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संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 ( Payment and Settlement Systems Act, 2007 )


 

संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007

(2007 का अधिनियम संख्यांक 51)

[20 दिसंबर, 2007]

भारत में संदाय प्रणालियों के विनियमन और पर्यवेक्षण का तथा भारतीय

रिजर्व बैंक को उस प्रयोजन के लिए प्राधिकारी के रूप में अभिहित

करने तथा उससे संबंधित या उसके

आनुषंगिक विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के अठावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 है ।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रारंभ के प्रतिनिर्देश है ।

2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) बैंक" से अभिप्रेत है-

(i) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित बैंक;

(ii) डाकघर बचत बैंक;

(iii) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में यथापरिभाषित बैंककारी कंपनी;

(iv) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 56 द्वारा यथा अंतःस्थापित धारा 5 के खंड (गग) में यथापरिभाषित सहकारी बैंक; और

(v) ऐसा कोई अन्य बैंक, जिसे रिजर्व बैंक, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट करे;

(ख) व्युत्पन्न" से किसी भविष्यवर्ती तारीख पर निपटाया जाने वाला ऐसा लिखत अभिप्रेत है जिसका मूल्य प्रतिभूतियों (जिसे अन्तर्निहित" भी कहा गया है), या किसी अन्य अन्तर्निहित की ब्याज दर, विदेशी मुद्रा दर, प्रत्यय रेटिंग या प्रत्यय सूचकांक, कीमत में या किसी अन्य अंतर्निहित अथवा उनमें से एक से अधिक के संयोजन में परिवर्तन से व्युत्पन्न होता है और इसके अंतर्गत ब्याज दर विनिमय, अग्रिम दर करार, विदेशी मुद्रा विनिमय, विदेशी मुद्रा-रुपए के विनिमय, विदेशी मुद्रा विकल्प, विदेशी मुद्रा-रुपया विकल्प या ऐसा कोई अन्य लिखत भी है, जो रिजर्व बैंक द्वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट किया जाए;

(ग) इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण" से निधियों का कोई ऐसा अंतरण अभिप्रेत  है, जो किसी व्यक्ति द्वारा अनुदेश, प्राधिकार या आदेश द्वारा किसी बैंक में रखे गए खाते से रकम निकालने या उसमें जमा करने के लिए इलेक्ट्रानिक माध्यम से किया जाता है और उसके अंतर्गत विक्रय अंतरण के बिंदु, स्वचालित टेलर मशीन संव्यवहार, सीधे निक्षेप या निधियों का निकाला जाना, टेलीफोन, इंटरनेट और कार्ड संदाय द्वारा आरंभ किए गए अंतरण भी सम्मिलित हैं;

(घ) सकल निपटान प्रणाली" से ऐसी संदाय प्रणाली अभिप्रेत है, जिसमें निधियों या प्रतिभूतियों का प्रत्येक निपटान पृथक् या व्यष्टिक अनुदेशों के आधार पर होता है;

(ङ) शुद्ध अवधारण" से प्रणाली के भागीदारों के बीच संदाय बाध्यताओं या परिदान बाध्यताओं के मुजरे या समायोजन के परिणामस्वरूप शोध्य या संदेय अथवा परिदेय धन या प्रतिभूतियों की रकम का प्रणाली प्रदाता द्वारा अवधारण अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत प्रणाली प्रदाता द्वारा किसी प्रणाली भागीदार के दिवालिएपन या विघटन या परिसमापन पर किसी भविष्य की तारीख पर निपटान के लिए स्वीकृत संव्यवहारों की समाप्ति पर उद्भूत दावे और बाध्यताएं या ऐसी अन्य परिस्थितियां जो प्रणाली प्रदाता अपने नियमों या विनियमों या उपविधियों (चाहे जिस नाम से ज्ञात हों) में विनिर्दिष्ट करे, भी हैं जिससे केवल शुद्ध दावे की ही मांग की जा सके या शुद्ध बाध्यता ही देय हो सके;

(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(छ) संदाय अनुदेश" से, -

(i) किसी व्यक्ति द्वारा किसी प्रणाली भागीदार को; या

(ii) किसी प्रणाली भागीदार द्वारा किसी अन्य प्रणाली भागीदार को,

संदाय को प्रभावी करने के लिए किसी भी रूप में कोई लिखत, प्राधिकार या आदेश अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत इलेक्ट्रानिक साधन भी हैं;

(ज) संदाय बाध्यता" से ऐसी ऋणिता अभिप्रेत है, जो किसी एक प्रणाली भागीदार द्वारा किसी अन्य प्रणाली भागीदार को निधियों, प्रतिभूतियों या विदेशी मुद्रा या व्युत्पन्नों या अन्य संव्यवहारों से संबंधित एक या अधिक संदाय अनुदेशों के समाशोधन या निपटान के परिणामस्वरूप देय है;

(झ) संदाय प्रणाली" से ऐसी प्रणाली अभिप्रेत है, जो किसी संदायकर्ता और किसी हिताधिकारी के बीच संदाय किए जाने को समर्थ बनाती है, जिसमें समाशोधन, संदाय या निपटान सेवा अथवा वे सभी सेवाएं सम्मिलित हैं किन्तु स्टॉक एक्सचेंज सम्मिलित नहीं है ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए संदाय प्रणाली" के अन्तर्गत ऐसी प्रणाली है, जो क्रेडिट कार्ड प्रचालनों, डेबिट कार्ड प्रचालनों, स्मार्ट कार्ड प्रचालनों, धन अंतरण प्रचालनों या वैसे ही प्रचालनों को समर्थ बनाती है;

(ञ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ट) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाया गया विनियम अभिप्रेत है;

(ठ) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;

(ड) प्रतिभूतियों" से लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) में यथापरिभाषित सरकारी प्रतिभूतियां या ऐसी अन्य प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर उस अधिनियम के अधीन अधिसूचित की जाएं;

(ढ) निपटान" से संदाय अनुदेशों का निपटान अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा या व्युत्पन्नों या ऐसे अन्य संव्यवहारों का निपटान भी है, जिनमें संदाय बाध्यताएं अंतर्वलित हैं;

(ण) व्यवस्थित जोखिम" से-

(i) किसी प्रणाली भागीदार की संदाय प्रणाली के अधीन अपनी संदाय बाध्यताओं को, जब भी वे शोध्य हों, चुकाने में असमर्थता; या

(ii) प्रणाली में किसी विच्छिन्नता, के कारण उद्भूत जोखिम अभिप्रेत है, जो अन्य भागीदारों को अपनी बाध्यताओं को, जब भी शोध्य हों, चुकाने में असफल कर सकेगी और जिससे प्रणाली की स्थिरता पर प्रभाव पड़ने की संभावना हैः

