बुधवार को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश शुरू हो जाएगा। इसके लिए केरल की वामपंथी सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने के बाद मचे बवाल पर केरल के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानेंगे। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, 'हम किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं देंगे। सरकार सबरीमाला मंदिर जाने वाले भक्तों की सुविधाओं का ध्यान रखेगी।
महिलाओं के प्रवेश से पहले इसके विरोध में सियासत शुरू हो गई है। बीजेपी सहित कई राजनीतिक पार्टियां और धार्मिक संगठनों ने केरल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सबरीमाला मंदिर का कपाट बुधवार को 5 दिन की मासिक पूजा के लिए खुलने वाला है। इस मौके पर महिला संगठनों ने उसमें प्रवेश की योजना बनाई है।आज प्रमुख पुराहितों की बैठक
उधर, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) की तंत्री परिवार, पंडलम पैलेस के प्रतिनिधि और अयप्पा सेवा संगम के नेताओं के साथ मंगलवार को चर्चा जारी है। इसे सरकार की ओर से आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। टीडीबी अध्यक्ष ए पद्मकुमार का कहना है, 'हम यहां सालों पुरानी परंपराओं और मूल्यों को बदलने के लिए नहीं हैं। हम सबरीमाला के भक्तों के हित और मूल्यों की रक्षा करना चाहते हैं।' वह आगे कहते हैं, 'सभी मुद्दों का सुलझना जरूरी है। बोर्ड नहीं चाहता कि सबरीमाला एक राजनैतिक मुद्दा बन जाए। इसलिए बिना किसी शर्त के हम तंत्री परिवार और दूसरे लोगों से चर्चा करेंगे।' उधर बीते सोमवार को मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने मंदिर के पुजारी परिवार (पंडालम) को बैठक के लिए बुलाया था ताकि बीच-बचाव का कोई रास्ता निकल सके लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
समीक्षा याचिका नहीं डालेगी केरल सरकार
केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने मंगलवार को साफ कर दिया कि सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर किसी को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सरकार श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करने के लिए सभी जरूरी बंदोबस्त करेगी। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को चुनौती देने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट में कोई समीक्षा याचिका नहीं डालेगी। विजयन ने कहा कि उनकी सरकार कोर्ट को बता चुकी है कि उसके आदेश का हर हाल में पालन किया जाएगा।
शिवसेना और बीजेपी का विरोध
शिवसेना और बीजेपी ने भी विरोध की तैयारी कर ली है। बीजेपी की मांग है कि केरल की वामपंथी सरकार सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका दायर करे। इस बाबत सोमवार को तिरुवनंतपुरम में एक बड़ा विरोध मार्च निकाला गया। जबकि शिवसेना और अयप्पा धर्म सेना ने महिलाओं को किसी भी सूरत में मंदिर में न जाने देने का मन बनाया है।
तृप्ति देसाई जाएंगी मंदिर
सबरीमाला मंदिर की लड़ाई तृप्ति देसाई ने लड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने ऐलान किया वे जल्द मंदिर में प्रवेश करेंगी। दूसरी ओर कई कट्टरपंथी संगठन देसाई को मंदिर जाने पर जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। कट्टरपंथियों ने अपनी चेतावनी में कहा है कि तृप्ति देसाई को किसी भी कीमत पर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है।
क्या है विरोध प्रदर्शन की योजना
-महिलाओं के लिए मंदिर का पट खोलने की योजना के बारे में मुख्यमंत्री पिनारई विजयन मंगलवार 3 बजे विस्तार से बताएंगे।
-केरल और समूचे देश में #SaveSabrimalaCampaign के तहत कई विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी।
-अयप्पा धर्म सेना के प्रमुख राहुल इश्वर मंगलवार शाम को पंबा में प्रदर्शन की शुरुआत करेंगे।
-मंगलवार शाम में ही निलक्कल में भी विरोध प्रदर्शन शुरू करने की योजना।
-मंगलवार 3 बजे त्रावणकोर देवसोम बोर्ड की अहम बैठक।
-बोर्ड की बैठक में तांत्री (मुख्य पुजारी) परिवार, पंडलाम शाही परिवार और अयप्पा सेवा संगम के पक्षकार हिस्सा लेंगे।
-बोर्ड ने महिलाओं के प्रवेश को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। पंबा में सबरीमाला बेस कैंप में श्रद्धालुओं के लिए कोई प्रबंध नहीं हो पाया है क्योंकि केरल बाढ़ के चलते मंदिर के दफ्तर और क्लोकरूम क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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