेगा, जब कि ऐसा अपराध गठित करने वाले तथ्यों की बाबत आवेदन धारा 20 के अधीन उपस्थापित किया गया हो और उसे पूर्णतः या भागतः मंजूर कर लिया गया हो, तथा समुचित सरकार ने या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी आफिसर ने परिवाद किए जाने की मंजूरी दे दी हो;

(ख) धारा 22 के खण्ड (क) के अधीन या धारा 22क के अधीन के किसी अपराध के लिए, किसी निरीक्षक द्वारा या उसकी मंजूरी से किए गए परिवाद पर करने के सिवाय न करेगा ।

(2) कोई भी न्यायालय- 

(क) धारा 22 के खण्ड (क) या खंड (ख) के अधीन के किसी अपराध का संज्ञान नहीं करेगा जब तक कि उसके लिए परिवाद इस धारा के अधीन मंजूरी अनुदत्त किए जाने से एक मास के भीतर न किया गया हो;

(ख) धारा 22क के अधीन के किसी अपराध का संज्ञान नहीं करेगा जब तक कि उसके लिए परिवाद उस तारीख से, जिसको अपराध का किया जाना अभिकथित है, छह मास के भीतर न किया गया हो । 

22. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी है तो हर व्यक्ति, जो अपराध किए जाने के लिए कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उस कम्पनी के प्रति उत्तरदायी था और वह कम्पनी भी उस अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के दायित्व के अधीन होंगे:

परन्तु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड के दायित्व के अधीन न करेगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या ऐसे अपराध का किया जाना निवारित करने के लिए उसने सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।  

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य आफिसर की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी ओर से हुई किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य आफिसर भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई की जाने और दण्डित किए जाने के दायित्व के अधीन होगा । 

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम आता है, तथा

(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है । 

22. कर्मचारियों को शोध्य असंवितरित रकमों का संदाय-वे सभी रकमें, जो कर्मचारी की न्यूनतम मजदूरी की रकम के रूप में उस कर्मचारी को किसी नियोजक द्वारा इस अधिनियम के अधीन संदेय है, या उस कर्मचारी को इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किए गए, किसी आदेश के अधीन अन्यथा शोध्य हैं, उस दशा में जिसमें ऐसी रकमें, उनके संदाय से पूर्व ही उस कर्मचारी की मृत्यु हो जाने के कारण या उसका पता ज्ञात न होने के कारण उसे दी नहीं जा सकती थीं या दी नहीं जा सकती हैं, विहित प्राधिकारी के पास निक्षिप्त कर दी जाएंगी, जो इस प्रकार से निक्षिप्त किए गए धन के सम्बन्ध में ऐसी रीति से कार्यवाही करेगा जैसी विहित की जाए ।  

22. सरकार के पास की नियोजक की आस्तियों का कुर्की से परित्राण-कोई भी ऐसी रकम, जो समुचित सरकार के साथ हुई किसी संविदा का सम्यक् पालन सुनिश्चित कराने के लिए, उस सरकार के पास नियोजक द्वारा निक्षिप्त की गई है और कोई भी अन्य रकम, जो ऐसी संविदा की बाबत उस सरकार के ऐसे नियोजक को शोध्य है, किसी ऐसे ऋण या दायित्व से, जो पूर्वोक्त संविदा के संसंग में नियोजित किसी कर्मचारी के प्रति उस नियोजक द्वारा उपगत किया गया था, भिन्न किसी ऐसे ऋण या दायित्व की बाबत जो नियोजक द्वारा उपगत किया गया था, किसी न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश के अधीन कुर्क किए जाने के दायित्वाधीन न होगी ।

22. मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 का अनुसूचित नियोजनों को लागू होना-(1) मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, समुचित सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि उपधारा (2) उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, उक्त अधिनियम के सभी उपबंध या उनमें से कोई भी ऐसे अनुसूचित नियोजनों में के, जैसे अधिसूचना में निर्दिष्ट किए जाएं, कर्मचारियों को संदेय मजदूरी को, ऐसे उपान्तरों सहित, यदि कोई हों, लागू होंगे जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।  

