Thursday, 11, Jun, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम, 1990 ( Prasar Bharati (Broadcasting Corporation Of India) Act, 1990 )


 

प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम, 1990

(1990 का अधिनियम संख्यांक 25)

[12 सितम्बर, 1990]

भारतीय प्रसारण निगम की, जिसका नाम प्रसार भारती होगा,

स्थापना का उपबंध करने, उसके गठन, कृत्य तथा शक्तियां

परिनिश्चित करने और उससे संबद्ध या उसके

आनुषंगिक विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के इकतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम, 1990 है  

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है  

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो,-

() आकाशवाणी" से अभिप्रेत है ऐसे कार्यालय, केन्द्र और अन्य स्थापन, चाहे वे किसी भी नाम से ज्ञात हों, जो, नियत दिन के ठीक पूर्व, संघ के सूचना और प्रसारण मंत्रालय, के आकाशवाणी के महानिदेशक के भाग थे या उसके अधीन थे  

() नियत दिन" से धारा 3 के अधीन नियत तारीख अभिप्रेत है ;  

() प्रसारण" से अभिप्रेत है अन्तरिक्ष से या केबलों से होकर वैद्युत-चुंबकीय तरंगों के पारेषण द्वारा सभी प्रकार के चिह्नों, संकेत, लेखन, चित्र, प्रतिबिंब और ध्वनि जैसे किसी भी रूप में संचार का प्रसार, जिनका प्रयोजन साधारण जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रिले केन्द्र के माध्यम से ग्रहण किया जाना है और उसके सभी व्याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों का अर्थ तदनुसार लगाया जाएगा

() बोर्ड" से प्रसार भारती बोर्ड अभिप्रेत है

() प्रसारण परिषद्" से धारा 14 के अधीन स्थापित परिषद् अभिप्रेत है

() अध्यक्ष" से धारा 4 के अधीन नियुक्त निगम का अध्यक्ष अभिप्रेत है

() निगम" से धारा 3 के अधीन स्थापित प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अभिप्रेत है ;

() दूरदर्शन" से अभिप्रेत है ऐसे कार्यालय, दृश्य केन्द्र और अन्य स्थापन, चाहे वे किसी भी नाम से ज्ञात हों, जो नियत दिन के ठीक पूर्व, संघ के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दूरदर्शन महानिदेशालय के भाग थे या उसके अधीन थे ;

() निर्वाचित बोर्ड सदस्य" से धारा 3 के अधीन निर्वाचित बोर्ड सदस्य अभिप्रेत हैं ;

() कार्यपालक बोर्ड सदस्य" से धारा 4 के अधीन नियुक्त कार्यपालक बोर्ड सदस्य अभिप्रेत हैं ;

() दृश्य केन्द्र" से स्टूडियो या ट्रांसिमीटरों या दोनों के सहित कोई दृश्य प्रसारण केन्द्र अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत रिले केन्द्र भी है,

() बोर्ड सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है ;

() बोर्ड सदस्य (वित्त)" से धारा 4 के अधीन नियुक्त बोर्ड सदस्य (वित्त) अभिप्रेत है ;

() बोर्ड सदस्य (कार्मिक)" से धारा 4 के अधीन नियुक्त बोर्ड सदस्य (कार्मिक) अभिप्रेत है ;

() नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य" से संघ के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा धारा 3 के अधीन नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य अभिप्रेत है ;

() अव्यपगमनीय निधि" से कतिपय स्कीमों पर व्यय की पूर्ति के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन की वाणिज्यिक आमदनी से सृजित निधि अभिप्रेत है ;

() अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;

() अंशकालिक बोर्ड सदस्य" से बोर्ड का धारा 4 के अधीन नियुक्त अंशकालिक बोर्ड सदस्य अभिप्रेत है ; किन्तु इसके अन्तर्गत कोई पदेन बोर्ड सदस्य, नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य या निर्वाचित बोर्ड सदस्य नही हैं

() विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

() भर्ती बोर्ड" से धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित बोर्ड अभिप्रेत है

() विनियम" से निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं

() केन्द्र" से स्टूडियो या ट्रांसमीटरों या दोनों के सहित कोई प्रसारण केन्द्र अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत रिले केन्द्र भी हैं

() पूर्णकालिक बोर्ड सदस्य" से कार्यपालक बोर्ड सदस्य, बोर्ड सदस्य (वित्त) या बोर्ड सदस्य (कार्मिक) अभिप्रेत है

() वर्ष" से वित्तीय वर्ष अभिप्रेत है  

अध्याय 2

प्रसार भारती

3. निगम की स्थापना और संरचना-(1) ऐसी तारीख से जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रसार भारती के नाम से ज्ञात एक निगम की स्थापना की जाएगी

(2) निगम पूर्वोक्त नाम से एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा  

(3) निगम का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा और निगम भारत में और, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, भारत के बाहर अन्य स्थानों पर कार्यालय, दृश्य केन्द्र या केन्द्र स्थापित कर सकेगा  

(4) निगम के कार्यकलापों का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबन्ध प्रसार भारती बोर्ड में निहित होगा जो सभी ऐसी शक्तियों का प्रयोग और सभी ऐसे कार्य और बातें कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन निगम द्वारा की जा सकती हैं

(5) बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-

() एक अध्यक्ष ;

() एक कार्यपालक बोर्ड सदस्य ;

() एक बोर्ड सदस्य (वित्त) ;

() एक बोर्ड सदस्य (कार्मिक) ;  

() छह अंशकालिक बोर्ड सदस्य ;

() महानिदेशक (आकाशवाणी), पदेन ;

() महानिदेशक (दूरदर्शन), पदेन ;

() संघ के सूचना और प्रसारण मंत्रालय का एक प्रतिनिधि जिसका नामनिर्देशन उस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा ; और

() निगम के कर्मचारियों के दो प्रतिनिधि जिनमें से एक इंजीनियरी कर्मचारिवृंद द्वारा अपने में से और एक अन्य कर्मचारियों द्वारा अपने में से निर्वाचित किया जाएगा  

