इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने दुष्कर्म एवं हत्या के एक गंभीर मामले में आरोपी मनोज को जमानत प्रदान करते हुए उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं (FSL) में आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त संसाधनों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी के कारण उसे “भारी मन और पीड़ा” के साथ आरोपी को जमानत देनी पड़ रही है।
मामला थाना साकेत, जनपद एटा में दर्ज अपराध संख्या 199/2025 से संबंधित है, जिसमें आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 66(1), 103(1) एवं 238 के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन के अनुसार, मृतका 18 नवंबर 2025 को खेत की ओर गई थी और बाद में उसका शव नदी के समीप बरामद हुआ। प्रारंभिक एफआईआर अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी। बाद में एक कथित प्रत्यक्षदर्शी के बयान के आधार पर आरोपी का नाम सामने आया, जिसने उसे घटना के दिन नदी की ओर जाते और गीले कपड़ों में लौटते हुए देखने का दावा किया।
आवेदक की ओर से तर्क दिया गया कि उसका नाम प्रारंभिक एफआईआर में नहीं था और कथित प्रत्यक्षदर्शी का बयान बाद में सामने आया, जिससे अभियोजन की कहानी संदिग्ध हो जाती है। यह भी कहा गया कि मृतका की घड़ी की कथित बरामदगी मात्र से अपराध में उसकी संलिप्तता सिद्ध नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि एफएसएल रिपोर्ट में मृतका के योनि स्वैब से प्राप्त डीएनए का मिलान आरोपी के डीएनए से नहीं हुआ। आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं था।
राज्य और प्रथम सूचक ने जमानत का विरोध किया, किंतु वे आवेदक द्वारा उठाए गए तथ्यों का प्रभावी खंडन नहीं कर सके।
न्यायालय ने Kapil Wadhawan v. CBI तथा Maya Tiwari v. State of U.P. में निर्धारित जमानत संबंधी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी जमानत का पात्र है।
अपने आदेश में न्यायमूर्ति देशवाल ने विशेष रूप से टिप्पणी की कि कई दुष्कर्म-हत्या मामलों में डीएनए प्रोफाइल पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती, जिसके कारण अपराधी की पहचान वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं हो पाती। न्यायालय ने कहा कि वर्तमान मामले में भी अपर्याप्त डीएनए प्रोफाइलिंग, पुरानी मशीनों और अधोसंरचना की कमी के कारण वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके। कोर्ट ने Mevalal Prajapati v. State of U.P. का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की एफएसएल प्रयोगशालाएँ स्टाफ और आधुनिक उपकरणों की कमी से जूझ रही हैं। न्यायालय ने राज्य सरकार से उच्च स्तरीय मशीनें और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की अपेक्षा व्यक्त की तथा आदेश की प्रति मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री के अवलोकनार्थ भेजने का निर्देश दिया।
READ ORDER
Publish Your Article
Campus Ambassador
Media Partner
Campus Buzz
LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026
LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!