परंतु यदि इस बारे में कोई संदेह या मतभेद उत्पन्न होता है कि क्या किसी विशिष्ट जोखिम से प्रणाली की स्थिरता पर कोई प्रभाव पड़ने की संभावना है तो रिजर्व बैंक का विनिश्चय अंतिम होगा;

(त) प्रणाली भागीदार" से कोई बैंक या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी संदाय प्रणाली में भाग ले रहा है और इसके अंतर्गत प्रणाली प्रदाता भी है;

(थ) प्रणाली प्रदाता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो प्राधिकृत संदाय प्रणाली को प्रचालित करता है ।

(2) उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं, किन्तु परिभाषित नहीं है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) या बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उन अधिनियमों में उनके हैं ।

अध्याय 2

अभिहित प्राधिकारी और उसकी समिति

3. अभिहित प्राधिकारी और उसकी समिति-(1) रिजर्व बैंक इस अधिनियम के अधीन संदाय प्रणालियों के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए अभिहित प्राधिकारी होगा ।

(2) रिजर्व बैंक, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन तथा कर्तव्यों का निर्वहन करने के प्रयोजनों के लिए, विनियम द्वारा, अपने केन्द्रीय बोर्ड की एक समिति का गठन कर सकेगा, जिसका नाम संदाय और निपटान प्रणाली विनियमन और पर्यवेक्षण बोर्ड होगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन गठित बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-

(क) रिजर्व बैंक का गवर्नर, जो बोर्ड का अध्यक्ष होगा;

(ख) रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर, जिनमें से ऐसा डिप्टी गवर्नर, जो संदाय और निपटान प्रणाली का भारसाधक है, बोर्ड का उपाध्यक्ष होगा;

(ग) भारतीय रिजर्व बैंक के केन्द्रीय बोर्ड से तीन से अनधिक निदेशक, जो रिजर्व बैंक के गवर्नर द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ।

(4) उपधारा (2) के अधीन गठित बोर्ड की शक्तियां और कृत्य, उसके अधिवेशनों का समय और स्थान, ऐसे अधिवेशनों में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया (जिसके अंतर्गत ऐसे अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है) और उससे आनुषंगिक अन्य विषय वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।

(5) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 58 की उपधारा (2) के खंड (झ) के अधीन गठित संदाय और निपटान प्रणाली विनियमन और पर्यवेक्षण बोर्ड को इस धारा के अधीन गठित बोर्ड समझा जाएगा और वह तद्नुसार तब तक बना रहेगा जब तक इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार बोर्ड का पुनर्गठन न हो जाए और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों द्वारा जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से सुसंगत नहीं हैं शासित   होगा ।

अध्याय 3

संदाय प्रणालियों का प्राधिकार

4. संदाय प्रणाली का प्राधिकार के बिना प्रचालन किया जाना-रिजर्व बैंक से भिन्न कोई भी व्यक्ति, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्राधिकार के अधीन और उसके अनुसार ही कोई संदाय प्रणाली प्रारंभ या प्रचालित करेगा, अन्यथा नहीं:

परंतु इस धारा की कोई बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी, -

(क) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान संदाय प्रणाली के विद्यमान प्रचालन को ऐसे प्रारंभ से छह मास से अनधिक की अवधि तक जब तक कि ऐसी अवधि के भीतर, ऐसी संदाय प्रणाली का प्रचालन इस अधिनियम के अधीन प्राधिकार अभिप्राप्त नहीं कर लेता या इस अधिनियम की धारा 7 के अधीन प्राधिकार के लिए किया गया आवेदन रिजर्व बैंक द्वारा नामंजूर नहीं कर दिया जाता;

(ख) ऐसे किसी अन्य व्यक्ति के, जिसको संदाय शोध्य है, सम्यक् रूप से नियुक्त अभिकर्ता के रूप में कार्यरत किसी व्यक्ति को;

(ग) ऐसी किसी कंपनी को, जो अपनी नियंत्री कंपनी या अपनी समनुषंगी कंपनियों में से किसी से या ऐसी किसी अन्य कंपनी से, जो उसी नियंत्री कंपनी की समनुषंगी भी है, संदाय प्राप्त करती है;

(घ) ऐसे किसी अन्य व्यक्ति को, जिसे रिजर्व बैंक, मुद्रा नीति के हितों या संदाय प्रणालियों के दक्ष प्रचालन, किसी संदाय प्रणाली के विस्तार पर विचार करने के पश्चात्, या किसी अन्य कारण से, अधिसूचना द्वारा, इस धारा के उपबंधों से छूट प्रदान करे ।

(2) रिजर्व बैंक, इस धारा की उपधारा (1) के अधीन, किसी कंपनी या निगम को पूरे देश में बैंकों के लिए सामान्य खुदरा समाशोधन गृह प्रणाली के लिए बैंकों के विद्यमान समाशोधन गृहों या नए समाशोधन गृहों को प्रचालित अथवा विनियमित करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगाः

परंतु, फिर भी ऐसी कंपनी या निगम के इक्यावन प्रतिशत से अन्यून साधारण शेयर पब्लिक सेक्टर बैंकों द्वारा धारित किए जाएंगे ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, पब्लिक सेक्टर बैंकों" में बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 में यथापरिभाषित कोई तत्स्थानी नया बैंक", भारतीय स्टेट बैंक" और समनुषंगी बैंक" सम्मिलित होगा ।

5. प्राधिकार के लिए आवेदन-(1) कोई भी व्यक्ति, जो किसी संदाय प्रणाली को प्रारंभ करने या चलाने की वांछा करता है, इस अधिनियम के अधीन प्राधिकार के लिए रिजर्व बैंक को आवेदन कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में किया जाएगा और उसके साथ ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।

6. रिजर्व बैंक द्वारा जांच-धारा 5 के अधीन आवेदन की प्राप्ति के पश्चात् और इस अधिनियम के अधीन प्राधिकार जारी किए जाने से पूर्व, रिजर्व बैंक ऐसी जांच कर सकेगा जो वह आवेदक द्वारा दी गई विशिष्टियों की असलियत, संदाय प्रणाली को प्रचालित करने की उसकी क्षमता, भागीदारों के बारे में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए या किसी अन्य कारण से आवश्यक समझे और जब ऐसी जांच इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के द्वारा की जाती है तो वह उस व्यक्ति से जांच के संबंध में रिपोर्ट की अपेक्षा कर सकेगा ।

7. प्राधिकार का जारी किया जाना या नामंजूर किया जाना-(1) रिजर्व बैंक, यदि धारा 6 के अधीन किसी जांच के पश्चात् या अन्यथा उसका यह समाधान हो जाता है कि आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण है और वह इस अधिनियम के उपबंधों और विनियमों के अनुरूप है, निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए इस अधिनियम के अधीन संदाय प्रणाली के प्रचालन के लिए प्राधिकार जारी कर सकेगा, अर्थात्ः-

(i) प्रस्तावित संदाय प्रणाली या उसके द्वारा दी जाने वाली प्रस्तावित सेवाओं की आवश्यकता;

