निष्क्रान्त निक्षेप अन्तरण अधिनियम, 1954
(1954 का अधिनियम संख्यांक 15)
[26 मार्च, 1954]
पाकिस्तान के साथ करार के अनुसरण में, निष्क्रान्तों के कतिपय
निक्षेपों के उस देश को अन्तरण, विस्थापित व्यक्तियों
के ऐसे निक्षेपों की भारत में प्राप्ति और
तत्संसक्त विषयों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
निष्क्रान्तों के कतिपय निक्षेपों के पाकिस्तान को अन्तरण, विस्थापित व्यक्तियों के ऐसे ही निक्षेपों की भारत में प्राप्ति और तत्संसक्त विषयों के लिए पाकिस्तान के साथ करार हो गया है ;
अतः संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम निष्क्रान्त निक्षेप अन्तरण अधिनियम, 1954 है ।
(2) इसका विस्तार [उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है जो 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पहले आसाम, पश्चिमी बंगाल, त्रिपुरा, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर राज्यों में समाविष्ट थे ।]
(3) यह फरवरी, 1954 के प्रथम दिन को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “अभिरक्षक" से धारा 3 के अधीन नियुक्त निक्षेपों का अभिरक्षक अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत निक्षेपों का सहायक अभिरक्षक आता है ;
(ख) “निक्षेप" से अभिप्रेत है-
(i) किसी सिविल या राजस्व न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही की बाबत उसकी अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन कोई जंगम सम्पत्ति ; अथवा
(ii) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, किसी प्रतिपाल्य अधिकरण के अधीक्षण के अधीन या उसकी अभिरक्षा में कोई जंगम सम्पत्ति चाहे ऐसी जंगम सम्पत्ति प्रतिपाल्य अधिकरण की वास्तविक अभिरक्षा में हो या उसके निमित्त किसी अन्य प्राधिकारी की अभिरक्षा में; अथवा
(iii) प्रबंधक की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन कोई जंगम सम्पत्ति,
और इसके अंतर्गत, ऐसे किसी सिविल या राजस्व न्यायालय की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन अथवा ऐसे प्रतिपाल्य अधिकरण के अधीक्षण के अधीन या उसकी अभिरक्षा में, अथवा ऐसे प्रबंधक की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन कोई प्रतिभूतियां, बीमा पालिसियां और परक्राम्य लिखतें आती हैं ।
स्पष्टीकरण 1-“प्रतिभूति" के अंतर्गत, किसी निगमित निकाय में या उसके शेयर पर्णक, स्टाक, बन्धपत्र, डिबेंचर, डिबेंचर स्टाक या वैसी ही प्रकृति की अन्य विपण्य प्रतिभूतियां, तथा सरकारी प्रतिभूतियां, भी आती हैं ।
स्पष्टीकरण 2- जहां किसी सिविल या राजस्व न्यायालय की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन अथवा प्रतिपाल्य अधिकरण के अधीक्षण के अधीन या उसकी अभिरक्षा में, अथवा प्रबंधक की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन कोई निक्षेप निष्क्रान्त सम्पत्ति के अभिरक्षक में निष्क्रान्त सम्पत्ति के रूप में निहित हो गया है, वहां ऐसे निक्षेप को, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, ऐसे सिविल या राजस्व न्यायालय की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन अथवा प्रतिपाल्य अधिकरण के अधीक्षण के अधीन या उसकी अभिरक्षा में, अथवा प्रबंधक की अभिरक्षा में या उसके नियंत्रण के अधीन समझा जाएगा ।
(ग) “विस्थापित व्यक्ति" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने भारत और पाकिस्तान के डोमिनियनों के स्थापित हो जाने के कारण अथवा किसी ऐसे क्षेत्र में जो अब पाकिस्तान का भाग है, सिविल उपद्रवों या ऐसे उपद्रवों के भय के कारण, मार्च, 1947 के प्रथम दिन को या उसके पश्चात्, ऐसे क्षेत्र में अपना निवास-स्थान छोड़ दिया है, या जो उससे विस्थापित कर दिया गया है और जो तत्पश्चात् भारत में निवास कर रहा है;
