व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999
(1999 का अधिनियम संख्यांक 47)
[30 दिसम्बर, 1999]
व्यापार चिह्नों से संबंधित विधि का संशोधन और समेकन करने,
माल और सेवाओं के लिए व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण
और बेहतर संरक्षण और कपटपूर्ण चिह्नों
के प्रयोग का निवारण करने का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पचासवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे :
परन्तु इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारम्भ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।
2. परिभाषाएं और निर्वचन-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) अपील बोर्ड" से धारा 83 के अधीन स्थापित अपील बोर्ड अभिप्रेत है ;
(ख) समनुदेशन" से संबंधित पक्षकारों के कार्य द्वारा लिखित रूप में समनुदेशन अभिप्रेत है ;
(ग) सहयुक्त व्यापार चिह्न" से ऐसे व्यापार चिह्न अभिप्रेत हैं जो इस अधिनियम के अधीन सहयुक्त व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत समझे जाते हैं, या जिनका इस रूप में रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है ;
(घ) न्यायपीठ" से अपील बोर्ड की न्यायपीठ अभिप्रेत है ;
(ङ) प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न" से वह चिह्न अभिप्रेत है, जो माल के उद्गम, सामग्री, विनिर्माण के ढंग या सेवाओं के निष्पादन, क्वालिटी, शुद्धता या अन्य लक्षणों के बारे में चिह्न के स्वत्वधारी द्वारा प्रमाणित माल या सेवाओं की, जिनके संबंध में उनका व्यापार के अनुक्रम में उपयोग होता है, उस माल या उन सेवाओं से, जो इस प्रकार प्रमाणित नहीं है, सुभिन्नता दर्शाने योग्य हैं और जो अध्याय 9 के अधीन प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी की हैसियत से उस व्यक्ति के नाम में उस माल या सेवाओं की बाबत, उस रूप में रजिस्टर किए जाने योग्य हैं ;
(च) अध्यक्ष" से अपील बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है ;
(छ) सामूहिक चिह्न" से ऐसा व्यापार चिह्न अभिप्रेत है जो व्यक्तियों के संगम के सदस्यों के (जो भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) के अर्थान्तर्गत भागीदारी नहीं है), जो चिह्न का स्वत्वधारी है, माल या सेवाओं को अन्यों के माल या सेवाओं से सुभिन्न करता है ;
(ज) इतना समरूप जिससे धोखा हो जाए" यदि किसी चिह्न का किसी अन्य चिह्न से इतना निकट सादृश्य है कि धोखा या भ्रम होना संभाव्य है तो यह समझा जाएगा कि वह चिह्न दूसरे चिह्न से इतना समरूप है कि धोखा हो जाए ;
(झ) मिथ्या पण्य विवरण" से अभिप्रेत है-
(I) वह पण्य विवरण, जो उस माल या उन सेवाओं की बाबत, जिन पर वह लगाया जाता है, तात्त्विक रूप से असत्य या भ्रामक है ; या
(II) पण्य विवरण का वह परिवर्तन, जो उस माल या उन सेवाओं की बाबत जिन पर वह लगाया जाता है, चाहे परिवर्धन करके, मिटाकर या अन्यथा किसी प्रकार से किया गया हो, जहां वह परिवर्तन उस विवरण को तात्त्विक रूप में असत्य या भ्रामक बना देता है ; या
(III) वह पण्य विवरण जिससे उस माल की बाबत जिस पर वह लगाया जाता है, यह द्योतन या विवक्षा होती है कि उसमें अन्तर्विष्ट मानक गज या मानक मीटर से अधिक गज या मीटर अंतर्विष्ट हैं ; या
(IV) वे चिह्न या उनका विन्यास या संयोजन-
(क) जो माल पर ऐसे ढंग से लगाए जाते हैं जिससे यह संभाव्य है कि व्यक्ति यह विश्वास कर ले कि वे माल उस व्यक्ति से, जिसकी वे वास्तव में पण्य या विनिर्मिति हैं, भिन्न किसी व्यक्ति की विनिर्मिति या पण्य हैं ;
(ख) जो सेवाओं के संबंध में ऐसे ढंग से लगाए जाते हैं, जिससे यह संभाव्य है कि व्यक्ति यह विश्वास कर ले कि वे सेवाएं उस व्यक्ति से, जिसकी वे वस्तुतः सेवाएं हैं, भिन्न व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराई जा रही हैं या दी जा रही हैं ; या
(ज्) किसी व्यक्ति का मिथ्या नाम या आद्यक्षर, जो माल या सेवाओं पर इस ढंग से लगाए गए हैं मानो वह नाम या वे आद्यक्षर पण्य विवरण हैं, ऐसी किसी अवस्था में जिसमें वह नाम या वे आद्यक्षर-
(क) व्यापार चिह्न नहीं है या व्यापार चिह्न का भाग नहीं है ; और
(ख) उस व्यक्ति के नाम के आद्यक्षर से तद्रूप या इतने समरूप हैं कि धोखा हो जाए जो उसी विवरण के माल या सेवाओं या दोनों का कारबार करता है और जिसने ऐसे नाम या आद्यक्षरों का प्रयोग प्राधिकृत नहीं किया है ; और
(ग) किसी कल्पित व्यक्ति के या किसी ऐसे व्यक्ति के, जो ऐसे माल से संबद्ध कारबार सद्भावपूर्वक नहीं कर रहा है, नाम या आद्यक्षर है,
और इस तथ्य से कि कोई पण्य विवरण व्यापार चिह्न है या किसी व्यापार चिह्न का भाग है, इस अधिनियम के अर्थान्तर्गत ऐसे पण्य विवरण का मिथ्या पण्य विवरण होना निवारित नहीं होगा ;
(ञ) माल" से कोई ऐसी वस्तु अभिप्रेत है जो व्यापार या विनिर्माण की वस्तु है ;
(ट) न्यायिक सदस्य" से, इस अधिनियम के अधीन नियुक्त अपील बोर्ड का न्यायिक सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं ;
(ठ) मर्यादाओं" से (व्याकरणिक रूपों सहित) वे मर्यादाएं अभिप्रेत हैं जो किसी व्यक्ति के व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकरण से उसके उपयोग के अनन्य अधिकार पर है और उसके अन्तर्गत इस अधिकार की वे मर्यादाएं हैं जो भारत के भीतर या भारत के बाहर उपयोग के ढंग या क्षेत्र के बारे में हैं ;
(ड) चिह्न" के अन्तर्गत कोई आकृति, छाप, शीर्षक, लेबल, टिकट, नाम, हस्ताक्षर, शब्द, अक्षर, अंक, माल का आकार, पैकेजिंग या रंगों का संयोजन या इनका कोई संयोजन है ;
(ढ) सदस्य" से अपील बोर्ड का कोई न्यायिक सदस्य या कोई तकनीकी सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं ;
(ण) नाम" के अंतर्गत नाम का कोई संक्षेप भी है ;
(त) अधिसूचित" से रजिस्ट्रार द्वारा प्रकाशित व्यापार चिह्न जनरल में अधिसूचित करना अभिप्रेत है ;
(थ) पैकेज" के अंतर्गत कोई पेटी, बक्सा, आधान, आवेष्टक, फोल्डर, पात्र, बर्तन, संदूकची, बोतल, लपेटन, लेबल, पट्टी, टिकट, रील, चौखटा, कैप्सूल, टोपी, ढक्कन, डाट और कार्क हैं ;
(द) अनुज्ञात उपयोग" से किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के संबंध में व्यापार चिह्न का वह उपयोग अभिप्रेत है-
(i) जो व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता द्वारा ऐसे माल या सेवाओं के संबंध में किया जाता है,-
(क) जिनसे वह व्यापार के अनुक्रम में संयुक्त है ; और
(ख) जिनके बारे में व्यापार चिह्न तत्समय रजिस्ट्रीकृत बना रहता है ; और
(ग) जिनके लिए वह रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकृत है ; और
(घ) जो ऐसी किन्हीं शर्तों या मर्दाओं का अनुपालन करती है जिनके अधीन रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता का रजिस्ट्रीकरण है ; या
(ii) जो रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता से भिन्न ऐसे व्यक्ति द्वारा माल या सेवाओं के संबंध में किया जाता है,-
(क) जिससे वह व्यापार के अनुक्रम में संसक्त है ; और
(ख) जिनके बारे में व्यापार चिह्न तत्समय रजिस्ट्रीकृत बना रहता है ; और
(ग) ऐसे रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी की, लिखित करार द्वारा, सहमति से ; और
(घ) जो ऐसी किन्हीं शर्तों या मर्यादाओं का अनुपालन करती है जिनके अधीन ऐसा उपयोक्ता है और जिसके अधीन व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण है ;
(ध) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(न) रजिस्टर" से धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यापार चिह्न रजिस्टर अभिप्रेत है ;
(प) रजिस्ट्रीकृत" से (व्याकरणिक रूपों सहित) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत अभिप्रेत है ;
(फ) रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी" से किसी व्यापार चिह्न के संबंध में वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्टर में तत्समय प्रविष्ट है ;
(ब) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न" से वह व्यापार चिह्न अभिप्रेत है जो वास्तव में रजिस्टर में है और प्रवृत्त है ;
(भ) रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो धारा 49 के अधीन इस रूप में तत्समय रजिस्ट्रीकृत है ;
(म) रजिस्ट्रार" से धारा 3 में निर्दिष्ट व्यापार चिह्न रजिस्ट्रार अभिप्रेत है ;
(य) सेवा" से ऐसी किसी भी प्रकार की सेवा अभिप्रेत है जो संभावी उपयोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाती है और इसके अन्तर्गत बैंककारी, संचार, शिक्षा, वित्तपोषण, बीमा, चिटफंड, स्थावर संपदा, परिवहन, भंडारण, सामग्री अभिक्रिया, प्रसंस्करण, विद्युत या अन्य ऊर्जा का प्रदाय, बोर्डिंग, आवास, मनोरंजन, आमोद, सन्निर्माण, मरम्मत, समाचार अथवा सूचना के प्रवहण और विज्ञापन जैसे किसी औद्योगिक या वाणिज्यिक विषयों के कारबार से संसक्त सेवाओं की व्यवस्था करना है ;
(यक) पण्य विवरण" से निम्नलिखित के बारे में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वर्णन, कथन या अन्य उपदर्शन अभिप्रेत है-
(i) किसी माल की संख्या, परिमाण, माप, गेज या भार के बारे में ; या
(ii) व्यापार में सामान्यतया प्रयुक्त या मान्य वर्गीकरण के अनुसार, किसी माल या किन्हीं सेवाओं की क्वालिटी के स्तर के बारे में ; या
(iii) किसी माल की, जो ओषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (1940 का 23) में यथापरिभाषित ओषधि" या खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 (1954 का 37) में यथापरिभाषित खाद्य" है, इस प्रयोजन के लिए उपयुक्तता, सामर्थ्य, कार्यकरण या प्रतिक्रिया के बारे में ; या
(iv) उस स्थान या देश के बारे में जिसमें या उस समय के बारे में जब कोई माल या सेवाएं, यथास्थिति, बनाए गए थे या उत्पादित किए गए थे या उनकी व्यवस्था की गई थी ; या
(v) उस विनिर्माता या सेवाओं की व्यवस्था करने वाले व्यक्ति के या उस व्यक्ति के, जिसके लिए माल विनिर्मित किए गए हैं या सेवाओं की व्यवस्था की गई है नाम और पते या पहचान के अन्य उपदर्शन के बारे में ; या
(vi) किसी माल के विनिर्माण या उत्पादन या सेवाओं के दिए जाने के ढंग के बारे में ; या
(vii) ऐसी किसी सामग्री के बारे में जिससे कोई माल बना है ; या
(viii) ऐसे किसी माल के बारे में जो किसी विद्यमान पेटेंट, विशेषाधिकार या प्रतिलिप्यधिकार के अधीन है,
और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं :-
(क) किसी चिह्न के उपयोग संबंधी कोई विवरण जो व्यापार की रूढ़ि के अनुसार, सामान्यता उपर्युक्त विषयों में से किसी का उपदर्शन माना जाता है ;
(ख) किसी आयातित माल संबंधी वह विवरण जो प्रवेश पत्र या पोत परिवहन पत्र में अंतर्विष्ट है ;
(ग) कोई अन्य विवरण जिसका उक्त विषयों में से सभी या किसी के लिए भ्रमवश या गलती से समझ लिया जाना संभाव्य है ;
(यख) व्यापार चिह्न" से ऐसा चिह्न अभिप्रेत है जो रूपित किए जाने में समर्थ है और जो एक व्यक्ति के माल या सेवाओं को अन्य दूसरे व्यक्तियों के माल या सेवाओं से सुभिन्न करने में समर्थ है और इसके अंतर्गत माल का आकार, उनकी पैकेजिंग और रंगों का संयोजन भी आ सकेगा, और-
(i) (धारा 107 को छोड़कर) अध्याय 12 के संबंध में, रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न या वह चिह्न, जो व्यापार के अनुक्रम में, यथास्थिति, माल या सेवाओं और ऐसे किसी व्यक्ति के, जिसे स्वत्वधारी के रूप में चिह्न के उपयोग का अधिकार है, बीच के संबंध का उपदर्शन करने के प्रयोजनार्थ या उपदर्शन करते हुए, माल या सेवाओं के संबंध में प्रयोग किया जाता है ; और
(ii) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के संबंध में, वह चिह्न जो व्यापार के अनुक्रम में, यथास्थिति, माल या सेवाओं और ऐसे किसी व्यक्ति के, जिसे या तो स्वत्वधारी या अनुज्ञात उपयोक्ता के रूप में, उस व्यक्ति की पहचान के किसी उपदर्शन सहित या रहित, जिसे उस चिह्न के उपयोग का अधिकार है, बीच के संबंध का उपदर्शन करने के प्रयोजनार्थ या उपदर्शन करते हुए, माल या सेवाओं के संबंध में प्रयोग किया जाता है, या प्रयोग किए जाने का प्रस्ताव है, और उसके अंतर्गत प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न या सामूहिक चिह्न है ;
(यग) पारेषण" से विधि की क्रिया से पारेषण, मृत व्यक्ति के वैयक्तिक प्रतिनिधि पर न्यागमन और समनुदेशन के सिवाय अंतरण के किसी अन्य ढंग से पारेषण अभिप्रेत है ;
(यघ) तकनीकी सदस्य" से ऐसा सदस्य अभिप्रेत है जो न्यायिक सदस्य नहीं है ;
(यङ) अधिकरण" से, यथास्थिति, रजिस्ट्रार या वह अपील बोर्ड अभिप्रेत है जिसके समक्ष संपृक्त कार्यवाही लंबित है ;
(यच) उपाध्यक्ष" से अपील बोर्ड का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है ;
(यछ) किसी माल या सेवा के संबंध में, सुविख्यात व्यापार चिह्न" से ऐसा चिह्न अभिप्रेत है जो जनता के ऐसे पर्याप्त भाग में ऐसे माल या सेवा की बाबत सुविख्यात हो गया है, जो ऐसे माल का इस प्रकार उपयोग करता है या ऐसी सेवा प्राप्त करता है कि अन्य माल या सेवा के संबंध में ऐसे चिह्न के उपयोग को उस माल या सेवा और प्रथम उल्लिखित माल या सेवा के संबंध में चिह्न का उपयोग करने वाले किसी व्यक्ति के बीच व्यापार के या सेवा प्रदान करने के अनुक्रम में संबंध के उपदर्शन के रूप में माना जाना संभाव्य होगा ।
(2) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) व्यापार चिह्न" के प्रति किसी निर्देश के अन्तर्गत सामूहिक चिह्न" या प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न" के प्रति निर्देश है ;
(ख) किसी चिह्न के उपयोग के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस चिह्न के मुद्रित या अन्य दृश्यरूपण के उपयोग के प्रति निर्देश है ;
(ग) किसी चिह्न के उपयोग के प्रति निर्देश का,-
(i) जो माल के संबंध में है, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे माल पर या ऐसे माल के किसी भौतिक या किसी भी अन्य संबंध में चिह्न के उपयोग के प्रति निर्देश है ;
(ii) जो सेवाओं के संबंध में है, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसी सेवा की उपलब्धता, व्यवस्था या कार्यकरण के बारे में, किसी कथन के रूप में या उसके भागरूप चिह्न के उपयोग के प्रति निर्देश है ;
(घ) रजिस्ट्रार के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत धारा 3 की उपधारा (2) के अनुसरण में रजिस्ट्रार के कृत्यों का निर्वहन करने वाले किसी अधिकारी के प्रति निर्देश है ;
(ङ) व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि इसके अंतर्गत व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के किसी भी कार्यालय के प्रति निर्देश है ।
(3) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए माल और सेवाएं परस्पर सहयुक्त हैं यदि यह संभावना है कि उन मालों का विक्रय या अन्यथा व्यापार और उन सेवाओं की व्यवस्था उस माल के विवरणों और सेवाओं के विवरणों के साथ उसी कारबार द्वारा की जा सकती हैं ।
(4) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विद्यमान रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न" से इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व, व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
रजिस्टर और रजिस्ट्रीकरण की शर्तें
3. रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक व्यक्ति नियुकत कर सकेगी जो पेटेन्ट, डिजाइन और व्यापार चिह्न महानियंत्रक के रूप में ज्ञात होगा तथा जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रार होगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, ऐसे अन्य अधिकारी, ऐसे पदाभिधानों सहित, जो वह ठीक समझे, रजिस्ट्रार के अधीक्षण और निदेशन के अधीन इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रार के ऐसे कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजन के लिए, जैसे वह समय-समय पर निर्वहन के लिए उन्हें प्राधिकृत करे, नियुक्त कर सकेगी ।
4. मामलों, आदि को वापस लेने या अंतरित करने की रजिस्ट्रार की शक्ति-रजिस्ट्रार, धारा 3 की उपधारा (2) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, लिखित आदेश द्वारा और उसमें अभिलिखित कारणों से, उक्त उपधारा (2) के अधीन नियुक्त किसी अधिकारी के समक्ष लम्बित कोई मामला वापस ले सकेगा और ऐसे मामले पर या तो नए सिरे से या उस प्रक्रम से, जिस पर उसे वापस लिया गया था, स्वयं कार्यवाही कर सकेगा अथवा उसे इस प्रकार नियुक्त किसी अन्य अधिकारी को अन्तरित कर सकेगा जो अन्तरण के आदेश में विशेष निदेशों के अधीन उस मामले पर या तो नए सिरे से या उस प्रक्रम से, जिस पर उसे अन्तरित किया गया था, कार्यवाही कर सकेगा ।
5. व्यापार चिह्न रजिस्ट्री और उसके कार्यालय-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक व्यापार चिह्न रजिस्ट्री होगी और व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) के अधीन स्थापित व्यापार चिह्न रजिस्ट्री, इस अधिनियम के अधीन व्यापार चिह्न रजिस्ट्री होगी ।
(2) व्यापार चिह्न रजिस्ट्री का मुख्य कार्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे और व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ ऐसे स्थानों पर, जिन्हें केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के शाखा कार्यालय स्थापित किए जा सकेंगे ।
(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वह राज्यक्षेत्रीय सीमा परिनिश्िचत कर सकेगी जिसके भीतर व्यापार चिह्न रजिस्ट्री का कोई कार्यालय अपना कार्य कर सकेगा ।
(4) व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की एक मुद्रा होगी ।
6. व्यापार चिह्न रजिस्टर-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के प्रधान कार्यालय में एक अभिलेख रखा जाएगा जो व्यापार चिह्न रजिस्टर कहलाएगा जिसमें स्वत्वधारियों के नाम, पते और विवरणों सहित सभी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न समनुदेशन और परेषण की अधिसूचनाएं, रजिस्ट्रीकृत उपयोगकर्ताओं के नाम, पते और विवरण, शर्तें, निर्बंधन और रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्नों से संबंधित ऐसे अन्य विषय प्रविष्ट किए जाएंगे, जो विहित किए जाएं ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह, ऐसे रक्षोपायों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाएं, कम्प्यूटर फ्लापियों, डिस्केटों में या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक प्ररूप में अभिलेखों को पूर्णतः या अंशतः रखे ।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन ऐसा रजिस्टर कम्प्यूटर में पूर्णतः या अंशतः रखा जाता है वहां रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के प्रति इस अधिनियम में किसी निर्देश का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा कि वह कम्प्यूटर में या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक प्ररूप में रखी गई प्रविष्टि के प्रति निर्देश है ।
(4) किसी न्यास की कोई सूचना अभिव्यक्त या विवक्षित या आन्वयिक रूप में रजिस्टर में प्रविष्ट नहीं की जाएगी और ऐसी कोई सूचना रजिस्ट्रार द्वारा प्राप्य नहीं होगी ।
(5) रजिस्टर को रजिस्ट्रार के नियंत्रण और प्रबंध के अधीन रखा जाएगा ।
(6) व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के प्रत्येक शाखा कार्यालय में रजिस्टर की और धारा 148 में उल्लिखित ऐसे अन्य दस्तावेजों की, जिन्हें केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे, एक प्रति रखी जाएगी ।
(7) इस अधिनियम के प्रारंभ पर विद्यमान व्यापार चिह्न रजिस्टर के भाग क और भाग ख दोनों, इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर में सम्मिलित किए जाएंगे और उसके भागरूप होंगे ।
7. माल और सेवाओं का वर्गीकरण-(1) रजिस्ट्रार माल और सेवाओं का वर्गीकरण, यावत्साध्य, व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजनों के लिए, माल और सेवाओं के अन्तरराष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार करेगा ।
(2) किसी ऐसे वर्ग के बारे में, जिसके भीतर कोई माल या सेवाएं आती हैं, उद्भूत कोई प्रश्न रजिस्ट्रार द्वारा अवधारित किया जाएगा जिसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
8. वर्णानुक्रम में अनुक्रमणिका का प्रकाशन-(1) रजिस्ट्रार, धारा 7 में निर्दिष्ट माल और सेवाओं के वर्गीकरण की वर्णानुक्रम अनुक्रमणिका विहित रीति में प्रकाशित कर सकेगा ।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित माल और सेवाओं की वर्णानुक्रम अनुक्रमणिका में कोई माल या सेवाएं विनिर्दिष्ट नहीं की गई हैं, वहां माल या सेवाओं के वर्गीकरण का अवधारण, रजिस्ट्रार द्वारा, धारा 7 की उपधारा (2) के अनुसार किया जाएगा ।
9. रजिस्ट्रीकरण से इंकार करने के लिए आत्यंतिक आधार-ऐसे व्यापार चिह्नों का-
(क) जिनका कोई सुभिन्न स्वरूप नहीं है, अर्थात् जो किसी व्यक्ति के माल या सेवाओं का उनसे सुभेद करने में समर्थ नहीं है, जो किसी अन्य व्यक्ति के माल या सेवाएं हैं ;
(ख) जिनमें अनन्यतः ऐसे चिह्न या उपदर्शन दिए गए हैं जो व्यापार में माल के उत्पादन या सेवओं के दिए जाने के प्रकार, क्वालिटी, मात्रा, आशयित प्रयोजन, मूल्य, भौगोलिक उद्भव या समय या माल अथवा सेवा की अन्य विशिष्टताओं को अभिहित करने में काम आएं ;
(ग) जिनमें अनन्यतः ऐसे चिह्न या उपदर्शन हैं जो इस समय प्रचलित भाषा में या व्यापार की सद्भाविक और स्थापित पद्धति में रूढ़िगत हो गए हैं,
रजिस्ट्रीकरण नहीं किया जाएगा :
परन्तु किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण से इंकार नहीं किया जाएगा यदि रजिस्ट्रीकरण के आवेदन की तारीख के पूर्व उसके उपयोग के परिणामस्वरूप उसका एक सुभिन्न स्वरूप हो गया है या वह एक सुविख्यात व्यापार चिह्न है ।
(2) कोई चिह्न व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा, यदि,-
(क) वह ऐसी प्रकृति का है जिससे जनसाधारण को धोखा या भ्रम हो सकता है ;
(ख) उसमें ऐसी कोई बात अंतर्विष्ट है या समाविष्ट है जिससे भारत के नागरिकों के किसी वर्ग या भाग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की संभावना है ;
(ग) उसमें कंलकात्मक या अश्लील सामग्री समाविष्ट या अन्तर्विष्ट है ;
(घ) उसका उपयोग संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 (1950 का 12) के अधीन प्रतिषिद्ध है ।
(3) कोई चिह्न, व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा यदि उसमें अनन्य रूप से निम्नलिखित है,-
(क) माल का आकार जो स्वयं माल की प्रकृति के परिणामस्वरूप है ; या
(ख) माल का आकार जो तकनीकी परिणाम अभिप्राप्त करने के लिए आवश्यक है ; या
(ग) वह आकार जो उस माल को सारवान् मूल्य प्रदान करता है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे मालों या सेवाओं की प्रकृति जिनके संबंध में व्यापार चिह्न प्रयुक्त हुआ है या प्रयोग किए जाने के लिए प्रस्तावित है, रजिस्ट्रीकरण की इंकारी के लिए कोई आधार नहीं होगी ।
10. रंग के बारे में मर्यादा-(1) व्यापार चिह्न पूर्णतः या भागतः रंगों के किसी संयोजन तक मर्यादित किया जा सकेगा और जिस अधिकरण को व्यापार चिह्न के सुभिन्न स्वरूप का निश्चय करना है वह ऐसी मर्यादाओं को ध्यान में रखेगा ।
(2) जहां कोई व्यापार चिह्न रंगों की मर्यादा के बिना रजिस्ट्रीकृत है वहां यह समझा जाएगा कि वह सभी रंगों के लिए रजिस्ट्रीकृत है ।
11. रजिस्ट्रीकरण से इंकार करने के सापेक्ष आधार-(1) धारा 12 में यथा उपबन्धित के सिवाय, किसी व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण नहीं किया जाएगा यदि, -
(क) किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के साथ उसकी पहचान और उस व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं की समरूपता; या
(ख) किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के साथ उसकी समरूपता और उस व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं के साथ पहचान या समरूपता,
के कारण जनसाधारण में भ्रम पैदा होने की संभावना है, जिनके अन्तर्गत पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के साथ उसके सहयुक्त किए जाने की संभावना है ।
(2) कोई ऐसा व्यापार चिह्न जो, -
(क) किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के तद्रूप है या उसके समरूप है; और
(ख) ऐसे माल या ऐसी सेवाओं के लिए रजिस्ट्रीकृत किया जाना है जो उनके समरूप नहीं है जिनके लिए पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न किसी भिन्न स्वत्वधारी के नाम रजिस्ट्रीकृत किया गया है,
रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा यदि या उस सीमा तक जिस तक कि पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न भारत में एक सुविख्यात व्यापार चिह्न है और पश्चात्वर्ती चिह्न का उपयोग किसी सम्यक् हेतुक के बिना, पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के सुभिन्न स्वरूप या ख्याति का अनुचित लाभ लेगा या उसके विरुद्ध होगा ।
(3) कोई व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा यदि या उस सीमा तक जिस तक उसके भारत में उपयोग को-
(क) किसी विधि, विशिष्टतया व्यापार के अनुक्रम में प्रयुक्त अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का संरक्षण करने के लिए चला देने वाली विधि के आधार पर; या
(ख) प्रतिलिप्यधिकार की विधि के आधार पर,
निवारित किया जा सकता है ।
(4) इस धारा की कोई बात, उस दशा में व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का निवारण नहीं करेगी जहां पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न या अन्य पूर्ववर्ती अधिकार के स्वत्वधारी ने रजिस्ट्रीकरण की सहमति दे दी है और ऐसी दशा में, रजिस्ट्रार धारा 12 के अधीन, विशेष परिस्थितियों के अधीन चिह्न का रजिस्ट्रीकरण कर सकेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
[(क) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न या धारा 18 के अधीन कोई ऐसा आवेदन, जिस पर फाइल किए जाने की कोई पूर्वतर तारीख पड़ी है या धारा 36ङ में निर्दिष्ट अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण या धारा 154 में निर्दिष्ट अभिसमय आवेदन, जिस पर प्रश्नगत व्यापार चिह्न के पूर्व की आवेदन की तारीख है, जहां समुचित हो, वहां व्यापार चिह्न के बारे में दावाकृत पूर्विकताओं का ध्यान रखते हुए,]
(ख) कोई व्यापार चिह्न, जो प्रश्नगत व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन की तारीख को या जहां समुचित हो, वहां आवेदन के बारे में दावाकृत पूर्विकता की तारीख को, सुविख्यात व्यापार चिह्न के रूप में संरक्षण का हकदार था ।
(5) किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण से उपधारा (2) और उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट आधारों पर इंकार नहीं किया जाएगा, जब तक कि उन आधारों में से किसी एक या अधिक आधार पर पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी द्वारा विरोधी कार्यवाहियों में आक्षेप न किया गया हो ।
(6) रजिस्ट्रार यह अवधारित करते हुए कि कोई व्यापार चिह्न सुविख्यात व्यापार चिह्न है या नहीं, ऐसे किसी तथ्य को गणना में लेगा जो वह किसी व्यापार चिह्न को सुविख्यात व्यापार चिह्न के रूप में अवधारित करते समय सुसंगत समझता है, इसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं: -
(i) जनता के सुसंगत भाग में उक्त व्यापार चिह्न का ज्ञान या मान्यता जिसके अन्तर्गत उक्त व्यापार चिह्न के संप्रवर्तन के परिणामस्वरूप अभिप्राप्त भारत में ज्ञान भी है;
(ii) उक्त व्यापार चिह्न के किसी उपयोग की अवधि, सीमा और भौगोलिक क्षेत्र;
(iii) उक्त व्यापार चिह्न के किसी संप्रवर्तन की अवधि, सीमा और भौगोलिक क्षेत्र जिसमें उक्त माल या सेवाओं के मेलों या प्रदर्शनियों में विज्ञापन या प्रचार और प्रस्तुति भी सम्मिलित है जिन्हें उक्त व्यापार चिह्न लागू होता है;
(iv) इस अधिनियम के अधीन उक्त व्यापार चिह्न के किसी रजिस्ट्रीकरण की अवधि और भौगोलिक क्षेत्र या रजिस्ट्रीकरण के लिए कोई आवेदन उस सीमा तक जहां तक वह उक्त व्यापार चिह्न के उपयोग या मान्यता को प्रतिबिम्बित करता है;
(v) उक्त व्यापार चिह्न में अधिकारों के सफलतापूर्वक प्रवर्तन का अभिलेख, विशिष्टतया वह सीमा, जहां तक उक्त अभिलेख के अधीन किसी न्यायालय या रजिस्ट्रार द्वारा उक्त व्यापार चिह्न को सुविख्यात व्यापार चिह्न के रूप में मान्यता दी गई है ।