(ii) प्रस्तावित संदाय प्रणाली के तकनीकी मानक या उसका डिजाइन;

(iii) किसी सुरक्षा प्रक्रिया सहित प्रस्तावित संदाय प्रणाली के प्रचालन के निबंधन और शर्तें;

(iv) वह रीति, जिसमें संदाय प्रणाली के भीतर निधियों का अंतरण किया जा सकेगा;

(v) संदाय प्रणाली के अधीन संदाय बाध्यताओं को चुकाने के लिए संदाय अनुदेशों की नेटिंग के लिए प्रक्रिया;

(vi) आवेदक की वित्तीय स्थिति, प्रबंध का अनुभव या उसकी ईमानदारी;

(vii) उपभोक्ताओं के हित, जिनके अंतर्गत संदाय प्रणाली प्रदाताओं के साथ उनके संबंधों को शासित करने वाले निबंधन और शर्तें भी हैं;

(viii) मुद्रा नीति और प्रत्यय नीति; और

(ix) ऐसे अन्य कारक, जो रिजर्व बैंक द्वारा सुसंगत समझे जाएं ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किया गया प्राधिकार ऐसे प्ररूप में होगा, जो विहित किया जाए और उसमें-

(क) उस तारीख का कथन होगा जिसको वह प्रभावी होगा;

(ख) उन शर्तों का कथन होगा, जिनके अधीन रहते हुए प्राधिकार प्रवृत्त होगा;

(ग) प्राधिकार को प्रवृत्त करने के लिए संदत्त की जाने वाली फीसों, यदि कोई हों, के संदाय को उपदर्शित किया जाएगा;

(घ) यदि वह आवश्यक समझे, आवेदक से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन संदाय प्रणाली के उचित संचालन के लिए ऐसी प्रतिभूति देने की अपेक्षा करेगा;

(ङ) प्राधिकार के प्रतिसंहृत किए जाने तक प्रवृत्त रहेगा ।

(3) जहां रिजर्व बैंक यह समझता है कि प्राधिकार के लिए आवेदन को नामंजूर किया जाना चाहिए, वहां वह आवेदक को इस आशय की एक लिखित सूचना देगा, जिसमें नामंजूर किए जाने के कारण बताए जाएंगेः

परंतु ऐसा कोई आवेदन तब तक नामंजूर नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

(4) प्राधिकार के लिए प्रत्येक आवेदन पर रिजर्व बैंक द्वारा, यथाशक्य शीघ्र, कार्रवाई की जाएगी और ऐसे आवेदन का, उसके फाइल किए जाने की तारीख से छह मास के भीतर निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा ।

8. प्राधिकार का प्रतिसंहरण-(1) यदि कोई प्रणाली प्रदाता, -

(i) इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करता है, या

(ii) विनियमों का अनुपालन नहीं करता है, या

(iii) अभिहित प्राधिकारी द्वारा जारी आदेशों या निदेशों का अनुपालन करने में असफल रहता है, या

(iv) संदाय प्रणाली का प्रचालन उन शर्तों के विपरीत करता है, जिनके अधीन रहते हुए प्राधिकार जारी किया    गया था,

तो रिजर्व बैंक, आदेश द्वारा, इस अधिनियम के अधीन ऐसे प्रणाली प्रदाता को दिए गए प्राधिकार को प्रतिसंहृत कर सकेगाः

परंतु उपधारा (1) के अधीन प्रतिसंहरण का कोई आदेश निम्नलिखित दशाओं में नहीं किया जाएगा, -

(i) प्रणाली प्रदाता को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना; और

(ii) प्रणाली प्रदाता को रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए इन निदेशों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कि संदाय प्रणाली का प्रचालन प्रतिसंहरण आदेश जारी किए जाने तक नहीं किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) की कोई बात ऐसे किसी मामले को लागू नहीं होगी, जिसमें रिजर्व बैंक किसी संदाय प्रणाली को दिए गए प्राधिकार को प्रतिसंहृत करना देश की मुद्रा नीति के हित में या ऐसे किन्हीं अन्य कारणों से, जो उसके द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, आवश्यक समझे ।

(3) उपधारा (1) के अधीन जारी प्रतिसंहरण के आदेश में, ऐसे प्रतिसंहरण के आदेश द्वारा प्रभावित व्यक्तियों के हितों की सुरक्षा करने और उसके रक्षोपायों के लिए आवश्यक उपबंध भी सम्मिलित हैं ।

(4) जहां कोई प्रणाली प्रदाता दिवालिया हो जाता है या विघटित या परिसमापित कर दिया जाता है वहां ऐसा प्रणाली प्रदाता उस तथ्य की सूचना रिजर्व बैंक को देगा और तदुपरांत रिजर्व बैंक ऐसे उपाय करेगा, जो ऐसे प्रणाली प्रदाता को संदाय प्रणाली को प्रचालित करने के लिए जारी किए गए प्राधिकार को प्रतिसंहृत करने के लिए वह आवश्यक समझे ।

9. केन्द्रीय सरकार को अपील-(1) किसी प्राधिकार का कोई आवेदक, जिसका संदाय प्रणाली के प्रचालन के लिए आवेदन धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन नामंजूर कर दिया गया है या ऐसा प्रणाली प्रदाता, जो धारा 8 के अधीन प्रतिसंहरण के आदेश से व्यथित है, उस तारीख से, जिसको आदेश उसे संसूचित किया गया है, तीस दिन के भीतर केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन किसी अपील का निपटारा तीन मास की अवधि के भीतर करने का प्रयास करेगी ।

(3) उपधारा (1) के अधीन किसी अपील पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

अध्याय 4

रिजर्व बैंक द्वारा विनियमन और पर्यवेक्षण

10. मानक अवधारित करने की शक्ति-(1) रिजर्व बैंक समय-समय पर निम्नलिखित विहित कर सकेगा-

(क) संदाय अनुदेशों के रूप विधान, ऐसे अनुदेशों का आकार और स्वरूप;

(ख) संदाय प्रणालियों द्वारा पालन किया जाने वाला समय;

(ग) बैंक के बीच के या बैंकों और अन्य प्रणाली भागीदारों के बीच कागज-पत्र, इलेक्ट्रानिक साधनों द्वारा या किसी अन्य रीति में संदाय प्रणाली के भीतर निधियों के अंतरण की रीति;

(घ) साधारणतया संदाय प्रणालियों द्वारा पालन किए जाने वाले ऐसे अन्य मानक;

(ङ) संदाय प्रणाली की सदस्यता के लिए मानदंड, जिसके अंतर्गत सदस्यता का जारी रहना, समापन और रद्द किया जाना भी है;

(च) वे शर्तें, जिनके अधीन प्रणाली के भागीदार ऐसे निधि अंतरणों में भाग लेंगे और ऐसी निधियों में प्रणाली भागीदारों के अधिकार और बाध्यताएं ।