(6) निगम ऐसी समितियां नियुक्त कर सकेगा जो उसके कृत्यों, शक्तियों और कर्तव्यों के दक्ष पालन, प्रयोग और निर्वहन के लिए आवश्यक हों :

परंतु प्रत्येक समिति के सभी या अधिकांश सदस्य, बोर्ड सदस्य होंगे और किसी समिति के ऐसे सदस्य को, जो बोर्ड सदस्य नहीं हैं, केवल समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु मतदान का अधिकार नहीं होगा  

(7) निगम, ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो विनियमों द्वारा उपबंधित किए जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को जिसकी सहायता या सलाह की उसे इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों का अनुपालन करने में आवश्यकता हो अपने साथ सहयुक्त कर सकेगा और इस प्रकार सहयुक्त व्यक्ति को उन प्रयोजनों से सुसंगत, जिनके लिए वह सहयुक्त किया गया है, बोर्ड की चर्चा में भाग लेने का अधिकार होगा किंतु मतदान का अधिकार नहीं होगा

(8) बोर्ड का या उपधारा (6) के अधीन उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति का कोई कार्य का कार्यवाही केवल इस कारण से अविधिमान्य नहीं होगी कि-

() बोर्ड या ऐसी समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ; या 

() बोर्ड सदस्य या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है ; या  

() बोर्ड या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नही पड़ता है  

4. अध्यक्ष और अन्य बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति-(1) अध्यक्ष की और पदेन बोर्ड सदस्यों, नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्यों और निर्वाचित बोर्ड सदस्यों के सिवाय अन्य बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाएगी इस समिति में निम्नलिखित होंगे

() राज्य सभा का सभापति, जो समिति का अध्यक्ष होगा

() प्रेस परिषद् अधिनियम, 1978 (1978 का 37) की धारा 4 के अधीन स्थापित भारतीय प्रेस परिषद् का अध्यक्ष; और 

() भारत के राष्ट्रपति का एक नामनिर्देशिती   

(2) किसी बोर्ड सदस्य की नियुक्ति केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि उपधारा (1) के अधीन नियुक्त समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है  

(3) अध्यक्ष और अंशकालिक बोर्ड सदस्य सार्वजनिक जीवन में विख्यात व्यक्ति होंगे, कार्यपालक बोर्ड सदस्य ऐसा व्यक्ति होगा जिसे प्रशासन, प्रबंध, प्रसारण, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, कला, संगीत, नाट्यशास्त्र या पत्रकारिता जैसे विषयों के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है ; बोर्ड सदस्य (वित्त) ऐसा व्यक्ति होगा जिसे वित्तीय विषयों के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है और बोर्ड सदस्य (कार्मिक) ऐसा व्यक्ति होगा जिसे कार्मिक प्रबंध और प्रशासन के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है  

(4) उपधारा (1) के अधीन गठित समिति की सिफारिशें इस धारा के अधीन नियुक्तियों के प्रयोजनों के लिए आबद्धकर होंगी

5. कार्यपालक बोर्ड सदस्य की शक्तियां और कृत्य-कार्यपालक बोर्ड सदस्य निगम का मुख्य कार्यपालक होगा और बोर्ड के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुए, बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो वह उसे प्रत्यायोजित करे  

6. अध्यक्ष और अन्य बोर्ड सदस्यों की पदावधि, सेवा की शर्तें, आदि- [(1) अध्यक्ष अंशकालिक बोर्ड सदस्य होगा और अपने पद ग्रहण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि तक या सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेगा :

परंतु प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) संशोधन अधिनियम, 2008 के प्रारंभ के ठीक पूर्व अध्यक्ष का पद धारण करने वाला कोई व्यक्ति, जहां तक उसकी नियुक्ति इस उपधारा के उपबंधों से असंगत है, ऐसे प्रारंभ पर ऐसे अध्यक्ष के रूप में अपने पद पर नहीं रहेगा और इस प्रकार अपने पद पर रहने के कारण किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा।]

(2)  बोर्ड सदस्य (वित्त) और बोर्ड सदस्य (कार्मिक) पूर्णकालिक बोर्ड सदस्य होंगे और अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेंगे

                 [(2) कार्यपालक बोर्ड सदस्य पूर्णकालिक सदस्य होगा और अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद धारण करेगा :

                परंतु प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) संशोधन अधिनियम, 2008 के प्रारंभ के ठीक पूर्व कार्यपालक बोर्ड सदस्य का पद धारण करने वाला कोई व्यक्ति, जहां तक उसकी नियुक्ति इस उपधारा के उपबंधों से असंगत है, ऐसे प्रारंभ पर ऐसे कार्यपालक बोर्ड सदस्य के रूप में अपने पद पर नहीं रहेगा और इस प्रकार अपने पद पर रहने के कारण किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ]

(3) अंशकालिक बोर्ड सदस्यों की पदावधि छह वर्ष होगी किन्तु उनमें से एक-तिहाई बोर्ड सदस्य प्रति दूसरे वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त हो जाएंगे

(4) निर्वाचित बोर्ड सदस्य की पदावधि दो वर्ष या जब वह निगम का कर्मचारी नहीं रहता है, तब तक, इनमें से जो भी पहले हो, होगी

(5) भारत का राष्ट्रपति, निगम की स्थापना के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, आदेश द्वारा, उस समय नियुक्त अंशकालिक बोर्ड सदस्यों में से कुछ बोर्ड सदस्यों की पदावधि को कम करने के लिए, जिससे कि ऐसे अंशकालिक बोर्ड सदस्यों के रूप में पद धारण करने वाले एक-तिहाई बोर्ड सदस्य उसके पश्चात् प्रति दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त हो जाएं, ऐसा उपबंध कर सकेगा जो वह ठीक समझे  

(6) जहां अध्यक्ष, या किसी अन्य बोर्ड सदस्य का पद धारण करने वाले किसी व्यक्ति की पदावधि समाप्त होने के पूर्व उसके पद में किसी भी कारण से कोई रिक्ति होती है वहां ऐसी रिक्ति को आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगा और ऐसी रिक्ति को भरने के लिए नियुक्त या निर्वाचित व्यक्ति उस पदावधि की अनवसित अवधि के लिए ही पद धारण करेगा जिसके लिए उसका पद पूर्ववर्ती, यदि ऐसी रिक्ति हुई होती तो, पद धारण करता