(घ) “निष्क्रान्त" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने भारत और पाकिस्तान के डोमिनियनों के स्थापित हो जाने के कारण अथवा सिविल उपद्रवों या ऐसे उपद्रवों के भय के कारण, मार्च, 1947 के प्रथम दिन को या उसके पश्चात्, उन राज्यक्षेत्रों में जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, कोई स्थान छोड़ दिया है, और जो अब किसी ऐसे स्थान में, जो पाकिस्तान का भाग है, निवास कर रहा है;
(ङ) “प्रबंधक" से विल्लंगमग्रस्त सम्पदाओं के संबंध में तत्समय प्रवृत्त किसी निधि के अधीन नियुक्त किसी विल्लंगमग्रस्त सम्पदा का प्रबंधक अभिप्रेत है;
(च) “अन्तरणीय निक्षेप" से वह निक्षेप अभिप्रेत है जिसमें किसी निष्क्रान्त का कोई अधिकार या हित इस अधिकार या हित के विस्तार तक है;
(छ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
3. निक्षेपों के अभिरक्षक और सहायक अभिरक्षकों की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निक्षेपों का अभिरक्षक और निक्षेपों के उतने सहायक अभिरक्षक जितने आवश्यक हों, इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अभिरक्षक और सहायक अभिरक्षकों पर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन करने के प्रयोजनार्थ नियुक्त कर सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निक्षेपों का अभिरक्षक और सहायक अभिरक्षक इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अपने पर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन, केन्द्रीय सरकार के साधारण अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन करेंगे, तथा केंद्रीय सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा, उनके बीच कार्य के वितरण के लिए उपबंध कर सकेगी ।
(3) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निक्षेपों के सहायक अभिरक्षक इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अपने पर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन, अभिरक्षक के साधारण अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन करेंगे ।
4. समूह-प्रवास-क्षेत्र में निक्षेपों का अन्तरण-(1) जहां किसी समूह-प्रवास क्षेत्र में स्थित सिविल या राजस्व न्यायालय या प्रतिपाल्य अधिकरण या ऐसे किसी क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले प्रबंधक का,-
(क) संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 (1890 का 8) के अधीन अधिकारिता का प्रयोग करने वाले सिविल न्यायालय से भिन्न सिविल या राजस्व न्यायालय की या प्रबंधक की दशा में, समाधान हो जाता है कि किसी निक्षेप में हितबद्ध सभी पक्षकार मुसलमान हैं;
(ख) संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 (1890 का 8) के अधीन अधिकारिता का प्रयोग करने वाले सिविल न्यायालय की दशा में, समाधान हो जाता है कि किसी निक्षेप में हितबद्ध संरक्षक और अवयस्क दोनों मुसलमान हैं;
(ग) अपने अधीक्षण या अभिरक्षा में कोई निक्षेप रखने वाले प्रतिपाल्य अधिकरण की दशा में, समाधान हो जाता है कि प्रतिपाल्य मुसलमान है,
तो, यथास्थिति, सिविल या राजस्व न्यायालय अथवा प्रतिपाल्य अधिकरण अथवा प्रबंधक इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, निक्षेप को उससे संबंधित अभिलेखों के साथ, पाकिस्तान के ऐसे प्राधिकृत अधिकारी या प्राधिकारी को अन्तरित करेगा जिसे केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे :
परन्तु जहां ऐसे किसी सिविल या राजस्व न्यायालय अथवा प्रतिपाल्य अधिकरण अथवा प्रबंधक की राय में, किसी निक्षेप में हितबद्ध व्यक्तियों में से कोई निष्क्रांत नहीं है, वहां निक्षेप इस धारा के अधीन पाकिस्तान को अन्तरित नहीं किया जाएगा ।