(2) रिजर्व बैंक उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना समय-समय पर, ऐसे दिशानिर्देश जारी कर सकेगा जो वह साधारणतया संदाय प्रणालियों के समुचित और दक्षतापूर्ण प्रबंध या किसी विशिष्ट संदाय प्रणाली के प्रतिनिर्देश से आवश्यक समझे ।

11. संदाय प्रणाली में परिवर्तन की सूचना-(1) कोई प्रणाली प्रदाता प्रणाली में कोई ऐसा परिवर्तन नहीं करवाएगा, जो-

(क) रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन के बिना, और

(ख) रिजर्व बैंक के अनुमोदन के पश्चात् प्रणाली भागीदारों को तीस दिन से अन्यून की सूचना दिए बिना,

संदाय प्रणाली की संरचना या प्रचालन को प्रभावित करेः

परंतु रिजर्व बैंक देश की मुद्रा नीति के हित में या लोकहित में प्रणाली प्रदाता को खंड (ख) के अधीन प्रणाली भागीदारों को, सूचना दिए बिना या प्रणाली प्रदाता से तीस दिन से अधिक की अवधि की सूचना देने की अपेक्षा करते हुए संदाय प्रणाली में कोई परिवर्तन करने की अनुज्ञा दे सकेगा ।

(2) जहां रिजर्व बैंक का किसी कारण से प्रस्तावित परिवर्तन के बारे में कोई आक्षेप है, वहां वह प्रणाली प्रदाता द्वारा प्रस्तावित परिवर्तन की सूचना की प्राप्ति के दो सप्ताह के भीतर उसे ऐसे आक्षेप को संसूचित करेगा ।

(3) प्रणाली प्रदाता, रिजर्व बैंक से आक्षेपों की प्राप्ति के दो सप्ताह की अवधि के भीतर अपनी टिप्पणियां रिजर्व बैंक को भेजेगा और प्रस्तावित परिवर्तन रिजर्व बैंक से अनुमोदन प्राप्त होने के पश्चात् ही प्रभावी किए जा सकेंगे ।

12. विवरणियां, दस्तावेज या अन्य जानकारी मांगने की शक्ति-रिजर्व बैंक किसी प्रणाली प्रदाता से ऐसी विवरणियां या दस्तावेज, ऐसे अन्तरलों पर, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो रिजर्व बैंक समय-समय पर अपेक्षित करे या जो विहित किया जाए, मांग सकेगा और ऐसे आदेश का पालन किया जाएगा ।

13. सूचना तक पहुंच-रिजर्व बैंक को किसी संदाय प्रणाली के प्रचालन से संबंधित किसी सूचना तक पहुंच रखने का अधिकार होगा और प्रणाली प्रदाता तथा सभी प्रणाली के भागीदार, रिजर्व बैंक को ऐसी जानकारी तक पहुंच उपलब्ध कराएंगे ।

14. प्रवेश और निरीक्षण करने की शक्ति-रिजर्व बैंक का उसके द्वारा इस निमित्त लिखित में सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी, इस अधिनियम या किन्हीं विनियमों के उपबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए किसी ऐसे परिसर में प्रवेश कर सकेगा, जहां संदाय प्रणाली का प्रचालन किया जा रहा है और किसी उपस्कर का निरीक्षण कर सकेगा, जिसके अंतर्गत ऐसे परिसर में स्थित कोई कम्प्यूटर प्रणाली या अन्य दस्तावेज भी है और ऐसे प्रणाली प्रदाता या उसके भागीदार के किसी कर्मचारी या ऐसे परिसर में कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति से ऐसी जानकारी या दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग कर सकेगा, जो उस अधिकारी द्वारा     अपेक्षित हों ।

15. जानकारी, आदि का गोपनीय होना-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रिजर्व बैंक द्वारा धारा 12 से धारा 14 (जिनमें दोनों धाराएं सम्मिलित हैं) के अधीन अभिप्राप्त कोई दस्तावेज या जानकारी गोपनीय रखी जाएगी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, रिजर्व बैंक उसके द्वारा धारा 12 से धारा 14 के अधीन (जिनमें दोनों धाराएं सम्मिलित हैं) अभिप्राप्त किसी दस्तावेज या जानकारी को किसी ऐसे व्यक्ति को प्रकट कर सकेगा, जिसके लिए ऐसे दस्तावेज या जानकारी का प्रकटन संदाय प्रणाली की विश्वसनीयता, प्रभाविता या सुरक्षा के लिए या बैंककारी या मुद्रा नीति के हित में या साधारणतया संदाय प्रणाली के प्रचालन या लोकहित में आवश्यक समझा जाए ।

16. संपरीक्षा और निरीक्षण करने की शक्ति-रिजर्व बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों को करने के प्रयोजन के लिए, संदाय प्रणाली या उसके भागीदारों की संपरीक्षा और निरीक्षण कर सकेगा या करा सकेगा और प्रणाली प्रदाता तथा प्रणाली भागीदारों का यह कर्तव्य होगा कि वे रिजर्व बैंक को ऐसी, यथास्थिति, संपरीक्षा या निरीक्षण करने में सहायता करें ।

17. निदेश जारी करने की शक्ति-जहां रिजर्व बैंक की यह राय है कि-

(क) कोई संदाय प्रणाली या प्रणाली का भागीदार ऐसे किसी कार्य, लोप या संचालन के अनुक्रम में लगा हुआ है या लगने वाला है, जिसका परिणाम व्यवस्थित जोखिम है या होने की संभावना है, जो अपर्याप्त रूप से नियंत्रित है; या

(ख) खंड (क) के अधीन किसी कार्रवाई से संदाय प्रणाली, देश की मुद्रा या प्रत्यय नीति के प्रभावित होने की संभावना है,

वहां रिजर्व बैंक ऐसी संदाय प्रणाली या प्रणाली भागीदार को ऐसी अवधि के भीतर उससे निम्नलिखित की अपेक्षा करते हुए निदेश जारी कर सकेगा, जो रिजर्व बैंक विनिर्दिष्ट करे-

(i) कार्य, लोप या संचालन के अनुक्रम में लगे रहने से रोकना और प्रविरत रहना या यह सुनिश्चित करना कि प्रणाली भागीदार ऐसे कार्य, लोप या संचालन के अनुक्रम में लगे न रहें और उससे प्रविरत रहें,

(ii) ऐसे कार्यों का पालन करना, जो रिजर्व बैंक की राय में स्थिति का उपचार करने के लिए आवश्यक हों ।