(7) रजिस्ट्रार, उपधारा (6) के प्रयोजनार्थ यह अवधारित करते समय कि कोई व्यापार चिह्न जनता के किसी सुसंगत भाग में ज्ञात या मान्यताप्राप्त है या नहीं, निम्नलिखित को ध्यान में रखेगा-
(i) माल या सेवाओं के वास्तविक या संभावित उपभोक्ताओं की संख्या;
(ii) माल या सेवाओं की वितरण प्रणालियों में अंतर्वलित व्यक्तियों की संख्या;
(iii) माल या सेवाओं में व्यवहार करने वाले कारोबारी सर्किल,
जिनको वह व्यापार चिह्न लागू होता है ।
(8) जहां किसी न्यायालय या रजिस्ट्रार द्वारा भारत में जनता के कम से कम एक सुसंगत भाग में किसी व्यापार चिह्न को सुविख्यात अवधारित किया गया हो वहां रजिस्ट्रार उक्त व्यापार चिह्न को इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए सुविख्यात व्यापार चिह्न समझेगा ।
(9) रजिस्ट्रार यह अवधारित करने के लिए कि कोई व्यापार चिह्न सुविख्यात व्यापार चिह्न है या नहीं निम्नलिखित में से किसी की शर्त के रूप में अपेक्षा नहीं करेगा, अर्थात्: -
(i) व्यापार चिह्न का भारत में उपयोग किया गया है;
(ii) व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत किया गया है;
(iii) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन भारत में दाखिल किया गया है;
(iv) व्यापार चिह्न भारत से भिन्न किसी अधिकारिता में: -
(क) सुविख्यात है; या
(ख) रजिस्ट्रीकृत किया गया है; या
(ग) उसके संबंध में रजिस्ट्रीकरण का आवेदन दाखिल किया गया है; या
(v) उक्त व्यापार चिह्न भारत में साधारणतया जनता में सुविख्यात है ।
(10) रजिस्ट्रार, किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन और उसके संबंध में दाखिल किए गए विरोधों पर विचार करते समय, -
(i) किसी सुविख्यात व्यापार चिह्न का, तद्रूप या समरूप व्यापार चिह्नों से संरक्षण करेगा;
(ii) आवेदक या विरोधी के, व्यापार चिह्न से संबंधित अधिकारों को प्रभावित करने वाले असद्भाव पर विचार करेगा ।
(11) जहां कोई व्यापार चिह्न रजिस्ट्रार को तात्त्विक सूचना प्रकट करते हुए, सद्भावपूर्वक रजिस्ट्रीकृत किया गया है या किसी व्यापार चिह्न का अधिकार इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व सद्भावपूर्वक उपयोग से अर्जित किया गया है वहां इस अधिनियम की किसी बात से उक्त व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता या उक्त व्यापार चिह्न के उपयोग के अधिकार पर, इस आधार पर कि उक्त व्यापार चिह्न किसी अन्य सुविख्यात, व्यापार चिह्न के तद्रूप या समरूप है, कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
12. सद्भाविक समवर्ती उपयोग, आदि की दशा में रजिस्ट्रीकरण-सद्भाविक समवर्ती उपयोग की दशा में या अन्य विशेष परिस्थितियों में, जिनके कारण रजिस्ट्रार की राय में ऐसा करना उचित है, रजिस्ट्रार उसी या समरूप माल या सेवाओं की बाबत एकाधिक स्वत्वधारी द्वारा ऐसे व्यापार चिह्नों का, जो तद्रूप या समरूप है (चाहे ऐसा कोई व्यापार चिह्न पहले से रजिस्ट्रीकृत हो या नहीं) ऐसी शर्तों और मर्यादाओं के अधीन, यदि कोई हों, जिन्हें रजिस्ट्रार अधिरोपित करना ठीक समझे, रजिस्ट्रीकरण अनुज्ञात कर सकेगा ।
13. रासायनिक तत्त्वों के नामों या अंतर्राष्ट्रीय अस्वत्वधारी नामों के रजिस्ट्रीकरण का प्रतिषेध-कोई शब्द, -
(क) जो किसी रासायनिक पदार्थ या निर्मिति की बाबत किसी एक रासायनिक तत्व या किसी एक रासायनिक यौगिक का (जो मिश्रण से भिन्न है) सामान्यतः उपयोग किया जाने वाला और स्वीकृत नाम है, या
(ख) जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अन्तरराष्ट्रीय अस्वत्वधारी नाम के रूप में घोषित और रजिस्ट्रार द्वारा समय-समय पर विहित रीति में अधिसूचित किया गया है या जो ऐसे नाम के इतना समरूप है कि धोखा हो सकता है,
व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्टर नहीं किया जाएगा और ऐसे किसी रजिस्ट्रीकरण को धारा 57 के प्रयोजनार्थ, रजिस्टर में बिना पर्याप्त कारण के की गई प्रविष्टि अथवा रजिस्टर में गलती से विद्यमान प्रविष्टि के रूप में, जैसा परिस्थितियों में अपेक्षित हो, समझा जाएगा ।
14. जीवित या हाल ही में मृत व्यक्तियों के नाम और प्रतिनिधित्व का उपयोग-जहां किसी ऐसे व्यापार चिह्न के लिए आवेदन किया जाता है जिसमें मिथ्या रूप से यह उपलक्षित होता है कि किसी जीवित व्यक्ति से या ऐसे व्यक्ति से, जिसकी मृत्यु व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की तारीख के पूर्व बीस वर्षों के भीतर हुई थी, कोई संबंध है, वहां रजिस्ट्रार आवेदन पर आगे कार्यवाही करने के पूर्व आवेदक से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह व्यापार चिह्न में प्रतीत होने वाले संबंध के बारे में, यथास्थिति, ऐसे जीवित व्यक्ति की या मृत व्यक्ति के विधिक प्रतिनिधियों की, लिखित सहमति उसके समक्ष पेश करे और जब तक आवेदक रजिस्ट्रार को ऐसी सहमति पेश नहीं करता है तब तक आवेदन पर आगे कार्यवाही करने से इन्कार कर सकेगा ।
15. व्यापार चिह्नों के भागों का और आवलि के रूप में व्यापार चिह्नों का रजिस्ट्रीकरण-(1) जहां किसी व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी उस व्यापार चिह्न के किसी भाग के पृथक्तः अनन्य उपयोग का हकदार होने का दावा करता है वहां वह समग्र व्यापार चिह्न और उसके भाग को पृथक् व्यापार चिह्नों के रूप में रजिस्टर करने के लिए आवेदन कर सकेगा ।
(2) ऐसा प्रत्येक पृथक् व्यापार चिह्न स्वतंत्र व्यापार चिह्न को लागू होने वाली सभी शर्तों को पूरी करेगा और उसमें स्वतंत्र व्यापार चिह्न की सभी अनुषंगी बातें होंगी ।
(3) जहां कोई व्यक्ति, जो उसी या समरूप माल या सेवाओं या उसी विवरण के माल या उसी विवरण की सेवाओं की बाबत ऐसे अनेक व्यापार चिह्नों का स्वत्वधारी होने का दावा करता है, जो अपनी तात्त्विक विशिष्टियों में एक दूसरे के सदृश होते हुए भी, निम्नलिखित के संबंध में भिन्न हैं-
(क) जिस माल या सेवा के संबंध में वे क्रमशः उपयोग किए जाते हैं या जिनका उपयोग प्रस्थापित है उनके कथन के संबंध में; या
(ख) संख्या, कीमत, क्वालिटी या स्थानों के नामों के कथन के संबंध में; या
(ग) अन्य बातों के संबंध में जो सुभिन्नकारी प्रकृति की नहीं हैं और जो उस व्यापार चिह्न की पहचान को सारतः प्रभावित नहीं करती हैं; या
(घ) रंग के संबंध में,
उन व्यापार चिह्नों को रजिस्टर करना चाहता है वहां वे एक रजिस्ट्रीकरण में आवलि के रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जा सकेंगे ।
16. सहयुक्त व्यापार चिह्नों के रूप में व्यापार चिह्नों का रजिस्ट्रीकरण-(1) जहां कोई व्यापार चिह्न, जो किसी माल या सेवा की बाबत रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का विषय है उसी स्वत्वधारी के नाम उसी माल या उसी विवरण के माल या उसी सेवा या उसी विवरण की सेवा की बाबत रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का विषय है किसी अन्य व्यापार चिह्न के तद्रूप है या इतना निकटतः सदृश है कि यदि स्वत्वधारी के अतिरिक्त, कोई व्यक्ति उसका उपयोग करे तो धोखा या भ्रम होने की संभाव्यता है, वहां रजिस्ट्रार किसी भी समय, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे व्यापार चिह्न रजिस्टर में सहयुक्त व्यापार चिह्न के रूप में प्रविष्ट किए जाएंगे ।
(2) जहां व्यापार चिह्न की, जो रजिस्टर किए जाते हैं, पहचान है या वे उनके निकट सदृश हैं अथवा उसी स्वत्वधारी के नाम में रजिस्ट्रीकरण के आवेदनों की ऐसे माल और ऐसी सेवाओं के बारे में विषय वस्तु है जो उस माल या उस विवरण के माल और उन सेवाओं या उस विवरण की सेवाओं से सहयुक्त हैं, वहां उपधारा (1) उसी प्रकार लागू होगी जिस प्रकार वह वहां लागू होती जहां उन चिह्नों की, जो रजिस्टर किए गए हैं, पहचान है या वे उनसे निकट सदृश हैं या वे उसी माल या वर्णन के माल या उन्हीं सेवाओं या वर्णन की सेवाओं के बारे में उसी स्वत्वधारी के नाम में रजिस्ट्रीकरण के आवेदनों की विषयवस्तु हैं ।
(3) जहां धारा 15 की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, कोई व्यापार चिह्न और उसका भाग उसी स्वत्वधारी के नाम में पृथक् व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत है वहां वह सहयुक्त व्यापार चिह्न समझे जाएंगे और उसी रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे ।
(4) धारा 15 की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार, एक रजिस्ट्रीकरण में आवलि के रूप में रजिस्ट्रीकृत सभी व्यापार चिह्न सहयुक्त व्यापार चिह्न समझे जाएंगे और उसी रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे ।
(5) सहयुक्त व्यापार चिह्नों के रूप में रजिस्ट्रीकृत दो या अधिक व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा विहित रीति में आवेदन करने पर यदि रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है कि यदि वह व्यापार चिह्न उस माल या उन सेवाओं या दोनों में से किसी के संबंध में, जिसकी बाबत यह रजिस्ट्रीकृत है, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग किया जाए तो धोखा या भ्रम होने की संभाव्यता नहीं है, तो वह उनमें से किसी की बाबत सहयोजन समाप्त कर सकेगा और तद्नुसार रजिस्टर संशोधित कर सकेगा ।
17. चिह्न के भागों के रजिस्ट्रीकरण का प्रभाव-(1) जहां किसी व्यापार चिह्न मे अनेक पदार्थ समाविष्ट हैं वहां उसका रजिस्ट्रीकरण स्वत्वधारी को उस सम्पूर्ण व्यापार चिह्न के उपयोग का अनन्य अधिकार प्रदान करेगा ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जब किसी व्यापार चिह्न में: -
(क) कोई ऐसा भाग अंतर्विष्ट है-
(i) जो व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए स्वत्वधारी द्वारा किए गए पृथक् आवेदन का विषय नहीं है; या
(ii) जो व्यापार चिह्न के रूप में स्वत्वधारी द्वारा पृथक् रूप से रजिस्ट्रीकृत नहीं है ; या
(ख) जिसमें कोई ऐसी बात अंतर्विष्ट है जो व्यापार के लिए सामान्य है या अन्यथा सुभिन्नकारी स्वरूप की नहीं है,
तब उसका रजिस्ट्रीकरण ऐसे पदार्थ में, जो इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत संपूर्ण व्यापार चिह्न का केवल एक भाग है, कोई अनन्य अधिकार प्रदान नहीं करेगा ।
अध्याय 3
रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया और उसकी अस्तित्वावधि
18. रजिस्ट्रीकरण के लिए ओवदन-(1) अपने द्वारा उपयोग किए गए या उपयोग के लिए प्रस्थापित किसी व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति, जो उसका रजिस्ट्रीकरण कराना चाहता है, रजिस्ट्रार को अपने व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए विहित रीति में लिखित रूप में आवेदन करेगा ।
(2) माल और सेवाओं के विभिन्न वर्गों के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए एक ही आवेदन किया जा सकेगा और उसके लिए संदेय फीस माल या सेवाओं के प्रत्येक ऐसे वर्ग की बाबत संदेय होगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन उस व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के कार्यालय में फाइल किया जाएगा जिसकी राज्यक्षेत्रीय सीमाओं के भीतर आवेदक का भारत में कारबार का प्रधान स्थान स्थित है या संयुक्त आवेदकों की दशा में, उस आवेदक का भारत में कारबार का प्रधान स्थान स्थित है, जिसका नाम भारत में कारबार का स्थान रखने वाले के रूप में आवेदन में प्रथमतः उल्लिखित है :
परन्तु जहां आवेदक या संयुक्त आवेदकों में से कोई भारत में कारबार नहीं करता है वहां आवेदन उस व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के कार्यालय में फाइल किया जाएगा जिसकी राज्यक्षेत्रीय सीमाओं के भीतर वह स्थान स्थित है जो आवेदन में यथाप्रकटित भारत में तामील के लिए पते में उल्लिखित है ।
(4) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रार आवेदन को अस्वीकार कर सकेगा या उसे आत्यंतिकतः अथवा ऐसे संशोधनों, उपांतरणों, शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो वह ठीक समझे, स्वीकार कर सकेगा ।
(5) किसी आवेदन के अस्वीकार किए या सशर्त स्वीकार किए जाने की दशा में, रजिस्ट्रार ऐसी अस्वीकृति या सशर्त स्वीकृति के आधार और अपने विनिश्चय पर पहुंचने के लिए स्वयं द्वारा उपयोग की गई समग्री, लेखबद्ध करेगा ।
19. स्वीकृति वापस लेना-जहां व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की स्वीकृति के पश्चात् किन्तु उसके रजिस्ट्रीकरण के पूर्व रजिस्ट्रार का यह समाधान हो गया है-
(क) आवेदन गलती से स्वीकार किया गया है; या
(ख) मामले की परिस्थितियों में व्यापार चिह्न को रजिस्टर नहीं किया जाना चाहिए या शर्तों या परिसीमाओं के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाना चाहिए या जिन शर्तों या परिसीमाओं के अधीन स्वीकार किया गया है, उनके अतिरिक्त, शर्तों या उनसे भिन्न शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाना चाहिए,
वहां रजिस्ट्रार, यदि आवेदक ऐसा चाहता है तो उसे सुनने के पश्चात्, स्वीकृति वापस ले सकेगा और इस प्रकार कार्यवाही करेगा मानो आवेदन स्वीकार नहीं किया गया था ।
20. आवेदन का विज्ञापन-(1) जहां व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का आवेदन चाहे आत्यंतिकतः या शर्तों और मर्यादाओं के अधीन स्वीकार किया गया है वहां रजिस्ट्रार स्वीकृति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, यथास्वीकृत आवेदन को उन शर्तों और मर्यादाओं सहित, यदि कोई हों, जिनके अधीन वह स्वीकार किया गया है, विहित रीति में विज्ञापित कराएगा:
परन्तु यदि आवेदन ऐसे व्यापार चिह्न से संबंधित है, जिसको धारा 9 की उपधारा (1) और धारा 11 की उपधारा (1) और उपधारा (2) लागू होती है या किसी अन्य दशा में, जहां उसे यह प्रतीत होता है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण ऐसा करना समीचीन है वहां, रजिस्ट्रार आवेदन को स्वीकार करने के पूर्व विज्ञापित करा सकेगा ।
(2) जहां-
(क) आवेदन को उपधारा (1) के अधीन स्वीकृति के पूर्व विज्ञापित किया गया है; या
(ख) आवेदन के विज्ञापन के पश्चात्-
(i) आवेदन में कोई गलती शुद्ध की गई है; या
(ii) आवेदन को धारा 22 के अधीन संशोधित करने की अनुज्ञा दी गई है,
वहां रजिस्ट्रार, स्वविवेकानुसार आवेदन को पुनः विज्ञापित करा सकेगा या खण्ड (ख) में आने वाले किसी मामले में, आवेदन में, आवेदन को पुनः विज्ञापित कराने के स्थान पर, आवेदन में की गई शुद्धि या संशोधन को विहित रीति में अधिसूचित कर सकेगा ।
21. रजिस्ट्रीकरण का विरोध- [(1) कोई व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण के आवेदन के विज्ञापन या पुनः विज्ञापन की तारीख से चार मास के भीतर रजिस्ट्रीकरण के विरोध की लिखित सूचना, विहित रीति में और ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, रजिस्ट्रार को दे सकेगा ।]
(2) रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकरण के आवेदक पर सूचना की एक प्रति तामील करेगा और आवेदक को विरोध की सूचना की ऐसी प्रति के प्राप्त होने के दो मास के भीतर आवेदक रजिस्ट्रार को विहित रीति में उन आधारों का प्रतिकथन भेजेगा, जिनका वह अपने आवेदन के लिए अवलम्ब लेता है, और यदि वह ऐसा नहीं करता है तो यह समझा जाएगा कि उसने अपने आवेदन का परित्याग कर दिया है ।
(3) यदि आवेदक ऐसा प्रतिकथन भेजता है तो रजिस्ट्रार उसकी एक प्रति विरोध की सूचना देने वाले व्यक्ति पर तामील कराएगा ।
(4) ऐसा कोई साक्ष्य जिसका अवलम्ब विरोधकर्ता और आवेदक लें, विहित रीति में और विहित समय के भीतर रजिस्ट्रार को प्रस्तुत किया जाएगा और यदि वे चाहें तो रजिस्ट्रार उन्हें सुनवाई का अवसर देगा ।
(5) रजिस्ट्रार, यदि ऐसा अपेक्षित हो, पक्षकारों को सुनने के पश्चात् और साक्ष्य पर विचार कर यह विनिश्चय करेगा कि रजिस्ट्रीकरण अनुज्ञात किया जाए या नहीं और किन शर्तों और परिसीमाओं के अधीन, यदि कोई है, अनुज्ञात किया जाए और वह आक्षेप के किसी आधार पर विचार कर सकेगा चाहे विरोधकर्ता ने उसका अवलंब लिया हो या नहीं ।
(6) जहां विरोध की सूचना देने वाला, कोई व्यक्ति या ऐसी सूचना की प्रति की प्राप्ति के पश्चात् प्रतिकथन भेजने वाला कोई आवेदक न तो भारत में निवास करता है और न ही कारबार करता है, वहां रजिस्ट्रार उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह रजिस्ट्रार के समक्ष कार्यवाहियों के खर्चे की प्रतिभूति दे और सम्यक्तः प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम होने पर, यथास्थिति, विरोध या आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा ।
(7) रजिस्ट्रार, ऐसे निबन्धनों पर, जिन्हें वह न्यायसंगत समझे, प्रार्थना करने पर, विरोध की सूचना या प्रतिकथन में किसी गलती को शुद्ध करने की या उसका कोई संशोधन करने की अनुज्ञा दे सकेगा ।
22. शुद्धि और संशोधन-रजिस्ट्रार ऐसे निबन्धनों पर, जिन्हें वह न्यायसंगत समझे, किसी भी समय चाहे धारा 18 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के आवेदन को स्वीकार करने के पहले या पश्चात् आवेदन में या उसके संबंध में किसी गलती की शुद्धि अनुज्ञात कर सकेगा या आवेदन का संशोधन अनुज्ञात कर सकेगा:
परन्तु यदि धारा 18 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट एक ही आवेदन में कोई ऐसा संशोधन किया जाता है जिसमें ऐसे आवेदन का दो या अधिक आवेदनों में विभाजन अन्तर्ग्रस्त है, तो आरंभिक आवेदन करने की तारीख, इस प्रकार विभाजित किए गए विभक्त आवेदनों को करने की तारीख समझी जाएगी ।
23. रजिस्ट्रीकरण-(1) धारा 19 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जब किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन स्वीकार किया गया है और या तो-
(क) आवेदन का विरोध नहीं किया गया है और विरोध की सूचना का समय समाप्त हो गया है; या
(ख) आवेदन का विरोध किया गया है और विरोध आवेदक के पक्ष में विनिश्चित हुआ है,
तब रजिस्ट्रार, जब तक कि केन्द्रीय सरकार अन्यथा निदेश न दे, उक्त व्यापार चिह्न को [आवेदन फाइल करने के अठारह मास के भीतर] रजिस्टर करेगा और व्यापार चिह्न रजिस्टर किए जाने पर उक्त आवेदन के किए जाने की तारीख से रजिस्टर होगा, और वह तारीख धारा 154 के उपबंधों के अधीन, रजिस्ट्रीकरण की तारीख समझी जाएगी ।
(2) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण पर, रजिस्ट्रार, आवेदक को व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की मुद्रा से मुद्रांकित विहित प्रारूप में उसके रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र जारी करेगा ।
(3) जहां आवेदक के व्यतिक्रम के कारण, आवेदन की तारीख से बारह मास के भीतर व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण पूर्ण नहीं हो जाता है वहां रजिस्ट्रार आवेदक को विहित रीति में सूचना देकर आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा जब तक कि वह सूचना में इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर पूर्ण न कर दिया जाए ।
(4) रजिस्ट्रार लेखन गलती या स्पष्ट भूल की शुद्धि के प्रयोजनार्थ, रजिस्टर को या रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र को संशोधित कर सकेगा ।
24. संयुक्त स्वामित्व के व्यापार चिह्न-(1) उपधारा (2) में यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम की कोई बात ऐसे दो या अधिक व्यक्तियों का जो किसी व्यापार चिह्न का स्वतंत्र रूप से उपयोग करते हैं या ऐसे उपयोग की प्रस्थापना करते हैं, उसके संयुक्त स्वत्वधारियों के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्राधिकृत नहीं करेगी ।
(2) जहां व्यापार चिह्न में हितबद्ध दो या अधिक व्यक्तियों के संबंध ऐसे हैं कि उनमें से कोई भी एक अपने और उनमें से दूसरे या दूसरों के बीच इस बात का हकदार नहीं है कि वह उसका उपयोग-
(क) दोनों की या सभी की ओर से; या
(ख) जिस वस्तु या सेवा से व्यापार के अनुक्रम में दोनों या सभी संसक्त हैं, उस वस्तु या सेवा के संबंध में,
उपयोग करने के सिवाय करे, वहां वे व्यक्ति उस व्यापार चिह्न के संयुक्त स्वत्वधारियों के रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जा सकेंगे और यह अधिनियम उस व्यापार चिह्न के उपयोग के उन व्यक्तियों में निहित अधिकारों के संबंध में इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वे अधिकार एक ही व्यक्ति में निहित हों ।
25. रजिस्ट्रीकरण की अस्तित्वावधि, उसका नवीकरण, हटाया जाना और प्रत्यावर्तन-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण दस वर्ष की अवधि के लिए होगा किन्तु उसे इस धारा के उपबंधों के अनुसार, समय-समय पर नवीकृत किया जा सकेगा ।
(2) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा विहित प्ररूप में और विहित अवधि के भीतर आवेदन करने पर और विहित फीस के संदाय के अधीन रजिस्ट्रार, यथास्थिति, मूल रजिस्ट्रीकरण या रजिस्ट्रीकरण के अंतिम नवीकरण के अवसान की तारीख से (जिस तारीख को इस धारा में अंतिम रजिस्ट्रीकरण का अवसान कहा गया है) दस वर्ष की अवधि के लिए व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण करेगा ।
(3) व्यापार चिह्न के अंतिम रजिस्ट्रीकरण के अवसान की सूचना से पूर्व विहित समय पर, रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को अवसान की तारीख की और फीस के संदाय संबंधी शर्तों की, या अन्यथा जिन पर रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण अभिप्राप्त किया जा सकेगा, विहित रीति में सूचना देगा और, यदि इस निमित्त विहित समय के अवसान पर उन शर्तों का सम्यक्तः अनुपालन नहीं होता है तो रजिस्ट्रार उस व्यापार चिह्न को रजिस्टर से हटा सकेगा:
परन्तु यदि व्यापार चिह्न के अंतिम रजिस्ट्रीकरण के अवसान से छह मास के भीतर विहित प्ररूप में कोई आवेदन किया जाता है और विहित फीस तथा अधिभार का संदाय कर दिया जाता है तो रजिस्ट्रार, रजिस्टर से व्यापार चिह्न को नहीं हटाएगा और उपधारा (2) के अधीन दस वर्ष की अवधि के लिए व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण करेगा ।
(4) जहां व्यापार चिह्न विहित फीस न देने के कारण रजिस्टर से हटा दिया गया है वहां अंतिम रजिस्ट्रीकरण के अवसान से छह मास के पश्चात् और एक वर्ष के भीतर विहित प्ररूप में आवेदन प्राप्त करने पर और विहित फीस के संदाय पर, यदि रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है कि ऐसा करना न्यायसंगत है तो वह व्यापार चिह्न को रजिस्टर में प्रत्यावर्तित करेगा और व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण या तो साधारणतः ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन, जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, अंतिम रजिस्ट्रीकरण के अवसान से दस वर्ष की कालावधि के लिए करेगा ।
26. नवीकरण के लिए फीस देने में असफलता पर रजिस्टर से हटाए जाने का प्रभाव-जहां नवीकरण के लिए फीस देने में असफलता पर व्यापार चिह्न को रजिस्टर से हटा दिया गया है वहां ऐसा होने पर भी हटाए जाने की तारीख के ठीक पश्चात्वर्ती एक वर्ष के भीतर दूसरे व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन के प्रयोजन के लिए उसे पहले से ही रजिस्टर में प्रविष्ट व्यापार चिह्न समझा जाएगा, जब तक कि अधिकरण का यह समाधान न हो जाए कि या तो-
(क) जो व्यापार चिह्न हटाया गया है उसके हटाए जाने के ठीक पूर्ववर्ती दो वर्षों में उसका कोई सद्भावपूर्ण व्यापार उपयोग नहीं हुआ है; या
(ख) जो व्यापार चिह्न हटाया गया है उसके किसी पूर्व उपयोग के कारण उस व्यापार चिह्न के, जो रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का विषय है, उपयोग से कोई धोखा या भ्रम उत्पन्न होने की संभाव्यता नहीं है ।
अध्याय 4
रजिस्ट्रीकरण का प्रभाव
27. अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अतिलंघन के लिए कोई कार्रवाई न होगी-(1) कोई व्यक्ति किसी अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अतिलंघन के निवारण के लिए या उसके लिए नुकसानी वसूल करने के लिए कोई कार्यवाही संस्थित करने का हकदार न होगा ।
(2) इस अधिनियम की कोई बात माल या सेवाओं को किसी अन्य व्यक्ति के माल या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई सेवाओं के रूप में चला देने के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई के अधिकारों या तद्विषयक उपचारों को प्रभावित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।
28. रजिस्ट्रीकरण से प्रदत्त अधिकार-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण, यदि वह विधिमान्य हो, तो उस व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को, उस माल या उन सेवाओं के संबंध में, जिनकी बाबत वह व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, उस व्यापार चिह्न के उपयोग का और इस अधिनियम द्वारा उपबंधित रीति में उस व्यापार चिह्न के अतिलंघन की बाबत अनुतोष अभिप्राप्त करने का, अनन्य अधिकार प्रदान करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रदत्त व्यापार चिह्न के उपयोग का अनन्य अधिकार उन्हीं शर्तों और मर्यादाओं के अधीन होगा जिनके अधीन रजिस्ट्रीकरण है ।
(3) जहां दो या अधिक व्यक्ति ऐसे व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी हैं, जो एक दूसरे के तद्रूप हैं या निकटतः सदृश हैं, वहां केवल व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण से यह नहीं समझा जाएगा कि उनमें से किसी एक व्यक्ति ने उनमें से किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध (जहां तक उनके पृथक् अधिकार रजिस्टर में प्रविष्ट शर्तों या मर्यादाओं के अधीन हैं, उनके सिवाय) उन व्यापार चिह्नों के उपयोग का अनन्य अधिकार अर्जित कर लिया है, किन्तु उनमें से हर एक व्यक्ति के अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध (जो अनुज्ञात उपयोग के रूप में उपयोग करने वाले रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता नहीं हैं) अन्यथा, वही अधिकार होंगे, जो उसके होते, यदि वह एकमात्र रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी होता ।
29. रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्नों का अतिलंघन-(1) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन उस व्यक्ति द्वारा होता है जो उस व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या अनुज्ञात उपयोग के रूप में उपयोग करने वाला व्यक्ति न होते हुए, किसी माल या किन्हीं सेवाओं के संबंध में, जिनकी बाबत वह व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, किसी ऐसे चिह्न का, जो उस व्यापार चिह्न से तद्रूप है या इतना समरूप है कि धोखा हो जाए, व्यापार के अनुक्रम में और इस रीति से उपयोग करता है कि उस चिह्न के उपयोग का व्यापार चिह्न के रूप में उपयोग समझे जाने की संभाव्यता हो जाती है ।
(2) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन उस व्यक्ति द्वारा होता है जो रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या अनुज्ञात उपयोग के रूप में उपयोग करने वाला व्यक्ति न होने पर, व्यापार के अनुक्रम में ऐसे चिह्न का उपयोग करता है जिससे-
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के साथ उसकी तद्रूपता और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं के साथ समरूपता के कारण; या
(ख) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के साथ उसकी समरूपता और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं के साथ उसकी तद्रूपता या समरूपता के कारण; या
(ग) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के साथ उसकी तद्रूपता और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अन्तर्गत आने वाले माल या सेवाओं के साथ उसकी तद्रूपता के कारण,
जनसाधारण में भ्रम पैदा होने की संभाव्यता हो या जिसका रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से सहयोजन होना संभव हो ।
(3) उपधारा (2) के खंड (ग) के अधीन आने वाले किसी मामले में, न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि उससे जनसाधारण में भ्रम पैदा होना संभाव्य है ।
(4) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन उस व्यक्ति द्वारा होता है जो रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या अनुज्ञात उपयोग के रूप में उपयोग करने वाला व्यक्ति न होने पर, व्यापार के अनुक्रम में ऐसे चिह्न का उपयोग करता है, जो-
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के तद्रूप या समरूप है; और
(ख) ऐसे माल या सेवाओं के संबंध में उपयोग किया जाता है जो उनके समरूप नहीं है जिनके लिए व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत किया गया है; और
