संक्षिप्त नाम -
यह अधिनियम परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 कहा जा सकेगा।
स्थानीय क्षेत्र, हुण्डियों, आदि से सम्बन्धित प्रथाओं की व्यावृत्ति, प्रारम्भ -- इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है, किन्तु इसमें अन्तर्विष्ट कोई भी बात इंडियन पेपर करेंसी एक्ट, 1871 (1871 का 3) की धारा 21 पर या किसी प्राच्य भाषा में की किसी भी लिखत से सम्बन्धित किसी भी स्थानीय प्रथा पर प्रभाव नहीं डालता :
परन्तु ऐसी प्रथाएं लिखत के निकाय के किन्हीं भी ऐसे शब्दों द्वारा, जिनसे यह आशय उपदर्शित हो कि उसके पक्षकारों के विधिक सम्बन्ध इस अधिनियम द्वारा शासित होंगे, अपवर्जित की जा सकेगी; और यह पहली मार्च, 1882 को प्रवृत्त होगा।