18. रिजर्व बैंक की साधारणतया निदेश देने की शक्ति-पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, रिजर्व बैंक, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि संदाय प्रणाली को विनियमित करने के लिए या उसे समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए या किसी संदाय प्रणाली के प्रबंध या प्रचालन के हित में या लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह संदाय प्रणाली के, जिनके अंतर्गत इलेक्ट्रानिक, गैर इलेक्ट्रानिक, देशी और अंतरराष्ट्रीय संदाय प्रणाली भी हैं, जो देशी संव्यवहारों को प्रभावित करती हैं, विनियमन से संबंधित नीतियां अधिकथित कर सकेंगी और लिखित में ऐसे निदेश दे सकेगा जो वह प्रणाली प्रदाता या प्रणाली के भागीदारों या किन्हीं अन्य व्यक्तियों या ऐसे अभिकरण के लिए साधारणतया और विशिष्टतया संदाय प्रणाली से संबंधित कारबार के संचालन के संबंध में आवश्यक समझे ।

19. रिजर्व बैंक के अनुदेशों का पालन किया जाना-ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसे इस अधिनियम के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा निदेश जारी किए गए हैं, ऐसे निदेशों का बिना किसी विलंब के पालन करेगा और पालन की रिपोर्ट रिजर्व बैंक को उसके द्वारा अनुज्ञात समय के भीतर दी जाएगी ।

अध्याय 5

प्रणाली प्रदाता के अधिकार और कर्तव्य

20. प्रणाली प्रदाता द्वारा अधिनियम, विनियमों, आदि के अनुसार कार्य करना-प्रत्येक प्रणाली प्रदाता, इस अधिनियम के उपबंध, विनियमों, प्रणाली भागीदारों के बीच संबंधों को शासित करने वाली संविदा, उन नियमों और विनियमों, जो संदाय प्रणाली के प्रचालन से संबंधित है और उन शर्तों का, जिनके अधीन प्राधिकार जारी किया गया है और रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर दिए गए निदेशों के अनुसार संदाय प्रणाली का प्रचालन करेगा ।

21. प्रणाली प्रदाता के कर्तव्य-(1) प्रत्येक प्रणाली प्रदाता विद्यमान या भावी प्रणाली भागीदारों को, निबंधनों और शर्तों का प्रकटन करेगा, जिसके अंतर्गत संदाय प्रणाली के अधीन प्रभार और दायित्व की परिसीमाएं भी हैं, उनको संदाय प्रणाली के प्रचालन, नेटिंग व्यवस्थाओं को शासित करने वाले नियमों और विनियमों और अन्य सुसंगत दस्तावेजों की प्रतियों का प्रदाय करेगा ।

(2) प्रत्येक प्रणाली प्रदाता का यह कर्तव्य होगा कि वह इस अधिनियम के अधीन अवधारित मानकों को बनाए रखे ।

22. संदाय प्रणाली में दस्तावेजों को गोपनीय रखने का कर्तव्य-(1) प्रणाली प्रदाता, किसी अन्य व्यक्ति को किसी दस्तावेज या उसके भाग की विद्यमानता या अंतर्वस्तु या प्रणाली भागीदारों द्वारा उसे दी गई किसी अन्य जानकारी को तब के सिवाय प्रकटित नहीं करेगा, जब ऐसा प्रकटन इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अपेक्षित हो या ऐसा प्रकटन संबद्ध प्रणाली भागीदारों की अभिव्यक्त या विवक्षित सहमति से किया गया हो या जहां ऐसा प्रकटन सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय या किसी कानूनी प्राधिकारी द्वारा कानून द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में पारित आदेशों के अनुपालन में हो ।

(2) बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 (1891 का 18) के उपबंध प्रणाली प्रदाता द्वारा किसी भी प्ररूप में रखी गई जानकारी या दस्तावेजों या अन्य बहियों के संबंध में लागू होंगे ।

23. निपटान और शुद्ध अवधारण-(1) प्रणाली भागीदारों के बीच संदाय, बाध्यताएं और निपटान अनुदेश, संदाय प्रणाली को प्राधिकार जारी करते समय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित, यथास्थिति, सकल और शुद्ध अवधारण प्रक्रिया के अनुसार अवधारित किए जाएंगे ।

(2) जहां संदाय प्रणाली के प्रचालन के लिए उपबंध करने वाले नियम प्रणाली भागीदारों और संदाय प्रणाली के बीच हानियों के संवितरण के लिए प्रक्रिया उपदर्शित करते हैं, वहां ऐसी प्रक्रिया, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, प्रभावी होगी ।

(3) ऐसी प्रक्रिया के अधीन किया गया कोई निपटान अंतिम और अप्रतिसंहरणीय होगा ।

(4) जहां किसी प्रणाली भागीदार को सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित किया जाता है या उसका विघटन किया जाता है या समापन हो जाता है, तब कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यथास्थिति, न्यायनिर्णयन या विघटन या समापन का आदेश, ऐसे किसी निपटान पर जो अंतिम और अप्रतिसंहरणीय हो गया है और नियमों, विनियमों या उपविधियों के अनुसार प्रणाली भागीदार द्वारा अभिदाय किए गए किसी सांपार्श्विक अभिदाय के निपटारे मद्दे विनियोग करने के प्रणाली प्रदाता के अधिकार को या ऐसे प्रणाली प्रदाता की अन्य बाध्यताओं पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा ।

स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस धारा में निर्दिष्ट निपटान, चाहे सकल हो या शुद्ध वहां तक अंतिम और अप्रतिसंहरणीय है, जहां तक ऐसे निपटान के परिणामस्वरूप संदेय धन, प्रतिभूतियां, विदेशी मुद्रा या व्युत्पन्नी या अन्य संव्यवहार अवधारित कर दिए जाते हैं, चाहे ऐसा धन प्रतिभूति या विदेशी मुद्रा या व्युत्पन्नी या अन्य संव्यवहार का संदाय वास्तव में किया गया हो या नहीं ।

अध्याय 6

विवादों का निपटान

24. विवादों का निपटान-(1) प्रणाली प्रदाता, ऐसे प्रणाली भागीदारों से भिन्न, जो संदाय प्रणाली के प्रचालन से संबद्ध किसी विषय के संबंध में प्रणाली भागीदारों के बीच विवादों का विनिश्चय करने के लिए विवाद के पक्षकार हैं, तीन से अन्यून प्रणाली भागीदारों से मिलकर बनने वाले पैनल का सृजन करने के लिए अपने नियमों या विनियमों में उपबंध करेगा ।

(2) जहां संदाय प्रणाली के प्रचालन से संबद्ध किसी विषय के संबंध में दो या अधिक प्रणाली भागीदारों के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है वहां, प्रणाली प्रदाता ऐसे विवाद को उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट पैनल को निर्दिष्ट करेगा ।

(3) जहां किसी प्रणाली भागीदार और प्रणाली प्रदाता के बीच या प्रणाली प्रदाताओं के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है या जहां उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट पैनल के विनिश्चय से किसी प्रणाली भागीदार का समाधान नहीं होता है, वहां ऐसा विवाद रिजर्व बैंक को निर्दिष्ट किया जाएगा ।