(7) पूर्णकालिक बोर्ड सदस्य निगम के कर्मचारी होंगे और उस रूप में ऐसे वेतनों और भत्तों के हकदार होंगे और छुट्टी, पेंशन (यदि कोई हो), भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होंगे जो विहित की जाएं :

परंतु उनके वेतन और भत्तों तथा सेवा की शर्तों में उनकी नियुक्ति के पश्चात् उनके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा

(8) अध्यक्ष और अंशकालिक बोर्ड सदस्य ऐसे भत्तों के हकदार होंगे जो विहित किए जाएं  

7. अध्यक्ष और बोर्ड सदस्यों का हटाया जाना और निलंबन-(1) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए अध्यक्ष या पदेन बोर्ड सदस्य, नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य और निर्वाचित बोर्ड सदस्य के सिवाय, कोई अन्य बोर्ड सदस्य अपने पद से कदाचार के आधार पर भारत के राष्ट्रपति के आदेश द्वारा केवल तभी हटाया जाएगा जब उच्चतम न्यायालय, राष्ट्रपति द्वारा उसे किए गए निर्देश पर, ऐसी प्रक्रिया के अनुसरण में, जिसका उच्चतम न्यायालय नियमों द्वारा उपबंध करे, जांच करने पर यह रिपोर्ट देता है कि, यथास्थिति, अध्यक्ष या ऐसे अन्य बोर्ड सदस्य को ऐसे आधार पर हटा देना चाहिए

(2) राष्ट्रपति, अध्यक्ष को या पदेन बोर्ड सदस्य; नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य या निर्वाचित बोर्ड सदस्य के सिवाय अन्य बोर्ड सदस्य को, जिसके बारे में उपधारा (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, पद से तब तक के लिए निलंबित कर सकेगा जब तक ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट की प्राप्ति पर राष्ट्रपति आदेश पारित नहीं कर देता है

(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी यदि अध्यक्ष या कोई पूर्णकालिक सदस्य

() भारत का नागरिक नहीं रहता है ; या 

() दिवालिया न्यायनिर्णीत किया जाता है ; या

() अपनी पदावधि में अपने पद के कर्तव्यों के बाहर किसी सवेतन नियोजन में लगता है ; या 

() किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है जिनमें नैतिक अधमता अंतर्वलित है ; या 

() राष्ट्रपति की राय में शारीरिक या मानसिक शैथिल्य के कारण अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है,

तो राष्ट्रपति ऐसे अध्यक्ष या ऐसे पूर्णकालिक बोर्ड सदस्य को आदेश द्वारा पद से हटा सकेगा :

                परंतु राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, किसी अंशकालिक बोर्ड सदस्य को उसके पद से हटा सकेगा यदि वह दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है या किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है जिसमें नैतिक अधमता अंतर्वलित है, या जहां वह राष्ट्रपति के राय में शारीरिक या मानसिक शैथिल्य के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य है   

(4) यदि अध्यक्ष या किसी पदेन बोर्ड सदस्य, नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य या निर्वाचित बोर्ड सदस्य के सिवाय कोई पूर्णकालिक बोर्ड सदस्य, निगमित कंपनी के सदस्य से भिन्न रूप में और अन्य सदस्यों के साथ सम्मिलित रूप से अन्यथा उस संविदा या करार से, जो निगम या भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा या उसके निमित्त की गई है, किसी प्रकार से संपृक्त या हितबद्ध है या हो जाता है या उसके लाभ या उससे उद्भूत किसी फायदे या उपलब्धि में भाग लेता है तो वह, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कदाचार का दोषी समझा जाएगा

(5) यदि कोई अंशकालिक बोर्ड सदस्य निगम द्वारा या उसके निमित्त की गई किसी संविदा या करार में किसी प्रकार से संपृक्त या हितबद्ध है या हो जाता है, तो वह, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कदाचार का दोषी समझा जाएगा  

(6) अध्यक्ष या कोई अन्य बोर्ड सदस्य, भारत के राष्ट्रपति को लिखित सूचना देकर अपना पद त्याग सकेगा और ऐसा त्यागपत्र स्वीकार कर लिए जाने पर अध्यक्ष या ऐसे अन्य बोर्ड सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है

8. बोर्ड के अधिवेशन-(1) बोर्ड ऐसे समय और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कार्य संचालन के बारे में (जिसके अंतर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा जिनका विनियमों में उपबंध किया जाए :

परंतु प्रति वर्ष कम से कम छह अधिवेशन होंगे और एक अधिवेशन और दूसरे अधिवेशन के बीच तीन मास का अंतर नहीं होगा  

(2) यदि कोई बोर्ड सदस्य अध्यक्ष की अनुमति के बिना बोर्ड के लगातार तीन अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है तो ऐसे बोर्ड सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है  

(3) अध्यक्ष बोर्ड के अधिवेशनों की अध्यक्षता करेगा और यदि वह किसी कारण से किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो कार्यपालक बोर्ड सदस्य और दोनों की अनुपस्थिति में, ऐसे अधिवेशन में उपस्थित बोर्ड सदस्यों द्वारा निर्वाचित कोई अन्य बोर्ड सदस्य, अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा

(4) बोर्ड के किसी अधिवेशन में उपस्थित सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले बोर्ड सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का दूसरा या निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा

9. निगम के अधिकारी और अन्य कर्मचारी-(1) ऐसे नियंत्रण, निबंधन और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाए, निगम, भर्ती बोर्ड से परामर्श करने के पश्चात्, महानिदेशक (आकाशवाणी), महानिदेशक (दूरदर्शन) और ऐसे अन्य अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को, जो आवश्यक हों, नियुक्त कर सकेगा  

(2) ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती की पद्धति और उससे संबद्ध सभी अन्य विषय तथा ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तें ऐसी होंगी जिनका विनियमों द्वारा उपबंध किया जाए