(ग) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न की भारत में ख्याति हो और उस चिह्न का सम्यक् हेतुक के बिना उपयोग, रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के सुभिन्न स्वरूप या ख्याति का अनुचित लाभ प्राप्त करता हो या उसके लिए अहितकर हो ।
(5) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन उस व्यक्ति द्वारा होता है यदि वह ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का उपयोग अपने व्यापार नाम या अपने व्यापार नाम के भागरूप या अपने कारबार समुत्थान के नाम या अपने उस कारबार समुत्थान के नाम के भागरूप करता है जो उस माल या सेवाओं की बाबत है जिनके संबंध में व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है ।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ति रजिस्ट्रीकृत चिह्न का उपयोग तब करता है जब वह विशिष्टतया-
(क) उसे माल या उसके पैकेज के साथ लगाता है;
(ख) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अधीन माल को विक्रय के लिए प्रस्थापित या खुला छोड़ता है, उसे बाजार में लाता है या उन प्रयोजनों के लिए उनका स्टाक करता है या उस रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अधीन सेवाओं की प्रस्थापना या प्रदाय करता है;
(ग) उस चिह्न के अधीन माल का आयात या निर्यात करता है; या
(घ) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का कारबार के कागजपत्रों पर या विज्ञापन में उपयोग करता है ।
(7) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन उस व्यक्ति द्वारा होता है जो ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का उपयोग ऐसी सामग्री पर करता है जो माल पर लेबल लगाने या पैकेज के लिए कारबार कागज के रूप में या माल अथवा सेवाओं के विज्ञापन के लिए उपयोग की जानी आशयित है, परन्तु यह तब जब ऐसा व्यक्ति चिह्न का उपयोग करते समय जानता था या उसके पास यह विश्वास करने का कारण था कि चिह्न का लगाया जाना स्वत्वधारी या अनुज्ञप्तिधारी द्वारा सम्यक्तः प्राधिकृत नहीं है ।
(8) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन, उस व्यापार चिह्न के किसी विज्ञापन द्वारा तब होता है जब ऐसा विज्ञापन, -
(क) औद्योगिक या वाणिज्यिक मामलों में अनुचित लाभ प्राप्त करता है और सद्भाविक पद्धतियों के प्रतिकूल है; या
(ख) सुभिन्न स्वरूप के लिए अहितकर है; या
(ग) व्यापार चिह्न की ख्याति के विरुद्ध है ।
(9) जहां रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के सुभिन्न तत्त्वों में या उसके अन्तर्गत शब्द हों वहां उस व्यापार चिह्न का अतिलंघन उन शब्दों के बोलने से तथा उनके दृश्य प्रतिरूपण से हो सकता है और इस धारा में चिह्न के उपयोग के प्रति निर्देश का अर्थ तद्नुसार होगा ।
30. रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के प्रभाव की सीमाएं-(1) धारा 29 की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी व्यक्ति द्वारा स्वत्वधारी के व्यापार चिह्न के रूप में किसी माल या सेवाओं की पहचान के प्रयोजनों के लिए रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के उपयोग को निवारित करता है, परन्तु यह तब जब कि वह उपयोग-
(क) औद्योगिक या वाणिज्यिक मामलों से सद्भाविक पद्धतियों के अनुसार हो; और
(ख) ऐसा न हो जो व्यापार चिह्न के सुभिन्न स्वरूप या ख्याति का अनुचित लाभ प्राप्त करता हो या उसके लिए अहितकर हो ।
(2) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का अतिलंघन नहीं होता है-
(क) जहां माल या सेवओं के संबंध में उसका उपयोग माल के प्रकार, क्वालिटी, मात्रा, आशयित प्रयोजन, मूल्य, भौगोलिक उद्भव, माल के उत्पादन या सेवाओं के लिए जाने का समय या माल या सेवाओं की अन्य विशेषताओं को उपदर्शित करता हो;
(ख) जहां व्यापार चिह्न किन्हीं शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रजिस्ट्रीकृत हैं, वहां किसी भी स्थान में, विक्रय किए जाने वाले या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल के संबंध में या उस माल के संबंध में, जो किसी भी बाजार को निर्यात किए जाने हैं, या उन सेवाओं के संबंध में जो भारत से बाहर किसी स्थान या देश में उपयोग के लिए हैं या स्वीकृति के लिए उपलभ्य हैं, या नहीं अन्य परिस्थितियों में जिनको, उन शर्तों या मर्यादाओं पर ध्यान देते हुए, रजिस्ट्रीकरण का विस्तार नहीं है, उस व्यापार चिह्न के किसी भी रीति में, उपयोग से ;
(ग) जहां किसी व्यक्ति द्वारा किसी व्यापार चिह्न का उपयोग, -
(i) व्यापार के अनुक्रम में, व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता से संसक्त माल के संबंध में है, यदि उस माल या उस प्रपुंज या जिसका वह माल भागरूप है के बारे में रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी ने या अनुज्ञात के अनुरूपतः रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता ने व्यापार चिह्न लगाया है और तत्पश्चात् उसे हटाया अथवा मिटाया नहीं है या किसी भी समय अभिव्यक्ततः या विवक्षतया, उस व्यापार चिह्न के उपयोग की अनुमति दी है; या
(ii) ऐसी सेवाओं के संबंध में है, जिस पर ऐसे चिह्न के स्वत्वधारी या अनुज्ञात उपयोग के अनुरूपतः रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता ने चिह्न के स्वत्वधारी या अनुज्ञात उपयोग के अनुरूपतः रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता ने चिह्न लगाया है, जहां चिह्न का उपयोग करने का प्रयोजन और प्रभाव तथ्य के अनुसार, यह उपदर्शित करता है कि वे सेवाएं चिह्न के स्वत्वधारी या उसके रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता द्वारा की गई है;
(घ) जहां किसी व्यक्ति द्वारा किसी व्यापार चिह्न को उस माल के संबंध में उपयोग से, जो ऐसे अन्य माल या सेवाओं के भागरूप या उसके उपसाधन होने के लिए अनुकूलित हैं जिस माल के बारे में इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण द्वारा दिए गए अधिकार का अतिलंघन किए बिना व्यापार चिह्न का उपयोग किया गया है, या तत्समय किया जा सकता है, यदि यह उपदर्शित करने के लिए कि माल या सेवाएं इस प्रकार अनुकूलित हैं, व्यापार चिह्न का उपयोग युक्तियुक्ततः आवश्यक है, और व्यापार चिह्न के उपयोग को न तो यह उपदर्शित करने का प्रयोजन है और न ही यह प्रभाव है कि व्यापार के अनुक्रम में, यथास्थिति, किसी व्यक्ति और माल में या सेवा में तथ्य के अनुसार, जो संबंध है, उससे भिन्न कोई संबंध है ;
(ङ) जहां इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण से मिले हुए व्यापार चिह्न के उपयोग के अधिकार के प्रयोग में ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के उपयोग से, जो इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत उन दो या अधिक व्यापार चिह्नों में से एक है, जो एक दूसरे के तद्रूप हैं या निकट सादृश्य रखते हैं ।
(3) जहां रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न युक्त माल किसी व्यक्ति द्वारा वैध रूप से अर्जित किया जाता है, वहां उस व्यक्ति द्वारा या उसके अधीन या उसके माध्यम से दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा बाजार में उस माल का विक्रय व्यापार चिह्न का अतिलंघन नहीं है, यदि ऐसा केवल इस कारण से है कि-
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न, उस माल के अर्जन के पश्चात् रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को समनुदिष्ट किया गया है; या
(ख) माल या स्वत्वधारी द्वारा या उसकी सहमति से उस रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अधीन बाजार में लाया गया है ।
(4) उपधारा (3) वहां लागू नहीं होगी जहां स्वत्वधारी के लिए उस माल में आगे व्यवहार का विरोध करने के लिए न्यायसंगत कारण विद्यमान हैं, विशिष्टतया जहां माल को बाजार में लाने के पश्चात् माल की दशा बदल गई है या उसका ह्रास हो गया है ।
31. रजिस्ट्रीकरण, विधिमान्यता का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होना-(1) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से संबंधित (धारा 57 के अधीन आवेदन सहित) सभी विधिक कार्यवाहियों में उस व्यापार चिह्न और व्यापार चिह्न के सभी पश्चात्वर्ती समनुदेशनों और पारेषणों के मूल रजिस्ट्रीकरण उनकी विधिमान्यता का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होंगे ।
(2) यथापूर्वोक्त सभी विधिक कार्यवाहियों में, यदि यह साबित कर दिया जाता है कि रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या उसके हक-पूर्वाधिकारी ने व्यापार चिह्न का उपयोग ऐसे किया है कि वह रजिस्ट्रीकरण की तारीख को सुभिन्न हो गया है, तो व्यापार चिह्न इस आधार पर अविधिमान्य नहीं किया जाएगा कि वह धारा 9 के अधीन बिना सुभिन्नता के साक्ष्य के रजिस्टर करने के योग्य व्यापार चिह्न नहीं था और यह कि रजिस्ट्रीकरण के पूर्व ऐसा साक्ष्य रजिस्ट्रार को प्रस्तुत नहीं किया गया था ।
32. कतिपय मामलों में सुभिन्नता के आधार पर रजिस्ट्रीकरण का संरक्षण-जहां व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण धारा 9 की उपधारा (1) का उल्लंघन करके किया गया है वहां उसे अविधिमान्य घोषित नहीं किया जाएगा यदि उसका जो उपयोग किया गया है उसके परिणामस्वरूप उससे रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् और ऐसे रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता का आक्षेप करने वाली किसी विधिक कार्यवाही के प्रारंभ के पूर्व, उस माल या सेवाओं के संबंध में, जिनके लिए उसे रजिस्ट्रीकृत किया गया है, सुभिन्न स्वरूप अर्जित कर लिया है ।
33. उपमति का प्रभाव-(1) जहां किसी पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के उपयोग में, उस उपयोग की जानकारी रखते हुए, लगातार पांच वर्ष की अवधि तक उपमत रहा है वहां उसे तब तक उस पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के आधार पर, -
(क) यह घोषणा करने के लिए आवेदन करने का हक नहीं होगा कि पश्चात्वर्ती व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है; या
(ख) उन माल या सेवाओं के संबंध में, जिनके संबंध में उनका इस प्रकार उपयोग किया जाता रहा है, पश्चात्वर्ती व्यापार चिह्न के उपयोग का विरोध करने का हक नहीं होगा,
जब तक कि पश्चात्वर्ती व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन सद्भावपूर्वक नहीं किया गया है ।
(2) जहां उपधारा (1) लागू होती है वहां पश्चात्वर्ती व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी को, यथास्थिति, पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न के उपयोग का विरोध करने का या पूर्ववर्ती अधिकार का समुपयोजन करने का इस बात के होते हुए भी हक नहीं होगा कि पूर्ववर्ती व्यापार चिह्न का अब उसके पश्चात्वर्ती व्यापार चिह्न के विरुद्ध अवलंब नहीं लिया जा सकेगा ।
34. निहित अधिकारों की व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई बात किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को इस बात के लिए हकदार नहीं बनाएगी कि वह उस व्यापार चिह्न के तद्रूप या निकट सादृश्य रखने वाले किसी व्यापार चिह्न के किसी व्यक्ति द्वारा उन मालों या सेवाओं के संबंध में उपयोग करने में हस्तक्षेप करे या उपयोग करने का अवरोध करे, जिनके संबंध में वह व्यक्ति या उसका हक पूर्वाधिकारी उस व्यापार चिह्न को, निम्नलिखित तारीखों में से जो भी पूर्वतर तारीख हो, उससे लगातार उपयोग में लाता रहा है,-
(क) उन मालों या सेवाओं के संबंध में प्रथम वर्णित व्यापार चिह्न को स्वत्वधारी या उसके हक पूर्वाधिकारी द्वारा उपयोग में लाने की तारीख, या
(ख) स्वत्वधारी या उसके हक पूर्वाधिकारी के नाम उन मालों या सेवाओं के बारे में प्रथम वर्णित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की तारीख,
और रजिस्ट्रार (ऐसा उपयोग साबित हो जाने पर) प्रथम वर्णित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के ही कारण द्वितीय वर्णित व्यापार चिह्न को रजिस्टर करने से इन्कार नहीं करेगा ।
35. नाम, पता या माल या सेवाओं के वर्णन के उपयोग की व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई बात किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को इस बात के लिए हकदार नहीं बनाएगी कि वह किसी व्यक्ति द्वारा सद्भावपूर्वक अपने नाम के या अपने व्यापार के स्थान के नाम के या कारबार में अपने पूर्वाधिकारी के नाम में या कारबार के स्थान के नाम के उपयोग में या किसी व्यक्ति द्वारा उसके माल या सेवा के लक्षण या क्वालिटी के सद्भावपूर्वक वर्णन के उपयोग में हस्तक्षेप करे ।
36. किसी वस्तु या पदार्थ या सेवा के नाम या वर्णन के रूप में उपयोग में लाए गए शब्दों की व्यावृत्ति-(1) किसी व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण केवल इस कारण अविधिमान्य हो गया नहीं समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकरण की तारीख के पश्चात् कोई एक या अधिक शब्द, जो व्यापार चिह्न में अंतर्विष्ट है या जिनसे मिलकर वह बनता है, किसी वस्तु या पदार्थ या सेवा के नाम या वर्णन के रूप में उपयोग में लाए गए हैं:
परंतु यदि यह साबित हो जाता है कि या तो-
(क) उस वस्तु या पदार्थ या सेवा के नाम या वर्णन के रूप में उक्त शब्दों का उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों द्वारा, जो उसमें व्यापार कर रहे हैं, सुविख्यात और प्रतिष्ठित उपयोग है और ऐसा उपयोग व्यापार के अनुक्रम में स्वत्वधारी से या व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता से संसक्त मालों या सेवाओं से संबद्ध नहीं है या (प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न की दशा में) स्वत्वधारी द्वारा प्रमाणित मालों या सेवाओं से संबद्ध नहीं है ; या
(ख) वह वस्तु या पदार्थ पहले किसी पेटेन्ट के अधीन विनिर्मित होता था, उस पेटेन्ट की समाप्ति के पश्चात् दो वर्ष या इससे अधिक की कालावधि व्यतीत हो चुकी है, और उक्त शब्द उस वस्तु या पदार्थ का केवल उपयोज्य नाम का वर्णन है,
तो उपधारा (2) के उपबंध लागू होंगे ।
(2) जहां उपधारा (1) के परंतुक के खण्ड (क) या खण्ड (ख) में उल्लिखित तथ्य किन्हीं शब्दों की बाबत साबित कर दिए जाते हैं वहां, -
(क) धारा 57 के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रयोजन के लिए यदि व्यापार चिह्न केवल ऐसे शब्दों से ही मिलकर बना है तो उस प्रश्नगत वस्तु या पदार्थ या उसी विवरण के किसी माल या किन्हीं सेवाओं या उसी विवरण की किन्हीं सेवाओं की बाबत, जैसा कि मामले में अपेक्षित हो, रजिस्ट्रीकरण के लिए उस व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण को रजिस्टर पर गलती से रह गई प्रविष्टि समझा जाएगा;
(ख) व्यापार चिह्न से संबंधित किन्हीं अन्य विधिक कार्यवाहियों के प्रयोजन के लिए-
(i) यदि व्यापार चिह्न केवल ऐसे शब्दों से ही मिलकर बना है तो उस व्यापार चिह्न के उपयोग के बारे में इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन स्वत्वधारी के सब अधिकार; या
(ii) यदि व्यापार चिह्न में ऐसे शब्द और अन्य बातें हैं तो ऐसे शब्दों के उपयोग के बारे में स्वत्वधारी के ऐसे सब अधिकार,
वस्तु या पदार्थ या उसी विवरण के किसी माल के संबंध में या सेवा या उसी विवरण की किन्हीं सेवाओं के संबंध में, जैसा कि मामलें में अपेक्षित हो, उस तारीख को समाप्त हो गए समझे जाएंगे जिस तारीख को उपधारा (1) के परन्तुक के खंड (क) में उल्लिखित उपयोग सर्वप्रथम सुविख्यात और प्रतिष्ठित हुआ या उक्त परन्तुक के खण्ड (ख) में उल्लिखित दो वर्षों की कालावधि समाप्त हुई ।
[अध्याय 4क
मैड्रिड प्रोटोकॉल के अधीन अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के माध्यम से व्यापार चिह्नों के संरक्षण के संबंध में विशेष उपबंध
36क. मैड्रिड प्रोटोकॉल के अधीन अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की दशा में अधिनियम का लागू होना-इस अध्याय के उपबंध अंतरराष्ट्रीय मैड्रिड प्रोटोकॉल के अधीन अंतरराष्ट्रीय आवेदनों और अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण को लागू होंगे ।
36ख. परिभाषाएं-इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) संविदाकारी राज्य या संविदाकारी संगठन के संबंध में आवेदन" से ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया आवेदन अभिप्रेत है जो, यथास्थिति, उस संविदाकारी राज्य या ऐसे राज्य का, जो उस संविदाकारी संगठन का सदस्य है, नागरिक है या उसमें अधिवासी है अथवा उसमें उसका वास्तविक और क्रियाशील औद्योगिक या वाणिज्ियक स्थापन है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए वास्तविक और क्रियाशील औद्यौगिक या वाणिज्यिक स्थापन" से ऐसा कोई स्थापन अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत है, जहां कुछ वास्तविक औद्योगिक या वाणिज्यिक क्रियाकलाप होते हैं और आवश्यकतः कारबार का मुख्य स्थान होना आवश्यक नहीं है;
(ख) मूल आवेदन" से धारा 18 के अधीन फाइल किए गए व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन अभिप्रेत है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए आधार के रूप में किया जाता है;
(ग) मूल रजिस्ट्रीकरण" से धारा 23 के अधीन व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण अभिप्रेत है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए आधार के रूप में किया जाता है;
(घ) सामान्य विनियमों" से मैड्रिड प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन से संबंधित विनियम अभिप्रेत हैं;
(ङ) संविदाकारी संगठन" से ऐसा संविदाकारी पक्षकार अभिप्रेत है, जो अंतर-सरकारी संगठन है;
(च) संविदाकारी पक्षकार" से मैड्रिड प्रोटोकॉल का संविदाकारी राज्य या संविदाकारी संगठन पक्षकार अभिप्रेत है;
(छ) संविदाकारी राज्य" से मैड्रिड प्रोटोकॉल का पक्षकार देश अभिप्रेत है ;
(ज) अंतरराष्ट्रीय आवेदन" से मैड्रिड प्रोटोकॉल के अधीन अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के लिए या किसी संविदाकारी पक्षकार को अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप संरक्षण के विस्तारण के लिए आवेदन अभिप्रेत है;
(झ) अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो" से विश्व बौद्धिक संपदा संगठन का अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो अभिप्रेत है;
(ञ) अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण" से मैड्रिड प्रोटोकॉल के अधीन प्रभावी अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो के रजिस्टर में व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण अभिप्रेत है;
(ट) मैड्रिड करार" से 14 अप्रैल, 1891 को मैड्रिड में अंगीकृत और तत्पश्चात् पुनरीक्षित और संशोधित चिह्नों के अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण से संबंधित मैड्रिड करार अभिप्रेत है;
(ठ) मैड्रिड प्रोटोकॉल" से 27 जून, 1989 को मैड्रिड में अंगीकृत, समय-समय पर यथासंशोधित चिह्नों के अंतरराष्ट्रीय रजिर्स्टीकरण से संबंधित मैड्रिड करार के संबंध में प्रोटोकॉल अभिप्रेत है ।
36ग. अंतरराष्ट्रीय आवेदनों पर कार्यवाही करने के लिए व्यापार चिह्न रजिस्ट्री-धारा 5 की उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, किसी अंतरराष्ट्रीय आवेदन पर व्यापार चिह्न रजिस्ट्री के प्रधान कार्यालय द्वारा या रजिस्ट्री के ऐसे शाखा कार्यालय द्वारा कार्यवाही की जाएगी, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।
36घ. भारत से उद्भूत अंतरराष्ट्रीय आवेदन-(1) जहां व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन धारा 18 के अधीन किया गया है या व्यापार चिह्न धारा 23 के अधीन रजिस्टर कर लिया गया है, वहां आवेदक या उसका रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी उस व्यापार चिह्न के अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के लिए सामान्य विनियमों द्वारा विहित प्ररूप में अंतरराष्ट्रीय आवेदन कर सकेगा ।
(2) अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण धारक कोई व्यक्ति, ऐसे रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप किसी अन्य संविदाकारी पक्षकार को संरक्षण के विस्तारण के लिए सामान्य विनियमों द्वारा विहित प्ररूप में अंतरराष्ट्रीय आवेदन कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अंतरराष्ट्रीय आवेदन, जहां अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप संरक्षण अपेक्षित है, संविदाकारी पक्षकारों को अभिहित करेगा ।
(4) रजिस्ट्रार विहित रीति में यह प्रमाणित करेगा कि अंतरराष्ट्रीय आवेदन में वर्णित विशिष्टियां, धारा 18 के अधीन आवेदन में या धारा 23 के अधीन रजिस्ट्रीकरण में प्रमाणन के समय वर्णित विशिष्टियों के तद्रूप है और, यथास्थिति, उस आवेदन की तारीख और संख्या या उस रजिस्ट्रीकरण की तारीख और संख्या तथा उस आवेदन की तारीख और संख्या उपदर्शित करेगा, जिसके परिणामस्वरूप रजिस्ट्रीकरण हुआ है और विहित अवधि के भीतर अंतरराष्ट्रीय आवेदन को अन्तरराष्ट्रीय ब्यूरो को रजिस्ट्रीकरण के लिए अग्रेषित करेगा और अंतरराष्ट्रीय आवेदन की तारीख भी उपदर्शित करेगा ।
(5) जहां अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति से पूर्व किसी समय, चाहे ऐसा रजिस्ट्रीकरण किसी अन्य अन्य व्यक्ति को अंतरित कर दिया गया है अथवा नहीं, यथास्थिति, धारा 18 के अधीन आवेदन या धारा 23 के अधीन रजिस्ट्रीकरण वापस ले लिया गया है, रद्द कर दिया गया है, समाप्त हो गया है अथवा अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण में सूचीबद्ध सभी या कुछ माल या सेवाओं की बाबत अंतिम रूप से नामंजूर कर दिया गया है, वहां ऐसे अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप संरक्षण प्रभावी नहीं रहेगा:
परंतु जहां रजिस्ट्रीकरण के विनिश्चय के विरुद्ध कोई अपील की जाती है और किसी आवेदन की वापसी के लिए अनुरोध करते हुए कोई कार्य या आवेदन का विरोध अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति से पूर्व आरंभ किया गया है वहां वापसी, रद्दकरण समाप्ति या इंकार में परिणत कोई अंतिम विनिश्चय अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति से पूर्व किया गया समझा जाएगा ।
(6) रजिस्ट्रार, अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की तारीख से आरंभ होने वाली पांच वर्ष की अवधि के दौरान, उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्रत्येक सूचना को अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को पारेषित करेगा ।
(7) रजिस्ट्रार अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को, यथास्थिति, मूल आवेदन या मूल रजिस्ट्रीकरण की वर्तमान प्रास्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के किए जाने वाले रद्दकरण को अधिसूचित करेगा ।
36ङ. जहां भारत को अभिहित किया गया है, वहां अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण-(1) रजिस्ट्रार, जहां भारत को अभिहित किया गया है, वहां किसी अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के बारे में अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो से सलाह लेने के पश्चात्, विहित रीति में उस अन्तरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की विशिष्टियों का अभिलेख रखेगा ।
(2) जहां, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की विशिष्टियों को अभिलिखित करने के पश्चात्, रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि मामले की परिस्थितियों में भारत में व्यापार चिह्न का संरक्षण प्रदान नहीं किया जाना चाहिए या ऐसा संरक्षण ऐसी शर्तों या परिसीमाओं के या उन शर्तों या परिसीमाओं के अतिरिक्त अथवा उनसे भिन्न शर्तों के अधीन रहते है, हुए प्रदान किया जाना चाहिए जिनके अधीन रहते हुए अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण स्वीकार किया गया है, वहां वह, आवेदक को सुनने के पश्चात्, यदि वह ऐसी वांछा करे, संरक्षण प्रदान करने से इंकार कर सकेगा और उस तारीख से, जिसको उपधारा (1) में निर्दिष्ट सलाह प्राप्त हुई थी, अठारह मास के भीतर विहित रीति में, अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को सूचित करेगा ।
(3) जहां रजिस्ट्रार उपधारा (2) के अधीन संरक्षण प्रदान करने से इंकार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की विशिष्टियों में कुछ नहीं पाता है, वहां वह विहित अवधि के भीतर ऐसे अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण को विहित रीति से विज्ञापित कराएगा ।
(4) धारा 9 से धारा 21 (दोनों धाराओं सहित), धारा 63 और धारा 74 के उपबंध किसी अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण को यथा आवश्यक परिवर्तनों सहित इस प्रकार लागू होंगे, मानो ऐसा अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण धारा 18 के अधीन व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन हो ।
(5) जब अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के संरक्षण का विरोध नहीं किया गया है और विरोध की सूचना के लिए समय समाप्त हो गया है, तब रजिस्ट्रार उपधारा (1) के अधीन सलाह की प्राप्ति के अठारह मास की अवधि के भीतर अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को ऐसे अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के अधीन व्यापार चिह्न के संरक्षण के विस्तारण को अपनी स्वीकृति के बारे में अधिसूचित करेगा और यदि रजिस्ट्रार अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को अधिसूचित करने में असफल रहता है तो यह समझा जाएगा कि संरक्षण व्यापार चिह्न तक विस्तारित किया गया है ।
(6) जहां व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी भारत में उस चिह्न का अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण करता है और भारत को अभिहित करता है वहां रजिस्ट्रीकरण की तारीख से अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण द्वारा भारत में धारित रजिस्ट्रीकरण को ऐसे पूर्व में धारित रजिस्ट्रीकरण के अधीन अर्जित किसी अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा और रजिस्ट्रार आवेदक के अनुरोध पर धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट रजिस्टर में आवश्यक प्रविष्टि करेगा ।
(7) किसी व्यापार चिह्न के अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के धारक को, जो भारत को अभिहित करता है और जिसको भारत में संरक्षण विस्तारित नहीं किया गया है, वही उपचार उपलब्ध होगा, जो धारा 18 के अधीन व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने वाले किसी व्यक्ति को उपलब्ध है और जो धारा 23 के अधीन रजिस्ट्रीकरण में परिणत नहीं हुआ है ।
(8) जहां किसी समय अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति से पूर्व, चाहे ऐसा रजिस्ट्रीकरण किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित किया गया हो अथवा नहीं, यथास्थिति, संबंधित मूल आवेदन या भारत से भिन्न किसी संविदाकारी पक्षकार देश में मूल रजिस्ट्रीकरण वापस ले लिया गया है या रद्द कर दिया गया है या समाप्त हो गया है या अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण में सूचीबद्ध सभी या कुछ माल अथवा सेवाओं की बाबत अंतिम रूप रूप से इंकार कर दिया गया है वहां भारत में ऐसे अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप संरक्षण प्रभावी नहीं रहेगा ।
36च. अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के प्रभाव-(1) किसी व्यापार चिह्न के अंतरराष्ट्रीय की तारीख से, जहां भारत को अभिहित किया गया है या व्यापार चिह्न के अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के परिणामस्वरूप संरक्षण के भारत को विस्तार के बारे में अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो के रजिस्टर में लेखबद्ध तारीख से, भारत में व्यापार चिह्न का संरक्षण वैसा ही होगा मानो व्यापार चिह्न भारत में रजिस्ट्रीकृत किया गया हो ।
(2) आवेदक द्वारा दिए गए माल और सेवाओं के वर्गों का उपदर्शन व्यापार चिह्न के संरक्षण की परिधि के अवधारण के संबंध में रजिस्ट्रार पर आबद्धकार नहीं होगा ।
36छ. अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की अवधि और उसका नवीकरण-(1) अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो में किसी व्यापार चिह्न का अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण दस वर्ष की अवधि के लिए होगा और पूवर्वर्ती अवधि की समाप्ति से दस वर्ष की अवधि के लिए नवीकृत किया जा सकेगा ।