(2) जहां कि उक्त अधिनियम के सभी उपबंध या उनमें से कोई भी, किसी अनुसूचित नियोजन के कर्मचारियों को संदेय मजदूरी को उपधारा (1) के अधीन लागू किए गए हों वहां, इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किए गए निरीक्षक के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार लागू किए गए उपबन्धों का प्रवर्तन अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर कराने के प्रयोजनार्थ निरीक्षक है ।]

23. कतिपय मामलों में दायित्व से नियोजक को छूट-जहां कि नियोजक पर इस अधिनियम के विरुद्ध के किसी अपराध का आरोप लगाया गया है, वहां उसे, अपने द्वारा सम्यक् रूप से किए गए परिवाद पर यह हक होगा कि वह किसी अन्य व्यक्ति को, जिस पर वास्ताविक अपराधी होने का आरोप लगाता है, उस आरोप की सुनवाई के लिए नियत किए गए समय पर न्यायालय के समक्ष बुलवाए, और यदि नियोजक अपराध का किया जाना साबित हो चुकने के पश्चात्, न्यायालय को समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि-

(क) उसने इस अधिनियम का निष्पादन कराने के लिए सम्यक् तत्परता बरती है, तथा 

(ख) उक्त अन्य व्यक्ति ने प्रश्नगत अपराध उसके ज्ञान, सम्मति या मौनानुकूलता के बिना किया था, तो वह अन्य व्यक्ति उस अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाएगा और वैसे ही दण्डनीय होगा, मानो वह नियोजक हो, और उन्मोचित कर दिया जाएगा:

                परन्तु यदि नियोजक यथापूर्वोक्त साबित करने की ईप्सा करता है तो उसकी शपथ पर परीक्षा की जा सकेगी और नियोजक के या उसके साक्षी के, यदि कोई हो, साक्ष्य की उस व्यक्ति द्वारा या की ओर से, जिस पर नियोजक वास्तविक अपराधी होने का आरोप लगाता है, और अभियोजक द्वारा प्रतिपरीक्षा की जा सकेगी ।

                24. वादों का वर्जन-कोई भी न्यायालय मजदूरी की वसूली के लिए किसी वाद को विचारणार्थ वहां तक ग्रहण नहीं करेगा जहां तक कि इस प्रकार दावाकृत राशि-

(क) धारा 20 के अधीन ऐसे आवेदन का, जो वादी द्वारा या उसकी ओर से उपस्थापित किया गया है, विषय है; अथवा 

(ख) उस धारा के अधीन वादी के पक्ष में दिए गए किसी निदेश का विषय रही है, अथवा 

(ग) की बाबत यह न्यायनिर्णय उस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में हो चुका है, कि वह वादी को शोध्य नहीं है, अथवा

(घ) उस धारा के अधीन आवेदन द्वारा वसूल की जा सकती थी । 

25. संविदा द्वारा त्याग-इस अधिनियम के प्रारम्भ के चाहे पूर्व चाहे पश्चात् की गई कोई संविदा या करार जिसके द्वारा कोई कर्मचारी मजदूरी की न्यूनतम दर के अपने अधिकार का या इस अधिनियम के अधीन अपने को प्रोद्भूत होने वाले किसी विशेषाधिकार या रियायत का त्याग कर देता है या उसे घटा लेता है, वहां तक बातिल और शून्य होगा जहां तक कि वह इस अधिनियम के अधीन नियत मजदूरी की न्यूनतम दर घटाने के लिए तात्पर्यित है । 

26. छूट और अपवाद-(1) समुचित सरकार, ऐसी शर्तों के अध्यधीन, यदि कोई हों, जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के उपबन्ध निःशक्त हो गए कर्मचारियों को संदेय मजदूरी के संबंध में लागू न होंगे । 

(2) समुचित सरकार, यदि वह विशेष कारणों से ऐसा करना ठीक समझे, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि [उन शर्तों के अध्यधीन तथा] उतने समय के लिए, जिन्हें वह विनिर्दिष्ट करे इस अधिनियम के उपबन्ध या उनमें से कोई किसी अनुसूचित नियोजन में नियोजित सभी या किसी वर्ग के कर्मचारियों को या किसी ऐसे परिक्षेत्र को, जहां कोई अनुसूचित नियोजन चलता है, लागू न होंगे । 