10. भर्ती बोर्डों की स्थापना-(1) निगम नियत दिन के पश्चात् यथाशीघ्र और ऐसी रीति से तथा ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, धारा 9 के प्रयोजनों के लिए एक या अधिक भर्ती बोर्डों की स्थापना करेगा जिनमें ऐसे व्यक्ति होंगे जो निगम के सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी नहीं हैं ;

परंतु ऐसे पदों पर, जिनके वेतनमान केन्द्रीय सरकार के संयुक्त सचिव के वेतनमान से कम नहीं हैं, नियुक्ति के प्रयोजनों के लिए, भर्ती बोर्ड, अध्यक्ष, अन्य बोर्ड सदस्य, पदेन बोर्ड सदस्य, नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य और निर्वाचित बोर्ड सदस्यों से मिलकर बनेगा   

(2) भर्ती बोर्ड गठित करने वाले सदस्यों की अर्हताएं और सेवा की अन्य शर्तें और वह अवधि, जिसके लिए वे पदधारण करेंगे ऐसी होगी जो विहित की जाए  

 [11. अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रास्थिति-(1) नियत दिन से पूर्व दूरदर्शन या आकाशवाणी के प्रयोजनों के लिए भर्ती किए गए तथा 1 अप्रैल, 2000 को निगम में सेवारत सभी अधिकारी और कर्मचारी 1 अप्रैल, 2000 से निगम में प्रतिनियुक्ति पर समझे जाएंगे और अपनी सेवानिवृत्ति तक उसी प्रकार बने रहेंगे  

(2) नियत दिन को या उसके पश्चात् से 5 अक्तूबर, 2007 तक की अवधि के दौरान भर्ती किए गए सभी अधिकारी और कर्मचारी, 1 अप्रैल, 2000 से या निगम की सेवा में पदभार ग्रहण करने की तारीख से, जो भी पश्चात्वर्ती हो और अपनी सेवानिवृत्ति तक, निगम में प्रतिनियुक्ति पर समझे जाएंगे

स्पष्टीकरण-उपधारा (1) और उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, भर्ती किए गए अधिकारी और कर्मचारी" से संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक के अधीन या अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार भर्ती किए गए अधिकारी और कर्मचारिवृंद अभिप्रेत हैं, किन्तु इसके अंतर्गत दैनिक मजदूरी, आकस्मिक, तदर्थ या निर्धारित कर्म के आधार पर नियोजित या नियुक्त किए गए व्यक्ति सम्मिलित नहीं होंगे  

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट अधिकारी और कर्मचारी केन्द्रीय सरकार के किसी कर्मचारी को अनुज्ञेय वेतन और सभी अन्य फायदों के हकदार होंगे :

परंतु ऐसे अधिकारी और कर्मचारी किसी प्रतिनियुक्ति भत्ते के हकदार नहीं होंगे  

(4) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, निगम को उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के संबंध में अनुशासनिक और पर्यवेक्षण की शक्ति तथा उन पर पूर्ण नियंत्रण होगा जिसके अंतर्गत एक स्थान, पद या माध्यम से दूसरे में उनको स्थानांतरित करने और निलंबन करने, अनुशासनिक कार्यवाहियां संस्थित करने और मुख्य या लद्यु शास्तियां अधिरोपित करने की शक्ति भी है :

परंतु सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्ति, हटाने या पदच्युत करने की मुख्य शास्तियां अधिरोपित करने की शक्ति का प्रयोग केन्द्रीय सरकार द्वारा किया जाएगा  

(5) 5 अक्तूबर, 2007 के पश्चात् भर्ती किए गए सभी अधिकारी और कर्मचारी निगम के अधिकारी और कर्मचारी होंगे और सेवा की ऐसी शर्तों द्वारा शासित होंगे, जो विनियमों में विनिर्दिष्ट की जाएं

11. धारा 11 का कतिपय अधिकारियों और कर्मचारियों को लागू होना-(1) धारा 11 के उपबंध भारतीय सूचना सेवा, केन्द्रीय सचिवालय सेवा या आकाशवाणी या दूरदर्शन से बाहर किसी अन्य सेवा काडर के ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को लागू नहीं होंगे, जो नियत दिन से पूर्व आकाशवाणी या दूरदर्शन में कार्य कर रहे हैं या उस दिन के पश्चात् निगम की सेवा में हैं  

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के निगम में सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं

 11. आकाशवाणी और दूरदर्शन के पदों का निगम में अंतरण करना-(1) उपधारा (2) में निर्दिष्ट काडरों की संख्या वाले पदों से भिन्न तत्कालीन आकाशवाणी और दूरदर्शन में सभी पद 1 अप्रैल, 2000 से निगम को अंतरित किए गए समझे जाएंगे  

(2) भारतीय सूचना सेवा, केन्द्रीय सचिवालय सेवा या आकाशवाणी या दूरदर्शन से बाहर काडर की संख्या वाले पदों से संबंधित सभी विषय, जहां तक ऐसे पदों का संबंध निगम से है, ऐसी रीति में और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो विहित की जाएं, अवधारित किए जाएंगे ]

12. निगम के कृत्य और शक्तियां-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निगम का यह प्राथमिक कर्तव्य होगा कि वह जनता को जानकारी देने, शिक्षित करने और उसका मनोरंजन करने के लिए और रेडियो तथा दूरदर्शन पर प्रसारण का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए लोक प्रसारण सेवाओं का आयोजन और संचालन करे  

स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के उपबंध भारतीय तार अधिनियम, 1885 (1855 का 13) के उपबंधों के अतिरिक्त, कि उनके अल्पीकरण में, होंगे

(2) निगम अपने कृत्यों के निर्वहन में निम्नलिखित उद्देश्यों से मार्गदर्शन प्राप्त करेगा, अर्थात् :-

() देश की एकता और अखंडता तथा संविधान में दिए गए मूल्यों को अक्षुण्ण रखना,  

() सार्वजनिक हित के सभी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय विषयों की निष्पक्ष, सत्य और उद्देश्यपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए नागरिकों के अधिकार को सुरक्षित रखना और सूचना को, जिसके अंतर्गत अपनी कोई राय या विचारधारा का पक्षपोषण किए बिना परस्पर विरोधी विचारों को प्रस्तुत करना भी है, उचित तथा संतुलित रूप से प्रस्तुत करना,