(2) नियमों द्वारा विहित अधिभार के संदाय के अधीन रहते हुए, अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के नवीकरण के लिए छह मास की अनुग्रह अवधि अनुज्ञात की जाएगी ।ट
अध्याय 5
समनुदेशन और पारेषण
37. रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी की समनुदेशन करने और रसीद देने की शक्ति-उस व्यक्ति को, जो रजिस्टर में तत्समय व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में प्रविष्ट है, इस अधिनियम के उपबंधों और रजिस्टर से किसी अन्य व्यक्ति में निहित प्रतीत होने वाले अधिकारों के अधीन, व्यापार चिह्न के समनुदेशन की और ऐसे समनुदेशन के लिए किसी प्रतिफल के लिए प्रभावी रसीदें देने की शक्ति होगी ।
38. रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न की समनुदेशनीयता और पारेषणीयता-किसी अन्य विधि में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न सम्पृक्त कारबार के गुडविल सहित या रहित और या तो उन सभी मालों या सेवाओं की बाबत, जिनकी बाबत व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, या उन मालों या सेवाओं में से केवल कुछ की बाबत समनुदेशनीय और पारेषणीय होगा ।
39. अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न की समनुदेशनीयता और पारेषणीयता-किसी अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न को सम्पृक्त कारबार की गुडविल सहित या उसके बिना समनुदेशित या पारेषित किया जा सकेगा ।
40. जहां बहु अनन्य अधिकार सृजित हो जाएंगे वहां समनुदेशन या पारेषण पर निर्बन्धन-(1) धारा 38 और धारा 39 में किसी बात के होते हुए भी, व्यापार चिह्न उस दशा में समनुदेशनीय या पारेषणीय नहीं होगा जिसमें समनुदेशन या पारेषण के परिणामस्वरूप उन परिस्थितियों में एकाधिक सम्पृक्त व्यक्तियों को, चाहे इस अधिनियम के अधीन हो या किसी अन्य विधि के अधीन, -
(क) उसी माल या सेवाओं;
(ख) उसी विवरण वाले माल या सेवाओं;
(ग) ऐसे माल या सेवाएं या माल या सेवाओं के विवरण, जो एक दूसरे से सहयुक्त हैं,
के संबंध में एक दूसरे से निकट सादृश्य रखने वाले व्यापार चिह्न या तद्रूप व्यापार चिह्न के अनन्य उपयोग के अधिकार अस्तित्ववान हो जाएंगे, यदि माल और सेवाओं और व्यापार चिह्न की समरूपता को ध्यान में रखते हुए, उन अधिकारों के प्रयोग में व्यापार चिह्न के उपयोग से धोखा या भ्रम होने की सम्भाव्यता है:
परंतु समनुदेशन या पारेषण इस उपधारा के अधीन अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा यदि उसके परिणामस्वरूप, सम्पृक्त व्यक्तियों के अस्तित्ववान अनन्य अधिकार उन पर अधिरोपित परिसीमाओं को ध्यान में रखते हुए, इस प्रकार के हैं, जो भारत के भीतर, वहां से निर्यात किए जाने से अन्यथा विक्रय किए जाने वाले या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल के संबंध में या भारत के बाहर एक ही बाजार को निर्यात किए जाने वाले माल के संबंध में या भारत में स्वीकृति के लिए उपलभ्य सेवाओं के संबंध में, भारत में किसी स्थान पर या भारत के बाहर किसी स्थान पर उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में या भारत के बाहर के एक ही देश या क्षेत्र में उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में या उन व्यक्तियों में से दो या अधिक द्वारा प्रयोक्तव्य नहीं हैं ।
(2) व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी जो उसे समनुदेशन करने की प्रस्थापना करता है, रजिस्ट्रार को विहित रीति से परिस्थितियों का ब्यौरा देते हुए, मामले का कथन प्रस्तुत कर सकेगा और रजिस्ट्रार उसे एक प्रमाणपत्र दे सकेगा जिसमें यह कथन होगा कि क्या मामले में निर्दिष्ट माल या सेवाओं और व्यापार चिह्नों की समरूपता को ध्यान में रखते हुए, उपधारा (1) के अधीन प्रस्थापित समनुदेशन अविधिमान्य होगा या नहीं होगा और इस प्रकार जारी किया गया प्रमाणपत्र अपील के अधीन रहते हुए और जब तक यह दर्शित नहीं किया जाए कि प्रमाणपत्र कपट या दुर्व्यपदेशन से अधिप्राप्त किया गया था, उपधारा (1) के अधीन समनुदेशन की विधिमान्यता या अविधिमान्यता के बारे में, जहां तक ऐसी विधिमान्यता या अविधिमान्यता मामले में कथित तथ्यों पर निर्भर है निश्चायक होगा, किन्तु जहां तक विधिमान्यता के पक्ष में प्रमाणपत्र का संबंध है, यह तभी होगा जब हकदार बनने वाले व्यक्ति के हक के, धारा 45 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन उस तारीख से, जिसको प्रमाणपत्र जारी किया जाता है, छह मास के भीतर ही कर दिया जाता है ।
41. समनुदेशन या पारेषण पर निर्बन्धन यदि भारत के भिन्न भागों में अनन्य अधिकार सृजित हो जाएंगे-धारा 38 और धारा 39 में किसी बात के होते हुए भी, व्यापार चिह्न उस दशा में समनुदेशनीय या पारेषणीय नहीं होगा जिसमें समनुदेशन या पारेषण के परिणामस्वरूप, उन परिस्थितियों में, चाहे इस अधिनियम के या किसी अन्य विधि के अधीन, -
(क) सम्पृक्त व्यक्तियों में से एक को, भारत में किसी भी स्थान में विक्रय किए जाने वाले या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल के संबंध में, भारत में किसी भी स्थान में उपयोग के लिए सेवाओं के या स्वीकार किए जाने के लिए उपलभ्य सेवाओं के संबंध में उपयोग के लिए मर्यादित व्यापार चिह्न के उपयोग के लिए अनन्य अधिकार; और
(ख) इन्हीं सम्पृक्त व्यक्तियों में से किसी अन्य व्यक्ति को-
(i) उसी माल या सेवाओं; या
(ii) उसी विवरण वाले माल या सेवाओं; या
(iii) ऐसी सेवाओं, जो उसी माल या उसी विवरण के माल से सहयुक्त हैं या ऐसे माल, जो उन्हीं सेवाओं या उसी विवरण की सेवाओं से सहयुक्त हैं,
के संबंध में प्रथम उल्लिखित व्यापार चिह्न से निकट सादृश्य रखने वाले व्यापार चिह्न या तद्रूप व्यापार चिह्न के उपयोग का भारत में किसी अन्य स्थान में विक्रय किए जाने वाले या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल या उपयोग किए जाने वाले या स्वीकार किए जाने के लिए उपलभ्य सेवाओं के संबंध में उपयोग के लिए मर्यादित अनन्य अधिकार होगा:
परंतु किसी भी ऐसी दशा में, व्यापार चिह्न के उस स्वत्वधारी द्वारा, जो उसे समनुदेशन करने की प्रस्थापना करता है या उस व्यक्ति द्वारा, जो यह दावा करता है कि रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न उसे या उसके हक-पूर्वाधिकारी को इस अधिनियम के प्रारंभ से ही पारेषित किया गया है, विहित रीति में आवेदन किए जाने पर यदि रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है कि सभी परिस्थितियों में, उक्त अधिनियम के प्रयोग में व्यापार चिह्न का उपयोग लोकहित के विरुद्ध नहीं होगा तो वह समनुदेशन या पारेषण का अनुमोदन कर सकेगा और इस प्रकार अनुमोदित समनुदेशन या पारेषण, जब तक यह दर्शित न कर दिया जाए कि अनुमोदन कपट या दुर्व्यपदेशन से अभिप्राप्त किया गया था, इस धारा या धारा 40 के अधीन अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा यदि हकदार बनने वाले व्यक्ति को धारा 45 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन उस तारीख से, जिसको अनुमोदन किया गया है, छह मास के भीतर कर दिया गया है या पारेषण की दशा में, उस तारीख से पहले किया गया था ।
42. किसी कारबार की गुडविल के संबंध से अन्यथा समनुदेशन की शर्तें-जहां किसी व्यापार चिह्न का, चाहे वह रजिस्ट्रीकृत हो या अरजिस्ट्रीकृत, समनुदेशन उस कारबार की जिसमें उस चिह्न का उपयोग किया गया था या किया जाता है, गुडविल के संबंध से अन्यथा किया गया है वहां समनुदेशन प्रभावी नहीं होगा जब तक कि समनुदेशिती समनुदेशन की तारीख से छह मास के अवसान के पहले या कुल मिलकार तीन मास से अनधिक ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर, यदि कोई हो, जो रजिस्ट्रार अनुज्ञात करे, समनुदेशन के विज्ञापन की बाबत निर्देशों के लिए रजिस्ट्रार को आवेदन नहीं करता है और ऐसे प्ररूप और रीति में और इतनी अवधि के भीतर जितनी कि रजिस्ट्रार निर्दिष्ट करे, विज्ञापित नहीं करता है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित विवरण वाले व्यापार चिह्न के समनुदेशन की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह ऐसा समनुदेशन है जो उस कारबार के, जिसमें उस चिह्न का उपयोग होता है, गुडविल के संबंध से अन्यथा किया गया है, अर्थात्: -
(क) जिस माल या सेवाओं के लिए व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, उसमें से कुछ की बाबत उस व्यापार चिह्न का समनुदेशन जिसके साथ केवल उस माल या सेवाओं से संपृक्त कारबार के गुडविल का अंतरण हुआ है; या
(ख) जिस व्यापार चिह्न का उपयोग भारत से निर्यातित माल के संबंध में या भारत से बाहर उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में होता है उसका समनुदेशन, यदि समनुदेशन के साथ केवल निर्यात कारबार के गुडविल का अंतरण हुआ है ।
43. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्नों की समनुदेशनीयता और पारेषणीयता-प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न रजिस्ट्रार की सहमति से ही समनुदेशनीय या पारेषणीय होगा अन्यथा नहीं और इसके लिए आवेदन लिखित रूप में विहित रीति में किया जाएगा ।
44. सहयुक्त व्यापार चिह्नों की समनुदेशनीयता और पारेषणीयता-सहयुक्त व्यापार चिह्न समग्र रूप से ही समनुदेशनीय और पारेषणीय होंगे पृथक्तः नहीं, किंतु इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन वे, सभी अन्य प्रयोजनों के लिए, पृथक् व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत समझे जाएंगे ।
[45. समनुदेशनों और पारेषणों का रजिस्ट्रीकरण-(1) जहां कोई व्यक्ति किसी रजिस्ट्रीकरण व्यापार चिह्न का समनुदेशन या पारेषण द्वारा हकदार हो जाता है, वहां वह अपने हक को रजिस्टर करने के लिए रजिस्ट्रार को विहित रीति में आवेदन करेगा और रजिस्ट्रार, आवेदन की प्राप्ति पर, उस माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में उसे रजिस्टर करेगा, जिसकी बाबत ऐसा समनुदेशन या पारेषण प्रभावी है और समनुदेशन या पारेषण की विशिष्टियों को रजिस्टर में प्रविष्ट कराएगा ।
(2) रजिस्ट्रार आवेदक से केवल वहीं जहां दिए गए किसी कथन या किसी दस्तावेज की सत्यता के बारे में कोई युक्तियुक्त संदेह हो, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह हक के सबूत में कोई साक्ष्य या अतिरिक्त साक्ष्य दे ।
(3) जहां किसी समनुदेशन या पारेषण की विधिमान्यता पक्षकारों के बीच में विवादग्रस्त है, वहां रजिस्ट्रार ऐसे समनुदेशन या पारेषण को रजिस्टर करने से तब तक इंकार कर सकेगा, जब तक कि पक्षकारों के अधिकार सक्षम न्यायालय द्वारा अवधारित नहीं किए जाते हैं और सभी अन्य मामलों में रजिस्ट्रार आवेदन का निपटारा विहित अवधि के भीतर करेगा ।
(4) जब तक कि उपधारा (1) के अधीन कोई आवेदन फाइल नहीं किया गया हो, तब तक समनुदेशन या पारेषण ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध प्रभावी नहीं होगा, जो रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न में या उसके अधीन समनुदेशन या पारेषण के ज्ञान के बिना विवादग्रस्त हित अर्जित करता है ।]
अध्याय 6
व्यापार चिह्न का उपयोग और रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता
46. निर्माण, आदि की जाने वाली कंपनी द्वारा व्यापार चिह्न का प्रस्तावित उपयोग-(1) केवल इस आधार पर यह प्रतीत होता है कि आवेदक व्यापार चिह्न का उपयोग नहीं करता है या उपयोग करने की प्रस्थापना नहीं करता है, किसी भी माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन को नामंजूर और ऐसे रजिस्ट्रीकरण की अनुज्ञा को विधारित नहीं किया जाएगा, यदि रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि-
(क) कोई कंपनी, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन निर्मित और रजिस्ट्रीकृत होने ही वाली है और आवेदक का आशय कंपनी द्वारा उन माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के उपयोग के उद्देश्य से उस कंपनी को उस व्यापार चिह्न का समनुदेशन करना है, या
(ख) स्वत्वधारी का व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् किसी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में उसका उपयोग किए जाने का आशय है ।
(2) इस उपधारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के संबंध में धारा 47 के उपबंध वैसे ही प्रभावी होंगे मानो उस धारा की उपधारा (1) के खण्ड (क) में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदक के इस आशय के प्रति निर्देश के स्थान पर कि व्यापार चिह्न उसके द्वारा उपयोग किया जाना चाहिए उसके इस आशय के प्रति निर्देश प्रतिस्थापित किया गया है कि उसका उपयोग सम्बद्ध कंपनी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता द्वारा किया जाना चाहिए ।
(3) अधिकरण उस मामले में, जिसमें उपधारा (1) लागू होती है, आवेदक से, विरोध या अपील से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों के खर्चे की प्रतिभूति देने की अपेक्षा कर सकेगा और सम्यक्तः ऐसी प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम होने पर आवेदन को परित्यक्त मान सकेगा ।
(4) जहां उस मामले में, जिसको उपधारा (1) लागू होती है, किसी माल या सेवाओं की बाबत कोई व्यापार चिह्न किसी ऐसे आवेदक के नाम रजिस्ट्रीकृत है, जो किसी कंपनी को व्यापार चिह्न का समनुदेशन करने के आशय का अवलंब लेता है, वहां यदि ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, या छह मास से अनधिक ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो रजिस्ट्रार विहित रीति में उसे आवेदन करने पर अनुज्ञात करे, कंपनी उस माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्टर नहीं की जाती है, तो रजिस्ट्रीकरण उनकी बाबत उस अवधि के अवसान पर प्रभावशील नहीं होगा और रजिस्ट्रार तद्नुसार रजिस्टर को संशोधित करेगा ।
47. अनुपयोग के आधार पर रजिस्टर से हटाना और मर्यादाएं अधिरोपित करना-(1) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न जिस माल या सेवाओं की बाबत वह रजिस्ट्रीकृत है उनमें से किसी बाबत भी व्यथित व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रार या अपील बोर्ड को विहित रीति में आवेदन करने पर निम्नलिखित आधारों में से किसी आधार पर रजिस्टर से हटाया जा सकेगा, अर्थात्: -
(क) यह कि व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण, रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदक की ओर से इस सद्भावपूर्ण आशय के बिना किया गया था कि उसका उपयोग उस माल या सेवाओं के संबंध में उसके द्वारा, या ऐसे माल में, जिसमें धारा 46 के उपबंध लागू होते हैं, यथास्थिति, संपृक्त कंपनी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता द्वारा, किया जाएगा और यह कि वस्तुतः उस व्यापार चिह्न का उस माल या सेवाओं के संबंध में तत्समय के किसी स्वत्वधारी द्वारा आवेदन की तारीख से तीन मास पूर्व की तारीख तक सद्भावपूर्ण उपयोग नहीं हुआ था ; या
(ख) यह कि आवेदन की तारीख से तीन मास पूर्व की तारीख तक उस तारीख से जिसको व्यापार चिह्न वास्तव में रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत किया गया था, पांच वर्ष की निरंतर अवधि या इससे अधिक अवधि व्यपगत हो चुकी है, जिसमें व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत था और जिसमें उसका तत्समय के किसी स्वत्वधारी द्वारा उस माल या सेवाओं के संबंध में कोई सद्भावपूर्ण उपयोग नहीं हुआ था:
परन्तु जहां आवेदक को धारा 12 के अधीन प्रश्नगत माल या सेवाओं की बाबत तद्रूप या निकट सादृश्य वाला व्यापार चिह्न रजिस्टर करने के लिए अनुज्ञात किया गया है या जहां अधिकरण की यह राय है कि उसे ऐसे व्यापार चिह्न को इस प्रकार रजिस्टर करने के लिए अनुज्ञात करना उचित होगा, उस दशा के सिवाय अधिकरण किसी माल या सेवाओं के संबंध में खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन आवेदन को नामंजूर कर सकेगा यदि यह दर्शाया जाता है कि, यथास्थिति, सुसंगत तारीख के पहले या सुसंगत अवधि के दौरान व्यापार चिह्न के तत्समय स्वत्वधारी द्वारा-
(i) उसी विवरण वाले माल या सेवाओं; या
(ii) यथास्थिति, उसी विवरण वाले उस माल या सेवाओं से सहयुक्त माल या सेवाओं, जो ऐसे माल या सेवाएं हैं जिनके संबंध में व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है,
की बाबत व्यापार चिह्न का सद्भावपूर्वक उपयोग किया गया है ।
(2) जहां किसी माल या सेवाओं के संबंध में जिसकी बाबत व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है-
(क) उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट परिस्थितियां विद्यमान हैं ऐसा भारत में किसी विशिष्ट स्थान में विक्रय या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल (जो भारत से निर्यात के लिए है उनसे अन्यथा) के संबंध में या भारत से बाहर किसी विशिष्ट बाजार में निर्यात किए जाने वाले माल के संबंध में या भारत में किसी विशिष्ट स्थान में उपयोग की जाने वाली या स्वीकार किए जाने के लिए उपलभ्य या भारत से बाहर किसी विशिष्ट बाजार के उपयोग के लिए किन्हीं सेवाओं के संबंध में व्यापार चिह्न के अनुपयोग के बारे में दर्शित किया गया है ; और
(ख) किसी व्यक्ति को धारा 12 के अधीन उन्हीं मालों के बारे में तद्रूप या निकट सादृश्य वाले व्यापार चिह्न किसी ऐसे रजिस्ट्रीकरण के अधीन जो विक्रय किए जाने वाले या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल के संबंध में या इस प्रकार निर्यात किए जाने वाले माल के संबंध में या उसी स्थान में उपयोग के लिए या स्वीकार किए जाने के लिए उपलभ्य या उसी देश में उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में उपयोग के लिए विस्तारित है, रजिस्टर करने के लिए अनुज्ञात किया गया है, या अधिकरण की यह राय है कि उसे ऐसे व्यापार चिह्न को इस प्रकार रजिस्टर करने के लिए अनुज्ञात करना उचित होगा,
वहां उस व्यक्ति द्वारा विहित रीति में अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार को आवेदन करने पर, अधिकरण पहले उल्लिखित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण पर ऐसी मर्यादाएं अधिरोपित की जा सकेंगी जिन्हें वह यह सुनिश्चित करने के लिए उचित समझे कि रजिस्ट्रीकरण का ऐसे उपयोग तक विस्तार समाप्त हो जाएगा ।
(3) उपधारा (1) के खण्ड (ख) के प्रयोजनार्थ या उपधारा (2) के प्रयोजनार्थ कोई आवेदक किसी व्यापार चिह्न के अनुपयोग का, जिसकी बाबत यह दर्शित किय जाता है कि वह व्यापार में विशेष परिस्थितियों के, जिनके अन्तर्गत भारत में व्यापार चिह्न के उपयोग पर किसी विधि या विनियम द्वारा अधिरोपित निर्बन्धन भी है, कारण या व्यापार चिह्न का उस माल या सेवाओं के संबंध में, जिनसे आवेदन संबंधित है, परित्याग करने या उपयोग न करने के आशय के कारण नहीं था, अवलम्ब लेने का हकदार नहीं होगा ।
48. रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता-(1) धारा 49 के उपबंधों के अधीन किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी से भिन्न कोई व्यक्ति उन सभी या किन्हीं माल या सेवाओं की बाबत जिसकी बाबत वह व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, उसके रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकृत किया जा सकेगा ।
(2) धारा 47 के प्रयोजनार्थ या किसी अन्य प्रयोजन के लिए जिसके लिए, ऐसा उपयोग इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन तात्त्विक है, व्यापार चिह्न का अनुज्ञात उपयोग उसके स्वत्वधारी द्वारा उपयोग किया गया समझा जाएगा और यह समझा जाएगा कि वह स्वत्वधारी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उपयोग नहीं किया जाएगा ।
49. रजिस्ट्रीकरण उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण-(1) जहां यह प्रस्थापना है कि किसी व्यक्ति को व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्टर किया जाए वहां रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और प्रस्थापित रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता संयुक्ततः लिखित रूप में रजिस्ट्रार को विहित रीति में आवेदन करेंगे और ऐसे प्रत्येक आवेदन के साथ निम्नलिखित होंगे: -
(क) रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और प्रस्थापित रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के बीच व्यापार चिह्न के अनुज्ञात उपयोग की बाबत किया गया लिखित करार या उसकी सम्यक्तः अधिप्रमाणित प्रति; और
(ख) रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या इस निमित्त कार्य करने के लिए रजिस्ट्रार के समाधानप्रद रूप में प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा किया गया शपथपत्र जिसमें-
(i) रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और प्रस्थापित रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के बीच विद्यमान या प्रस्थापित संबंध की विशिष्टियां उन विशिष्टियों सहित दी हुई होंगी जिनमें उस अनुज्ञात उपयोग पर जो उनके संबंध द्वारा प्रदत्त होगा, स्वत्वधारी द्वारा नियंत्रण की मात्रा और यह बात दर्शित होगी कि क्या यह उनके संबंध का निबन्धन है कि प्रस्थापित रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता एकमात्र रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता होगा या उन व्यक्तियों की बाबत कोई अन्य निर्बन्धन होगा जिनके रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया जा सकेगा ;
(ii) वे माल या सेवाएं कथित होंगी, जिनकी बाबत रजिस्ट्रीकरण प्रस्थापित है;
(iii) वे शर्तें और निर्बन्धन, यदि कोई हों, कथित होंगे, जो माल या सेवाओं के लक्षणों की बाबत, अनुज्ञात उपयोग के ढंग या स्थान की बाबत या किसी अन्य बात की बाबत प्रस्थापित है;
(iv) यह कथित होगा कि क्या अनुज्ञात उपयोग किसी अवधि के लिए होगा या बिना सीमा की अवधि के लिए होगा, और यदि अवधि के लिए है तो उसकी अस्तित्वावधि; और
(ग) ऐसे और दस्तावेज या अन्य साक्ष्य जो रजिस्ट्रार द्वारा अपेक्षित हों या जो विहित किए जाएं ।
(2) उपधारा (1) की अपेक्षाओं का अनुपालन हो जाने पर, रजिस्ट्रार उन माल और सेवाओं की बाबत, जिनके बारे में उसका इस प्रकार समाधान हो जाए, प्रस्थापित रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को रजिस्ट्रीकृत करेगा ।
(3) रजिस्ट्रार किसी व्यक्ति के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण की सूचना उस व्यापार चिह्न के अन्य रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ताओं को, यदि कोई हों, विहित रीति में जारी करेगा ।
(4) यदि आवेदक ऐसी प्रार्थना करे तो रजिस्ट्रार यह सुनिश्िचत करने के लिए कदम उठाएगा कि इस धारा के अधीन आवेदन के प्रयोजनार्थ दी गई सूचना (रजिस्टर में प्रविष्ट बातों के अतिरिक्त) व्यापार में प्रतिद्वन्दियों को प्रकट नहीं की जाएं ।
50. रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण में फेरफार करना या उसे रद्द करने की रजिस्ट्रार की शक्ति-(1) धारा 57 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में किसी व्यक्ति का रजिस्ट्रीकरण-
(क) रजिस्ट्रार द्वारा, उन माल या सेवाओं के संबंध में, जिनकी बाबत वह प्रवृत्त है, व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के विहित रूप में लिखित आवेदन करने पर, फेरफार किया जा सकेगा;
(ख) रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता या व्यापार चिह्न के किसी अन्य रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के विहित रीति में लिखित आवेदन करने पर, रद्द किया जा सकेगा,
(ग) रजिस्ट्रार द्वारा, किसी भी व्यक्ति के विहित रीति में लिखित आवेदन करने पर, निम्नलिखित में से किसी आधार पर रद्द किया जा सकेगा; अर्थात्: -
(i) रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता ने, व्यापार चिह्न का धारा 49 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन करार से अन्यथा उपयोग किया है या इस प्रकार से उपयोग किया है कि धोखा या भ्रम होता है या होने की संभाव्यता है;
(ii) स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता ने, रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन के लिए किसी ऐसे तात्त्विक तथ्य का दुर्व्यपदेशन किया है या उसे प्रकट करने में असफल रहा है, जिसे यदि सही रूप में व्यपदेशित किया जाता या प्रकट किया जाता तो उससे रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता का रजिस्ट्रीकरण न्यायसंगत नहीं होता;
(iii) रजिस्ट्रीकरण की तारीख से परिस्थितियां इस प्रकार बदल गई हैं कि रद्द करने के लिए ऐसे आवेदन की तारीख को वे रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रजिस्ट्रीकरण को न्यायसंगत नहीं बनाती हैं;
(iv) उस संविदा के आधार पर, जिसके अनुपालन में आवेदक हितबद्ध है, उसमें निहित अधिकारों को ध्यान में रखते हुए, रजिस्ट्रीकरण नहीं किया जाना चाहिए था;
(घ) रजिस्ट्रार द्वारा, स्वप्रेरणा से या किसी व्यक्ति द्वारा विहित रीति में लिखित आवेदन पर, इस आधार पर रद्द किया जा सकेगा कि रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के बीच करार में किसी अनुबंध को, जो उस माल या सेवाओं की क्वालिटी के बारे में है, जिसके संबंध में व्यापार चिह्न उपयोग किया जाना है, लागू नहीं किया जा रहा है या उसका अनुपालन नहीं हो रहा है ;
(ङ) रजिस्ट्रार द्वारा उस माल या सेवाओं की बाबत, जिसके संबंध में व्यापार चिह्न अब रजिस्ट्रीकृत नहीं है, रद्द किया जा सकेगा ।
(2) रजिस्ट्रार इस धारा के अधीन प्रत्येक आवेदन की बाबत सूचना उस व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और (आवेदक से भिन्न) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को विहित रीति में जारी करेगा ।
(3) रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए:
परन्तु रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के पूर्व रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।
51. रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ताओं की बाबत करार से संबंधित जानकारी मांगने की रजिस्ट्रार की शक्ति-(1) रजिस्ट्रार रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रजिस्ट्रीकरण के जारी रहने के दौरान किसी समय लिखित सूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह एक मास के भीतर उसे यह पुष्टि करे कि धारा 49 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन फाइल किया गया करार प्रवृत्त बना हुआ है ।
(2) यदि रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी उपधारा (1) के अधीन यथा अपेक्षित पुष्टि एक मास के भीतर करने में असफल रहता है तो रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता उक्त अवधि की समाप्ति के ठीक पश्चात् के दिन को रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता नहीं रह जाएगा और रजिस्ट्रार उसे अधिसूचित करेगा ।
52. अतिलंघन के विरुद्ध कार्यवाही करने का रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता का अधिकार-(1) पक्षकारों के बीच अस्तित्ववान किसी करार के अधीन रहते हुए, कोई रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को प्रतिवादी बनाते हुए अतिलंघन के लिए अपने स्वयं के नाम में कार्यवाही वैसे ही संस्थित कर सकेगा मानो वह रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी हो और ऐसे मामले में ऐसे उपयोगकर्ता के अधिकार और बाध्यताएं रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के अधिकारों और बाध्यताओं के समवर्ती हैं ।
(2) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, प्रतिवादी के रूप में इस प्रकार जोड़ा गया रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी किसी खर्चे के लिए दायी नहीं होगा जब तक कि वह उपसंजात होकर कार्यवाहियों में भाग नहीं लेता है ।
53. अनुज्ञात उपयोक्ता को अतिलंघन के विरुद्ध कार्यवाही करने का अधिकार न होना-धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (द) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को किसी अतिलंघन के लिए कोई कार्यवाही संस्थित करने का अधिकार नहीं होगा ।
54. रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को समनुदेशन या पारेषण का अधिकार न होना-इस अधिनियम की कोई बात व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को उसके उपयोग के लिए कोई समनुदेशीय या पारेषणीय अधिकार प्रदत्त नहीं करेगी ।