(4) उपधारा (3) के अधीन न्यायनिर्णयन के लिए रिजर्व बैंक को निर्दिष्ट विवाद का निपटारा रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा, जिसे इस निमित्त साधारणतया या विशेषतया प्राधिकृत किया गया हो, किया जाएगा और रिजर्व बैंक का विनिश्चय अंतिम और आबद्धकर होगा ।

(5) जहां कोई विवाद प्रणाली प्रदाता या प्रणाली भागीदार की हैसियत में कार्य करते समय रिजर्व बैंक और किसी अन्य प्रणाली प्रदाता या प्रणाली भागीदार के बीच उत्पन्न होता है वहां मामले को केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जो विवाद के निपटारे के लिए संयुक्त सचिव से अन्यून पंक्ति के किसी अधिकारी को प्राधिकृत कर सकेगी और ऐसे अधिकारी का विनिश्चय अंतिम होगा ।

25. खाते में निधि की अपर्याप्तता आदि के कारण इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण का अनादरण-जहां किसी व्यक्ति द्वारा उसके द्वारा रखे गए लेखा द्वारा किए गए किसी इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण को इस आधार पर निष्पादित नहीं किया जा सकता है कि उस खाते में अंतरण अनुदेश का समादरण करने के लिए उस खाते में जमा धन पर्याप्त नहीं है या बैंक के साथ किए गए किसी करार द्वारा उस खाते से संदाय किए जाने के लिए की गई व्यवस्था से वह रकम अधिक है वहां ऐसे व्यक्ति के बारे में समझा जाएगा मानो उसने अपराध किया है, और वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी अवधि के लिए कारावास से, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या ऐसे जुर्माने से, जो इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण की रकम से दोगुने तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा :

परन्तु इस धारा की कोई बात, तब तक लागू नहीं होगी, जब तक कि-

(क) इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण किसी ऋण या अन्य दायित्व को संपूर्णतः या भागतः उन्मोचित करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को धन की किसी रकम का संदाय करने के लिए न किया गया हो;

(ख) इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण प्रणाली प्रदाता द्वारा जारी सुसंगत प्रक्रिया संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार न किया गया हो;

(ग) फायदाग्राही इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण के अनादरण की बाबत संबंधित बैंक से उसे सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण करने की किसी व्यक्ति को लिखित सूचना देकर उक्त धन की रकम का संदाय करने के लिए मांग न की हो; और

(घ) इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण करने वाला व्यक्ति उक्त सूचना की प्राप्ति के पन्द्रह दिन के भीतर फायदाग्राही को उक्त रकम का संदाय करने में असफल न रहा हो ।

(2) जब तक कि प्रतिकूल साबित न हो जाए यह उपधारणा की जाएगी कि इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण किसी ऋण या अन्य दायित्व के संपूर्ण रूप में या भागरूप में उन्मोचन के लिए किया गया था ।

(3) उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध के अभियोजन में यह प्रतिरक्षा नहीं होगी कि उस व्यक्ति के पास, जिसने किसी अनुदेश, प्राधिकरण आदेश या करार के माध्यम से इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण आरंभ किया था, ऐसे अनुदेश, प्राधिकरण आदेश या करार के समय, यह विश्वास किए जाने का कारण नहीं था कि उसके खाते में जमा इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण को प्रभावी बनाने के लिए अपर्याप्त है ।

(4) न्यायालय इस धारा के अधीन प्रत्येक कार्यवाही के संबंध में, बैंक से इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण के अनादरण को रेखांकित करते हुए कोई संसूचना प्रस्तुत करने पर ऐसे इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण के अनादरण के तथ्य के बारे में तब तक उपधारणा करेगा जब तक कि ऐसे तथ्य को नासाबित न कर दिया हो ।

(5) परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) के अध्याय 17 के उपबंध इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण के अनादरण को उस सीमा तक लागू होंगे, जिस तक परिस्थितियां स्वीकार करें ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए ऋण या अन्य दायित्व" से, यथास्थिति, विधिक रूप से प्रवर्तनीय कोई ऋण या अन्य दायित्व अभिप्रेत है ।

अध्याय 7

अपराध और शास्तियां

26. शास्तियां-(1) जहां कोई व्यक्ति धारा 4 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा या धारा 7 के अधीन निबंधनों और शर्तों के अध्यधीन जारी प्राधिकार का अनुपालन करने में असफल रहेगा, वहां वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक मास से कम की नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक करोड़ रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान वह ऐसा अनुपालन करने में ऐसा उल्लंघन या असफलता जारी रहती है, अतिरिक्त जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(2) जो कोई प्राधिकार के लिए किसी आवेदन में, या इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन या उसके किसी उपबन्ध के अधीन या प्रयोजन के लिए दिए जाने के लिए अपेक्षित किसी विवरणी में या अन्य दस्तावेज या किसी अपेक्षित जानकारी में जानबूझकर कोई ऐसा कथन करता है जो किसी तात्त्विक विशिष्ट में मिथ्या है, जिसके बारे में वह जानता है कि वह मिथ्या है या जानबूझकर किसी तात्त्विक कथन को करने का लोप करेगा; वह ऐसी अवधि के कारावास से जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपए से कम का नहीं होगा और जो पचास लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(3) यदि कोई व्यक्ति किसी कथन, जानकारी, विवरणी या अन्य दस्तावेज को पेश करने में या कोई कथन, जानकारी, विवरणी या अन्य दस्तावेज देने में, जिसे देना धारा 12 या धारा 13 के अधीन उसका कर्तव्य है या किसी अधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण की अपेक्षा है, जिसमें किसी संदाय प्रणाली के प्रचालन से संबंधित किसी प्रश्न का कोई उत्तर देना धारा 14 के अधीन उसका कर्तव्य है, असफल होगा तो वह जुर्माने से, जो प्रत्येक अपराध के संबंध में दस लाख रुपए तक का हो सकेगा और यदि वह लगातार ऐसे इन्कार करता है, तो ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा अपराध जारी रहता है, पच्चीस हजार रुपए तक हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(4) यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी जानकारी का प्रकटन करेगा, जो धारा 22 के अधीन प्रतिषिद्ध है, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, या ऐसे प्रकटन के कार्य द्वारा कारित नुकसानी की रकम के दोगुने के बराबर रकम से, इनमें से जो भी अधिक हो, या दोनों से, दंडनीय होगी ।