() शिक्षा और साक्षरता के प्रसार, कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों की ओर विशेष ध्यान देना

() समुचित कार्यक्रमों के प्रसारण द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों की विविध संस्कृतियों और भाषाओं के पर्याप्त कार्यक्रम देना

() क्रीड़ा और खेलकूद के पर्याप्त कार्यक्रम देना जिससे कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और खेलकूद की भावना को प्रोत्साहन मिले,

() युवकों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर समुचित कार्यक्रम देना,

() महिलाओं की प्रास्थिति और समस्याओं के संबंध में सूचना देना, राष्ट्रीय चेतना जागृत करना तथा महिलाओं के उत्थान के लिए विशेष ध्यान देना ;

() सामाजिक न्याय की अभिवृद्धि करना तथा शोषण, असमानता और अस्पर्श्यता जैसी बुराइयों का सामना करना तथा समाज के दुर्बल वर्गों के कल्याण को अग्रसर करना ;

() श्रमजीवी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके कल्याण को अग्रसर करना

() ग्रामीण जनता, और जनता के दुर्बल वर्गों तथा सीमावर्ती प्रदेशों, पिछड़े या दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों की सेवा करना ;

() अल्पसंख्यकों और जनजाति समुदायों की विशेष आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए समुचित कार्यक्रम देना

() बालकों, अंधों, वृद्धों, विकलांगों तथा अन्य निर्बल वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए विशेष उपाय करना ;

() भारत की भाषाओं में संप्रेषण में वृद्धि करते हुए इस प्रकार प्रसारण करना जिससे राष्ट्रीय एकता की अभिवृद्धि हो सके और प्रत्येक राज्य में उस राज्य की भाषाओं में प्रादेशिक सेवाओं का विस्तार करना

() समुचित प्रौद्योगिकी को चुनकर और उपलब्ध प्रसारण आवृत्ति का सर्वोत्तम उपयोग करके व्यापक प्रसारण कार्यक्रम देना और यह सुनिश्चित करना कि ग्राह्यता उच्च कोटि की हो ;

() रेडियों और दूरदर्शन प्रसारण प्रौद्योगिकी को निरंतर अद्यतन बनाए रखने के लिए अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को बढा़वा देना

() विभिन्न स्तरों पर पारेषण के अतिरिक्त चैनल स्थापित करके प्रसारण सुविधाओं का विस्तार करना

(3) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निगम निम्नलिखित कार्य करने के लिए ऐसे उपाय कर सकेगा जो वह ठीक समझे, अर्थात् :-

() यह सुनिश्चित करना कि कार्यक्रमों को देने और बनाने के लिए प्रसारण का संचालन लोक सेवा के रूप में हो रहा है,

() रेडियो और दूरदर्शन के लिए समाचार-संग्रह प्रणाली की स्थापना करना

() प्रसारण के लिए खेलकूद और अन्य आयोजनों, फिल्मों, धारावाहिकों, अवसरों, अधिवेशनों, समारोहों या सार्वजनिक रुचि की अन्य घटनाओं की बाबत कार्यक्रमों और अधिकारों या विशेषाधिकारों का क्रय करना या अन्यथा अर्जित करने के लिए बातचीत करना और सेवाओं के लिए ऐसे कार्यक्रमों, अधिकारों या विशेषाधिकारों के आबंटन की प्रक्रिया स्थापित करना,

() रेडियो, दूरदर्शन और अन्य सामग्री के पुस्तकालय या पुस्तकालयों की स्थापना करना और उनका अनुरक्षण करना

() समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम, श्रोता अनुसंधान, विपणन या तकनीकी सेवा संचालित करना या कराना जो ऐसे व्यक्तियों को और ऐसी रीति से तथा ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए दिए जा सकें जो निगम ठीक समझे,

() ऐसी अन्य सेवाओं की व्यवस्था करना, जो विनियमों द्वारा निर्दिष्ट की जाएं  

(4) उपधारा (2) और उपधारा (3) की कोई बात निगम को केन्द्रीय सरकार की ओर से और ऐसे निबंधनों और शर्तों के अनुसार जो उस सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, विदेश सेवा के प्रसारण का प्रबंध करने और केन्द्रीय सरकार द्वारा व्ययों की प्रतिपूर्ति के लिए किए गए ठहरावों के आधार पर भारत के बाहर के संगठनों द्वारा किए गए प्रसारणों का अनुश्रवण करने से निवारित नहीं करेगी  

(5) यह सुनिश्चित करने के प्रयोजनों के लिए कि इस धारा में उपवर्णित उद्देश्यों की अभिवृद्धि के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध किया जाए, केन्द्रीय सरकार को विज्ञापनों के बारे में प्रसार-समय की अधिकतम सीमा अवधारित करने की शक्ति होगी

(6) निगम किसी सिविल दायित्व के अधीन केवल इस कारण नहीं होगा कि वह इस धारा के किसी उपबंध का अनुपालन करने में असफल रहा है  

(7) निगम को विज्ञापनों और ऐसे कार्यक्रमों के लिए या उनकी बाबत, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, फीस और अन्य सेवा प्रभार अवधारित और उद्गृहीत करने की शक्ति होगी :

परन्तु इस उपधारा के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत फीस तथा अन्य सेवा प्रभार ऐसी सीमाओं से अधिक नहीं होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाएं

13. संसदीय समिति-(1) एक समिति का गठन किया जाएगा जो संसद् के बाईस सदस्यों से मिलकर बनेगी जिसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा, लोक सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित लोक सभा के पंद्रह सदस्य और राज्य सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित राज्य सभा के सात सदस्य होंगे जो इस बात की निगरानी रखेंगे कि निगम अपने कृत्यों का निर्वहन इस अधिनियम के उपबंधों और विशेष रूप से धारा 12 में उपवर्णित उसके उद्देश्यों के अनुसार करता है और वह उस पर संसद् को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी  