स्पष्टीकरण 1-निम्नलिखित मामलों में व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता का अधिकार इस धारा के अर्थान्तर्गत समनुदेशित या पारेषित नहीं समझा जाएगा, अर्थात्: -
(क) जहां रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता, जो एक व्यक्ति है, संपृक्त कारबार चलाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति के साथ भागीदारी करता है; किन्तु ऐसी किसी दशा में फर्म उस व्यापार चिह्न का उपयोग, यदि वह अन्यथा प्रवृत्त हो, तभी तक कर सकेगी जब तक रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता उस फर्म का सदस्य है;
(ख) जहां रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के, जो एक फर्म है, गठन में तत्पश्चात् परिवर्तन हो जाता है; किन्तु ऐसी दशा में पुनर्गठित फर्म उस व्यापार चिह्न का उपयोग, यदि वह अन्यथा प्रवृत्त हो तभी तक कर सकेगी जब तक रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के समय मूल फर्म का कोई भागीदार पुनर्गठित फर्म का भागीदार बना रहता है ।
स्पष्टीकरण 2-स्पष्टीकरण 1 के प्रयोजनों के लिए फर्म" का वही अर्थ है जो भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) में है ।
55. सहयुक्त या सारतः तद्रूप व्यापार चिह्नों में से एक का उपयोग दूसरे के उपयोग के समतुल्य होना-(1) जहां इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के उपयोग की किसी प्रयोजन के लिए साबित करने की अपेक्षा है वहां अधिकरण, यदि और जहां तक वह ठीक समझे, रजिस्ट्रीकृत सहयुक्त व्यापार चिह्न के उपयोग को या ऐसे परिवर्धनों या परिवर्तनों सहित व्यापार चिह्न के उपयोग को, जो उसकी पहचान को सारतः प्रभावित नहीं करता है, उस उपयोग के समतुल्य मान सकेगा जिसका साबित किया जाना अपेक्षित है ।
(2) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का समग्रतः उपयोग इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उस व्यापार चिह्न का उपयोग भी समझा जाएगा जो उसका भाग है और उसी स्वत्वधारी के नाम धारा 15 की उपधारा (1) के अनुसार रजिस्ट्रीकृत है ।
(3) धारा 32 में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (2) में रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के भाग का उपयोग इस अधिनियम के अधीन किसी प्रयोजन के लिए सुभिन्नता के उसके साक्ष्य के लिए निश्चायक नहीं होगा ।
56. व्यापार चिह्न का निर्यात व्यापार के लिए उपयोग और व्यापार संबंध का स्वरूप बदलने पर उपयोग-(1) भारत से निर्यात किए जाने वाले माल को या भारत के बाहर उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में भारत में व्यापार चिह्न का उपयोजन और भारत से इस प्रकार निर्यात किए जाने वाले मालों या भारत से बाहर इस प्रकार की गई सेवाओं के संबंध में भारत में किया गया कोई अन्य कार्य, जो यदि भारत के भीतर विक्रय किए जाने वाले माल या उपबंधित सेवाओं या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल या सेवाओं के संबंध में किया जाता तो भारत में व्यापार चिह्न का उपयोग होता, उस माल या सेवाओं के संबंध में किसी ऐसे प्रयोजनार्थ, जिसके लिए ऐसा उपयोग इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन तात्त्विक है, व्यापार चिह्न का उपयोग समझा जाएगा ।
(2) ऐसे माल या सेवाओं के संबंध में रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के उपयोग से, जिनके और चिह्न का उपयोग करने वाले व्यक्ति के बीच व्यापार के अनुक्रम में किसी प्रकार का संबंध अस्तित्ववान है, यह नहीं समझा जाएगा कि उससे केवल इस आधार पर धोखा या भ्रम होने की संभावना है कि चिह्न का ऐसे माल या सेवाओं के संबंध में उपयोग किया गया है या उपयोग किया जाता है, जिनके और उक्त व्यक्ति के या उस व्यक्ति के पूर्ववर्ती के बीच व्यापार के अनुक्रम में कोई भिन्न संबंध अस्तित्ववान था या है ।
अध्याय 7
रजिस्टर की पुरिशुद्धि और शुद्धि
57. रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने या उसमें फेरफार करने और रजिस्टर को परिशोधित करने की शक्ति-(1) किसी व्यथित व्यक्ति द्वारा विहित रीति में अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार को आवेदन करने पर अधिकरण किसी उल्लंघन या उसके संबंध में रजिस्टर में प्रविष्ट शर्त का पालन करने में असफलता के आधार पर व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के रद्द करने या इसमें फेरफार करने का ऐसा आदेश दे सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(2) रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के अभाव या लोप से या रजिस्टर में बिना पर्याप्त कारण से की गई किसी प्रविष्टि से या रजिस्टर में गलती से रह गई किसी प्रविष्टि से या रजिस्टर में किसी प्रविष्टि में किसी गलती या त्रुटि से व्यथित व्यक्ति विहित रीति में अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार को आवेदन कर सकेगा, और अधिकरण उसकी प्रविष्टि करने, उसे निकाल देने या उसमें फेरफार करने के लिए ऐसा आदेश दे सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(3) इस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में अधिकरण किसी ऐसे प्रश्न को विनिश्चित कर सकेगा जिसका रजिस्टर के परिशोधन के संबंध में विनिश्चय करना आवश्यक या समीचीन हो ।
(4) अधिकरण, स्वप्रेरणा से, संपृक्त पक्षकारों को विहित रीति में सूचना देने के पश्चात् और उन्हें सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट आदेश दे सकता है ।
(5) अपील बोर्ड के रजिस्टर को परिशोधित करने वाले आदेश में यह निदेश होगा कि परिशोधन की सूचना रजिस्ट्रार को विहित रीति में तामील की जाएगी और रजिस्ट्रार ऐसी सूचना की प्राप्ति पर रजिस्टर को तद्नुसार परिशोधित करेगा ।
58. रजिस्टर की शुद्धि-(1) रजिस्ट्रार रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा विहित रीति में आवेदन करने पर, -
(क) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के नाम, पते या विवरण में किसी गलती को व्यापार चिह्न से संबंधित किसी अन्य प्रविष्टि को शुद्ध कर सकेगा;
(ख) उस व्यक्ति के, जो व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकृत है, नाम, पते या विवरण में कोई परिवर्तन प्रविष्ट कर सकेगा;
(ग) रजिस्टर में व्यापार चिह्न की प्रविष्टि को रद्द कर सकेगा;
(घ) उस माल, माल के वर्ग या सेवाओं में से, जिनकी बाबत कोई व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, किसी माल या माल के वर्ग या सेवाओं को काट सकेगा,
और रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र में कोई पारिणामिक संशोधन या परिवर्तन कर सकेगा और उस प्रयोजनार्थ रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को अपने समक्ष पेश करने की अपेक्षा कर सकेगा ।
(2) रजिस्ट्रार व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता द्वारा विहित रीति में किए गए आवेदन पर और रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को सूचना देने के पश्चात् या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता के नाम, पते या विवरण में किसी गलती को शुद्ध कर सकेगा या उसमें किसी परिवर्तन की प्रविष्टि कर सकेगा ।
59. रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का परिवर्तन-(1) व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी व्यापार चिह्न की अनन्यता को सारतः प्रभावित न करने वाली रीति में उस व्यापार चिह्न में परिवर्धन या परिवर्तन करने की इजाजत के लिए रजिस्ट्रार को विहित रीति में आवेदन कर सकेगा और रजिस्ट्रार इजाजत देना अस्वीकार कर सकेगा या ऐसी शर्तों पर और ऐसी मर्यादाओं के अधीन दे सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(2) रजिस्ट्रार इस धारा के अधीन किए गए आवेदन को ऐसी किसी दशा में विहित रीति में विज्ञापित करा सकेगा, जहां उसे यह प्रतीत होता हो कि ऐसा करना समीचीन है और जहां वह ऐसा करता है वहां यदि विज्ञापन की तारीख से विहित समय के भीतर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रार को विहित रीति में आवेदन के विरोध की सूचना देता है तो रजिस्ट्रार, यदि आवश्यक हो तो, पक्षकारों को सुनने के पश्चात् मामले का विनिश्चय करेगा ।
(3) जहां इस धारा के अधीन इजाजत दी जाती है वहां यथा परिवर्तित व्यापार चिह्न तब तक विहित रीति में विज्ञापित नहीं किया जाएगा जब तक कि धारा 2 के अधीन आवेदन पहले ही विज्ञापित नहीं कर दिया गया हो ।
60. रजिस्टर की प्रविष्टियों का माल या सेवाओं के संशोधित या प्रतिस्थापित वर्गीकरण के लिए अनुकूलन-(1) रजिस्ट्रार, रजिस्टर में कोई ऐसा संशोधन नहीं करेगा जिसका प्रभाव संशोधन किए जाने के ठीक पहले उस माल या माल के वर्गों या सेवाओं में, जिनकी बाबत व्यापार चिह्न (चाहे एक या अधिक वर्गों में) रजिस्ट्रीकृत है, किसी माल या माल के वर्गों या सेवाओं को जोड़ना होगा या किसी माल या सेवाओं की बाबत व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण को पूर्व दिनांकित करना होगा:
परंतु यह उपधारा तब लागू नहीं होगी, जब रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाता है कि उसके अनुपालन में असम्यक् जटिलताएं हैं और, यथास्थिति, वैसे जोड़े जाने या पूर्व दिनांकन से माल या सेवाओं का पर्याप्त परिणाम प्रभावित नहीं होगा और किसी व्यक्ति के अधिकारों पर पर्याप्ततः प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा ।
(2) रजिस्टर को इस प्रकार संशोधित करने की प्रस्थापना प्रभावित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी को सूचित की जाएगी और विहित रीति में विज्ञापित की जाएगी और कोई भी व्यथित व्यक्ति रजिस्ट्रार के समक्ष इस आधार पर विरोध कर सकेगा कि प्रस्थापित संशोधन उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है ।
अध्याय 8
सामूहिक चिह्न
61. सामूहिक चिह्न के लिए विशेष उपबंध-(1) इस अधिनियम के उपबंध इस अध्याय में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए सामूहिक चिह्न को लागू होंगे ।
(2) सामूहिक चिह्न के संबंध में एक व्यक्ति के माल या सेवाओं के दूसरे व्यक्ति के माल या सेवाओं से विभेद के लिए धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (यख) में निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे व्यक्तियों के एक संगम के सदस्यों के माल या सेवाओं के दूसरे व्यक्तियों के संगम के सदस्यों के माल या सेवाओं से विभेद के प्रतिनिर्देश हैं ।
62. सामूहिक चिह्न का स्वरूप या महत्व के संबंध में भ्रामक न होना-कोई सामूहिक चिह्न रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा यदि इससे, विशिष्टतया तब जब उसे सामूहिक चिह्न से अन्यथा किसी रूप में ग्रहण किए जाने की संभावना हो, जनता में धोखा या भ्रम उत्पन्न होने की संभावना है तथा ऐसे माल में रजिस्ट्रार यह अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसे चिह्न में, जिसके बारे में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया गया है, ऐसा कुछ उपदर्शन हो कि यह सामूहिक चिह्न है ।
63. आवेदन के साथ सामूहिक चिह्न के उपयोग को शासित करने वाले विनियमों का होना-(1) सामूहिक चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन के साथ ऐसे सामूहिक चिह्न के उपयोग को शासित करने वाले विनियम होंगे ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट विनियमों में चिह्न का उपयोग करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति, संगम की सदस्यता की शर्तें और चिह्न के उपयोग की शर्तें, जिनके अंतर्गत दुरुपयोग के विरुद्ध कोई शास्ति भी है और ऐसी अन्य बातें, जो विहित की जाएं, विनिर्दिष्ट की जाएंगी ।
64. आवेदन और विनियमों का रजिस्ट्रार द्वारा स्वीकार किया जाना-यदि रजिस्ट्रार को यह प्रतीत होता है कि रजिस्ट्रीकरण के लिए अपेक्षाएं पूरी कर दी गई हैं तो वह विनियमों के साथ आवेदन को या तो बिना किसी शर्त या ऐसी शर्तों के अधीन, जिनके अंतर्गत उक्त विनियमों का संशोधन, यदि कोई हो, भी है जैसा वह ठीक समझे, स्वीकार करेगा या उसे स्वीकार करने से इंकार करेगा और यदि स्वीकार करता है तो विनियमों को अधिसूचित करेगा ।
65. विनियमों का निरीक्षण के लिए खुला होना-धारा 63 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट विनियम, सर्व साधारण के निरीक्षण के लिए वैसे ही खुले होंगे जैसे कि धारा 148 में यथाउपबंधित रजिस्टर होते हैं ।
66. विनियमों का संशोधन-धारा 63 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट विनियमों का कोई संशोधन तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि संशोधित विनियम रजिस्ट्रार के पास फाइल नहीं किए गए हैं और उनको धारा 64 के अनुसार रजिस्ट्रार द्वारा स्वीकार और प्रकाशित नहीं किया गया है ।
67. सामूहिक चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा अतिलंघन की कार्यवाहियां-वादी के रूप में सामूहिक चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा संस्थित अतिल्लंघन के वाद में न्यायालय प्राधिकृत उपयोक्ता को हुई किसी हानि या होने के लिए संभाव्य किसी हानि को हिसाब में लेगा और ऐसे निदेश दे सकेगा, जो वह इस बारे में ठीक समझे कि ऐसे प्राधिकृत उपयोक्ता की ओर से किसी धनीय उपचार के आगमों को वादी किस विस्तार तक धारित करेगा ।
68. सामूहिक चिह्न के रजिस्ट्रीकरण को हटाने के लिए अतिरिक्त आधार-सामूहिक चिह्न को रजिस्ट्रीकरण रजिस्टर से निम्नलिखित आधारों पर भी हटाया जा सकेगा-
(क) जिस रीति में सामूहिक चिह्न का उपयोग स्वत्वधारी या प्राधिकृत उपयोक्ता द्वारा किया गया है, उससे उसका सामूहिक चिह्न के रूप में जनता के लिए भ्रामक होना संभाव्य हो गया है; या
(ख) स्वत्वधारी चिह्न के उपयोग को शासित करने वाले विनियमों का पालन करने या पालन करने को सुनिश्चित करने में असफल रहा है ।
स्पष्टीकरण 1-इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो प्राधिकृत उपयोक्ता" से किसी संगम का ऐसा कोई सदस्य अभिप्रेत है जो उस संगम के रजिस्ट्रीकृत सामूहिक चिह्न का प्राधिकृत उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है ।
स्पष्टीकरण 2-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए स्पष्टीकरण 1 में निर्दिष्ट प्राधिकृत उपयोक्ता द्वारा सामूहिक चिह्न का उपयोग उसके रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा किया गया उपयोग समझा जाएगा ।
अध्याय 9
प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न
69. इस अधिनियम के कतिपय उपबंधों का प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न को लागू न होना-इस अधिनियम के निम्नलिखित उपबंध प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न को लागू नहीं होंगे, अर्थात्: -
(क) धारा 9 की उपधारा (1) का खंड (क) और खंड (ग);
(ख) धारा 18, धारा 20 और धारा 21, इस अध्याय द्वारा जहां अभिव्यक्ततः लागू किए गए हैं उनको छोड़कर;
(ग) धारा 28, धारा 29, धारा 30, धारा 41, धारा 42, धारा 47, धारा 48, धारा 49, धारा 50, धारा 52, धारा 54 और धारा 56 की उपधारा (2);
(घ) अध्याय 12, धारा 107 को छोड़कर ।
70. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्नों का रजिस्ट्रीकरण-कोई चिह्न उस व्यक्ति के नाम में प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्टर नहीं किया जाएगा जो प्रमाणीकृत प्रकार के माल या प्रमाणीकृत प्रकार की सेवाओं की व्यवस्था का व्यापार करता है ।
71. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन-(1) किसी चिह्न को प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन रजिस्ट्रार को विहित रीति में उस व्यक्ति द्वारा किया जाएगा जिसे उसके स्वत्वधारी के रूप में रजिस्टर करने की प्रस्थापना है और उसके साथ धारा 74 के अधीन जमा किए जाने वाले विनियमों का प्ररूप भी होगा ।
(2) धारा 70 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, धारा 18, धारा 19 और धारा 22 के उपबंध इस धारा के अधीन आवेदन के संबंध में इस उपांतर के अधीन रहते हुए कि उसमें आवेदन को स्वीकार किए जाने के प्रति निर्देश का अर्थ आवेदन के संबंध में कार्यवाही करने के प्राधिकार के प्रति निर्देश के रूप में लगाया जाएगा, वैसे ही लागू होंगे जिस प्रकार वे धारा 18 के अधीन आवेदन के संबंध में लागू होते हैं ।
(3) इस धारा के अधीन किसी आवेदन को उक्त उपबंधों के अधीन निपटाने में, अधिकरण, जहां तक सुसंगत हो, ऐसी बातों पर, मानो वह आवेदन धारा 18 के अधीन आवेदन है और इस धारा के अधीन आवेदनों के लिए सुसंगत अन्य बातों पर भी ध्यान देगा जिसके अन्तर्गत यह सुनिश्चित करने की वांछनीयता भी है कि प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न में कोई ऐसा उपर्दशन होगा कि वह प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न है ।
72. रजिस्ट्रीकरण के आवेदन पर रजिस्ट्रार द्वारा विचार-(1) रजिस्ट्रार धारा 71 के अधीन आवेदन पर निम्नलिखित विषयों के बारे में विचार करेगा, अर्थात्: -
(क) क्या आवेदक उस माल को, जिसकी बाबत चिह्न, रजिस्टर किया जाना है, प्रमाणित करने के लिए सक्षम है;
(ख) क्या धारा 74 के अधीन फाइल किए जाने वाले विनियमों का प्ररूप समाधानप्रद है;
(ग) क्या आवेदित रजिस्ट्रीकरण सभी परिस्थितियों में सार्वजनिक लाभ के लिए होगा,
और या तो-
(i) आवेदन नामंजूर कर सकेगा; या
(ii) आवेदन स्वीकार कर सकेगा और विनियमों के उक्त प्ररूप को या तो बिना उपांतरों के और शर्त के बिना या किन्हीं शर्तों और परिसीमाओं के अथवा आवेदन या विनियमों के किन्हीं संशोधनों या उपांतरों के अधीन रहते हुए, जिन्हें उक्त विषयों में से किन्हीं पर ध्यान देते हुए वह आवश्यक समझे, अनुमोदित कर सकेगा ।
(2) उपांतरों और शर्तों के बिना स्वीकार और अनुमोदित करने की दशा के सिवाय, रजिस्ट्रार आवेदक को सुनवाई का अवसर दिए बिना उपधारा (1) के अधीन किसी मामले का विनिश्चय नहीं करेगा ।
73. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्नों के रजिस्ट्रीकरण का विरोध-जब कोई आवेदन स्वीकार कर लिया जाता है तब रजिस्ट्रार, तत्पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, यथास्वीकृत आवेदन को विहित रीति में विज्ञापित कराएगा और धारा 21 के उपबंध उस चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे धारा 18 के अधीन आवेदन के संबंध में लागू होते हैं ।
74. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के उपयोग को शासित करने वाले विनियमों को फाइल करना-(1) प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के रूप रजिस्ट्रीकृत प्रत्येक चिह्न की बाबत उसके उपयोग को शासित करने वाले विनियम व्यापार चिह्न रजिस्ट्री में फाइल किए जाएंगे, जिसके अंतर्गत उन मामलों के बारे में उपबंध भी होंगे जिनमें स्वत्वधारी को माल या सेवाओं को प्रमाणित करना और प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के उपयोग को प्राधिकृत करना है और जिनमें कोई अन्य उपबंध भी अंतर्विष्ट हो सकेंगे जिन्हें रजिस्ट्रार साधारण या विशेष आदेश द्वारा, उनमें अन्तःस्थापित करने की अपेक्षा करे या अनुज्ञात करे (इसके अन्तर्गत स्वत्वधारी द्वारा माल को प्रमाणित करने या विनियमों के अनुसार प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के उपयोग को प्राधिकृत करने से इंकार करने के विरुद्ध रजिस्ट्रार को अपील करने का अधिकार प्रदान करने वाले उपबंध भी हैं) और इस प्रकार फाइल किए गए विनियम धारा 148 में जैसा उपबंधित है, रजिस्टर के समान ही निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे ।
(2) इस प्रकार फाइल किए गए विनियम, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के आवेदन पर, रजिस्ट्रार द्वारा परिवर्तित किए जा सकेंगे ।
(3) रजिस्ट्रार ऐसे आवेदन को ऐसी किसी दशा में विज्ञापित करा सकेगा जहां उसे यह प्रतीत हो कि ऐसा करना समीचीन है और जहां वह ऐसा कराता है, वहां यदि विज्ञापन में विनिर्दिष्ट समय के भीतर कोई व्यक्ति आवेदन के विरोध की सूचना देता है, तो रजिस्ट्रार पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिए बिना मामले का विनिश्चय नहीं करेगा ।
75. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्नों का अतिलंघन-उस व्यक्ति द्वारा धारा 78 द्वारा प्रदत्त अधिकार का अतिलंघन किया जाता है जो प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या धारा 74 के अधीन फाइल किए गए विनियमों के अधीन उसके द्वारा इस निमित प्राधिकृत व्यक्ति तद्नुसार उसका उपयोग करने वाला व्यक्ति नहीं है और जो उस माल के या उन सेवाओं के संबंध में, जिनकी बाबत वह चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, व्यापार के अनुक्रम में ऐसे चिह्न का उपयोग करता है जो प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के तद्रूप या इतना समरूप है कि धोखा हो जाए और इस रीति से उपयोग करता है कि इस बात की संभाव्यता है कि ऐसा उपयोग व्यापार चिह्न के उपयोग के रूप में समझा जाए ।
76. वे कार्य जो प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न का अतिलंघन नहीं हैं-(1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रीकृत प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के उपयोग के अधिकार का अतिलंघन निम्नलिखित कार्यों से नहीं होता है: -
(क) जहां कोई प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न रजिस्टर में प्रविष्ट शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रजिस्ट्रीकृत है, वहां विक्रय किए जाने वाले या अन्यथा व्यापार किए जाने वाले माल के संबंध में या किसी बाजार को निर्यात किए जाने वाले माल के संबंध में या किसी स्थान, देश या राज्यक्षेत्र में स्वीकार करने के लिए उपलब्ध या उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में, या किन्हीं अन्य परिस्थितियों में जिनको, ऐसी किन्हीं मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए, रजिस्ट्रीकरण का विस्तार नहीं है ऐसे चिह्न का किसी ढंग से उपयोग;
(ख) चिह्न के स्वत्वधारी द्वारा प्रमाणित माल या सेवाओं के संबंध में प्रमाणीकरण व्यपार चिह्न का उपयोग, यदि उस माल या उन सेवाओं के बारे में या किसी प्रपुंज के बारे में जिसके वे भाग हैं, स्वत्वधारी या सुसंगत विनियमों के अधीन उनके प्राधिकार के अनुसार किसी अन्य ने चिह्न लगाया है और तत्पश्चात् उसे न तो हटाया है और न मिटाया है, या स्वत्वधारी ने किसी भी समय अभिव्यक्ततः या विवक्षित रूप से चिह्न के उपयोग की सहमति दी है;
(ग) प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न का उस माल या उन सेवाओं के संबंध में उपयोग, जो अन्य माल के, जिनके संबंध में चिह्न का यथापूर्वोक्त दिए गए अधिकार के अतिलंघन के बिना उपयोग किया गया है, या तत्समय उस प्रकार उपयोग किया जा सकता है, भागरूप बनाने के लिए या उपसाधन बनाने के लिए अनुकूलित है, यदि चिह्न का उपयोग यह उपदर्शित करने के लिए युक्तियुक्त रूप से आवश्यक है कि माल या सेवाएं इस प्रकार अनुकूलित हैं, और चिह्न के उपयोग का न तो यह आशय है और न यह प्रभाव ही है कि इस तथ्य से भिन्नतः कुछ उपदर्शित किया जाए कि माल या सेवाएं स्वत्वधारी द्वारा प्रमाणित हैं ।
(2) उपधारा (1) का खंड (ख) ऐसे उपयोग के मामले में, जो किसी प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के किसी माल या सेवाओं को लागू करता है, इस बात के होते हुए भी कि वे ऐसे माल या सेवाएं हैं जो उस खंड में उल्लिखित हैं, उस दशा में लागू नहीं होगा यदि ऐसा लागू किया जाना उस खंड में विनिर्दिष्ट विनियमों के प्रतिकूल है ।
(3) जहां प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत दो या अधिक व्यापार चिह्नों में से एक है जो एक दूसरे से तद्रूप या निकटतः सदृश है, वहां रजिस्ट्रीकरण द्वारा प्रदत्त उस व्यापार चिह्न के उपयोग के अधिकार के प्रयोग में उन व्यापार चिह्नों में से किसी का उपयोग उन व्यापार चिह्नों में से किसी अन्य के उपयोग के लिए उस प्रकार प्रदत्त अधिकार का अतिलंघन नहीं समझा जाएगा ।
77. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का रद्द किया जाना या उसमें फेरफार करना-रजिस्ट्रार किसी व्यथित व्यक्ति के विहित रीति में आवेदन पर और स्वत्वधारी को उस आवेदन का विरोध करने का अवसर देने के पश्चात् किसी प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न से संबंधित रजिस्टर में किसी प्रविष्टि को हटाने या उसमें फेरफार करने के लिए या विनियमों में फेरफार करने के लिए निम्नलिखित आधारों में से किसी पर ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे, अर्थात्: -
(क) स्वत्वधारी उस माल या उन सेवाओं में से किसी की दशा में, जिसकी बाबत चिह्न रजिस्ट्रीकृत है, उस माल या सेवओं को प्रमाणित करने के लिए अब सक्षम नहीं है;
(ख) स्वत्वधारी विनियमों के किसी उपबंध का, जिनका उसे अनुपालन करना था, अनुपालन करने में असफल रहा है;
(ग) चिह्न का रजिस्ट्रीकृत बना रहना अब सार्वजनिक हित में नहीं है;
(घ) सार्वजनिक हित के लिए यह अपेक्षित है कि यदि चिह्न रजिस्ट्रीकृत बना रहे तो विनियमों में फेरफार किया जाए ।
78. प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण द्वारा प्रदत्त अधिकार-(1) धारा 34, धारा 35 और धारा 76 के उपबंधों के अधीन किसी माल या किन्हीं सेवाओं की बाबत किसी व्यक्ति के प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकरण से, यदि वह विधिमान्य है तो, उस व्यक्ति को उस माल या उन सेवाओं की बाबत उस चिह्न के उपयोग का अनन्य अधिकार प्राप्त होगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के उपयोग का अनन्य अधिकार उन शर्तों और मर्यादाओं के अधीन होगा जिनके अधीन रजिस्ट्रीकरण है ।
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अध्याय 11
अपील बोर्ड
83. अपील बोर्ड की स्थापना-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक अपील बोर्ड की स्थापना करेगी जिसका नाम बौद्धिक संपदा अपील बोर्ड होगा, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उसे प्रदत्त अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग करेगा ।
84. अपील बोर्ड की संरचना-(1) अपील बोर्ड एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और उतने अन्य सदस्यों से, जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, मिलकर बनेगा और इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपील बोर्ड की अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग उसके न्यायपीठों द्वारा किया जा सकेगा ।
(2) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई न्यायपीठ एक न्यायिक सदस्य और एक तकनीकी सदस्य से मिलकर बनेगा और वह ऐसे स्थान पर अधिविष्ठ होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।
(3) उपधारा (2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष-
(क) उस न्यायपीठ के, जिसमें उसे नियुक्त किया जाता है न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कृत्यों के निर्वहन के अतिरिक्त किसी अन्य न्यायपीठ के, यथास्थिति, न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कृत्यों का भी निर्वहन कर सकेगा;
(ख) किसी सदस्य का एक न्यायपीठ से दूसरे न्यायपीठ में स्थानांतरण कर सकेगा;
(ग) एक न्यायपीठ में नियुक्त उपाध्यक्ष, न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य को किसी अन्य न्यायपीठ के, यथास्थिति, न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकेगा ।
(4) जहां किन्हीं न्यायपीठों का गठन किया जाता है वहां केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा न्यायपीठों में अपील बोर्ड के कारबार के वितरण से संबंधित उपबंध कर सकेगी और उन मामलों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिनका निपटारा प्रत्येक न्यायपीठ द्वारा किया जाएगा ।
(5) यदि ऐसा कोई प्रश्न उत्पन्न होता है कि कोई मामला न्यायपीठ को आबंटित कार्य के अंतर्गत आता है या नहीं, तो अध्यक्ष का विनिश्चय अंतिम होगा ।
स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषणा की जाती है कि मामला" पद के अंतर्गत धारा 91 के अधीन कोई अपील भी है ।
