केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार की ‘प्रियदर्शिनी योजना’ के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया। इस योजना के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की साधारण बस सेवाओं में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत फैसला है, जिसका उद्देश्य कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अदालत के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
किसने दायर की याचिका?
यह याचिका मोहम्मद फिरदौज नाम के व्यक्ति ने दायर की थी, जिन्होंने खुद को एक जागरूक नागरिक और करदाता बताया। उन्होंने दावा किया था कि यह योजना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती है, क्योंकि इसमें महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बिना किसी आय सीमा, निवास शर्त या विशेष पात्रता के मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इस योजना से सरकारी खजाने पर प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये और सालाना करीब 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने योजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया और इसके तेजी से लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए थे।
'जरूरतमंद को विशेष सुविधाएं देना राज्य का दायित्व'
हालांकि, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि ऐसी योजनाएं पहले से ही दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में लागू हैं। सरकार ने कहा कि यह एक जनकल्याणकारी योजना है और इसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जरूरतमंद लोगों को लाभ, रियायतें और विशेष सुविधाएं देना राज्य का दायित्व है। केवल इसलिए किसी कल्याणकारी योजना को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता कि उस पर सरकारी खर्च होता है या उसमें महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
केरल हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार के नीति संबंधी फैसलों की समझदारी या वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन करना न्यायपालिका का काम नहीं है। जब तक किसी योजना में स्पष्ट रूप से असंवैधानिक तत्व न हों, तब तक अदालत उसमें दखल नहीं दे सकती। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता सरकार के आदेश या योजना में किसी भी तरह की अंतर्निहित असंवैधानिकता साबित नहीं कर सके। इसलिए याचिका को खारिज कर दिया गया।
यूडीएफ सरकार के वादों में शामिल थी योजना
गौरतलब है कि प्रियदर्शिनी योजना विधानसभा चुनाव के दौरान यूडीएफ द्वारा किए गए पांच प्रमुख वादों में शामिल थी। सत्ता में आने के बाद सरकार ने इसे लागू किया और अब महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर लोगों को केएसआरटीसी की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिल रही है।
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