Thursday, 21, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

बिना मास्टर प्लान कैसे बढ़ गया जयपुर का दायरा? जेडीए के 679 नए गांवों वाले प्लान पर हाईकोर्ट सख्त


Rajasthan High Court0.jpeg
19 Mar 2026
Categories: Hindi News

 राजस्थान की राजधानी जयपुर के भूगोल को रातों-रात दोगुना करने के सरकारी फैसले पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस बलजिंदर संधू की खंडपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल किए गए 679 नए गांवों में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत का यह आदेश सरकार के उस मास्टर प्लान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसने जयपुर के दायरे को 3 हजार से बढ़ाकर 6 हजार वर्ग किलोमीटर कर दिया था।
 

बिना तैयारी 'महानगर' बनाने की कोशिश?

संजय जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और JDA से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता जया मित्रा ने दलील दी कि 1 अक्टूबर 2025 को जारी अधिसूचना के जरिए कृषि प्रधान गांवों को JDA में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक या वैधानिक आधार नहीं था।

अदालत में उठाए गए ये मुख्य बिंदु

  • नया मास्टर प्लान नदारद: मौजूदा 'मास्टर प्लान 2025' में इन गांवों का जिक्र नहीं है और 'मास्टर प्लान 2047' अभी फाइलों में ही है। बिना प्लान के विस्तार अवैध निर्माण को दावत देने जैसा है।
  • विशेषज्ञों की अनदेखी: विस्तार का फैसला किसी विशेषज्ञ समिति या पर्यावरणीय अध्ययन के बजाय महज एक आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट पर लिया गया।
  • पंचायतों की अनदेखी: इस प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों से कोई राय नहीं ली गई, जिससे लाखों ग्रामीणों पर अचानक शहरी नियम थोप दिए गए।

6000 वर्ग किमी का 'चक्रव्यूह'

सरकार का तर्क है कि जयपुर के बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए शहर का दायरा बढ़ाना जरूरी था ताकि बेहतर विकास हो सके। लेकिन याचिका में आरोप लगाया गया है कि शुरुआत में केवल 272 गांवों का प्रस्ताव था, जिसे बिना किसी सर्वे के बढ़ाकर 679 कर दिया गया। 100 किलोमीटर के दायरे के इस 'अंधाधुंध' विस्तार से गोचर भूमि, चरागाह और सामुदायिक संसाधनों के खत्म होने का डर है।

पर्यावरण और नियमों की दुहाई

कोर्ट को बताया गया कि यह विस्तार सुप्रीम कोर्ट के 2017 के उस आदेश का उल्लंघन है, जिसमें मास्टर प्लान में बदलाव से पहले जनसुनवाई और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को अनिवार्य बताया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस फैसले से केवल अनियंत्रित रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भूजल स्तर गिरेगा और कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन 679 गांवों में फिलहाल न तो कोई नया पट्टा जारी हो सकेगा और न ही निर्माण कार्य। सरकार को अब कोर्ट में यह साबित करना होगा कि यह विस्तार जनहित में है या सिर्फ कागजी खानापूर्ति।

Source link



Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : MAIMS

 
 
Latestlaws Newsletter