(6) यदि किसी मुद्दे पर किसी न्यायपीठ के सदस्यों के बीच मतभेद होता है तो वे उस मुद्दे या उन मुद्दों का, जिन पर मतभेद है उल्लेख करेंगे और अध्यक्ष को निर्देश करेंगे, जो मुद्दे या मुद्दों की या तो स्वयं सुनवाई करेगा या ऐसे मुद्दे या मुद्दों की सुनवाई के लिए उसे एक या अन्य सदस्यों को निर्दिष्ट करेगा और ऐसे मुद्दे या मुद्दों का विनिश्चय उन सदस्यों के बहुमत के अनुसार किया जाएगा जिन्होंने मामले की सुनवाई की है, जिनके अंतर्गत वे सदस्य भी हैं जिन्होंने उसकी पहली बार सुनवाई की थी ।
85. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताएं-(1) कोई व्यक्ति अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह-
(क) किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है; या
(ख) कम से कम दो वर्ष तक उपाध्यक्ष का पद धारण कर चुका हो ।
(2) कोई व्यक्ति उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह-
(क) कम से कम दो वर्ष तक न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के रूप में पद धारण कर चुका हो; या
(ख) भारतीय विधि सेवा का सदस्य रहा है और उस सेवा के ग्रेड-1 में या किसी उच्च पद पर कम से कम पांच वर्ष तक पद धारण कर चुका हो ।
(3) कोई व्यक्ति न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह-
(क) भारतीय विधि सेवा का सदस्य रहा है और उस सेवा के ग्रेड-1 में कम से कम तीन वर्ष तक पद धारण कर चुका है; या
(ख) कम से कम दस वर्ष तक कोई सिविल न्यायिक पद धारण कर चुका हो ।
(4) कोई व्यक्ति तकनीकी सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह-
(क) कम से कम दस वर्ष तक इस अधिनियम या व्यापार और पण्य वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) के अधीन, या दोनों के अधीन अधिकरण के कृत्यों का निर्वहन कर चुका है और कम से कम पांच वर्ष तक कोई ऐसा पद धारण कर चुका है जो संयुक्त रजिस्ट्रार के पद से निम्न पंक्ति का न हो ; या
(ख) कम से कम दस वर्ष तक ऐसा अधिवक्ता रहा हो जिसे व्यापार चिह्न विधि में साबित विशेषज्ञीय अनुभव हो ।
(5) उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी ।
(6) अध्यक्ष के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श के पश्चात् ही की जाएगी, अन्यथा नहीं ।
86. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की पदावधि-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य ऐसी तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करते हैं, पांच वर्ष की अवधि तक, या-
(क) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की दशा में पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त होने तक, और
(ख) किसी सदस्य की दशा में बासठ वर्ष की आयु प्राप्त होने तक,
इनमें से जो भी पूर्वतर हो, उस हैसियत में अपना पद धारण करेगा ।
87. कतिपय परिस्थितियों में उपाध्यक्ष या ज्येष्ठतम सदस्य का अध्यक्ष के रूप में कार्य करना या उसके कृत्यों का निर्वहन करना-(1) अध्यक्ष के पद पर उसकी मृत्यु, त्यागपत्र के कारण या अन्यथा कोई रिक्ति होने की दशा में, उपाध्यक्ष और उसकी अनुपस्थिति में ज्येष्ठतम सदस्य, उस तारीख तक, जिसको कोई नया अध्यक्ष इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार ऐसी रिक्ति को भरने के लिए अपना पद ग्रहण करता है, अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा ।
(2) जब अध्यक्ष अपनी अनुपस्थिति, बीमारी के कारण या किसी अन्य कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है, तो उपाध्यक्ष और उसकी अनुपस्थिति में ज्येष्ठतम सदस्य, उस तारीख तक, जिसको अध्यक्ष अपना कर्तव्य ग्रहण करता है, अध्यक्ष के कृत्यों का निर्वहन करेगा ।
88. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के वेतन, भत्ते और उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें-(1) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबन्धन और शर्तें (जिनके अंतर्गत पेंशन, उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे हैं) वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में जो, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में पद ग्रहण करने की तारीख से ठीक पूर्व सरकारी सेवा में था, यह समझा जाएगा कि वह उस तारीख को, जिसको वह अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में पद ग्रहण करता है, सेवा से निवृत्त हो गया है ।
89. पदत्याग और हटाया जाना-(1) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य, भारत के राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित सूचना द्वारा, अपना पद त्याग सकेगा:
परंतु अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य, जब तक कि उसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा उससे पहले अपना पद त्याग करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती, ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन मास की समाप्ति तक या उसके पदोत्तरवर्ती के रूप में सम्यक् रूप से नियुक्त व्यक्ति द्वारा अपना पद ग्रहण कर लेने तक या उसकी पदावधि समाप्त होने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, अपना पद धारण करता रहेगा ।
(2) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य अपने पद से, साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर, उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा ऐसी जांच किए जाने के पश्चात् जिसमें ऐसे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य को उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दे दी गई है और उन आरोपों के संबंध में सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दे दिया गया है, भारत के राष्ट्रपति द्वारा किए गए आदेश से ही हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (2) में निर्दिष्ट अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य के कदाचार या असमर्थता का अन्वेषण करने के लिए प्रक्रिया, नियमों द्वारा विनियमित कर सकेगी ।
90. अपील बोर्ड के कर्मचारिवृंद-(1) केन्द्रीय सरकार ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की किस्म और प्रवर्ग अवधारित करेगी जो अपील बोर्ड को उसके कृत्यों का निर्वहन करने में सहायता करने के लिए अपेक्षित हों और अपील बोर्ड के लिए ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था करेगी, जो वह ठीक समझे ।
(2) अपील बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा सेवा की शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।
(3) अपील बोर्ड के अधिकारी और अन्य कर्मचारी अध्यक्ष के साधारण अधीक्षण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन ऐसी रीति से करेंगे, जो विहित की जाए ।
91. अपील बोर्ड को अपील-(1) कोई ऐसा व्यक्ति जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन रजिस्ट्रार के आदेश या विनिश्चय से व्यथित है, अपील बोर्ड को ऐसी तारीख से, जिसको ऐसा आदेश या विनिश्चय जिसके विरुद्ध अपील की जा रही हो, अपील करने वाले ऐसे व्यक्ति को संसूचित किया गया है, तीन मास के भीतर अपील कर सकेगा ।
(2) यदि कोई अपील उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् की जाती है तो वह ग्रहण नहीं की जाएगी:
परंतु कोई अपील उसके लिए विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी अपील बोर्ड का यह समाधान कर देता है कि उसके पास विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अपील न करने का पर्याप्त हेतुक था ।
(3) अपील बोर्ड को अपील विहित प्ररूप में की जाएगी और वह विहित रीति से सत्यापित होगी और उसके साथ उस आदेश या विनिश्चय की, जिसके विरुद्ध अपील की जा रही है, एक प्रति और ऐसी फीस, जो विहित की जाए, होगी ।
92. अपील बोर्ड की प्रक्रिया और शक्तियां-(1) अपील बोर्ड, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में अधिकथित प्रक्रिया से आबद्ध नहीं होगा किन्तु नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होगा और इस अधिनियम तथा तद्धीन बनाए गए नियमों के ऐसे उपबंधों के अध्यधीन होगा । अपील बोर्ड को अपनी प्रक्रिया को, जिसके अंतर्गत सुनवाई का स्थान और समय नियत करना भी है, विनियमित करने की शक्ति होगी ।
(2) अपील बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए वही शक्तियां होंगी जो निम्नलिखित विषयों की बाबत किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहिती होती हैं, अर्थात्: -
(क) साक्ष्य ग्रहण करना ;
(ख) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
(ग) किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करना; और
(घ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाए ।
(3) अपील बोर्ड के समक्ष कोई कार्यवाही, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में और धारा 196 के प्रयोजन के लिए न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी और अपील बोर्ड को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
93. न्यायालयों, आदि की अधिकारिता का वर्जन-कोई न्यायालय या अन्य प्राधिकारी धारा 91 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट विषयों के संबंध में किसी अधिकारिता, शक्तियों या प्राधिकार का प्रयोग नहीं करेगा या उसके प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा ।
94. अपील बोर्ड के समक्ष उपसंजात होने का वर्जन-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य सदस्य पद धारण करना समाप्त होने पर, अपील बोर्ड या रजिस्ट्रार के समक्ष उपसंजात नहीं होंगे ।
95. अंतरिम आदेश करने के बारे में शर्तें-इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किन्हीं अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, कोई अंतरिम आदेश (चाहे वह व्यादेश या रोक के रूप में हो या किसी अन्य रीति में) किसी अपील पर या उससे संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों में तब तक नहीं किया जाएगा जब तक-
(क) ऐसी अपील की और ऐसे अंतरिम आदेश के लिए अभिवाक् के समर्थन में सभी दस्तावेजों की प्रतियां उस पक्षकार को नहीं दे दी जातीं जिसके विरुद्ध ऐसी अपील की गई है या किए जाने के लिए प्रस्थापित है; और
(ख) ऐसे पक्षकार को इस विषय में सुनवाई का अवसर नहीं दे दिया जाता ।
96. मामलों को एक न्यायपीठ से दूसरे न्यायपीठ को अंतरित करने की अध्यक्ष की शक्ति-पक्षकारों में से किसी के आवेदन पर और पक्षकारों को सूचना देने के पश्चात् तथा उनमें से किसी को, जिसकी वह सुनवाई करना चाहे, सुने जाने के पश्चात् या ऐसी सूचना के बिना स्वप्रेरणा से, अध्यक्ष एक न्यायपीठ के समक्ष लंबित किसी मामले को किसी अन्य न्यायपीठ को, निपटारे के लिए, अंतरित कर सकेगा ।
97. अपील बोर्ड के समक्ष परिशोधन, आदि, के लिए आवेदन की प्रक्रिया-(1) अपील बोर्ड को धारा 57 के अधीन किया गया रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा जो विहित किया जाए ।
(2) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से संबंधित अपील बोर्ड के प्रत्येक आदेश या निर्णय की प्रमाणित प्रति बोर्ड द्वारा रजिस्ट्रार को संसूचित की जाएगी और रजिस्ट्रार बोर्ड के आदेश को प्रभावी करेगा तथा जब ऐसा निदेश दिया जाए तो, ऐसे आदेश के अनुसार रजिस्टर में प्रविष्टियों का संशोधन या परिशोधन करेगा ।
98. विधिक कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार का उपसंजात होना-(1) रजिस्ट्रार को-
(क) अपील बोर्ड के समक्ष किन्हीं ऐसी विधिक कार्यवाहियों में उपसंजात होने और सुने जाने का अधिकार होगा, जिनमें अपेक्षित अनुतोष के अंतर्गत रजिस्टर में परिवर्तन या उसका परिशोधन है या जिनमें व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की प्रथा से संबंधित कोई प्रश्न उद्भूत हुआ है;
(ख) किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन पर रजिस्ट्रार के आदेश के विरुद्ध बोर्ड को की गई किसी ऐसी अपील में उपसंजात होने और सुने जाने का अधिकार होगा-
(i) जिसका विरोध नहीं किया गया है, और आवेदन को रजिस्ट्रार द्वारा नामंजूर कर दिया गया है या उसके द्वारा किन्हीं संशोधन, उपांतरणों, शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए स्वीकार किया गया है, या
(ii) जिसका विरोध किया गया है और रजिस्ट्रार समझता है कि उसकी उपसंजाति लोकहित में आवश्यक है,
और रजिस्ट्रार किसी मामले में उपसंजात होगा यदि बोर्ड द्वारा ऐसा निदेश दिया जाए ।
(2) जब तक कि अपील बोर्ड अन्यथा निदेश न दे, रजिस्ट्रार, उपसंजात होने के बदले अपने द्वारा हस्ताक्षरित लिखित रूप में एक कथन प्रस्तुत कर सकेगा, जिसमें वह विवाद्यक विषय से संबंधित उसके समक्ष कार्यवाहियों के या उससे प्रभावित होने वाले उसके द्वारा दिए गए किसी विनिश्चय के आधारों के या उसी प्रकार के मामलों में व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की प्रथा के या विवाद्यकों से सुसंगत किसी अन्य विषय के संबंध में जो रजिस्ट्रार के रूप में उसकी जानकारी में है, उसके संबंध में ऐसी विशिष्टियां देगा जो वह उचित समझे और ऐसा कथन कार्यवाही में साक्ष्य होगा ।
99. अपील बोर्ड के समक्ष कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार के खर्चे-इस अधिनियम के अधीन अपील बोर्ड के समक्ष सभी कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार के खर्चे बोर्ड के विवेकाधिकार में होंगे किन्तु रजिस्ट्रार को किसी भी पक्षकार के खर्चों का संदाय करने का आदेश नहीं दिया जाएगा ।
100. लंबित कार्यवाहियों का अपील बोर्ड को अंतरण-रजिस्ट्रार के किसी आदेश या विनिश्चय के विरुद्ध अपीलों के सभी मामले और उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित रजिस्टर की किसी परिशुद्धि से संबंधित सभी मामले, उस तारीख से अपील बोर्ड को अंतरित हो जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित की जाए और अपील बोर्ड इस विषय में या तो नए सिरे से कार्यवाही कर सकेगा या उस प्रक्रम से कर सकेगा जिससे ऐसा अंतरण हुआ था ।
अध्याय 12
अपराध, शास्तियां और प्रक्रिया
101. व्यापार चिह्न और पण्य विवरण के लगाने का अर्थ-(1) कोई व्यक्ति किसी व्यापार चिह्न या चिह्न या पण्य विवरण को माल या सेवाओं को लगाने वाला समझा जाएगा जो-
(क) माल पर ही उसे लगाता है और इसका सेवाओं के संबंध में उपयोग करता है; या
(ख) उसे किसी ऐसे पैकेज पर लगाता है जिसमें या जिसके साथ माल विक्रय किया जाता है या विक्रय के लिए अभिदर्शित किया जाता है या विक्रय के लिए या व्यापार या विनिर्माण के प्रयोजन के लिए कब्जे में रखा जाता है; या
(ग) किसी ऐसे माल को, जो विक्रय किया जाता है या विक्रय के लिए अभिदर्शित किया जाता है या विक्रय के लिए या व्यापार या विनिर्माण के प्रयोजन के लिए कब्जे में रखा जाता है किसी ऐसे पैकेज या अन्य वस्तु में या उसके साथ जिस पर व्यापार चिह्न या चिह्न या पण्य विवरण लगाया गया है, रखता है, संलग्न करता है या आबद्ध करता है; या
(घ) किसी व्यापार चिह्न या चिह्न या पण्य विवरण का इस रीति में उपयोग करता है जिसके युक्तियुक्त रूप से यह विश्वास होने की संभाव्यता है कि वह माल या सेवाएं, जिनके संबंध में उसका उपयोग किया गया है, उस व्यापार चिह्न या चिह्न या पण्य विवरण द्वारा अभिहित या वर्णित माल या सेवाएं हैं; या
(ङ) माल या सेवाओं के संबंध में किसी व्यापार चिह्न या पण्य विवरण का उपयोग किसी संकेत, विज्ञापन, बीजक, सूचीपत्र, कारबार पत्र, कारबार कागज पत्र, कीमत सूची या अन्य वाणिज्यिक दस्तावेज में करता है और इस प्रकार उपयोग किए गए व्यापार चिह्न या पण्य विवरण के निर्देश में किए गए अनुरोध या आदेश के अनुसरण में किसी व्यक्ति को माल परिदत्त किया जाता है या सेवाएं प्रदान की जाती हैं ।
(2) व्यापार चिह्न या चिह्न या व्यापार विवरण माल पर लगाया गया समझा जाएगा चाहे वह उस माल या किसी पैकेज या अन्य वस्तु में बुना जाए या उस पर छापा जाए या अन्यथा बनाया जाए या उपाबद्ध किया जाए या चिपकाया जाए ।
102. व्यापार चिह्नों का मिथ्याकरण और उन्हें मिथ्या रूप में लगाना-(1) कोई व्यक्ति किसी व्यापार चिह्न को मिथ्याकृत करने वाला समझा जाएगा जो या तो-
(क) व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी की अनुमति के बिना उस व्यापार चिह्न को बनाता है या इतना समरूप व्यापार चिह्न बनाता है कि धोखा हो जाए; या
(ख) किसी असली व्यापार चिह्न को चाहे परिवर्तन करके, परिवर्धन करके, मिटाकर या अन्यथा मिथ्याकृत करता है ।
(2) कोई व्यक्ति किसी व्यापार चिह्न को माल या सेवाओं पर मिथ्या रूप से लगाने वाला समझा जाएगा जो व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी की अनुमति के बिना-
(क) ऐसे व्यापार चिह्न को या तो इतने समरूप चिह्न को कि जिससे धोखा हो जाए, माल या सेवाओं या किसी ऐसे पैकेज पर, जिसमें माल है, लगाता है;
(ख) ऐसे स्वत्वधारी के व्यापार चिह्न से तद्रूप या इतने समरूप चिह्न वाले कि धोखा हो जाए, किसी पैकेज या उपयोग व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के असली माल से भिन्न किसी माल को उसमें पैक करने, भरने या लपेटने के प्रयोजन के लिए करता है ।
(3) उस व्यापार चिह्न को जो उपधारा (1) में यथाउल्लिखित मिथ्याकृत है या उपधारा (2) में यथाउल्लिखित मिथ्या रूप से लगाया गया है, इस अधिनियम में मिथ्या व्यापार चिह्न के रूप में निर्दिष्ट किया गया है ।
(4) व्यापार चिह्न के मिथ्याकरण के लिए या माल या सेवाओं पर व्यापार चिह्न मिथ्या रूप से लगाने के लिए किसी अभियोजन में स्वत्वधारी की अनुमति साबित करने का भार अभियुक्त पर होगा ।
103. मिथ्या व्यापार चिह्न, पण्य विवरण, आदि लगाने के लिए शास्ति-कोई व्यक्ति जो-
(क) किसी व्यापार चिह्न का मिथ्याकरण करेगा; या
(ख) माल या सेवाओं पर किसी व्यापार चिह्न को मिथ्या रूप से लगाएगा; या
(ग) किसी व्यापार चिह्न के मिथ्याकरण या मिथ्याकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन के लिए कोई डाई, ब्लाक, मशीन, पट्टी या अन्य उपकरण बनाएगा, व्ययन करेगा या अपने कब्जे में रखेगा; या
(घ) माल या सेवाओं पर किसी मिथ्या व्यापार विवरण को लगाएगा; या
(ङ) किसी ऐसे माल पर जिस पर धारा 139 के अधीन उस देश या स्थान का, जहां वह बनाया गया या उत्पादित किया गया था या जिस विनिर्माता या व्यक्ति के लिए माल विनिर्मित किया गया है, उसके नाम और पते का उपदर्शन लगाने की अपेक्षा है, ऐसे देश, स्थान, नाम या पते का मिथ्या उपदर्शन लगाएगा; या
(च) किसी ऐसे उद्गम संबंधी उपदर्शन को जिसे उस माल पर लगाया गया है जिस पर इसके लगाए जाने की धारा 139 के अधीन अपेक्षा है, बिगाड़ेगा, परिवर्तित करेगा या मिटाएगा; या
(छ) इस धारा में ऊपर उल्लिखित किन्हीं बातों को कराएगा,
जब तक वह यह साबित न कर दे कि उसने कपट के आशय के बिना कार्य किया था, कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:
परन्तु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएं, छह मास से कम अवधि तक के कारावास का दंडादेश या पचास हजार रुपए से कम का जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।
104. ऐसे माल का विक्रय या ऐसी सेवाएं प्रदान करने के लिए शास्ति जिस पर मिथ्या व्यापार चिह्न या मिथ्या पण्य विवरण लगाया गया है-कोई व्यक्ति जो किसी ऐसे माल या वस्तुओं का विक्रय करेगा, भाड़े पर देगा या विक्रय या भाड़े के लिए अभिदर्शित करेगा या विक्रय के लिए अपने कब्जे में रखेगा या ऐसी सेवाएं प्रदान करेगा या उन्हें भाड़े पर देगा, जिन पर कोई मिथ्या व्यापार चिह्न या मिथ्या पण्य विवरण लगाया गया है या जिन पर उनके बनाए जाने या उत्पादन के देश या स्थान का या उस विनिर्माता, या उस व्यक्ति का, जिसके लिए, यथास्थिति, माल विनिर्मित किया गया है या सेवाएं प्रदान की गई हैं, नाम और पते का उपदर्शन धारा 139 के अधीन लगाने की अपेक्षा है, ऐसे अपेक्षित उपदर्शन के बिना है, जब तक वह यह साबित न कर दे कि :-
(क) इस धारा के विरुद्ध अपराध करने के संबंध में सभी युक्तियुक्त पूर्वोपाय कर लेने के पश्चात् उसके पास अधिकथित अपराध के किए जाने के समय व्यापार चिह्न या पण्य विवरण के असलीपन पर या उस माल या उन सेवाओं की बाबत कोई अपराध किया गया है, यह संदेह करने का कारण नहीं था; या
(ख) अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग किए जाने पर उस व्यक्ति की बाबत, जिससे कि उसने वे माल या वस्तुएं या सेवाएं अभिप्राप्त की थीं, वह सब जानकारी दी जो उसकी शक्ित में थी; या
(ग) उसने अन्यथा निर्दोष रूप से कार्य किया था,
कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:
परन्तु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएं, छह मास से कम अवधि तक के कारावास का दंडादेश या पचास हजार रुपए से कम का जुर्माना, अधिरोपित कर सकेगा ।
105. दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के लिए वर्धित शास्ति-जो कोई धारा 103 या धारा 104 के अधीन किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध किए जाने पर ऐसे किसी अपराध के लिए पुनः दोषसिद्ध किया जाएगा वह दूसरे और प्रत्येक पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:
परन्तु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारण से, जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएं, एक वर्ष से कम अवधि तक के कारावास का दंडादेश या एक लाख रुपए से कम का जुर्माना, अधिरोपित कर सकेगा:
परन्तु यह और कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व की गई किसी दोषसिद्धि का संज्ञान नहीं किया जाएगा ।
106. धारा 81 के प्रतिकूल थान वाला माल, आदि हटाने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ित धारा 81 में निर्दिष्ट किसी परिसर से ऐसे थान वाले माल या कपास के सूत या कपास के धागे को, जो उस धारा द्वारा यथाअपेक्षित रूप में चिह्नित नहीं है, विक्रय के लिए हटाएगा या हटाने का प्रयत्न करेगा या हटवाएगा या हटवाने का प्रयत्न करेगा या उसका विक्रय करेगा या विक्रय के लिए उसे अभिदर्शित करेगा या विक्रय के लिए या व्यापार या विनिर्माण के किसी प्रयोजन के लिए अपने कब्जे में रखेगा तो ऐसा प्रत्येक थान और सूत की प्रत्येक लच्छी और ऐसा सब धागा और उसके पैकिंग में उपयोग की गई प्रत्येक वस्तु सरकार को समपहृत हो जाएगी और ऐसा व्यक्ति जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो जाएगा, दंडनीय होगा ।
107. किसी व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत रूप में मिथ्या रूप से व्यपदेशन करने के लिए शास्ति-(1) कोई व्यक्ति निम्नलिखित व्यपदेशन नहीं करेगा: -
(क) ऐसे चिह्न के संबंध में, जो रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न नहीं है, इस प्रभाव का कि वह रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न है; या
(ख) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के भाग के संबंध में, जो व्यापार चिह्न के रूप में पृथक्तः रजिस्ट्रीकृत भाग नहीं है, इस प्रभाव का कि वह व्यापार चिह्न के रूप में पृथक्तः रजिस्ट्रीकृत है; या
(ग) इस प्रभाव का कि रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न ऐसे माल या सेवाओं की बाबत रजिस्ट्रीकृत है जिनकी बाबत वह वस्तुतः रजिस्ट्रीकृत नहीं है; या
(घ) इस प्रभाव का कि किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण से किन्हीं परिस्थितियों में उसके उपयोग का अनन्य अधिकार प्राप्त होता है जब कि रजिस्टर में प्रविष्ट मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए उस रजिस्ट्रीकरण से वस्तुतः वह अधिकार प्राप्त नहीं होता है ।
(2) यदि कोई व्यक्ित उपधारा (1) के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारत में व्यापार चिह्न के संबंध में रजिस्ट्रीकृत" शब्द का उपयोग, या अभिव्यक्ततः या विवक्षित रूप से रजिस्ट्रीकरण को निर्दिष्ट करने वाले किसी अन्य पद, प्रतीक या संकेत का उपयोग निम्नलिखित दशाओं के सिवाय रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण के निर्देश को द्योतन करने वाला समझा जाएगा, अर्थात्: -
(क) जहां वह शब्द या अन्य पद, प्रतीक या संकेत अन्य शब्दों के सीधे संसर्ग में उपयोग किया जाता है जो कम से कम उतने ही बड़े अक्षरों में अंकित है जितने में कि वह शब्द या अन्य पद, प्रतीक या संकेत अंकित है और जो उपदर्शित करते हैं कि वह निर्देश व्यापार चिह्न के रूप में ऐसे रजिस्ट्रीकरण के प्रति है जो भारत के बाहर के किसी देश की विधि के अधीन है, और जो देश ऐसा है जिसकी विधि के अधीन निर्दिष्ट रजिस्ट्रीकरण वास्तव में प्रवृत्त है; या
(ख) जहां वह अन्य पद, प्रतीक या संकेत स्वयं ऐसा है कि उससे यह उपदर्शित होता है कि वह निर्देश ऐसे रजिस्ट्रीकरण के प्रति है जो खंड (क) में वर्णित है; या
(ग) जहां, वह शब्द ऐसे चिह्न के संबंध में उपयोग में लाया जाता है जो भारत के बाहर किसी देश की विधि के अधीन और उस देश को निर्यात किए जाने वाले माल के ही संबंध में या उस देश में उपयोग के लिए सेवाओं के संबंध में किसी व्यापार चिह्न के रूप में रजिस्ट्रीकृत है ।
108. कारबार के स्थान को व्यापार चिह्न कार्यालय से संबद्ध रूप में अनुचित वर्णन करने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति अपने कारबार के स्थान पर या अपने द्वारा जारी किए गए किसी दस्तावेज पर या अन्यथा ऐसे शब्दों का उपयोग करेगा जिनसे युक्तियुक्त रूप से यह विश्वास हो सकता है कि उसका कारबार का स्थान व्यापार चिह्न का कार्यालय है या व्यापार चिह्न कार्यालय से शासकीय रूप से संबद्ध है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
109. रजिस्टर में प्रविष्टियों के मिथ्याकरण के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति रजिस्टर में कोई मिथ्या प्रविष्टि या कोई लेख जिससे मिथ्या रूप से रजिस्टर की किसी प्रविष्टि का प्रतिलिपि होना तात्पर्यित है, यह जानते हुए करेगा या कराएगा कि वह प्रविष्टि या लेख मिथ्या है या ऐसे किसी लेख को साक्ष्य में प्रस्तुत करेगा या निविदत्त करेगा या प्रस्तुत या निविदत्त कराएगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
110. कतिपय दशाओं में कोई अपराध न होना-धारा 102, धारा 103, धारा 104 और धारा 105 के उपबंध रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न या ऐसे चिह्न के स्वत्वधारी के संबंध में, इस अधिनियम द्वारा सृजित या मान्यताप्राप्त अधिकारों के अधीन होंगे और कोई कार्य या लोप पूर्वोक्त धाराओं के अधीन अपराध नहीं समझा जाएग, यदि-
(क) अभिकथित अपराध रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से संबंधित है और कार्य या लोप इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञात है; और
(ख) अभिकथित अपराध रजिस्ट्रीकृत या अरजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से संबंधित है और कार्य या लोप तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञात है ।
111. माल का सपमहरण-(1) जहां कोई व्यक्ति धारा 103 या धारा 104 या धारा 105 के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, या धारा 103 या धारा 104 के अधीन अपराध से, यह साबित करने पर कि उसने कपट के आशय के बिना कार्य किया था, या धारा 104 के अधीन उस धारा के खंड (क), खंड (ख) या खंड (ग) में विनिर्दिष्ट मामलों के साबित करने पर दोषमुक्त किया गया है, वहां उसे सिद्धदोष या दोषमुक्त करने वाला न्यायालय सरकार को उन सब माल और वस्तुओं के समपहरण किए जाने का निदेश दे सकेगा जिनके माध्यम से या जिनके संबंध में अपराध किया गया है या यदि पूर्वोक्त सबूत न होता तो किया गया होता ।
(2) जहां दोषसिद्धि पर समपहरण का निदेश दिया जाता है और ऐसी दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील होती है, वहां समपहरण के विरुद्ध भी अपील होगी ।
(3) जहां दोषमुक्ति पर समपहरण का निदेश दिया जाता है और वह माल या वे वस्तुएं जिनसे निदेश संबंधित है, पचास रुपए से अधिक मूल्य की है, वहां समपहरण के विरुद्ध अपील निदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, उस न्यायालय को की जा सकेगी जिसमें अपीली मामलों में समपहरण का निदेश देने वाले न्यायालय के दंडादेशों से अपील की जाती है ।
(4) जहां दोषसिद्धि पर समपहरण का निदेश दिया जाता है, वहां वह न्यायालय जिसके समक्ष वह व्यक्ति सिद्धदोष है, किन्हीं समपहृत वस्तुओं को नष्ट करने या उनका अन्यथा व्ययन करने का, जैसा न्यायालय ठीक समझे, आदेश दे सकेगा ।
112. कारबार के सामान्य अनुक्रम में नियोजित कतिपय व्यक्तियों को छूट-जहां धारा 103 के अधीन अपराध के लिए अभियुक्त कोई व्यक्ति यह साबित करता है कि-