(2) समिति ऐसे नियमों के अनुसार कार्य करेगी जो लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा बनाए जाएं

14. प्रसारण परिषद् की स्थापना, उसके सदस्यों की पदावधि और उनका हटाया जाना, आदि-(1) नियत दिन के पश्चात् यथासंभव शीघ्र, अधिसूचना द्वारा, प्रसारण परिषद् के नाम से ज्ञात एक परिषद् की स्थापना की जाएगी जो धारा 15 में निर्दिष्ट परिवादों को ग्रहण करेगी और उन पर विचार करेगी और धारा 12 में उपवर्णित उद्देश्यों के अनुसार निगम को उसके कृत्यों के निर्वहन में सलाह देगी  

(2) प्रसारण परिषद् निम्नलिखित से मिलकर बनेगी,-

(i) एक अध्यक्ष और दस अन्य सदस्य जो भारत के राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक जीवन में विख्यात व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाएंगे

(ii) संसद् के चार सदस्य, जिनमें से लोक सभा के दो सदस्य उसके अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे और राज्य सभा के दो सदस्य उसके सभापति द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे  

(3) प्रसारण परिषद् का अध्यक्ष पूर्णकालिक सदस्य होगा और प्रत्येक अन्य सदस्य आंशकालिक सदस्य होगा तथा अध्यक्ष या अंशकालिक सदस्य उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, तीन वर्ष की अवधि के लिए उस रूप में पद धारण करेगा  

(4) प्रसारण परिषद् उतनी प्रादेशिक परिषदें गठित कर सकेगी जितनी वह परिषद् की, उसके कृत्यों के निर्वहन में, सहायता करने के लिए आवश्यक समझे

(5) प्रसारण परिषद् का अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा और छुट्टी, पेंशन (यदि कोई हो), भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होगा जो विहित की जाएं

परन्तु प्रसारण परिषद् के अध्यक्ष के वेतन तथा भत्तों और सेवा की शर्तों में, उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा  

(6) प्रसारण परिषद् के अन्य सदस्य और उपधारा (4) के अधीन गठित प्रादेशिक परिषदों के सदस्य ऐसे भत्तों के हकदार होंगे जो विहित किए जाएं

15. प्रसारण परिषद् की अधिकारिता और उसके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-(1) प्रसारण परिषद् निम्नलिखित से परिवाद ग्रहण करेगी और उन पर विचार करेगी, अर्थात् :- 

(i) कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जो यह अभिकथित करता है कि कोई कार्यक्रम या प्रसारण या निगम का विनिर्दिष्ट मामलों में या साधारणतया कार्यकरण उन उद्देश्यों के अनुसार नहीं है जिनके लिए निगम स्थापित किया गया है

(ii) कोई व्यक्ति (निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी से भिन्न) जो यह दावा करता है कि निगम के किसी कार्यक्रम के प्रसारण के संबंध में उसके साथ किसी रीति से अन्यायपूर्ण या अनुचित व्यवहार किया गया है (जिसके अंतर्गत उसकी एकांतता का अनधिकृत अतिक्रमण, दुर्व्यपदेशन, विकृति या वस्तुनिष्ठता का अभाव है)  

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई परिवाद ऐसी रीति से और ऐसी अवधि के भीतर किया जाएगा जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए  

(3) जो परिवाद प्रसारण परिषद् को प्राप्त होते हैं उन्हें निपटाने के लिए परिषद् ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगी जो वह   ठीक समझे  

(4) यदि परिवाद पूर्णतः या भागतः न्यायोचित पाया जाता है तो प्रसारण परिषद् कार्यपालक बोर्ड सदस्य को समुचित कार्रवाई करने के लिए सलाह देगी

(5) यदि कार्यपालक बोर्ड सदस्य प्रसारण परिषद् की सिफारिश को स्वीकार करने में असमर्थ है तो वह ऐसी सिफारिश को बोर्ड के समक्ष विनिश्चय के लिए रखेगा  

(6) यदि बोर्ड भी प्रसारण परिषद् की सिफारिश को स्वीकार करने में असमर्थ है, तो वह उसके लिए अपने कारण अभिलिखित करेगा और तद्नुसार प्रसारण परिषद् को सूचित करेगा  

(7) उपधारा (5) और उपधारा (6) में किसी बात के होते हुए भी, जहां प्रसारण परिषद् यह समुचित समझे, वहां वह ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, निगम से किसी परिवाद के बारे में अपनी सिफारिशों का प्रसार ऐसी रीति में करने की अपेक्षा कर सकेगी जैसी परिषद् ठीक समझे  

अध्याय 3

आस्तियां, वित्त और लेखे

16. केंद्रीय सरकार की कतिपय आस्तियों, दायित्वों, आदि का निगम को अन्तरण-नियत दिन से ही-

() ऐसी सभी संपत्ति और आस्तियां (जिनके अन्तर्गत अव्यपगमनीय निधि भी है) जो आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों के प्रयोजन के लिए उस दिन से ठीक पहले केन्द्रीय सरकार में निहित थी, निगम को, ऐेसे निबंधनों और शर्तों पर, जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, अंतरित हो जाएंगी और ऐसी सभी संपत्तियों और आस्तियों का बही मूल्य केन्द्रीय सरकार द्वारा निगम की दी गई पूंजी समझा जाएगा

() आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों के प्रयोजनों के लिए या उनके संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा  या उसके साथ या उसके लिए उस दिन के ठीक पहले उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें उस निगम द्वारा या उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी

() आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों के संबंध में केन्द्रीय सरकार को उस दिन के ठीक पहले देय सभी धनराशियां निगम को देय समक्ष जाएंगी

() आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों से संबंधित किसी विषय की बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध उस दिन के ठीक पहले संस्थित किए गए या संस्थित किए जा सकने वाले सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां निगम द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी या संस्थित की जा सकेंगी  

17. केंद्रीय सरकार द्वारा अनुदान, आदि-निगम को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन में समर्थ बनाने के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् निगम को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में,-

                (i) प्रसारण ग्राही अनुज्ञप्ति फीस के आगम का, यदि कोई हों, उसमें से संग्रहण प्रभार घटाकर, और

