सतलोक आश्रम हत्या मामले में संत रामपाल पर सजा का ऐलान हो गया है। हत्या के दो मामलों में दोषी करार दिए गए रामपाल को हिसार की कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मंगलवार दोपहर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने रामपाल को 'मरते दम तक जेल' की सजा सुनाई है। रामपाल को 4 महिलाओं और एक बच्चे की हत्या के आरोप में दोषी पाया गया था, बीते 11 अक्टूबर को ही उसे दोषी करार दिया गया था। हिसार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी.आर.चालिया ने हत्या के दोनों मामलों और अन्य अपराधों में रामपाल और उसके अनुयायियों को दोषी ठहराया था।अदालत ने रामपाल समेत कुल उसके 26 अनुयायियों को दोषी करार दिया था। सजा के ऐलान को देखते हुए जेल के आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। आजीवन कारावास के अलावा रामपाल पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

बता दें कि इन हत्या के मामलों की सुनवाई लगभग चार साल तक चली है। 67 वर्षीय रामपाल और उसके अनुयायी नवंबर, 2014 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद थे। रामपाल और उसके अनुयायियों के खिलाफ बरवाला पुलिस थाने में 19 नवम्बर, 2014 को दो मामले दर्ज किए गए थे।

क्या है मामला

पहला मामला दिल्ली में बदरपुर के पास मीठापुर के शिवपाल की शिकायत पर जबकि दूसरा मामला उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले के सुरेश ने दर्ज कराया था। दोनों ने रामपाल के आश्रम के अंदर अपनी पत्नियों की हत्या की शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दोनों महिलाओं को कैद करके रखा गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के आरोपों के अलावा इन पर लोगों को गलत तरीके से बंधक बनाने का आरोप लगाया गया था।

फिर पुलिस जब आश्रम के अंदर मौजूद रामपाल को गिरफ्तार करने जा रही थी तो उसके लगभग 15 हजार अनुयायियों ने 12 एकड़ जमीन में फैले आश्रम को घेर लिया था। रामपाल के भक्त पुलिस के साथ भिड़ गये थे। इस दौरान करीब 10 दिन चली हिंसा में 4 महिलाएं और 1 बच्चे की मौत हो गई थी। 67 वर्षीय रामपाल और उसके अनुयायी नवम्बर, 2014 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद थे। रामपाल और उसके अनुयायियों के खिलाफ बरवाला पुलिस थाने में 19 नवम्बर, 2014 को दो मामले दर्ज किये गये थे। बाबा के अनुयायियों की हिंसा के कारण छह लोगों की मौत हो गई थी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस बार हिसार जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये थे ताकि बाबा को सजा सुनाए जाने के बाद जिले में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को कायम रखा जा सके। हिसार शहर को किले में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी संभावित बवाल, हिंसा और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। हिसार जिले में धारा-144 लागू कर दी गई थी।

पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने शहर के विभिन्न भागों में शाम को फ्लैग मार्च भी निकाला था। जिला मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मीणा ने सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा भी लागू की है जो कम से कम 17 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी।

 

Source

Picture Source :