इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली जमानत याचिका खारिज होने के बाद बिना किसी नए और ठोस परिस्थितिगत बदलाव के दूसरी जमानत अर्जी पर विचार नहीं किया जा सकता। केवल नए तर्क पेश करने से जमानत नहीं दी जा सकती। इसके लिए तथ्यात्मक स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन होना जरूरी है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने आरोपी तुफैल चौधरी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
तुफैल चौधरी के खिलाफ गाजियाबाद के कौशांबी थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि पुलिस ने एक ट्रक से 15 हजार बोतल प्रतिबंधित फेन्सिडिल कफ सिरप बरामद किया था। ट्रक को आरोपी तुफैल चौधरी चला रहा था। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी केवल वाहन चालक है और माल से उसका कोई संबंध नहीं है। इस मामले में सह आरोपी को जमानत मिल चुकी है और तुफैल लंबे समय से जेल में है। इसलिए उसे भी राहत दी जाए।
वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप की बरामदगी हुई है। आरोपी को सिर्फ वाहन चालक नहीं माना जा सकता, उस पर माल के बारे में भी जानकारी होने का आरोप बनता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की पहली जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है और वर्तमान अर्जी में कोई नया या महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आया है। ऐसी स्थिति में दूसरी जमानत अर्जी स्वीकार करना न्यायिक अनुशासन के विपरीत होगा। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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