(5) जहां इस अधिनियम के अधीन जारी किसी निदेश का अनुपालन, रिजर्व बैंक द्वारा अनुबंधित अवधि के भीतर नहीं किया जाता है या जहां ऐसी कोई अवधि अनुबंधित नहीं है, किसी युक्तियुक्त समय के भीतर; या जहां धारा 30 के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा अधिरोपित शास्ति का संदाय आदेश की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर नहीं किया गया है, वहां प्रणाली प्रदाता या प्रणाली भागीदार जो ऐसे निदेश या जुर्माने का संदाय करने में असफल रहा है ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक मास से कम की नहीं होगी किंतु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक करोड़ रुपए तक हो सकेगा या दोनों से और जहां ऐसे निदेशों का अनुपालन करने में असफलता जारी रहती है तो अतिरिक्ति जुर्माने से, जो पहले उल्लंघन के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान उल्लंघन जारी रहता है, एक लाख रुपए तक हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(6) यदि इस अधिनियम के किसी उपबंध का उल्लंघन किया जाता है या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी विनियम, किए गए आदेश या अधिरोपित शर्त की किसी अन्य अपेक्षा का अनुपालन करने में व्यतिक्रम किया जाता है, जिसके संबंध में कोई शास्ति विनिर्दिष्ट नहीं की गई है तो, यथास्थिति, ऐसे उल्लंघन या व्यतिक्रम के लिए दोषी व्यक्ति जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक हो सकेगा और जहां ऐसा उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहने वाला है, वहां ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से जो उस प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

27. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी विनियम, किए गए निदेश या आदेश का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति कंपनी है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस उल्लंघन के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे उल्लंघन के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई की जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगेः

परंतु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी व्यक्ति को इस उपधारा में उपबंधित दंड का दायी नहीं बनाएगी यदि, वह यह साबित कर देता है कि उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे उल्लंघन के किए जाने को निवारित करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी विनियम, निदेश या आदेश के किसी उपबंध के उल्लंघन के अधीन दंडनीय कोई अपराध, किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया हो या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई की जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या अन्य व्यष्टि संगम भी है; और

(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

28. अपराधों का संज्ञान-(1) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा जो इस निमित्त साधारणतः या विशेष रूप से प्राधिकृत हो, की गई लिखित शिकायत के सिवाय नहीं करेगा और महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्नतर कोई न्यायालय ऐसे किसी अपराध का विचारण नहीं करेगाः

परंतु न्यायालय, इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण के अनादरण से व्यथित व्यक्ति द्वारा लिखित में किए गए परिवाद पर धारा 25 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान ले सकेगा ।

(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, न्यायालय, रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी को शिकायत फाइल करने के लिए वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा, किन्तु मजिस्ट्रेट स्वविवेक पर प्रक्रिया के किसी प्रक्रम पर शिकायतकर्ता को वैयक्तिक रूप से हाजिर होने का निदेश दे सकेगा ।

29. जुर्माने का उपयोजन-इस अधिनियम के अधीन कोई जुर्माना अधिरोपित करने वाला न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि जुर्माने को पूर्णतः या उसके किसी भाग का उपयोग कार्यवाहियों के खर्चे का संदाय करने में या उसके संबंध में किया जाए ।

30. रिजर्व बैंक की जुर्माने अधिरोपित करने की शक्ति-(1) धारा 26 में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई उल्लंघन या व्यतिक्रम, यथास्थिति, धारा 26 की उपधारा (2) या उपधारा (6) में निर्दिष्ट प्रकृति का है, तो रिजर्व बैंक उल्लंघन या किसी व्यतिक्रम कारित करने वाले व्यक्ति पर ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा जो पांच लाख रुपए से या ऐसे उल्लंघन या व्यतिक्रम में अंतर्वलित रकम के दोगुने से अधिक न होगी, जहां ऐसी रकम निर्धारण योग्य हो, उनमें से जो अधिक हो, और जहां ऐसा व्यतिक्रम जारी रहता है, तो ऐसी अतिरिक्त शास्ति अधिरोपित कर सकेगा जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा व्यतिक्रम जारी रहता है, पच्चीस हजार रुपए तक हो सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन अधिरोपित शास्ति के प्रयोजन के लिए, रिजर्व बैंक, ऐसे व्यतिक्रमी को उससे कारण बताने की अपेक्षा करते हुए सूचना भेजेगा, कि क्यों न सूचना में विनिर्दिष्ट रकम शास्ति के रूप में अधिरोपित की जाए और ऐसे व्यतिक्रमी को सुनवाई का उचित अवसर भी दिया जाएगा ।

(3) इस धारा के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा अधिरोपित कोई शास्ति रिजर्व बैंक द्वारा जारी सूचना को व्यतिक्रमी पर तामील होने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर संदेय होगी और उसी अवधि के भीतर उक्त राशि का संदाय करने में व्यक्ति के असफल रहने की दशा में वह उस क्षेत्र पर, जहां व्यतिक्रमी कंपनी का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय या व्यक्ति का कारबार का कार्यालय स्थित है, अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा किए गए किसी संदाय पर वसूल की जा सकेगीः

परंतु ऐसा कोई निदेश रिजर्व बैंक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा किए गए किसी आवेदन पर किए जाने के सिवाय नहीं किया जाएगा ।

(4) रिजर्व बैंक शास्ति की रकम की वसूली या व्यतिक्रमी के चालू खाते, यदि कोई हो, से विकलित करके व्यतिक्रमी द्वारा धारित प्रतिभूतियों के परिसमापन द्वारा या इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में कर सकेगा ।

(5) वह न्यायालय, जो उपधारा (3) के अधीन निदेश करता है, व्यतिक्रमी द्वारा संदेय रकम विनिर्दिष्ट करते हुए प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र उसी रीति में प्रवर्तनीय होगा मानो वह सिविल वाद में न्यायालय द्वारा की गई डिक्री हो ।

(6) जहां किसी न्यायालय में किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई शिकायत, यथास्थिति, उपधारा (2) में या, धारा 26 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट स्वरूप के उल्लंघन या व्यतिक्रम के संबंध में फाइल की गई है वहां इस धारा के अधीन उस व्यक्ति पर कोई शास्ति अधिरोपित करने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी ।

31. अपराध के शमन की शक्ति-(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी उल्लंघन के लिए इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध, जो केवल कारावास से या कारावास और जुर्माने से भी दंडनीय कोई अपराध नहीं है, किसी कार्यवाही के संस्थित होने के पहले या पश्चात् ऐसा उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति से आवेदन की प्राप्ति पर, रिजर्व बैंक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा शमनीय होगा ।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी उल्लंघन का शमन किया गया है, वहां, यथास्थिति, कोई कार्यवाही या और कार्यवाहियां इस धारा के अधीन ऐसे उल्लंघन कारित करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध इस प्रकार शमन किए गए उल्लंघन की बाबत, यथास्थिति, संस्थित या जारी नहीं की जाएंगी ।