 [(2क) समुचित सरकार, यदि उसकी यह राय हो कि साधारणतः किसी अनुसूचित नियोजन में के या किसी स्थानीय क्षेत्र के किसी अनुसूचित नियोजन में के किसी वर्ग के कर्मचारियों को 1[या किसी अनुसूचित नियोजन में के किसी स्थापन को या किसी स्थापन के किसी भाग को] लागू सेवा के निबन्धनों और शर्तों की दृष्टि से उस वर्ग के ऐसे कर्मचारियों के 1[या ऐसे स्थापन या स्थापन के भाग में के कर्मचारियों के बारे में] जो ऐसी अधिकतम मात्रा से जो इस संबंध में विहित की जाए अधिक मजदूरी पा रहे हैं, न्यूनतम मजदूरी नियत करना आवश्यक नहीं है, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों के अध्यधीन, यदि कोई हों, जिन्हें वह सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के उपबन्ध या उनमें से कोई ऐसे कर्मचारियों के संबंध में लागू नहीं होंगे ।]  

(3) इस अधिनियम में की कोई भी बात उस मजदूरी को लागू नहीं होगी जो नियोजक द्वारा अपने कुटुम्ब के किसी ऐसे सदस्य को संदेय हो जो उसके साथ रह रहा है और उस पर आश्रित है ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा में नियोजक के कुटुम्ब के सदस्य के अन्तर्गत नियोजक का पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, माता-पिता या भाई-बहन आते हैं, यह समझा जाएगा । 

27. अनुसूची में समुचित सरकार की जोड़ने की शक्ति-समुचित सरकार ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम तीन मास की सूचना, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, देने के पश्चात् अनुसूची में के दोनों भागों में से किसी में भी किसी ऐसे नियोजन को, जिसकी बाबत उसकी राय हो कि मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जानी चाहिएं, वैसी ही अधिसूचना द्वारा जोड़ सकेगी, और तदुपरि यह समझा जाएगा कि वह अनुसूची उस राज्य में तदनुसार संशोधित रूप में लागू है । 

28. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार को उस राज्य में इस अधिनियम का निष्पादन करने के संबंध में निदेश दे सकेगी ।

29. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए, केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, कारबार के संचालन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया, मतदान की पद्धति, सदस्यता में हुई आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति और कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ति को विहित करने वाले नियम, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

30. समुचित सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) समुचित सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी । 

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम- 

(क) समितियों, उप-समितियों, ॥। और सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, कारबार के संचालन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया, मतदान की पद्धति, सदस्यता में हुई आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति और कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ति विहित कर सकेंगे; 

(ख) समितियों, उप-समितियों, 3॥। और सलाहकार बोर्ड के समक्ष साक्षियों को समन करने की और जांच की विषय-वस्तु से सुसंगत दस्तावेजों को पेश कराने की पद्धति विहित कर सकेंगे; 

(ग) वस्तु रूप में मजदूरी के और आवश्यक वस्तुओं के रियायती दरों पर प्रदायों की बाबत रियायतों के नकद मूल्य की संगणना का ढंग विहित कर सकेंगे; 

(घ) मजदूरी दिए जाने के समय और शर्तें और उसमें से अनुज्ञेय कटौतियां विहित कर सकेंगे; 

(ङ) इस अधिनियम के अधीन नियत की गई मजदूरी के न्यूनतम दरों की यथायोग्य प्रचार के लिए उपबन्ध कर सकेंगे; 

(च) सात दिनों की हर कालावधि में एक विश्राम-दिन के लिए और ऐसे दिन की बाबत पारिश्रमिक के संदाय के लिए उपबन्ध कर सकेंगे;  

(छ) काम के घंटों की वह संख्या, जो प्रसामान्य कार्य-दिवस को गठित करेगी, विहित कर सकेंगे; 

