चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने बुधवार को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसके बाद, हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर के लिए तय कर दी।
याचिकाकर्ता दीपिका शर्मा के वकील वैभव शर्मा की ओर से याचिका में कहा गया कि दिल्ली सरकार ने 20 जून, 2025 को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें प्री-स्कूल के लिए एक नई क्लास शुरू की गई और शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 से कक्षा 1 में दाखिले के लिए उम्र क्राइटेरिया 6 साल तय किया गया।
याचिका में क्या तर्क
यह तर्क दिया गया कि दिल्ली सरकार ने वास्तव में एक नई नीति/सर्कुलर पेश किया है, जिसके अनुसार बच्चे को कक्षा एक में दाखिले से पहले प्री स्कूल 1, प्री स्कूल 2 और प्री स्कूल 3 की पढ़ाई पूरी करनी होगी। पहले यह नर्सरी और केजी था, लेकिन अब उक्त सर्कुलर के बाद शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 से यह एक नई क्लास होगी।
आगे बताया गया कि इस नीति के लागू होने से आम जनता दो तरह से प्रभावित होगी। पहला, प्री-स्कूल की एक साल की फीस का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, क्योंकि कक्षा 1 में दाखिले से पहले प्री-स्कूल पास करना अनिवार्य हो जाएगा। इसके अलावा, सीमित सीटों के कारण कक्षा 1 में डायरेक्ट एडमिशन मिलना बहुत मुश्किल है।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि पहली बात तो यह कि जिन छात्रों का पहले से नामांकन हो चुका है और जिन्हें कक्षा 1 में प्रमोट किया जाना है, उन्हें फिर से प्री-स्कूल जाना होगा और नर्सरी के जिन छात्रों को केजी में प्रमोट किया जाना है, उन्हें फिर से नर्सरी में ही रहना होगा। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि यदि ऐसा कोई सर्कुलर पेश किया जा रहा है, तो यह शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 से लागू होना चाहिए और नए दाखिलों के लिए प्रभावी होना चाहिए, न कि शैक्षणिक वर्ष 2025 में स्कूल में पहले से पढ़ रहे बच्चों के लिए यह लागू हो।
याचिका में कहा गया है कि ऐसा सर्कुलर जारी करने से ऐसा लगता है कि क्लास खाली रहेगी, क्योंकि केजी में पहले से पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 1 में प्रमोट करना होगा। हालांकि, अधिकतम बच्चे 6 साल से कम उम्र के होंगे और उन्हें एक साल तक प्री-स्कूल में ही रहना होगा।
याचिका में दिया यह सुझाव
याचिकाकर्ता ने यह भी सुझाव दिया है कि सर्कुलर में संशोधन करके नर्सरी कक्षा में दाखिले की उम्र 3 साल और उससे अधिक से बदलकर 4 वर्ष या उससे अधिक कर दी जाए। 4 साल और उससे अधिक के लिए वही प्री-स्कूल 1, पांच वर्ष और उससे अधिक के लिए प्री-स्कूल 2, तथा कक्षा 1 के लिए 6 वर्ष और उससे अधिक उम्र निर्धारित की जाए।
याचिका में कहा गया है कि सर्कुलर के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 से प्रवेश की उम्र 4 साल निर्धारित की जा सकती है। वरना यह माता-पिता को आर्थिक रूप से प्रभावित करेगा और साथ ही पहले से ही प्री-स्कूल में पढ़ रहे छात्रों को फिर से प्री-स्कूल में जाना होगा।
यह भी रेखांकित किया गया है कि किसी भी निजी स्कूल की वर्तमान तिथि के अनुसार एक तिमाही की फीस लगभग 60,000 है, जो एक साल के लिए लगभग 2.40 लाख होती है, जो आम जनता पर अनावश्यक बोझ है।
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