दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा अधिनियम, 1964
(1964 का अधिनियम संख्यांक 14)
[12 मई, 1964]
दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा नामक संस्था को, जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय
इस समय मद्रास में है, राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने
और उससे तत्संसक्त कतिपय विषयों के लिए
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पन्द्रहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और आरम्भ-(1) यह अधिनियम दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा अधिनियम, 1964 कहा जा सकेगा ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “ज्ञापन” से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन मद्रास के संयुक्त स्टाक कम्पनियों के रजिस्ट्रार के यहां फाइल किया गया सभा का संगम-ज्ञापन अभिप्रेत है ;
(ख) “नियम और विनियम” के अन्तर्गत ऐसा कोई भी नियम या विनियम, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, आता है जिसे सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में बनाने के लिए वह सभा सक्षम हो ; किन्तु उसके कार्य-संचालन के लिए नियमों और विनियमों के अधीन बनाई गई कोई भी उपविधियां या स्थायी आदेश उसके अन्तर्गत न जाएंगे ;
(ग) “सभा” से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा अभिप्रेत है ।
3. दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा का राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया जाना-यत दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा नामक संस्था के उद्देश्य ऐसे हैं जो उसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था बनाते हैं, अतः एतद्द्वारा घोषित किया जाता है कि दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था है ।
4. सभा द्वारा उपाधियों, डिप्लोमों और प्रमाणपत्रों का अनुदान - विशवविधालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) में या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सभा ऐसी परीक्षाएं ले सकेगी और ऐसी उपाधियां, डिप्लोमें तथा हिन्दी या हिन्दी के शिक्षण में प्रवीणता के ऐसे प्रमाणपत्र अनुदत्त कर सकेगी जैसे वह समय-समय पर अवधारित करे ।
5. लेखा और संपरीक्षा-(1) सभा उचित लेखा तथा अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगी और ऐसे प्ररूप में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए एक वार्षिक लेखा-विवरण जिसके अन्तर्गत तुलनपत्र आता है, तैयार करेगी ।
(2) सभा के लेखे, हर वर्ष कम से एक बार, ऐसे चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट द्वारा संपरीक्षित किए जाएंगे जो चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट अधिनियम, 1949 (1949 का 38) के अर्थ के भीतर व्यवसायशील हो और जो सभा द्वारा प्रति वर्ष नियुक्त किया जाएगा :
परन्तु सभा का कोई भी ऐसा सदस्य जो चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट हो या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो ऐसे सदस्य के साथ भागीदारी में हो इस धारा के अधीन संपरीक्षक नियुक्त किए जाने का पात्र न होगा ।
(3) सभा के या उसकी किसी समिति, परिषद्, बोर्ड या शाखा के रजिस्टरों, बहियों, अभिलेखों तथा अन्य दस्तावेजों तक सभी युक्तियुक्त समयों पर हर संपरीक्षक की, उसके कर्तव्यों के पालन में पहुंच होगी ।
(4) हर एक वर्ष के अन्त में यथासाध्य शीघ्र संपरीक्षक सभा को अपनी रिपोर्ट निवेदित कर देंगे और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भी उसकी जानकारी के लिए भेज देंगे ।
6. सभा द्वारा किए जाने वाले कतिपय कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन आवश्यक-सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) में अथवा ज्ञापन या नियमों और विनियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सभा, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिनाश्न्
(क) उन प्रयोजनों में से, जिनके लिए वह स्थापित हुई है, या जिनके लिए इस अधिनियम के प्रारम्भ के अव्यवहित पूर्व उसका उपयोग किया जाता रहा है, किसी भी प्रयोजन को न परिवर्तित करेगी, न विस्तारित और न उसका न्यूनन करेगी और न अपने को किसी अन्य संस्था या सोसाइटी से पूर्णतः या भागतः समामेलित करेगी; अथवा
(ख) किसी रीति ज्ञापन या नियमों और विनियमों को न परिवर्तित और न संशोधित करेगी; अथवा
(ग) विघटित नहीं की जाएगी ।
7. किए गए काम आदि का पुनर्विलोकन-(1) केन्द्रीय सरकार सभा से परामर्श के पश्चात् निम्नलिखित सभी प्रयोजनों के या उनमें से किसी के लिए एक या अधिक समितियां गठित कर सकेगी जो इतने संख्यक व्यक्तियों से मिलकर बनेगी जितने वह उनमें नियुक्त करना ठीक समझे, अर्थात् :श्न्
(क) किसी विनिर्दिष्ट कालावधि में सभा द्वारा किए गए काम और उसके द्वारा की गई प्रगति का पुनर्विलोकन, तथा
(ख) सभा द्वारा किए गए काम का मूल्यांकन ।
(2) इस प्रयोजन से कि उपधारा (1) के अधीन गठित कोई भी समिति अपने कर्तव्यों के पालन में समर्थ हो सके सभा उसे सभी आवश्यक सुविधाएं देगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन गठित किसी भी समिति की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से निवेदित की जाएगी जैसी वह सरकार निदिष्ट करे ।
(4) सभा को एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का हक होगा, जिसे ऐसे पुनर्विलोकन या मूल्यांकन के अवसर पर उपस्थित होने और सुने जाने का अधिकार होगा ।
(5) केन्द्रीय सरकार सभा के अध्यक्ष को ऐसे पुनर्विलोकन या मूल्यांकन के उस परिणाम का निर्देश देकर, जो उपधारा (1) के अधीन गठित किसी समिति की रिपोर्ट से प्रकट हो, सम्बोधित कर सकेगी और सभा का अध्यक्ष उस पर की गई कार्यवाही, यदि कोई हुई हो, केन्द्रीय सरकार को संसूचित कर देगा ।
(6) जब कि केन्द्रीय सरकार ने उपधारा (5) के अनुसरण में सभा के अध्यक्ष को किसी बात के सम्बन्ध में सम्बोधित किया हो और सभा का अध्यक्ष उसकी बाबत युक्तियुक्त समय के भीतर केन्द्रीय सरकार का समाधान करने वाली कार्यवाही न करे तब केन्द्रीय सरकार स्पष्टीकरण या अभ्यावेदन का अवसर सभा को अनुज्ञात करने के पश्चात् ऐसे निदेश निकाल सकेगी जैसे रिपोर्ट में चर्चित बातों में से किसी भी बात की बाबत उस सरकार के विचार में आवश्यक हों और सभा, किसी तत्समय प्रवृत्त विधि में अथवा सभा के ज्ञापन या नियमों और विनियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे निदेशों का पालन करेगी ।
(7) उपधारा (1) के अधीन गठित किसी भी समिति के सदस्यों को ऐसे भत्ते दिए जाएंगे जैसे केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा नियत करे और ऐसे भत्ते ऐसी किसी भी समिति द्वारा अपने कृत्यों के पालन में केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के उपगत व्ययों सहित (जिसके अन्तर्गत ऐसी किसी भी समिति द्वारा नियोजित किसी भी व्यक्ति को देय सम्बलम्, पारिश्रमिक या भत्ते भी, यदि कोई हों, आते हैं) किसी तत्समय प्रवृत्त विधि में अथवा सभा के ज्ञापन या नियमों और विनियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सभा की निधि में से दिए जाएंगे ।
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