(ज) वे दशाएं और परिस्थितियां विहित कर सकेंगे जिनमें प्रसामान्य कार्य-दिवस गठित करने वाले घंटों की अपेक्षित संख्या से कम कालावधि के लिए नियोजित कर्मचारी पूरे प्रसामान्य कार्य-दिवस के लिए मजदूरी पाने का हकदार नहीं होगा; 

(झ) रखे जाने वाले रजिस्टरों और अभिलेखों के प्ररूप और ऐसे रजिस्टरों और अभिलेखों में प्रविष्ट की जाने वाली विशिष्टियां विहित कर सकेंगे; 

(ञ) मजदूरी-पुस्तिकाओं और मजदूरी-पर्चियों के दिए जाने के लिए उपबन्ध कर सकेंगे और मजदूरी-पुस्तिकाओं और मजदूरी-पर्चियों में प्रविष्टियां करने और अधिप्रमाणीकृत करने की रीति विहित कर सकेंगे; 

(ट) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षकों की शक्तियां विहित कर सकेंगे; 

(ठ) धारा 20 के अधीन की कार्यवाहियों में अनुज्ञात किए जा सकने वाले खर्चों का मापमान विनियमित कर सकेंगे; 

(ड) धारा 20 के अधीन की कार्यवाहियों की बाबत न्यायालय-फीसों की रकम विहित कर सकेंगे; तथा

(ढ) किसी अन्य ऐसे विषय के लिए उपबन्ध कर सकेंगे जो विहित किया जाना है या किया जाए । 

 [30. केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना- [(1)] इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया हर नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के हर एक सदन के समक्ष उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो, या अव्यवहित पश्चात्वर्ती सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं, या दोनों सदन समहत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह नियम ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावशील होगा या उसका कोई भी प्रभाव न होगा, किन्तु ऐसे कि ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा ।

 [(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]

 [31. मजदूरी की कतिपय न्यूनतम दरों के नियत किए जाने को विधिमान्य बनाना-जहां कि-

(क) 1952 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारम्भ होने वाली और मिनिमम वेजेज (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 1954 (1954 का 26) के प्रारम्भ की तारीख को समाप्त होने वाली, अथवा

(ख) 1954 के दिसम्बर के 31वें दिन को प्रारम्भ होने वाली और मिनिमम वेजेज (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 1957(1957 का 30) के प्रारम्भ की तारीख को समाप्त होने वाली, अथवा 

(ग) 1959 के दिसम्बर के 31वें दिन को प्रारम्भ होने वाली और मिनिमम वेजेज (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 1961(1961 का 31) के प्रारम्भ की तारीख को समाप्त होने वाली,

कालावधि के दौरान मजदूरी की न्यूनतम दरें अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी नियोजन में नियोजित कर्मचारियों को संदेय के रूप में समुचित सरकार द्वारा इस विश्वास पर या इस तात्पर्यित विश्वास पर नियत की गई हैं कि ऐसी दरें धारा 3 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन, जैसी वह, यथास्थिति, मिनिमम वेजेज (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 1954 (1954 का 26) या मिनिमम वेजेज (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 1957 (1957 का 30) या मिनिमम वेजेज (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 1961 (1961 का 31) के प्रारम्भ से अव्यवहित पूर्व प्रवृत्त थी या नियत की जा रही हैं वहां ऐसी दरें विधि के अनुसार नियत की गई समझी जाएंगी और किसी भी न्यायालय में केवल इसी आधार पर प्रश्नगत न की जाएंगी कि उस खण्ड में इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट सुसंगत तारीख का उस समय अवसान हो चुका था जब वे दरें नियत की गई थीं : 

परन्तु इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी भी बात का ऐसा विस्तार न होगा और न उसका यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसका ऐसा विस्तार है कि वह किसी भी व्यक्ति पर इस धारा में विनिर्दिष्ट किसी कालावधि के दौरान अपने कर्मचारियों में से किसी को मजदूरी के रूप में ऐसी रकम के, जो इस धारा में विनिर्दिष्ट मजदूरी की न्यूनतम दरों से कम हो, देने के कारण या धारा 13 के अधीन निकाले गए किसी आदेश या नियम के पूर्वोक्त कालावधि के दौरान अनुपालन के कारण किसी भी प्रकार के किसी दण्ड या शास्ति के दायित्वाधीन करती है ।]

