कोटद्वार के चर्चित ‘मोहम्मद दीपक’ प्रकरण ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। मामले में दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। दीपक कुमार ने याचिका में आरोप लगाया कि उनके खिलाफ मुकदमा पक्षपातपूर्ण कार्रवाई है। हाई कोर्ट ने सरकार से मामले में जवाब मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ता दीपक को भी तलब किया। उनसे खाते में आ रहे चंदे का हिसाब मांगा है।
मंगलवार को न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में दीपक कुमार उर्फ अक्की समेत अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि जिन लोगों ने कोटद्वार में आकर हंगामा किया और हमला करने की कोशिश की, उनके खिलाफ पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की।
पुलिस पर पक्षपात का आरोप
दीपक कुमार और उनके मित्र विजय रावत द्वारा 13 मार्च को दायर याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर की गई है, जो पक्षपातपूर्ण है और उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से दर्ज की गई है।
याचिका में कहा गया है कि दीपक ने आरोपियों के नाम, फोन नंबर, वाहन की जानकारी और वीडियो सबूत पुलिस को दिए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कर केस को कमजोर किया। अब तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही ठोस जांच।
दीपक का यह भी आरोप है कि पुलिस ने 26 और 31 जनवरी की घटनाओं के वीडियो को नजरअंदाज करते हुए “गलत कहानी” के आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
चंदे’ पर हाईकोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाते हुए दीपक से उनके बैंक खाते में आ रहे ‘चंदे’ का पूरा विवरण मांगा है। दीपक ने बताया कि इस घटना के बाद उन्हें देशभर से समर्थन मिला और उनके बैंक खाते में स्वैच्छिक चंदा जमा हुआ। उन्होंने कहा कि यह राशि बिना किसी मांग के आई और इसकी जानकारी प्रशासन व बैंक को दी गई है।
क्या है पूरा विवाद
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इन लेन-देन का पूरा ब्योरा मांगा है और पुलिस से उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी भी तलब की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नवनीश नेगी के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है।
मामला 26 जनवरी का है, जब कोटद्वार में दीपक कुमार ने एक 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार के साथ हो रहे कथित दुर्व्यवहार का विरोध किया था। दुकानदार पार्किंसन बीमारी से पीड़ित है और कुछ लोग उनसे दुकान के नाम से “बाबा” शब्द हटाने का दबाव बना रहे थे। विवाद के दौरान जब दीपक से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया, जिससे मामला चर्चा में आ गया।
31 जनवरी को बजरंग दल के कुछ सदस्य दीपक का विरोध करने पहुंचे, हालांकि पुलिस ने उन्हें रोक दिया। दीपक का आरोप है कि इसके बाद उनके जिम के बाहर भीड़ जुटी, गालियां दी गईं और भड़काऊ भाषण दिए गए।
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