(क) वह अपने कारबार के सामान्य अनुक्रम में अन्य व्यक्तियों की ओर से व्यापार चिह्न या पण्य विवरण लगाने के लिए, या, यथास्थिति, व्यापार चिह्न बनाने में या बनाने में उपयोग के लिए डाई, ब्लाक, मशीन, पट्टी या अन्य उपकरण बनाने के लिए नियोजित है; और
(ख) वह, उस मामले में जो आरोप का विषय है इस प्रकार नियोजित था और माल या अन्य वस्तुओं में, यथास्थिति, ऐसे माल के विक्रय या सेवाएं प्रदान करने पर आधारित लाभ या कमीशन में हितबद्ध नहीं था; और
(ग) आरोपित अपराध के करने के विरुद्ध सभी युक्तियुक्त पूर्वावधानियां बरतने के पश्चात् उसके पास अभिकथित अपराध के किए जाने के समय व्यापार चिह्न या पण्य विवरण के असली होने पर संदेह करने का कोई कारण नहीं था; और
(घ) अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग करने पर उसने उन व्यक्तियों की बाबत, जिनकी ओर से व्यापार चिह्न या पण्य विवरण लगाया गया था, वह सब जानकारी दी जो उसकी शक्ति में थी,
वहां वह दोषमुक्त कर दिया जाएगा ।
113. जहां अभियुक्त रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता का अभिवचन करता है, वहां प्रक्रिया-(1) जहां धारा 103 या धारा 104 या धारा 105 के अधीन आरोपित अपराध रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से संबंधित है और अभियुक्त यह अभिवचन करता है कि व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है, वहां निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा-
(क) यदि न्यायालय का समाधान हो जाता है कि ऐसा प्रतिवाद प्रथमदृष्टया मान्य है तो वह आरोप पर आगे कार्यवाही नहीं करेगा किन्तु अभियुक्त को इस आधार पर कि रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है रजिस्टर को परिशोधित करने के लिए इस अधिनियम के अधीन अपील बोर्ड के समक्ष आवेदन फाइल करने के लिए समर्थ बनाने के लिए उस तारीख से, जिसको अभियुक्त का अभिवचन अभिलिखित किया गया है, तीन मास के लिए कार्यवाही स्थगित कर देगा;
(ख) यदि अभियुक्त न्यायालय के समक्ष यह साबित कर देता है कि उसने ऐसे परिसीमित या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जैसा न्यायालय पर्याप्त हेतुक पर अनुज्ञात करे, ऐसा आवेदन कर दिया है तो अभियोजन में आगे कार्यवाही तब तक रोक दी जाएगी जब तक परिशोधन के ऐसे आवेदन का निपटारा नहीं हो जाता है;
(ग) यदि तीन मास की अवधि के भीतर या ऐसे बढ़ाए गए समय के भीतर जो, न्यायालय अनुज्ञात करे, अभियुक्त रजिस्टर का परिशोधन करने के लिए अपील बोर्ड को आवेदन करने में असमर्थ रहता है तो न्यायालय मामले में आगे इस प्रकार कार्यवाही करेगा मानो रजिस्ट्रीकरण विधिमान्य है ।
(2) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए परिवाद संस्थित करने के पहले प्रश्नगत व्यापार चिह्न से संबंधित रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता के आधार पर पहले ही अधिकरण के समक्ष उचित रूप से कर दिया गया है और लंबित है, वहां न्यायालय पूर्वोक्त आवेदन का निपटारा होने तक अभियोजन में आगे कार्यवाहियां रोक देगा और जहां तक परिवादी अपने चिह्न के रजिस्ट्रीकरण का अवलम्ब लेता है, न्यायालय अभियुक्त के विरुद्ध आरोप, परिशोधन के आवेदन के परिणाम के अनुरूप अवधारित करेगा ।
114. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कंपनी है, तो कंपनी और साथ ही प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, अपराध के लिए दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था, या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार, अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
115. कतिपय अपराधों का संज्ञान और पुलिस अधिकारी की तलाशी लेने और अभिग्रहण करने की शक्तियां-(1) कोई भी न्यायालय धारा 107, धारा 108 या धारा 109 के अधीन अपराध का संज्ञान रजिस्ट्रार या उसके द्वारा लिखित रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा लिखित परिवाद के बिना नहीं करेगा:
परन्तु न्यायालय धारा 107 की उपधारा (1) के खंड (ग) के संबंध में किसी अपराध का संज्ञान रजिस्ट्रार द्वारा जारी किए गए इस आशय के प्रमाणपत्र के आधार पर करेगा कि कोई रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न ऐसे किसी माल या सेवाओं की बाबत रजिस्ट्रीकृत है जिसके संबंध में वास्तव में वह रजिस्ट्रीकृत नहीं है ।
(2) महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
(3) धारा 103 या धारा 104 या धारा 105 के अधीन अपराध संज्ञेय होंगे ।
(4) यदि किसी पुलिस अधिकारी का, जो पुलिस उप अधीक्षक या समतुल्य की पंक्ति से नीचे का नहीं है, यह समाधान हो जाता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट अपराधों में से कोई अपराध किया गया है, किया जा रहा है या किए जाने की संभावना है तो वह अपराध किए जाने में अन्तर्वलित माल, डाई, ब्लाक, मशीन, प्लेट, अन्य उपकरण या वस्तुओं की, जहां कहीं भी वे पाई जाएं, बिना वारंट तलाशी ले सकेगा और उन्हें अभिगृहीत कर सकेगा और इस प्रकार अभिगृहीत सभी वस्तुएं यथाशक्य शीघ्र, यथास्थिति, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश की जाएंगी :
परन्तु पुलिस अधिकारी, कोई तलाशी लेने या अभिग्रहण करने से पूर्व व्यापार चिह्न से संबंधित अपराध में अन्तर्ग्रस्त तथ्यों के बारे में रजिस्ट्रार की राय अभिप्राप्त करेगा और इस प्रकार अभिप्राप्त राय का पालन करेगा ।
(5) उपधारा (4) के अधीन अभिगृहीत वस्तुओं में कोई हित रखने वाला व्यक्ति, ऐसे अभिग्रहण के पंद्रह दिन के भीतर, उसे ऐसी वस्तुएं वापस दिलाए जाने के लिए, यथास्थिति, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट को आवेदन करेगा और मजिस्ट्रेट आवेदक और अभियोजन की सुनवाई के पश्चात् आवेदन पर ऐसा आदेश पारित करेगा, जो वह ठीक समझे ।
116. समुद्र द्वारा आयातित माल के उद्गम का साक्ष्य-भारत में समुद्र द्वारा लाए गए माल की दशा में, इस अधिनियम के अधीन या सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 112 के खंड (ख) के अधीन या धारा 111 के खंड (घ) के अधीन माल के अधिग्रहण के संबंध में और माल के आयात से संबंधित व्यापार चिह्न के संरक्षण के लिए उक्त अधिनियम की धारा 11 की उपधारा (2) के खंड (ढ) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अपराध के लिए अभियोजन में पोतभरण के पत्तन का साक्ष्य प्रथमदृष्ट्या उस स्थान या देश का साक्ष्य होगा जिसमें माल बनाए गए या उत्पादित किए गए हैं ।
117. प्रतिवाद या अभियोजन का खर्च-इस अधिनियम के अधीन किसी अभियोजन में, न्यायालय अभियुक्त द्वारा परिवादी को या परिवादी द्वारा अभियुक्त को ऐसे खर्चे का संदाय करने का आदेश दे सकेगा जिन्हें न्यायालय मामले की समस्त परिस्थितियों और पक्षकारों के आचरण पर ध्यान देते हुए, युक्तियुक्त समझे और इस प्रकार अधिनिर्णीत खर्च ऐसे वसूल किया जाएगा मानो यह जुर्माना है ।
118. अभियोजन की परिसीमा-इस अधिनियम के अधीन या सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 112 के खंड (ख) के अधीन या धारा 111 के खंड (घ) के अधीन माल के अधिहरण से संबंधित और माल के आयात से संबंधित व्यापार चिह्न के संरक्षण के लिए उक्त अधिनियम की धारा 11 की उपधारा (2) के खंड (ढ) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित अपराध के लिए कोई अभियोजन आरोपित अपराध के किए जाने के ठीक तीन वर्ष या उसके अभियोजक को पता चलने के दो वर्ष के अवसान के पश्चात् दोनों अवसानों में से जो भी पहले घटित हो, प्रारंभ नहीं किया जाएगा ।
119. अपराध किए जाने के बारे में इत्तिला-सरकार के किसी अधिकारी को, जिसका कार्य इस अध्याय के उपबंधों को प्रवृत्त कराने में भाग लेना है, किसी भी न्यायालय में यह कहने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा कि इस अधिनियम के विरुद्ध किसी अपराध के किए जाने के बारे में कोई इत्तिला उसे कहां से प्राप्त हुई ।
120. भारत के बाहर किए गए कार्यों के लिए भारत में दुष्प्रेरण का दंड-यदि कोई व्यक्ति, जो भारत के भीतर है, भारत के बाहर ऐसे किसी कार्य को करने का दुष्प्रेरण करता है, जो यदि भारत में किया जाता तो इस अधिनियम के अधीन अपराध होता तो उसका भारत में किसी भी स्थान पर जहां वह पाया जाए, ऐसे दुष्प्रेरण के लिए विचारण किया जा सकेगा और वह उसके लिए उस दंड से दंडित किया जा सकेगा जिससे वह दंडनीय होता यदि उस स्थान में स्वयं वह कार्य करता जिसका उसने दुष्प्रेरण किया है ।
121. दांडिक न्यायालयों द्वारा अनुपालन के लिए केन्द्रीय सरकार के अनुज्ञेय फेरफार संबंधी अनुदेश-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, संख्या, परिमाण, माप, गेज या भार के बारे में फेरफार की सीमा संबंधी ऐसे अनुदेश जारी कर सकेगी, जो किसी माल की दशा में दांडिक न्यायालयों द्वारा अनुज्ञेय माने जाएंगे ।
अध्याय 13
प्रकीर्ण
122. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात की बाबत कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाहियां किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होंगी ।
123. कतिपय व्यक्तियों का लोक सेवक होना-इस अधिनियम के अधीन नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति और अपील बोर्ड का प्रत्येक सदस्य भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
124. जहां व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता प्रश्नगत की जाती है वहां कार्यवाहियों का रोका जाना, आदि-(1) जहां किसी व्यापार चिह्न के अतिलंघन के लिए किसी वाद में-
(क) प्रतिवादी यह अभिवचन करता है कि वादी के व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य है; या
(ख) प्रतिवादी धारा 30 की उपधारा (2) के खण्ड (ङ) के अधीन प्रतिवाद करता है और वादी प्रतिवादी के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता का अभिवचन करता है,
वहां वाद का विचारण करने वाला न्यायालय (जिसे इसमें इसके पश्चात् न्यायालय कहा गया है)-
(i) यदि वादी या प्रतिवादी के व्यापार चिह्न के संबंध में रजिस्टर के परिशोधन के लिए कोई कार्यवाहियां रजिस्ट्रार या अपील बोर्ड के समक्ष लंबित हैं, तो ऐसी कार्यवाहियों के अंतिम निपटारे के लम्बित रहने तक वाद को रोक देगा;
(ii) यदि कोई ऐसी कार्यवाहियां लंबित नहीं हैं और न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि वादी या प्रतिवादी के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की अविधिमान्यता के बारे में अभिवचन प्रथमदृष्ट्या मान्य है तो उनके बारे में विवाद्यक बनाएगा और मामले को विवाद्यक बनाने की तारीख से तीन मास की अवधि के लिए स्थगित कर देगा जिससे कि संबद्ध पक्षकार रजिस्टर के परिशोधन के लिए अपील बोर्ड को आवेदन करने में समर्थ हो सके ।
(2) यदि संबद्ध पक्षकार न्यायालय में यह साबित करता है कि उसने उपधारा (1) के खंड (ख) (ii) में निर्दिष्ट ऐसा कोई आवेदन उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे विस्तारित समय के भीतर जो न्यायालय पर्याप्त कारण से अनुज्ञात करे, किया है, तो जब तक परिशोधन की कार्यवाहियों का अंतिम निपटान न हो जाए तब तक वाद का विचारण रुक जाएगा ।
(3) यदि यथापूर्वोक्त कोई ऐसा आवेदन ऐसे विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे विस्तारित समय के भीतर जो न्यायालय अनुज्ञात करे, नहीं किया गया है, तो संबद्ध व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में विवाद्यक परित्यक्त समझा जाएगा और न्यायालय मामले में अन्य विवाद्यकों की बाबत वाद में आगे कार्यवाही करेगा ।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट परिशोधन कार्यवाहियों में दिया गया अंतिम आदेश पक्षकारों पर आबद्धकर होगा और जहां तक वह व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में विवाद्यक से संबंधित है, न्यायालय वाद को ऐसे आदेश के अनुरूप निपटाएगा ।
(5) इस धारा के अधीन व्यापार चिह्न के अतिलंघन के किसी वाद को रोकने से न्यायालय वाद के रुके रहने की अवधि के दौरान (व्यादेश अनुदत्त करने वाले, लेखा रखने का निदेश देने वाले, रिसीवर नियुक्त करने वाले या संपत्ति कुर्क करने वाले किसी आदेश सहित) कोई अर्न्तवर्ती आदेश करने से प्रविरत नहीं होगा ।
125. कतिपय मामलों में रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन अपील बोर्ड को किया जाना-(1) जहां रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अतिलंघन के लिए वाद में वादी के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता को प्रतिवादी द्वारा प्रश्नगत किया गया है या जहां ऐसे किसी वाद में प्रतिवादी ने धारा 30 की उपधारा (2) के खण्ड (ङ) के अधीन प्रतिवाद किया है और वादी प्रतिवादी के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता को प्रश्नगत करता है, वहां संबद्ध व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में, विवाद्यक रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन पर ही अवधारित किया जाएगा और धारा 47 या धारा 57 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा आवेदन अपील बोर्ड को किया जाएगा, न कि रजिस्ट्रार को ।
(2) जहां, उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्टर के परिशोधन के लिए कोई आवेदन धारा 47 या धारा 57 के अधीन रजिस्ट्रार को किया जाता है, वहां यदि रजिस्ट्रार ठीक समझे तो, वह कार्यवाहियों के किसी भी प्रकम पर आवेदन को अपील बोर्ड को निर्दिष्ट कर सकेगा ।
126. चिह्नित माल के विक्रय पर विवक्षित वारंटी-जहां विक्रय वाले माल पर या किसी माल के विक्रय के लिए या किसी सेवा के संबंध में संविदा पर कोई चिह्न या व्यापार चिह्न या पण्य विवरण लगाया गया है, वहां यह समझा जाएगा कि विक्रेता ने यह वारंटी दी है कि चिह्न असली चिह्न है और मिथ्या रूप से नहीं लगाया गया है या पण्य विवरण इस अधिनियम के अर्थान्तर्गत मिथ्या पण्य विवरण नहीं है, जब तक कि विक्रेता द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित किसी लेख द्वारा प्रतिकूल बात अभिव्यक्त न की गई हो और माल के विक्रय के समय या संविदा पर सेवाओं का उपबन्ध करते समय क्रेता को परिदत्त न की गई हो और उसके द्वारा प्रतिगृहीत न की गई हो ।
127. रजिस्ट्रार की शक्ति-रजिस्ट्रार के समक्ष इस अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों में-
(क) रजिस्ट्रार को साक्ष्य लेने, शपथ दिलाने, साक्षियों को उपस्थित कराने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण और उन्हें पेश कराने और साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी;
(ख) रजिस्ट्रार धारा 157 के अधीन इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, खर्च के बारे में ऐसे आदेश कर सकेगा जिन्हें वह युक्तियुक्त समझे और ऐसा कोई आदेश सिविल न्यायालय की डिक्री के रूप में निष्पादित किया जाएगा:
परन्तु रजिस्ट्रार को प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी द्वारा माल को प्रमाणीकृत करने या सेवाओं का उपबंध करने से इंकार करने या चिह्न का उपयोग प्राधिकृत करने के विरुद्ध उसको की गई अपील में किसी पक्षकार को या उसके विरुद्ध खर्चा अधिनिर्णीत करने की शक्ति नहीं होगी;
(ग) विहित रीति से आवेदन करने पर रजिस्ट्रार अपने विनिश्चय का पुनर्विलोकन कर सकेगा ।
128. रजिस्ट्रार द्वारा विवेकाधिकार शक्ति का प्रयोग-धारा 131 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रार इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों द्वारा उसमें निहित किसी विवेकाधिकार या अन्य शक्ति का प्रयोग, उस शक्ति का प्रयोग करने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति प्रतिकूलतः उस व्यक्ति को सुनवाई का अवसर (यदि उस व्यक्ति द्वारा विहित समय के भीतर ऐसी अपेक्षा की जाए) दिए बिना नहीं करेगा ।
129. रजिस्ट्रार के समक्ष साक्ष्य-इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में रजिस्ट्रार के समक्ष साक्ष्य शपथपत्र द्वारा दिया जाएगा:
परन्तु रजिस्ट्रार, यदि वह ठीक समझे, शपथपत्र द्वारा ऐसे साक्ष्य के बदले में या उसके अतिरिक्त मौखिक साक्ष्य ले सकेगा ।
130. कार्यवाही के पक्षकार की मृत्यु-यदि कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन कार्यवाही का (जो अपील बोर्ड या न्यायालय की कार्यवाही नहीं है) पक्षकार है, कार्यवाही के लंबित रहते हुए मर जाता है, तो रजिस्ट्रार, अनुरोध पर और उसके समाधानपर्यंत मृत व्यक्ति के हित का पारेषण साबित कर देने पर कार्यवाही में उसके स्थान पर उसके हित उत्तराधिकारी को प्रतिस्थापित कर सकेगा, या, यदि रजिस्ट्रार की यह राय है कि मृत व्यक्ति का हित, उत्तरजीवी पक्षकारों द्वारा पर्याप्त रूप से व्यपदेशित है तो वह उसके हित उत्तराधिकारी को प्रतिस्थापित किए बिना कार्यवाहियां चलाए रखने को अनुमति दे सकेगा ।
131. समय का विस्तार-(1) यदि रजिस्ट्रार का, विहित रीति से और विहित फीस के साथ दिए गए आवेदन पर यह समाधान हो गया है कि किसी कार्यवाही को करने के लिए समय का (जो इस अधिनियम में अभिव्यक्ततः उपबंधित समय नहीं है) विस्तार करने का पर्याप्त कारण है तो चाहे इस प्रकार विनिर्दिष्ट समय समाप्त हो गया हो या नहीं वह ऐसी शर्तों के अधीन, जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे, समय का विस्तार कर सकेगा और तद्नुसार पक्षकारों को अधिसूचित कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात रजिस्ट्रार से समय के विस्तार के लिए आवेदन का निपटारा करने के पहले पक्षकारों को सुनने की अपेक्षा करने वाली नहीं समझी जाएगी और इस धारा के अधीन रजिस्ट्रार के किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी ।
132. परित्याग-जहां रजिस्ट्रार की राय में इस अधिनियम या इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व प्रवृत्त व्यापार चिह्न से संबंधित किसी अधिनियम के अधीन फाइल किए गए किसी आवेदन पर आगे कार्यवाही करने में कोई आवेदक व्यतिक्रम करता है वहां रजिस्ट्रार सूचना देकर आवेदन से विनिर्दिष्ट समय के भीतर उस व्यतिक्रम का उपचार करने की अपेक्षा कर सकेगा, और यदि ऐसी वांछा हो, तो उसे सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् आवेदन को परित्यक्त समझ सकेगा जब तक कि सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर व्यतिक्रम का उपचार नहीं कर दिया जाता है ।
133. सुभिन्नता के बारे में रजिस्ट्रार की प्रारंभिक सलाह-(1) रजिस्ट्रार, किसी व्यक्ति द्वारा, जो किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की प्रस्थापना करता है, विहित रीति से उसे आवेदन करने पर यह सलाह दे सकेगा कि क्या उसे वह व्यापार चिह्न प्रथमदृष्ट्या सुभिन्न प्रतीत होता है ।
(2) रजिस्ट्रार ने जिस व्यापार चिह्न के लिए यथापूर्वोक्त सलाह सकारात्मक दी है उसके रजिट्रीकरण के लिए सलाह देने के पश्चात् तीन मास के भीतर आवेदन करने पर, यदि रजिस्ट्रार, अतिरिक्त जांच या विचार करने के पश्चात्, आवेदक को इस आधार पर आक्षेप की सूचना देता है कि व्यापार चिह्न सुभिन्न नहीं है तो, आवेदक विहित अवधि के भीतर आवेदन वापस लेने की सूचना देने पर उस फीस को वापस पाने का हकदार होगा जो आवेदन फाइल करने पर संदत्त की गई थी ।
134. अतिलंघन, आदि के लिए वाद का जिला न्यायालय के समक्ष संस्थित किया जाना-(1) कोई भी वाद-
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अतिलंघन के लिए; या
(ख) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के किसी अधिकार से संबंधित; या
(ग) प्रतिवादी द्वारा किसी चिह्न के, जो वादी के व्यापार चिह्न से, चाहे वह रजिस्ट्रीकृत हो या अरजिस्ट्रीकृत, समरूप है या इतना समरूप है कि धोखा हो जाए, उपयोग से उद्भूत चला देने के लिए,
वाद का विचारण करने की अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायालय के अवर किसी न्यायालय में संस्थित नहीं किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता वाले जिला न्यायालय" के अंतर्गत, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, वह जिला न्यायालय है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वाद या अन्य कार्यवाही संस्थित करने के समय वाद या कार्यवाही संस्थित करने वाला व्यक्ति या जहां एक से अधिक ऐसे व्यक्ति हैं वहां उनमें से कोई वस्तुतः और स्वेच्छा से निवास करता है या कारबार या अभिलाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य करता है ।
स्पष्टीकरण-उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए व्यक्ति" के अंतर्गत रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी और रजिस्ट्रीकृत उपयोगकर्ता भी है ।
135. अतिलंघन के या चला देने के वादों में अनुतोष-(1) धारा 134 में निर्दिष्ट अतिलंघन या चला देने के लिए किसी वाद में न्यायालय जो अनुतोष अनुदत्त कर सकेगा उसके अंतर्गत (ऐसे निबंधनों के अधीन, यदि कोई हों, जिन्हें न्यायालय ठीक समझे), व्यादेश और अतिलंघन करने वाले लेबलों और चिह्नों को नष्ट करने या मिटाने के लिए उनके परिदान के आदेश के सहित या उसके बिना, वादी के विकल्प पर या तो नुकसानी या लाभ का लेखा भी है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन व्यादेश के अंतर्गत एकपक्षीय व्यादेश या निम्नलिखित विषयों में से किसी के लिए कोई अंतर्वर्ती आदेश हो सकेगा, अर्थात्: -
(क) दस्तावेजों का प्रकटीकरण;
(ख) अतिलंघनकारी माल, दस्तावेजों या अन्य साक्ष्य का, जो वाद की विषय-वस्तु से संबंधित है, परिरक्षण;
(ग) प्रतिवादी को अपनी आस्तियों का व्ययन करने या ऐसी रीति से उसके संबंध में व्यौहार करने से अवरुद्ध करना, जो वादी की, नुकसानी, खर्चे या अन्य धनीय उपचारों को, जो वादी को अंतिम रूप से अधिनिर्णीत किए जाएं, वसूल करने की योग्यता को प्रतिकूलतः प्रभावित करे ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, न्यायालय (नाममात्र की नुकसानी से भिन्न) नुकसानी के रूप में या लाभ मद्दे कोई अनुतोष उस मामले में अनुदत्त नहीं करेगा-
(क) जहां व्यापार चिह्न के अतिलंघन के वाद में, परिवादित अतिलंघन प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न या सामूहिक चिह्न से संबंधित है; या
(ख) जहां अतिलंघन के वाद में प्रतिवादी न्यायालय का समाधान कर देता है कि-
(i) जब उसके वाद में परिवादित व्यापार चिह्न का उपयोग प्रारंभ किया तब उसे यह ज्ञान नहीं था और उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार नहीं था कि वादी का व्यापार चिह्न रजिस्टर में था या वादी अनुज्ञात उपयोग के रूप में उपयोग करने वाला रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता था; और
(ii) जब उसे व्यापार चिह्न में वादी के अधिकार की विद्यमानता और प्रकृति का ज्ञान हुआ तब उसने उस माल या सेवाओं के संबंध में, जिनकी बाबत यह व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत था, उसका उपयोग करना तुरन्त बंद कर दिया; या
(ग) जहां चला देने के वाद में प्रतिवादी न्यायालय का समाधान कर देता है कि-
(i) जब उसने वाद में प्रतिवादित व्यापार चिह्न का उपयोग प्रारंभ किया तब उसे यह ज्ञान नहीं था और उसके पास यह विश्वास करने का कोई युक्तियुक्त आधार नहीं था कि वादी का व्यापार चिह्न उपयोग में है; और
(ii) जब उसे वादी के व्यापार चिह्न की विद्यमानता और प्रकृति का ज्ञान हुआ तब उसने प्रतिवादित व्यापार चिह्न का उपयोग करना तुंरत बंद कर दिया ।
136. रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को कतिपय कार्यवाहियों में पक्षकार बनाया जाना-(1) अध्याय 7 के अधीन या धारा 91 के अधीन प्रत्येक कार्यवाही में अनुज्ञात उपयोग के रूप में व्यापार चिह्न का उपयोग करने वाले रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता को, जो उस अध्याय या धारा के अधीन किसी कार्यवाही की बाबत स्वयं आवेदक नहीं है, कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाएगा ।
(2) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कार्यवाही का इस प्रकार पक्षकार बनाया गया रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता किसी खर्चे के लिए तब तक दायी नहीं होगा जब तक कि वह उपसंजात न हो और कार्यवाहियों में भाग न ले ।
137. रजिस्टर में प्रविष्टियों आदि का और रजिस्ट्रार द्वारा की गई बातों का साक्ष्य-(1) रजिस्टर में किसी प्रविष्टि या धारा 148 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी दस्तावेज की प्रति, जिसका रजिस्ट्रार द्वारा प्रमाणित और व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की मुद्रा में मुद्रांकित होना तात्पर्यित है, सभी न्यायालयों में और सभी कार्यवाहियों में अतिरिक्त सबूत या मूल पेश किए बिना साक्ष्य में ग्रहण की जाएगी ।
(2) कोई प्रमाणपत्र, जिसका रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर से होना तात्पर्यित है और जो किसी प्रविष्टि, विषय या बात के बारे में हैं, जिसके बनाने या करने के लिए वह उस अधिनियम या नियमों द्वारा प्राधिकृत है, उस प्रविष्टि के किए जाने या उसकी अंतर्वस्तुओं के या उस विषय या बात के किए जाने या नहीं किए जाने का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा ।
138. रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों का रजिस्टर, आदि पेश करने के लिए बाध्य न होना-रजिस्ट्रार या व्यापार चिह्न रजिस्ट्री का कोई अधिकारी, किन्हीं विधिक कार्यवाहियों में, जिनका वह पक्षकार नहीं है, रजिस्टर या उसकी अभिरक्षा के किसी अन्य दस्तावेज को, जिसकी अंतर्वस्तु इस अधिनियम के अधीन दी गई प्रमाणित प्रति पेश करके साबित की जा सकती है, पेश करने या उसमें अभिलिखित विषय को साबित करने के लिए साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा जब तक कि विशेष कारण से न्यायालय आदेश न दें ।
139. माल पर उद्गम का उपदर्शन करने की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह अपेक्षा कर सकेगी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी वर्ग के माल पर, जो भारत की सीमा के बाहर बनाए या उत्पादित किए जाते हैं और भारत में आयात किए जाते हैं, या जो भारत की सीमा के भीतर बनाए गए या उत्पादित किए जाते हैं, ऐसी तारीख से, जो अधिसूचना द्वारा नियत की जाए, जो उसके जारी करने से तीन मास से कम न होगी, उस देश या स्थान का, जहां वे बनाए या उत्पादित किए गए थे या विनिर्माता का अथवा उस व्यक्ति का, जिसके लिए माल विनिर्मित किए गए थे, नाम और पते का उपदर्शन उपयोजित किया जाए ।
(2) अधिसूचना में वह रीति विनिर्दिष्ट की जा सकेगी जिससे ऐसा उपदर्शन लगाया जाएगा, अर्थात् माल पर ही या किसी अन्य रीति से और वे समय या अवसर विनिर्दिष्ट किए जा सकेंगे जिन पर उपदर्शन का होना आवश्यक होगा, अर्थात् केवल आयात पर, या विक्रय के समय भी, चाहे थोक या फुटकर या दोनों प्रकार के विक्रयों पर ।
(3) इस धारा के अधीन कोई अधिसूचना तब तक नहीं निकाली जाएगी, जब तक संबंधित माल में व्यौहारी या विनिर्माता, उत्पादक या उपयोक्ता के हितों का सारतः प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों या संगमों द्वारा उसे निकाले जाने के लिए आवेदन न किया जाए, या जब तक केन्द्रीय सरकार को, ऐसी जांच करके या उसके बिना, जो केंद्रीय सरकार आवश्यक समझे, अन्यथा यह विश्वास नहीं हो जाता कि अधिसूचना निकालना लोक हित में आवश्यक है ।
(4) साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के उपबंध इस धारा के अधीन अधिसूचना निकाले जाने को उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उन नियमों या उपविधि के बनाने को लागू होते हैं जिनका बनाना पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन आता है ।
(5) इस धारा के अधीन अधिसूचना भारत की सीमा के बाहर बनाए गए या उत्पादित और भारत में आयातित माल को लागू नहीं होगी, यदि उस माल की बाबत, सीमाशुल्क आयुक्त का आयात करने के समय समाधान हो गया है कि वे या तो भारत में वाहनान्तरण के या भारत से होकर अभिवहन के पश्चात् या अन्यथा निर्यात के लिए आशयित है ।
140. मिथ्या व्यापार चिह्न वाले आयातित माल की जानकारी की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी या अनुज्ञप्ितधारी सीमाशुल्क कलक्टर को किसी माल के आयात का प्रतिषेध करने के लिए लिखित रूप में सूचना उस दशा में दे सकेगा यदि उक्त माल के आयात से धारा 29 की उपधारा (6) के खंड (ग) के अधीन अतिलंघन होता है ।