 

अनुसूची

[धारा 2() और धारा 27 देखिए]

भाग 1

1. ऊनी कालीन बनाने वाले या दुशाला बुनने के किसी स्थापन में नियोजन । 

2. किसी चावल मिल, आटा मिल या दाल मिल में नियोजन । 

3. किसी तम्बाकू (जिसके अन्तर्गत बीड़ी बनाना आता है) विनिर्माणशाला में नियोजन ।

                4. किसी बागान अर्थात् ऐसी भू-सम्पदा में, जो सिंकोना, रबड़, चाय या काफी उगाने के प्रयोजन के लिए रखी जाती है, नियोजन ।

5. किसी तेल मिल में नियोजन।

6. किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन नियोजन ।

 [7. सड़कों के सन्निर्माण या उन्हें बनाए रखने में या निर्माण-क्रियाओं में नियोजन ।] 

8. पत्थर तोड़ने या पत्थर चूरने में नियोजन । 

9. किसी लाख-विनिर्माणशाला में नियोजन ।

10. किन्हीं अभ्रक-कर्मशाला में नियोजन । 

11. लोक मोटर परिवहन में नियोजन ।

12. चर्म-शोधनशालाओं में और चर्म-विनिर्माणशाला में नियोजन । 

 [जिप्सम खानों में नियोजन ।

बैराइट्रस खानों में नियोजन ।

बोक्साइट खानों में नियोजन ।]

 [मैंगनीज खानों में नियोजन ।]

 [भवनों को बनाए रखने में नियोजन तथा धावन-पथों के सन्निर्माण या उन्हें बनाए रखने में नियोजन ।]

 [चीनी मिट्टी की खानों में नियोजन ।]

कैनाईट खानों में नियोजन ।

 [तांबा खानों में नियोजन ।]

 [खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) के अन्तर्गत आने वाली मृत्तिका खानों में नियोजन ।] 

 [खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) के अन्तर्गत आने वाली मैंगनेसाईट खानों में नियोजन ।] 

 [श्वेत मिट्टी खानों में नियोजन ।]

 [पत्थर खानों में नियोजन ।]

 [स्टिएटाइट खानों में नियोजन (जिसके अंतर्गत सेलखड़ी और टेल्क का उत्पादन करने वाली खानें भी हैं) ।]

 

 [आकरेव खानों में नियोजन ।]

 [एस्बेस्टास खानों में नियोजन ।]

 [अग्नि सह मिट्टी खानों में नियोजन ।]

 [क्रोमाइट की खानों में नियोजन ।]

 [कार्टीजाइट खानों में नियोजन ।]

क्वार्ट्रज खानों में नियोजन ।

 सिलिका खानों में नियोजन ।]

 [ग्रेफाइट खानों में नियोजन ।]

 [फेल्सपर खानों में नियोजन ।]

 [लैटेराइट खानों में नियोजन ।]

 [डोलोमाइट खानों में नियोजन ।]

 [रेडोक्साइड खानों में नियोजन ।]

 [वोलफ्राम खानों में नियोजन ।]

 [लोह अयस्क खानों में नियोजन ।]

 [ग्रेनाइट खानों में नियोजन ।]

भाग 2

                1. कृषि में, अर्थात् किसी भी रूप में कृषिकर्म में नियोजन, जिसके अंतर्गत धरती को जोतना और बोना, दुग्ध उद्योग, किसी कृषि-संबंधी या उद्यान-कृषि संबंधी वस्तु का उत्पादन, उसकी खेती, उसे उगाना और काटना, जीवधन पालन, मधु-मक्खी पालन या कुक्कुट पालन और किसी कृषक द्वारा या किसी कृषि क्षेत्र पर या कृषिकर्म की आनुषंगिक रूपी या उनके साथ-साथ की गई क्रियाएं (जिनके अन्तर्गत वन संबंधी या काष्ठीकरण संबंधी क्रियाएं और कृषि उपज को मण्डी के लिए तैयार करने और भंडार में या मंडी को या मंडी तक परिवहनार्थ वाहन का परिदान करना आता है) आती है । 

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