(ii) ऐसी अन्य धनराशियों का, जो वह सरकार आवश्यक समझे इक्विटी, सहायता अनुदान या उधार के रूप में,

संदाय कर सकेगी  

18. निगम की निधि-(1) निगम की अपनी निधि होगी और निगम की सभी प्राप्तियां (जिनके अन्तर्गत धारा 16 के अधीन निगम को अन्तरित रकमें भी हैं) निधि में जमा की जाएंगी और निगम द्वारा सभी संदाय उसमें से किए जाएंगे  

(2) निधि का सभी धन किसी एक या अधिक राष्ट्रीयकृत बैकों में ऐसी रीति से जमा किया जाएगा जो निगम विनिश्चित करे  

(3) निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए ऐसी धनराशियां व्यय कर सकेगा जो वह ठीक समझे और ऐसी धनराशियों को निगम की निधि में से संदेय व्यय माना जाएगा  

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, राष्ट्रीयकृत बैंक" से बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी नया बैंक या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है  

19. धन का विनिधान-निगम अपने धन का विनिधान केन्द्रीय सरकार की या किसी राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में या ऐसी अन्य रीति से कर सकेगा जो विहित की जाए

20. निगम का वार्षिक वित्तीय विवरण-(1) निगम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक वार्षिक वित्तीय विवरण तैयार करेगा जिसमें,-

() वह व्यय पृथक् रूप से दिखाया जाएगा जिसको निगम के आंतरिक साधनों से पूरा करने का प्रस्ताव है, और

() वे धनराशियां पृथक् रूप से दिखाई जाएंगी जो अन्य व्ययों को पूरा करने के लिए केन्द्रीय सरकार से अपेक्षित हैं, और-  

(i) राजस्व व्यय को अन्य व्यय से, और 

(ii) योजनेतर व्यय को योजना व्यय से

अलग दर्शाया जाएगा

(2) वार्षिक वित्तीय विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार किया जाएगा और अनुमोदन के लिए केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर भेजा जाएगा जो उस सरकार और निगम द्वारा तय पाया जाए

21. निगम के लेखा और उनकी संपरीक्षा-(1) निगम उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तैयार करेगा जो विहित की जाए   

(2) निगम के लेखाओं की संपरीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरिक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय निगम द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा

(3) नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के और निगम के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के उस संपरीक्षा में संबंध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और उसे विशिष्ट रूप से बहियां, लेखा, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तथा कागजपत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और निगम के किसी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित निगम के लेखे, उनकी संपरीक्षा रिपोर्ट के साथ, प्रतिवर्ष केन्द्रीय सरकार को भेजे जाएंगे और केन्द्रीय सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी

                                                                                                                                                                                  

अध्याय 4

प्रकीर्ण

23. निदेश देने की केंद्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर और जब कभी अवसर उत्पन्न हो निगम को भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता या राज्य की सुरक्षा या लोक व्यवस्था बनाए रखने के हित में ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह आवश्यक समझे जिसमें वह उससे यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह निदेश में विनिर्दिष्ट विषय पर प्रसारण करे या निदेश में विनिर्दिष्ट लोक महत्व के किसी विषय पर कोई प्रसारण करे  

(2) जहां निगम उपधारा (1) के अधीन दिए गए निदेश के अनुसरण में कोई प्रसारण करता है वहां ऐसे प्रसारण के साथ, यदि निगम ऐसी वांछा करे तो इस तथ्य की भी घोषणा की जा सकेगी कि ऐसा प्रसारण ऐसे निदेश के अनुसरण में किया गया है  

(3) उपधारा (1) के अधीन दिए गए प्रत्येक निदेश की एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी  

24. केंद्रीय सरकार की जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति-केंद्रीय सरकार निगम से ऐसी जानकारी देने की अपेक्षा कर सकेगी जैसी वह सरकार आवश्यक समझे

25. कतिपय विषयों में संसद् को रिपोर्ट और बोर्ड के विरुद्ध कार्रवाई के बारे में सिफारिशें-(1) जहां बोर्ड धारा 23 के अधीन दिए गए किन्हीं निदेशों के अनुपालन में बार-बार व्यतिक्रम करता है या धारा 24 के अधीन अपेक्षित जानकारी देने में असफल रहता है वहां केन्द्रीय सरकार उसकी एक रिपोर्ट तैयार कर सकेगी और उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, संसद् की यह सिफारिश प्राप्त करने के लिए रख सकेगी कि बोर्ड के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाए (जिसके अन्तर्गत बोर्ड का अतिष्ठित किया जाना भी हो सकता है)

(2) संसद् की सिफारिश पर, राष्ट्रपति, अधिसूचना द्वारा, बोर्ड को छह मास से अनधिक ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगा :

परन्तु इस उपधारा के अधीन अधिसूचना निकालने के पूर्व, राष्ट्रपति बोर्ड को यह हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर देगा कि उसे क्यों अतिष्ठित कर दिया जाए और बोर्ड के स्पष्टीकरणों और आक्षेपों पर, यदि कोई हों, विचार करेगा

(3) उपधारा (7) के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन पर,-

() सभी बोर्ड सदस्य, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से अपना पद रिक्त कर देंगे,

() ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उसके अधीन बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से प्रयोग या निर्वहन किया जा सकता है, इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के पुनर्गठित किए जाने तक, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें राष्ट्रपति निदेश दे, प्रयोग और निर्वहन किया जाएगा

(4) उपधारा (2) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिष्ठित किए जाने की अवधि के अवसान पर, राष्ट्रपति नई नियुक्तियों द्वारा बोर्ड को पुनर्गठित कर सकेगा और ऐसे किसी मामले में कोई ऐसा व्यक्ति जिसने उपधारा (3) के खंड () के अधीन अपना पद रिक्त किया था, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं होगा :

परन्तु राष्ट्रपति प्रतिष्ठित किए जाने की अवधि के अवसान के पूर्व किसी भी समय इस उपधारा के अधीन कार्रवाई कर सकेगा  

