बॉलीवुड एक्टर आदित्य पंचोली से जुड़े रेप मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में मंगलवार को 28वीं सुनवाई हुई, जिसमें एक्टर कोर्ट में पेश हुए। यह मामला साल 2019 में वर्सोवा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई FIR से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पंचोली ने शिकायतकर्ता महिला एक्ट्रेस के साथ 2004 से 2009 के बीच यौन शोषण किया।
इस लंबित मामले में पंचोली के वकील ने कोर्ट से FIR को रद्द करने की मांग दोहराई। अब मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को तय की गई है। पंचोली ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला रद्द होने वाला है। चूंकि यह मामला कोर्ट में चल रहा है, इसलिए इस पर कुछ कहना उचित नहीं है। इसमें आगे क्या होगा, यह 4 मार्च को पता चलेगा।
पीड़िता को अब तक 11 बार नोटिस भेजे जा चुके हैं
वहीं पंचोली के वकील प्रशांत पाटिल ने बताया कि सुनवाई में FIR को रद्द करने की मांग दोहराई गई। पाटिल ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता को जांच के लिए कई बार नोटिस भेजे। पीड़िता को अब तक 11 बार नोटिस भेजे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वह पुलिस के सामने बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हुई।
अगली सुनवाई में उपस्थिति होने के निर्देश
इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दोबारा नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में उपस्थिति होने के निर्देश दिए। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने समय मांगा और कहा कि उन्हें अपने मुवक्किल से इंस्ट्रक्शन लेने की जरूरत है ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
यह शिकायत लगभग 15 साल पुरानी घटना के आधार पर
यह विवाद लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। यह मामला 27 जून 2019 को दर्ज किया गया था और यह शिकायत लगभग 15 साल पुरानी घटना के आधार पर की गई थी। शिकायतकर्ता एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि पंचोली ने उनके करियर की शुरुआत के समय उन्हें नशीला पदार्थ देकर यौन शोषण किया और उनकी पर्सनल तस्वीरें लीं। उन तस्वीरों को पब्लिक करने की धमकी दी गई और लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखा गया। इसके चलते पीड़िता ने कानूनी कार्यवाही का फैसला लिया।
कहा- एफआईआर दर्ज करने के पीछे निजी रंजिश की भावना
आदित्य पंचोली और उनके वकील ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला झूठा और दुर्भावनापूर्ण है, और शिकायत काफी समय बाद दर्ज की गई। पंचोली ने अपनी याचिका में कहा कि एफआईआर दर्ज करने के पीछे निजी रंजिश की भावना थी। उनका तर्क है कि लंबित मामले और विवादास्पद शिकायत के आधार पर न्यायालय को एफआईआर को रद्द करना चाहिए।
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