मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अनिका मामले में केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इंदौर की रहने वाली तीन साल की मासूम बच्ची अनिका शर्मा स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 2' जैसी एक जेनेटिक बीमारी से पीड़ित है। बच्ची के जीवन को बचाने के लिए दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकारों से पूछा है कि वे इस बच्ची की आर्थिक मदद के लिए क्या कदम उठा सकती हैं।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने गौर किया कि अनिका के इलाज का कुल खर्च 9।50 करोड़ रुपये है। बच्ची के माता-पिता और स्थानीय निवासियों ने पिछले सात महीनों से एक बड़ा फंड जुटाने का अभियान चलाया है, जिसके दम पर उन्होंने 7।50 करोड़ रुपये का इंतजाम कर लिया है। इस राशि में केंद्र सरकार द्वारा मंजूर की गई 50 लाख रुपये की सहायता भी शामिल है। हालांकि, इलाज शुरू करने के लिए अब भी 2 करोड़ रुपये की भारी कमी है।
AIIMS दिल्ली और एएसजी को कोर्ट के सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील अनुज भार्गव ने अदालत को बताया कि उन्हें ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली से इस संबंध में अभी तक कोई साफ निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) सुनील जैन को निर्देशित किया कि वे खुद एम्स (AIIMS) नई दिल्ली से उचित निर्देश प्राप्त करें और मामले में एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करें
अदालत ने राज्य सरकार के वकील को भी निर्देश दिए हैं कि वे सरकार से बात कर यह बताएं कि क्या राज्य स्तर पर याचिकाकर्ता बच्ची की कोई वित्तीय मदद की जा सकती है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तारीख तय की है।
अमेरिका से आना है करोड़ों का इंजेक्शन, पिता ने जताई चिंता
अनिका के पिता प्रवीण शर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी बेटी की जान बचाने के लिए एक बेहद कीमती इंजेक्शन अमेरिका से आयात करना होगा। यह इंजेक्शन उनकी बेटी को AIIMS, नई दिल्ली में लगाया जाना तय हुआ है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "मेरी बेटी की हालत दिन-ब-दिन लगातार बिगड़ रही है। अगर उसे आने वाले कुछ दिनों में यह इंजेक्शन नहीं मिला, तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। हमारे पास अब समय बहुत कम है।
क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी?
यह एक बेहद दुर्लभ और गंभीर जेनेटिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है। इसके कारण शरीर की रीढ़ की हड्डी में मौजूद मोटर न्यूरॉन्स (नसों की कोशिकाएं) धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। इस नुकसान की वजह से दिमाग का शरीर की ऐच्छिक मांसपेशियों जैसे हाथ-पैर हिलाने वाली मसल्स से संपर्क टूट जाता है। इसके चलते मांसपेशियां अत्यधिक कमजोर हो जाती हैं और सिकुड़ने लगती हैं। पीड़ित बच्चे को रेंगने, उठने-बैठने और चलने में असमर्थता होने लगती है। बीमारी गंभीर होने पर बच्चे को खाना निगलने और सांस लेने तक में बेहद तकलीफ होने लगती है।
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