(2) प्रत्येक सिविल या राजस्व न्यायालय और प्रत्येक प्रतिपाल्य अधिकरण और प्रबंधक, यथाशक्य शीघ्र, अभिरक्षक को ऐसे रूप में, जो विहित किया जाए, उपधारा (1) के अधीन पाकिस्तान को अन्तरित सब निक्षेपों की विशिष्टियां भेजेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में, “समूह-प्रवास-क्षेत्र" पद से वे राज्यक्षेत्र अभिप्रेत हैं [जो 1 नवंबर, 1956 के ठीक पहले निम्नलिखित राज्यों या क्षेत्रों में समाविष्ट थे], अर्थात् :-
(i) पंजाब राज्य;
(ii) पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ;
(iii) अजमेर राज्य;
(iv) दिल्ली राज्य;
(v) हिमाचल प्रदेश राज्य;
(iv) राजस्थान राज्य में अलवर, भरतपुर और बीकानेर जिले, तथा उत्तर प्रदेश राज्य में सहारनपुर, देहरादून, मेरठ और मुजफ्फरनगर जिले ।
5. कतिपय अन्य निक्षेपों के पाकिस्तान को अन्तरण के लिए प्रक्रिया-(1) जहां या तो पाकिस्तान के किसी ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, इस निमित्त प्राप्त अनुरोध पर या अपने को उपलब्ध किसी अन्य जानकारी पर, अभिरक्षक की राय है कि कोई ऐसा अन्तरणीय निक्षेप है जिसको धारा 4 के उपबन्ध लागू नहीं होते, वहां वह उससे संबंधित अभिलेख किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी से मंगा सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा ।
(2) यदि किसी ऐसे निरीक्षण के, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट है, करने के पश्चात् और मामले में ऐसी अतिरिक्त जांच के, जो विहित की जाए, करने के पश्चात् अभिरक्षक का समाधान हो जाता है कि निक्षेप इस अधिनियम के अर्थ में अन्तरणीय निक्षेप है तो वह आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा कि निक्षेप पाकिस्तान के ऐसे प्राधिकृत अधिकारी या प्राधिकारी को अन्तरित किया जाए जिसे केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे और कोई न्यायालय या अन्य प्राधिकारी जो ऐसे किसी निक्षेप को अपनी अभिरक्षा में या अपने नियंत्रण के अधीन धारण करता है, उस निदेश का अनुपालन करेगा ।
(3) इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निक्षेप की बाबत, ऐसे निक्षेप में किसी निष्क्रांत के अधिकार या हित का परिमाण सुगमता से अभिनिश्चित नहीं किया जा सकता है, या निक्षेप की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, अभिरक्षक की राय में ऐसे निक्षेप में निष्क्रांत के अधिकार या हित को अन्य व्यक्तियों के अधिकार या हित से पृथक् करना साध्य नहीं है वहां अभिरक्षक निक्षेप का कोई भी भाग पाकिस्तान को अन्तरित नहीं करेगा ।
6. अन्तरणीय निक्षेपों से संबंधित अभिलेखों का अन्तरण-(1) जहां किसी अन्तरणीय निक्षेप के धारा 5 के उपबंधों के अधीन पाकिस्तान को अन्तरित किए जाने का निदेश दिया जाता है, वहां अभिरक्षक निक्षेप से संबंधित अभिलेख, या यदि ऐसा करना समीचीन है तो अभिलेख के उतने भाग की केवल प्रमाणित प्रतिलिपि, जो अभिरक्षक की राय में उस मामले के लिए तात्त्विक है, पाकिस्तान की सरकार को या ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी को, जिसे निक्षेप अन्तरित किए जाने का निदेश दिया गया है, भेज सकेगा ।
(2) यदि उपधारा (1) के अनुसरण में केवल प्रमाणित प्रतिलिपि भेजी जाती है तो धारा 5 के अधीन अभिरक्षक के आदेश की प्रतिलिपि के साथ मूल अभिलेख उस न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को लौटा दिया जाएगा जिससे वह अभिप्राप्त किया गया था ।
7. पाकिस्तान को पारेषण के पहले निक्षेपों को धन में संपरिवर्तित करने की न्यायालय या अभिरक्षक की शक्ति- जहां किसी वस्तु का, जो अन्तरणीय निक्षेप है, पाकिस्तान को अन्तरण तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रतिषिद्ध है, वहां, यथास्थिति, किसी सिविल या राजस्व न्यायालय अथवा प्रतिपाल्य अधिकरण अथवा प्रबंधक अथवा अभिरक्षक के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसी वस्तु को ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, धन में संपरिवर्तित कर ले, तथा ऐसे संपरिवर्तन पर इस अधिनियम के उपबंध उसके आगमों को उसी प्रकार लागू होंगे जैसे कि वे अन्तरणीय निक्षेप को लागू होते हैं ।