(2) जहां माल, जिनका व्यापार चिह्नों के संरक्षण के लिए भारत में आयात किया जाना, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 की उपधारा (2) के खंड (ढ) के अधीन केन्द्रीय सरकार की अधिसूचना द्वारा प्रतिषिद्ध है और जो आयात पर उस अधिनियम के अधीन अधिहृत किए जाने के लिए दायी हैं, भारत में आयात किए जाते हैं, वहां सीमाशुल्क आयुक्त, यदि उसे अभ्यावेदन करने पर उसके पास विश्वास करने का कारण है कि परिवादित व्यापार चिह्न मिथ्या व्यापार चिह्न के रूप में उपयोग किया गया है, उस माल के आयातकर्ता या उसके अभिकर्ता से माल से संबंधित दस्तावेज जो उसके कब्जे में हैं, पेश करने की और उस व्यक्ति के नाम और पते की जानकारी देने की, जिसने माल भारत को प्रेषित किया था और उस व्यक्ति के नाम और पते की जानकारी देने की जिसको माल भारत में भेजा गया था, अपेक्षा कर सकेगा ।
(3) आयातकर्ता या उसका अभिकर्ता, चौदह दिन के भीतर यथापूर्वोक्त अपेक्षा का अनुपालन करेगा और यदि वह ऐसा करने असफल रहेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(4) इस धारा के अधीन माल के आयातकर्ता या उसके अभिकर्ता से अभिप्राप्त कोई जानकारी सीमाशुल्क आयुक्त द्वारा उस व्यापार चिह्न के, जिसका मिथ्या व्यापार चिह्न के रूप में उपयोग अभिकथित है, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोगकर्ता को संसूचित की जा सकेगी ।
141. विधिमान्यता का प्रमाणपत्र-यदि अपील बोर्ड के समक्ष रजिस्टर के परिशोधन के लिए विधिक कार्यवाही में प्रतिवाद के पश्चात् व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में विवाद्यक पर विनिश्चय व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के पक्ष में दिया गया है तो अपील बोर्ड इस प्रभाव का प्रमाणपत्र अनुदत्त कर सकेगा और यदि ऐसा प्रमाणपत्र अनुदत्त दिया जाता है, तो किसी पश्चात्वर्ती विधिक कार्यवाही में, जिसमें उक्त विधिमान्यता प्रश्नगत होती है, उक्त स्वत्वधारी उस व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता को अपने पक्ष में अभिपुष्टि करने वाले अंतिम आदेश या निर्णय को अभिप्राप्त करने पर, जब तक उक्त अंतिम आदेश या निर्णय पर्याप्त कारणों से अन्यथा निदेश न दे, विधि-व्यवसायी और मुवक्किल के बीच अपने पूरे खर्चे, प्रभार और व्ययों का हकदार होगा ।
142. विधिक कार्यवाहियों की निराधार धमकियां-(1) जहां कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को ऐसे व्यापार चिह्न के अतिलंघन के लिए जो रजिस्ट्रीकृत है या जिसका रजिस्ट्रीकृत होना प्रथम उल्लिखित व्यक्ति द्वारा अभिकथित है, कोई कार्रवाई या कार्यवाही करने की या इस प्रकार की किसी अन्य कार्यवाही करने की धमकी परिपत्रों, विज्ञापनों के माध्यम से या अन्यथा देता है, वहां व्यथित व्यक्ति, चाहे धमकी देने वाला व्यक्ति उस व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता हो या न हो, प्रथम उल्लिखित व्यक्ति के विरुद्ध वाद ला सकेगा और इस प्रभाव की घोषणा अभिप्राप्त कर सकेगा कि धमकियां न्यायोचित नहीं हैं, और धमकियों के जारी रहने के विरुद्ध व्यादेश प्राप्त कर सकेगा और ऐसी नुकसानी (यदि कोई हो) वसूल कर सकेगा, जो उसने उठाई हैं । जब तक प्रथम उल्लिखित व्यक्ति न्यायालय का यह समाधान न कर दे कि व्यापार चिह्न रजिस्ट्रीकृत है और जिन कार्यों की बाबत कार्यवाहियां चलाने की धमकी दी गई थी उनसे व्यापार चिह्न का अतिलंघन हो जाता है या यदि वे किए जाएंगे तो हो जाएगा ।
(2) अंतिम पूर्वगामी धारा उस दशा में लागू नहीं होती है यदि व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या धारा 52 की उपधारा (1) के अनुसरण में कार्य करने वाला रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ता सम्यक् उद्यम से उस व्यक्ति के विरुद्ध, जिसको व्यापार चिह्न के अतिलंघन की धमकी दी गई है, कार्यवाही प्रारंभ करता है और चलाता है ।
(3) इस धारा की कोई बात किसी विधि-व्यवसायी को या रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न अभिकर्ता को उसके द्वारा उसकी व्यवसायिक हैसियत में मुवक्िकल की ओर से किए गए किसी कार्य की बाबत इस धारा के अधीन कार्रवाई के लिए दायी नहीं बनाएगी ।
(4) उपधारा (1) के अधीन कोई वाद जिला न्यायालय से अवर किसी न्यायालय में संस्थित नहीं किया जाएगा ।
143. तामील के लिए पता-आवेदन या विरोध की सूचना में कथित तामील के लिए पता, आवेदन या विरोध की सूचना के प्रयोजनार्थ, यथास्थिति, आवेदक या विरोधी का पता समझा जाएगा, और आवेदन या विरोध की सूचना से संबंधित सभी दस्तावेजें, यथास्थिति, आवेदक या विरोधी को तामील के लिए पते पर छोड़कर या डाक से भेजकर तामील किए जा सकेंगे ।
144. व्यापार की प्रथा पर विचार किया जाना, आदि-व्यापार चिह्न से संबंधित किसी कार्यवाही में अधिकरण संबंधित व्यापार की प्रथाओं और अन्य व्यक्तियों द्वारा विधिसम्मत उपयोग किए जाने वाले किसी सुसंगत व्यापार चिह्न या व्यापार नाम या सज्जा का साक्ष्य ग्रहण करेगा ।
145. अभिकर्ता-जहां इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन, शपथपत्र बनाने से भिन्न कोई कार्य, किसी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रार के समक्ष किए जाने की अपेक्षा है, वहां वह कार्य, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन उस व्यक्ति द्वारा स्वयं करने के स्थान पर, विहित रीति से सम्यक्तः प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा किया जा सकेगा जो-
(क) विधि-व्यवसायी है; या
(ख) विहित रीति से व्यापार चिह्न अभिकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति है; या
(ग) मालिक द्वारा अनन्यतः और नियमित रूप से नियोजित व्यक्ति है ।
146. किसी अभिकर्ता या प्रतिनिधि द्वारा प्राधिकार के बिना रजिस्ट्रीकृत चिह्न-यदि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी का कोई अभिकर्ता या प्रतिनिधि, प्राधिकार के बिना, चिह्न का उपयोग करता है या अपने नाम में रजिस्टर करने का प्रयत्न करता है या रजिस्टर कराता है, तो स्वत्वधारी को आवेदित रजिस्ट्रीकरण का विरोध करने या उसके रद्दकरण या रजिस्टर की परिशुद्धि करने का हक होगा जिससे कि उसे उक्त चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी के रूप में उसके पक्ष में समनुदेशन द्वारा लाया जा सके:
परन्तु ऐसी कार्रवाई व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा अभिकर्ता या प्रतिनिधि के आचरण से अवगत होने के तीन वर्ष के भीतर की जाएगी ।
147. अनुक्रमणिकाएं-रजिस्ट्रार के निदेशन और पर्यवेक्षण के अधीन-
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्नों की एक अनुक्रमणिका,
(ख) उन व्यापार चिह्नों की एक अनुक्रमणिका जिनकी बाबत रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन लंबित है,
(ग) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्नों के स्वत्वधारियों के नामों की एक अनुक्रमणिका, और
(घ) रजिस्ट्रीकृत उपयोक्ताओं के नामों की एक अनुक्रमणिका रखी जाएगी ।
148. दस्तावेज जिनका सार्वजनिक निरीक्षण किया जा सकता है-(1) धारा 49 की उपधारा (4) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय-
(क) रजिस्टर का और किसी दस्तावेज का जिस पर रजिस्टर की कोई प्रविष्टि आधारित है;
(ख) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के विरोध की प्रत्येक सूचना का, रजिस्ट्रार के समक्ष परिशोधन के लिए आवेदन का, उसके प्रति कथन का और रजिस्ट्रार के समक्ष किन्हीं कार्यवाहियों में पक्षकारों द्वारा फाइल किए गए किसी शपथपत्र या दस्तावेज का;
(ग) धारा 63 या धारा 74 के अधीन जमा किए गए सब विनियमों का, और ऐसे विनियमों में फेरफार करने के लिए धारा 66 या धारा 77 के अधीन सभी आवेदनों का;
(घ) धारा 147 में उल्लिखित अनुक्रमणिकाओं का; और
(ङ) ऐसे अन्य दस्तावेजों का, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे,
ऐसी शर्तों के अधीन, जो विहित की जाएं, व्यापार चिह्न रजिस्ट्री में सार्वजनिक निरीक्षण किया जाएगा:
परन्तु जहां कम्प्यूटर में ऐसा रजिस्टर पूर्णतः या अंशतः रखा जाता है वहां इस धारा के अधीन ऐसे रजिस्टर का निरीक्षण कम्प्यूटर में इस प्रकार रखे रजिस्टर की सुसंगत प्रविष्टि की कम्प्यूटर मुद्रित प्रति से किया जाएगा ।
(2) कोई भी व्यक्ति, रजिस्ट्रार को आवेदन देने पर, और ऐसी फीस का संदाय करने पर, जो विहित की जाए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट रजिस्टर में किसी प्रविष्टि या किसी दस्तावेज की प्रमाणित प्रति अभिप्राप्त कर सकेगा ।
149. रजिस्ट्रार की रिपोर्टों का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार, रजिस्ट्रार द्वारा या उसके अधीन इस अधिनियम के निष्पादन के संबंध में एक रिपोर्ट वर्ष में एक बार संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।
150. फीस और अधिभार-(1) इस अधिनियम के अधीन [आवेदनों, अंतरराष्ट्रीय आवेदनों] और रजिस्ट्रीकरण तथा अन्य बातों की बाबत ऐसी फीस और अधिभार संदत्त किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार विहित करे ।
(2) जहां रजिस्ट्रार द्वारा कोई कार्य करने की बाबत कोई फीस संदेय है, वहां जब तक फीस संदत्त नहीं की जाए, रजिस्ट्रार वह कार्य नहीं करेगा ।
(3) जहां व्यापार चिह्न रजिस्ट्री में किसी दस्तावेज के फाइल करने की बाबत कोई फीस संदेय है, वहां जब तक फीस संदत्त नहीं की जाए, दस्तावेज रजिस्ट्री में फाइल किया गया नहीं समझा जाएगा ।
151. अध्याय 12 के कतिपय विषयों की बाबत व्यावृत्ति-अध्याय 12 की किसी बात में-
(क) किसी व्यक्ति को किसी वाद या अन्य कार्यवाही से छूट नहीं मिलेगी जो, यदि उस अध्याय में ऐसी कोई बात न होती तो उसके विरुद्ध लाई जा सकती थी; या
(ख) किसी व्यक्ति को यह हक नहीं होगा कि वह किसी वाद या अन्य कार्यवाही में पूर्ण प्रकटीकरण करने या किसी प्रश्न या परिप्रश्न का उत्तर देने से इंकार कर दे, किंतु ऐसा प्रकटीकरण या उत्तर इस अध्याय के अधीन या सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 112 के खंड (ज) के संबंध में, जो उस अधिनियम की धारा 111 के खंड (घ) के अधीन माल के अधिहरण से संबंधित है और माल के आयात से संबंधित व्यापार चिह्न के संरक्षण के लिए उसकी धारा 11 की उपधारा (2) के खंड (ढ) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित है, किसी अपराध के लिए किसी अभियोजन में ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य में ग्राह्य नहीं होगा ; या
(ग) यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि भारत में निवासी मालिक का कोई सेवक, जिसने ऐसे मालिक के अनुदेशों के पालन में सद्भावपूर्वक कार्य किया है और अभियोजन द्वारा या उसकी ओर से मांग की जाने पर अपने मालिक के संबंध में और उन अनुदेशों के संबंध में, जो उसे अपने मालिक से मिले थे, पूरी जानकारी दे दी है, उससे किसी अभियोजन या दंड के दायित्वाधीन हो जाए ।
152. व्यापार चिह्न के स्वामित्व के संबंध में घोषणा का रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 के अधीन रजिस्ट्रीकरण न होना-रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न से भिन्न किसी व्यापार चिह्न पर किसी व्यक्ति के स्वामित्व या हक को घोषित करने वाले, या घोषित करना तात्पर्यित करने वाले किसी दस्तावेज को उस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा ।
153. सरकार का आबद्ध होना-इस अधिनियम के उपबंध सरकार पर आबद्धकर होंगे ।
154. अभिसमय देशों के नागरिकों से रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों से संबंधित विशेष उपबंध-(1) भारत के बाहर किसी देश या ऐसे देश के, जो देशों के समूह या देशों के संघ, अन्तर-शासनात्मक संगठन का सदस्य है, साथ जो भारत के नागरिकों को उसी प्रकार के विशेषाधिकार देता है जैसे उसके अपने नागरिकों को अनुदत्त किए जाते हैं, किसी संधि, अभिसमय या ठहराव की पूर्ति की दृष्टि से केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे देश या देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, अभिसमय देश, देशों का समूह या देशों का संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन घोषित कर सकेगी ।
(2) जहां किसी व्यक्ति ने किसी अभिसमय देश या ऐसे देश में, जो देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन का सदस्य है, व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया है और वह व्यक्ति, या उसका विधिक प्रतिनिधि या समनुदेशिती, उस तारीख के पश्चात् जिसको उस अभिसमय देश या ऐसा देश, जो देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन का सदस्य है, में आवेदन दिया गया था, छह मास के भीतर भारत में व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करता है, वहां यदि वह व्यापार चिह्न इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किया जाता है तो वह उस तारीख से रजिस्टर किया जाएगा जिस तारीख को अभिसमय देश या ऐसे देश जो देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन का सदस्य है, में आवेदन किया गया था और इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए वह तारीख रजिस्ट्रीकरण की तारीख समझी जाएगी ।
(3) जहां व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन दो या अधिक अभिसमय देशों में या ऐसे देश में जो देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन के सदस्य हैं, किए जाते हैं, इससे ठीक पहले की उपधारा में निर्दिष्ट छह मास की अवधि की गणना उस तारीख से की जाएगी जिसको उन आवेदनों में से पहला या सबसे पहला आवेदन किया गया था ।
(4) इस अधिनियम की कोई भी बात किसी व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी को, ऐसे अतिलंघन के लिए नुकसानी वसूल करने का हकदार नहीं बनाएगी जो इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की तारीख के पूर्व हुई हो ।
155. व्यतिकारिता के लिए उपबंध-जहां केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट कोई देश या ऐसा देश जो देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन का सदस्य है, भारत के नागरिकों को व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण की बाबत वही अधिकार नहीं देता है जो वह अपने राष्ट्रिकों को देता है, वहां, यथास्थिति, ऐसे देश या ऐसा देश जो देशों के समूह या देशों के संघ या अन्तर-शासनात्मक संगठन का सदस्य है, का कोई राष्ट्रिक या तो अकेले ही या किसी अन्य व्यक्ति से संयुक्ततः-
(क) व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए, या उसके स्वत्वधारी के रूप में रजिस्ट्रीकरण होने के लिए;
(ख) रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के समनुदेशिती के रूप में रजिस्ट्रीकृत होने के लिए; या
(ग) धारा 49 के अधीन व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत उपयोगकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने के लिए या रजिस्ट्रीकृत होने के लिए,
हकदार नहीं होगा ।
156. कठिनाइयों को दूर करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हो:
परंतु इस धारा के अधीन कोई भी आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभ से पांच वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
157. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन की शर्तों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात्: -
(i) वे विषय जो धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन व्यापार चिह्न रजिस्टर में सम्मिलित किए जाएंगे और उस धारा की उपधारा (2) के अधीन कम्प्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों में या अन्य इलेक्ट्रानिक प्ररूप में अभिलेख रखने में पालन किए जाने वाले रक्षोपाय;
(ii) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन माल और सेवाओं के वर्गीकरण की वर्णानुक्रम अनुक्रमणिका के प्रकाशन की रीति;
(iii) वह रीति जिसमें रजिस्ट्रार धारा 13 के अधीन किसी शब्द को अन्तरराष्ट्रीय अस्वत्वधारी नाम के रूप में अधिसूचित कर सकेगा;
(iv) धारा 16 की उपधारा (5) के अधीन किसी संगम के विघटन के लिए आवेदन करने की रीति;
(v) धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने की रीति;
(vi) धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन के विज्ञापन की रीति और उपधारा (2) के अधीन शुद्धियों या संशोधनों को अधिसूचित करने की रीति;
[(vii) धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन विरोध की सूचना देने की रीति और ऐसी सूचना के लिए संदेय फीस तथा उपधारा (2) के अधीन प्रतिकथन भेजने और उपधारा (4) के अधीन साक्ष्य प्रस्तुत करने की रीति और उसके लिए समय;]
(viii) धारा 23 की उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का प्ररूप और उपधारा (3) के अधीन आवेदक को सूचना देने की रीति;
(ix) धारा 25 के अधीन नवीकरण और प्रत्यावर्तन के लिए आवेदन का प्रारूप, वह समय जिसके भीतर ऐसा आवेदन किया जाएगा और ऐसे प्रत्येक आवेदन के साथ देय फीस और अधिभार, यदि कोई हो, और वह समय जिसके भीतर रजिस्ट्रार उस धारा की उपधारा (3) के अधीन सूचना भेजेगा और ऐसी सूचना की रीति;
[(ixक) वह समय, जिसके भीतर अन्तरराष्ट्रीय आवेदन अन्तरराष्ट्रीय ब्यूरो को अग्रेषित किया जाना है और धारा 36घ की उपधारा (4) के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा विशिष्टियों को प्रमाणित करने की रीति;
(ixख) धारा 36ङ की उपधारा (1) के अधीन अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण की विशिष्टियों का अभिलेख रखने की रीति;
(ixग) धारा 36ङ की उपधारा (2) के अधीन अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को सूचना देने की रीति;
(ixघ) अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के विज्ञापन की रीति और वह समय, जिसके भीतर अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रकीरण धारा 36ङ की उपधारा (3) के अधीन विज्ञापित किया जाएगा;]
(x) धारा 40 की उपधारा (2) के अधीन मामलों के विवरण प्रस्तुत करने की रीति;
(xi) धारा 41 के अधीन किसी व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी द्वारा आवेदन करने की रीति;
(xii) धारा 43 के अधीन प्रमाणीकरण व्यापार चिह्न के समनुदेशन या पारेषण के लिए आवेदन करने की रीति;
(xiii) धारा 45 की उपधारा (1) के अधीन हक रजिस्टर कराने के लिए रजिस्ट्रार को आवेदन की रीति;
2[(xiiiक) वह अवधि, जिसके भीतर रजिस्ट्रार धारा 45 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन का निपटारा करेगा;]
(xiv) वह रीति जिसमें और वह अवधि जिसके भीतर धारा 46 की उपधारा (4) के अधीन आवेदन किया जाएगा;
(xv) धारा 47 की उपधारा (2) के अधीन आवेदन करने की रीति;
(xvi) धारा 49 की उपधारा (1) के अधीन ऐसा आवेदन करने की रीति, वे दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जो ऐसे आवेदन के साथ होंगे, और वह रीति जिसमें उपधारा (3) के अधीन सूचना जारी की जाएगी;
(xvii) धारा 50 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने की रीति, उपधारा (2) के अधीन सूचना जारी की रीति और उपधारा (3) के अधीन रजिस्ट्रीकरण रद्द करने की प्रक्रिया;
(xviii) धारा 57 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन आवेदन करने की रीति, उपधारा (4) के अधीन सूचना देने की रीति और उपधारा (5) के अधीन परिशुद्धि की सूचना की तामील करने की रीति;
(xix) धारा 58 के अधीन आवेदन करने की रीति;
(xx) धारा 59 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने की रीति, आवेदन के विज्ञापन की रीति, ऐसी सूचना का समय और रीति जिसके द्वारा आवेदन का उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन विरोध किया जा सकेगा;
(xxi) धारा 60 की उपधारा (2) के अधीन विज्ञापन की रीति;
(xxii) धारा 63 की उपधारा (2) के अधीन विनियमों में विनिर्दिष्ट किए जाने वाले अन्य विषय;
(xxiii) धारा 71 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने की रीति;
(xxiv) धारा 73 के अधीन आवेदन के विज्ञापन की रीति;
(xxv) धारा 77 के अधीन आवेदन करने की रीति;
। । । । । ।
(xxix) धारा 88 की उपधारा (1) के अधीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवाओं के अन्य निबंधन और शर्तें;
(xxx) धारा 89 की उपधारा (3) के अधीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण की प्रक्रिया;
(xxxi) धारा 90 की उपधारा (2) अधीन अपील बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें तथा वह रीति जिसमें अपील बोर्ड के अधिकारी और अन्य कर्मचारी धारा 90 की उपधारा (3) के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे;
(xxxii) धारा 91 की उपधारा (3) के अधीन अपील करने का प्ररूप, सत्यापन की रीति और संदेय फीस;
(xxxiii) वह प्ररूप जिसमें और वे विशिष्टियां जो धारा 97 की उपधारा (1) के अधीन अपील बोर्ड को आवेदन करने में सम्मिलित की जाएंगी ।
(xxxiv) धारा 127 के खंड (ग) के अधीन पुनर्विलोकन के लिए आवेदन करने की रीति;
(xxxv) वह समय जिसके भीतर धारा 128 के अधीन रजिस्ट्रार को अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए आवेदन किया जाएगा;
(xxxvi) धारा 131 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने की रीति और उसके लिए संदेय फीस;
(xxxvii) धारा 133 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने की रीति और उपधारा (2) के अधीन ऐसे आवेदन के वापस लिए जाने की अवधि;
(xxxviii) धारा 145 के अधीन कार्य को करने के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत करने की रीति और व्यापार चिह्न अभिकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण की रीति;
(xxxix) धारा 148 की उपधारा (1) के अधीन दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए शर्तें और उसकी उपधारा (2) के अधीन रजिस्टर में किसी प्रविष्टि की प्रमाणित प्रति अभिप्राप्त करने के लिए संदेय फीस;
(xl) धारा 150 के अधीन आवेदन करने तथा रजिस्ट्रीकरण और अन्य मामलों के लिए संदेय फीस और अधिभार;
(xli) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए ।
(3) इस धारा द्वारा प्रदत्त नियम बनाने की शक्ति के अंतर्गत उपधारा (2) के खंड (xxix) और खंड (xxxi) में निर्दिष्ट विषयों की बाबत उस तारीख से भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति भी है, जो इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्ववर्ती नहीं होगी, किन्तु ऐसे किसी नियम को इस रूप में भूतलक्षी प्रभाव नहीं दिया जाएगा, जिससे ऐसे किसी व्यक्ति के, जिसको ऐसा उपनियम लागू होता हो, हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो ।
(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीन दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत जो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
158. संशोधन-अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियां उसमें विनिर्दिष्ट रीति से संशोधित की जाएंगी ।
159. निरसन और व्यावृत्तियां-(1) व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) निरसित किया जाता है ।
(2) निरसन की बाबत साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) के अधीन निकाली गई अधिसूचना, बनाया गया नियम, किया गया आदेश, की गई अपेक्षा, किया गया रजिस्ट्रीकरण, दिया गया प्रमाणपत्र, दी गई सूचना, किया गया विनिश्चय, किया गया अवधारण, दिया गया निदेश, अनुमोदन, प्राधिकार, दी गई सम्मति, किया गया आवेदन, की गई प्रार्थना या बात यदि इस अधिनियम के प्रारंभ में प्रवृत्त है तो, वह प्रवृत्त बनी रहेगी और इस प्रकार प्रभावी होगी मानो वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन निकाली गई, बनाया गया, किया गया, की गई, दिया गया या दी गई है ।
(3) इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम के प्रारंभ के समय लंबित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन को और उस पर किसी पारिणामिक कार्यवाही को और उसके अनुसरण में अनुदत्त किसी रजिस्ट्रीकरण को लागू होंगे ।
(4) धारा 100 के उपबंधों के अधीन रहते हुए और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ पर किसी न्यायालय में लंबित कोई विधिक कार्यवाही उस न्यायालय में जारी रखी जाएगी मानो यह अधिनियम पारित न हुआ हो ।
(5) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का विशिष्ट उपयोग, इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व रजिस्ट्रीकृत किसी व्यापार चिह्न का अतिलंघन नहीं है, वहां उस चिह्न का सतत उपयोग इस अधिनियम के अधीन अतिलंघन नहीं होगा ।
(6) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यापार चिह्न के, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व रजिस्ट्रीकृत है, रजिस्ट्रीकरण के अवसान की तारीख, सात वर्ष की अवधि के ठीक बाद की वह तारीख होगी, जिसके लिए इसे रजिस्ट्रीकृत या नवीकृत किया गया था:
परन्तु व्यापार और पुण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) की धारा 47 में निर्दिष्ट प्रतिरक्षात्मक व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण ऐसे प्रारम्भ के पांच वर्ष की समाप्ति के ठीक बाद की या उस अवधि की समाप्ति के ठीक बाद की, जिसके लिए इसे रजिस्ट्रीकृत या नवीकृत किया गया था, इनमें से जो भी पहले हो, तारीख को प्रभावी नहीं रहेगा ।
अनुसूची
(धारा 158 देखिए)
संशोधन
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वर्ष |
अधिनियम संख्यांक |
संक्षिप्त नाम |
संशोधन |
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1956 |
1 |
कंपनी अधिनियम, 1956 |
(I) धारा 20 की उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधाराएं रखी जाएंगी, अर्थात्: - |
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(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि उस नाम की बाबत- |
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(i) जो उसके समान है या उस नाम से अतिसदृश है, जिस नाम से विद्यमान कोई कंपनी पहले से रजिस्ट्रीकृत रही है, या |
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(ii) जो व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 के अधीन किसी अन्य व्यक्ति के किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के या किसी ऐसे व्यापार चिह्न के जो रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन का विषय है, समान है या उससे अतिसदृश है, |
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केन्द्रीय सरकार द्वारा यह समझा जा सकेगा कि वह उपधारा (1) के अर्थ के भीतर अवांछनीय है । |
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(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (2) के खंड (ii) के अधीन आने वाले किसी नाम को अवांछनीय समझे जाने के पूर्व व्यापार चिह्न रजिस्ट्रार से परामर्श कर सकेगी ।" । |
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(II) धारा 22 में, - |
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(i) उपधारा (1) में, यदि कोई कंपनी" से प्रारम्भ होने वाले और प्रथम वर्णित कंपनी" पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: - |
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यदि कोई कंपनी अपने प्रथम रजिस्ट्रीकरण पर या अपने नए नाम के रजिस्ट्रीकरण पर उस नाम से अनवधानता से या अन्यथा रजिस्ट्रीकृत की जाती है, जो, - |
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(i) केन्द्रीय सरकार की राय में, या तो वही नाम है या उस नाम से अतिसदृश है जो ऐसी विद्यमान कंपनी का है जो चाहे इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य पूर्व कंपनी विधि के अधीन पहले रजिस्ट्रीकृत की गई है, तो प्रथमवर्णित कंपनी; या |
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(ii) किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा आवेदन पर, केन्द्रीय सरकार की राय में, व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 के अधीन ऐसे स्वत्वधारी के रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के समान है या उससे अतिसदृश है, तो ऐसी कंपनी" |
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(ii) उपधारा (1) में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्: - |
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परन्तु खंड (ii) के अधीन किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी द्वारा कंपनी के रजिस्ट्रीकरण की सूचना होने के पांच वर्ष के पश्चात् किए गए आवेदन पर केन्द्रीय सरकार द्वारा विचार नहीं किया जाएगा ।" |
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