(5) केन्द्रीय सरकार उपधारा (2) के अधीन निकाली गई अधिसूचना को और इस धारा के अधीन की गई कार्रवाई की पूर्ण रिपोर्ट को संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी  

26. सदस्य के पद से संसद् के किसी सदस्य का निरर्हित होना-यह घोषित किया जाता है कि प्रसारण परिषद् के या धारा 13 के अधीन गठित समिति के सदस्य का पद उसके धारक को संसद् के किसी सदन का सदस्य चुने जाने के लिए या सदस्य होने के लिए निरर्हित नहीं करेगा  

27. अध्यक्ष, बोर्ड सदस्यों, आदि का लोक सेवक होना-निगम का अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य बोर्ड सदस्य, प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी तथा उसकी समिति का प्रत्येक सदस्य, प्रसारण परिषद् का अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य या प्रादेशिक परिषद् या भर्ती बोर्ड का प्रत्येक सदस्य भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा  

28. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही, निगम के या निगम के अध्यक्ष, किसी बोर्ड सदस्य या अधिकारी या अन्य कर्मचारी के या प्रसारण परिषद् के अध्यक्ष या किसी सदस्य के या प्रादेशिक परिषद् या भर्ती बोर्ड के किसी सदस्य के विरुद्ध होगी

29. निगम के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणणन-निगम के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष के या इस निमित्त निगम द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य बोर्ड सदस्य के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जाएंगे और निगम द्वारा निष्पादित सभी अन्य लिखतें कार्यपालक सदस्य के या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत निगम के किसी अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएंगी

30. शक्तियों का प्रत्यायोजन-निगम, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, निगम के अध्यक्ष या किसी अन्य बोर्ड सदस्य या किसी अधिकारी को, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कर्तव्यों को, जो वह उचित समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा  

31. वार्षिक रिपोर्ट-(1) निगम प्रत्येक कलैण्डर वर्ष में एक बार ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का (जिसके अन्तर्गत प्रसारण परिषद् द्वारा की गई सिफारिशें और दिए गए सुझाव और उन पर की गई कार्यवाही भी है) पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजी जाएंगी और वह सरकार उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी  

(2) प्रसारण परिषद्, प्रत्येक कलैंडर वर्ष में एक बार, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगी जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजी जाएंगी और वह सरकार उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी

32. नियम बनाने को शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-

() धारा 6 की उपधारा (7) के अधीन पूर्णकालिक बोर्ड सदस्यों के संबंध में वेतन और भत्ते तथा छुट्टी, पेंशन (यदि कोई हों), भविष्य निधि और अन्य विषयों के बारे में सेवा की शर्तें,

() धारा 6 की उपधारा (8) के अधीन अध्यक्ष और अंशकालिक बोर्ड सदस्यों को संदेय भत्ते

() वे नियंत्रण, निबन्धन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन निगम अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगी

() वह रीति जिससे तथा वे शर्तें और निर्बन्धन जिसके अधीन रहते हुए धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन भर्ती बोर्ड की स्थापना की जा सकेगी

() धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन भर्ती बोर्ड के सदस्यों की अर्हताएं और सेवा की अन्य शर्तें तथा उनकी पदावधि

 [() धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन अधिकारियों और कर्मचारियों की निगम में सेवा के निबंधन और शर्तों

(चच) धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन वह रीति और निबंधन तथा शर्तें, जिनके अध्यधीन भारतीय सूचना सेवा, केन्द्रीय सचिवालय सेवा के काडरों या आकाशवाणी या दूरदर्शन से बाहर के किसी अन्य काडर की संख्या वाले पदों से सबंधित विषय अवधारित किए जाएंगे,]

() धारा 14 की उपधारा (5) के अधीन प्रसारण परिषद् के अध्यक्ष का वेतन और भत्ते और छुट्टी, पेंशन (यदि काई हों), भविष्य निधि तथा अन्य विषयों के बारे में सेवा की शर्तें,

() धारा 14 की उपधारा (6) के अधीन प्रसारण परिषद् के अन्य स्दस्यों और प्रादेशिक परिषदों के सदस्यों को संदेय भत्ते

() वह रीति जिससे निगम धारा 19 के अधीन अपने धन का विनिधान कर सकेगा

() वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे धारा  21 की उपधारा (1) के अधीन लेखाओं का वार्षिक विवरण तैयार किया जाएगा

() वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर निगम और प्रसारण परिषद् धारा 31 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेंगे

() कोई अन्य विषय जिसका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए

33. विनियम बनाने की शक्ति-(1) निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने में अपने को समर्थ बनाने के लिए ऐसे विनियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत हों  

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे अर्थात् :- 

() वह रीति जिससे और वे प्रयोजन जिनके लिए निगम किसी व्यक्ति को धारा 3 की उपधारा (7) के अधीन अपने साथ सहयोजित कर सकेगा

() धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन वह समय जब और वे स्थान जहां बोर्ड के अधिवेशन होंगे और ऐसे अधिवेशनों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और बोर्ड के अधिवेशन के कार्य संचालन के लिए आवश्यक गणपूर्ति

() धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती की पद्धति और सेवा की शर्तें

 [() धारा 11 की उपधारा (5) के अधीन अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तें ;]

                                                                                                                                                                   

() धारा 12 की उपधारा (3) के खंड () के अधीन वे सेवाएं जो निगम द्वारा प्रदान की जा सकेंगी

() धारा 12 की उपधारा (7) के अधीन, विज्ञापनों और अन्य कार्यक्रमों की बाबत फीसों और अन्य सेवा प्रभारों का अवधारण और उद्ग्रहण

() धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन यह रीति जिसमें और वह अवधि जिसके भीतर परिवाद किए जा सकेंगे   

() कोई अन्य विषय जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए उपबन्ध करना निगम की राय में आवश्यक है :

परंतु खंड () या खंड () के अधीन विनियम केवल केंद्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ही बनाए जाएंगे  

34. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरा हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा  

35. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से अंसगत हों, और जिन्हें वह उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक समझे :

परंतु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से तीन वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा

______________

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : MAIMS

 
 
Latestlaws Newsletter