8. अन्तरित निक्षेपों के बारे में अधिकारिता की समाप्ति-धारा 4 के अधीन किसी अन्तरणीय निक्षेप के अन्तरण पर, या धारा 5 के अधीन अभिरक्षक के आदेश के अनुसरण में, भारत के समस्त न्यायालय और प्राधिकारी, इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस प्रकार अन्तरित निक्षेप के संबंध में कोई अधिकारिता, जहां तक कि वह निक्षेप में किसी निष्क्रांत के अधिकार या हित से संबंधित है, रखने या उसका प्रयोग करने से परिविरत हो जाएंगे ।
9. पाकिस्तान से अन्तरित निक्षेपों की भारत में प्राप्ति-(1) अभिरक्षक के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह पाकिस्तान के किसी ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट किया जाए, अन्तरित किए गए किसी निक्षेप को भारत में किसी विस्थापित व्यक्ति के निक्षेप के रूप में प्राप्त करे और अपनी अभिरक्षा में धारण करे ।
(2) ऐसे किसी निक्षेप की प्राप्ति पर, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट है, अभिरक्षक उसकी सूचना ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, उन सब व्यक्तियों को, जो उसकी राय में निक्षेप में हितबद्ध हों, दिलवाएगा, और मामले में ऐसे व्यक्तियों को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् तथा निक्षेप से संबंधित किसी ऐसे अभिलेख का, जो पाकिस्तान से अन्तरित किया जाए, निरीक्षण करने के पश्चात् निक्षेप का निम्नलिखित रीति से व्ययन करेगा, अर्थात् :-
(क) यदि निक्षेप का हकदार केवल एक दावेदार है तो वह अथवा यदि सब दावेदार, जहां वे एक से अधिक हैं, अभिरक्षक के समक्ष हाजिर होते हैं तथा निक्षेप के वितरण के बारे में कोई विवाद नहीं है, तो, यथास्थिति, निक्षेप का उस दावेदार को संदाय करेगा अथवा निक्षेप का दावेदारों के बीच उनके द्वारा तय पाई गई रीति से वितरण करेगा;
(ख) यदि सब दावेदार अभिरक्षक के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं अथवा यदि ऐसे सब दावेदार उपस्थित होते हैं किन्तु निक्षेप के हकदार व्यक्ति या व्यक्तियों के बारे में या उनके बीच में उसके वितरण की रीति के बारे में सहमत नहीं होते हैं, तो अभिरक्षक निक्षेप और उससे संबंधित अभिलेखों को आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय को, जिसकी अधिकारिता में दावेदारों में से सब या उनकी अधिकतम संख्या निवास करती है, अथवा जहां दो या अधिक न्यायालयों की अधिकारिता में निवास करने वाले दावेदारों की संख्या बराबर है वहां उस न्यायालय को, जो अभिरक्षक की राय में, दावेदारों के लिए सर्वाधिक सुविधापूर्ण होगा, भेजेगा ।
(3) वह न्यायालय जिसको कोई निक्षेप और उससे संबंधित कोई अभिलेख उपधारा (2) के अधीन भेजे जाते हैं, मामले में ऐसी कार्यवाही करने के लिए अग्रसर होगा मानो निक्षेप उसके द्वारा अपने समक्ष की किसी कार्यवाही में दिए गए आदेश के अनुपालन में किया गया हो, और मामले में ऐसी अतिरिक्त जांच, जो वह ठीक समझता है, करने के पश्चात् निक्षेप उस व्यक्ति को अधिनिर्णीत या उन व्यक्तियों के बीच वितरित करेगा जो उसकी राय में उसका हकदार है या उसके हकदार हैं ।
(4) उपधारा (3) के अधीन किसी न्यायालय द्वारा पारित प्रत्येक आदेश की अपील उस न्यायालय में, जो ऐसे न्यायालय के विनिश्चयों की अपीलें सुनने के लिए प्राधिकृत है, हो सकेगी, यदि अपील में किए गए दावे की रकम या उसकी विषयवस्तु का मूल्य दो हजार रुपए से अधिक है ।
(5) किसी निक्षेप का इस धारा के उपबंधों के अनुसार व्ययन, अभिरक्षक का निक्षेप के बारे में किसी व्यक्ति के प्रति किसी भी दायित्व से उन्मोचन करेगा ।