अध्याय 8

प्रकीर्ण

32. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।

33. शास्ति की वसूली का ढंग-(1) धारा 30 के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा व्यतिक्रमी पर अधिरोपित शास्ति किसी ऐसे व्यक्ति को, जिससे व्यतिक्रमी को कोई रकम शोध्य है, उससे यह अपेक्षा करते हुए सूचना जारी करके वसूल की जा सकेगी कि वह उसके द्वारा व्यतिक्रमी को संदेय रकम में से शास्ति के रूप में रिजर्व बैंक को संदेय रकम की कटौती करे और उसका रिजर्व बैंक को संदाय करे ।

(2) इस धारा में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अधीन कोई सूचना जारी की जाती है, ऐसी सूचना का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा और विशेष रूप से, जहां ऐसी सूचना किसी डाकघर, बैंक या किसी बीमाकर्ता को जारी की जाती है, वहां किसी प्रतिकूल नियम, व्यवहार या अपेक्षा के होते हुए भी कोई प्रविष्टि, पृष्ठांकन या ऐसी ही कोई समान क्रिया करने के प्रयोजन के लिए किसी पास बुक, निक्षेप रसीद, पालिसी या किसी अन्य दस्तावेज को प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा ।

(3) किसी ऐसी संपत्ति से संबंधित कोई दावा, जिसकी बाबत इस उपधारा के अधीन कोई सूचना जारी की गई है, जो सूचना की तारीख के पश्चात् उद्भूत हुआ है, सूचना में अंतर्विष्ट किसी मांग के प्रति शून्य होगा ।

(4) जहां ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अधीन सूचना भेजी गई है, शपथ पर कथन के द्वारा यह आक्षेप करता है कि मांग की गई राशि या उसका कोई भाग व्यतिक्रमी को शोध्य नहीं है या यह कि वह व्यतिक्रमी के लिए या उसकी ओर से कोई धन धारण नहीं करता है तो इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात ऐसे व्यक्ति से, यथास्थिति, ऐसी राशि या उसके भाग या संदाय करने की अपेक्षा करने वाली नहीं समझी जाएगी, किन्तु यदि यह पता चलता है कि ऐसा कथन किसी विशिष्ट तथ्य के संबंध में मिथ्या था तो ऐसा व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से, सूचना की तारीख को व्यतिक्रमी के प्रति अपने स्वयं के दायित्व की सीमा तक या रिजर्व बैंक द्वारा व्यतिक्रमी पर अधिरोपित शास्ति की सीमा तक, इनमें से जो भी कम हो, रिजर्व बैंक के प्रति दायी होगा ।

(5) रिजर्व बैंक किसी भी समय या समय-समय पर, इस धारा के अधीन जारी किसी सूचना को संशोधित या प्रतिसंहृत कर सकेगा या ऐसी सूचना के अनुसरण में संदाय करने के समय को विस्तारित कर सकेगा ।

(6) रिजर्व बैंक इस धारा के अधीन जारी किसी सूचना के अनुपालन में उसे संदत्त किसी रकम के लिए रसीद प्रदान करेगा और इस प्रकार संदाय करने वाला व्यक्ति इस प्रकार संदत्त रकम की सीमा तक व्यतिक्रमी के प्रति अपने दायित्व से पूर्णतया उन्मोचित होगा ।

(7) इस धारा के अधीन कोई सूचना प्राप्त होने के पश्चात् व्यतिक्रमी के किसी दायित्व का उन्मोचन करने वाला कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से रिजर्व बैंक के प्रति इस प्रकार उन्मोचित व्यतिक्रमी के संबंध में अपने स्वयं के दायित्व की सीमा तक या रिजर्व बैंक द्वारा व्यतिक्रमी पर अधिरोपित शास्ति की सीमा तक, उनमें से जो भी कम हो, दायी होगा ।

(8) यदि ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे इस धारा के अधीन कोई सूचना भेजी गई है, उसके अनुसरण में रिजर्व बैंक को संदाय करने में असफल रहता है तो उसे सूचना में विनिर्दिष्ट रकम के संबंध में व्यतिक्रमी समझा जाएगा और उस रकम की वसूली के लिए उसके विरुद्ध इस प्रकार आगे और कार्यवाहियां की जा सकेंगी मानो वह इस धारा में उपबंधित रीति में उससे शोध्य बकाया हो ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, व्यतिक्रमी" से ऐसा कोई व्यक्ति या प्रणाली प्रदाता या प्रणाली भागीदार अभिप्रेत है, जिस पर रिजर्व बैंक द्वारा धारा 30 के अधीन कोई शास्ति अधिरोपित की गई है ।

34. स्टाक एक्सचेंजों या स्टाक एक्सचेंजों के समाशोधन निगमों को अधिनियम का लागू होना-इस अधिनियम में अंतर्विष्ट कोई बात स्टाक एक्सचेंजों या स्टाक एक्सचेंजों के समाशोधन निगमों को लागू नहीं होगी ।

35. कतिपय व्यक्तियों का लोक सेवक समझा जाना-रिजर्व बैंक के ऐसे प्रत्येक अधिकारी को, जिसे इस अधिनियम के अधीन कोई शक्ति सौंपी गई है, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक माना जाएगा ।

36. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम, उसके अधीन बनाए गए किसी विनियम, किए गए किसी आदेश या दिए गए निदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक या उसके किसी अधिकारी के विरुद्ध नहीं होगी ।

37. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, जो उसे कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होंः

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके किए जाने के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

38. रिजर्व बैंक की विनियम बनाने की शक्ति-(1) रिजर्व बैंक, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए इस अधिनियम से सुसंगत विनियम अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः -

(क) उपधारा (2) के अधीन गठित समिति की शक्तियां और कृत्य, उसके अधिवेशनों का समय और स्थान और अपने अधिवेशनों में धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन उसके द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (जिसके अंतर्गत ऐसे अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है);

(ख) वह प्ररूप और रीति, जिसमें धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन, किसी संदाय प्रणाली के प्रारंभ के लिए या चलाने हेतु प्राधिकार के लिए कोई आवेदन किया जाएगा, और वह फीस, जो ऐसे आवेदन के साथ होगी;

(ग) वह प्ररूप, जिसमें धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन इस अधिनियम के अधीन किसी संदाय प्रणाली का प्राधिकार जारी किया जाएगा;

(घ) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन संदाय प्रणाली द्वारा अनुपालन किए जाने वाले मानकों का अवधारण करने के संबंध में संदाय अनुदेशों और अन्य विषयों का प्रारूपः

(ङ) ऐसे अंतराल, जिन पर और प्ररूप और रीति, जिसमें धारा 12 के अधीन रिजर्व बैंक द्वारा अपेक्षित सूचना या विवरणियां प्रस्तुत की जाएंगी;

(च) ऐसे अन्य विषय, जिनका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किए जाएं ।

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया कोई विनियम ऐसी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तारीख से (न कि इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्वतर तारीख से) प्रभावी होगा, जो विनियम में विनिर्दिष्ट की जाए ।

(4) रिजर्व बैंक द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा और केन्द्रीय सरकार उसकी एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् यह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

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