जहां यह रिपोर्ट की जाती है कि पागल बंदी अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है वहां प्रक्रिया-यदि ऐसा व्यक्ति धारा 330 की उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किया जाता है और, जेल में निरुद्ध व्यक्ति की दशा में कारागारों का महानिरीक्षक या पागलखाने में निरुद्ध व्यक्ति की दशा में उस पागलखाने की परिदर्शक या उनमें से कोई दो प्रमाणित करें कि उसकी या उनकी राय में वह व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है तो वह, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष उस समय, जिसे वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय नियत करे, लाया जाएगा और वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस व्यक्ति के बारे में धारा 332 के उपबंधों के अधीन कार्यवाही करेगा, और पूर्वोक्त महानिरीक्षक या परिदर्शकों का प्रमाणपत्र साक्ष्य के तौर पर ग्रहण किया जा सकेगा ।