10. अभिरक्षक की शक्तियां-अभिरक्षक को निम्नलिखित विषयों के बारे में वे सब शक्तियां प्राप्त होंगी जो वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-
(क) प्रकटीकरण और निरीक्षण;
(ख) साक्षियों को हाजिर कराना और उनके खर्चों के निक्षेप की अपेक्षा करना;
(ग) दस्तावेजों को पेश करने के लिए विवश करना;
(घ) शपथ पर साक्षियों की परीक्षा करना;
(ङ) शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(च) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना,
तथा वह स्वप्रेरणा से किसी भी व्यक्ति को, जिसका साक्ष्य उसे तात्त्विक प्रतीत होता है, समन कर सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा; तथा दंड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) की धारा 480 और धारा 482 के अर्थ में सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
स्पष्टीकरण- साक्षियों को हाजिर कराने के प्रयोजन के लिए, अभिरक्षक की अधिकारिता की स्थानीय सीमाएं वे स्थानीय सीमाएं होंगी जिनके लिए उसे नियुक्त किया गया है ।
11. सिविल न्यायालयों की अधिकारिता वर्जित-किसी भी सिविल न्यायालय को यह अधिकारिता न होगी कि वह किसी अन्तरणीय निक्षेप के अन्तरण या किसी ऐसे निक्षेप के जो किसी विस्थापित व्यक्ति के निक्षेप के रूप में पाकिस्तान से प्राप्त हुआ है, व्ययन के संबंध में अभिरक्षक द्वारा की गई किसी कार्रवाई या दिए गए किसी विनिश्चय की वैधता को प्रश्नगत करे ।
12. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए सरंक्षण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किए गए आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हों, केन्द्रीय सरकार या किसी अभिरक्षक या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
13. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम-
(क) अभिरक्षक और सहायक अभिरक्षकों की सेवा के निबंधन और शर्तें और उनकी अपनी-अपनी अधिकारिताओं की स्थानीय सीमाएं और उनके बीच कार्य का वितरण अथवा अभिरक्षक और सहायक अभिरक्षकों के कार्य का एक से दूसरे को अन्तरण परिनिश्चित कर सकेंगे;
(ख) यह रीति परिनिश्चित कर सकेंगे जिसमें निक्षेप और उनसे संबंधित अभिलेख पाकिस्तान को अन्तरित किए जा सकेंगे;
(ग) यह रीति विहित कर सकेंगे जिसमें इस अधिनियम के अधीन कोई जांच की जा सकेगी;
(घ) वह रीति विहित कर सकेंगे जिसमें कोई अन्तरणीय निक्षेप धारा 7 के अधीन धन में संपरिवर्तित किया जा सकेगा ;
(ङ) उन व्यक्तियों को जिनको, और वह रीति जिसमें, इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों की सूचनाएं, दी जाएंगी, विनिर्दिष्ट कर सकेंगे;
(च) वह रीति विहित कर सकेंगे जिसमें किसी अभिलेख की प्रमाणित प्रतिलिपियां इस अधिनियम के अधीन तैयार की जा सकेंगी तथा वे फीसें, यदि कोई हों, विहित कर सकेंगे जो ऐसी प्रमाणित प्रतिलिपियों की बाबत उद्गृहीत की जा सकेंगी;
(छ) वह प्ररूप विहित कर सकेंगे जिसमें इस अधिनियम के अधीन अभिरक्षक को कोई आवेदन किया जा सकेगा ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकती है, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्र के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, या दोनों सदन इस बात से सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम, यथास्थिति, तत्पश्चात् केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, तथापि, उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
14. [1954 के अध्यादेश सं० 6 का निरसन ।]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1960 (1960 का 58), धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।
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