सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि विशुद्ध रूप से पारिवारिक संपत्ति विवादों को आपराधिक मामला या एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम का स्वरूप देकर किसी व्यक्ति के अग्रिम जमानत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी।
मामला रांची के चुटिया निवासी स्वाति कच्छप और उनके जीजा निर्मल प्रसाद साहू के बीच लंबे समय से चल रहे फ्लैट और अन्य संपत्ति विवाद से जुड़ा है। स्वाति ने रांची की एससी/एसटी अदालत में शिकायत दर्ज कराते हुए अपने जीजा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 341 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए थे। मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए निर्मल प्रसाद साहू ने झारखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। एक मई को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया था कि विवाद का मूल कारण जीजा-साली के बीच संपत्ति को लेकर चला आ रहा पारिवारिक विवाद है।
हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि दीवानी प्रकृति के संपत्ति विवाद को सुलझाने या दबाव बनाने के उद्देश्य से एससी/एसटी अधिनियम और आपराधिक धाराओं का सहारा लिया गया प्रतीत होता है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत दी थी। हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए स्वाति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताते हुए कहा कि आरोपी को दी गई राहत कानूनी रूप से उचित है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग को अस्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
आदित्य साहू ने हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के उपलक्ष्य में भाजपा ने मेन रोड स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू शामिल हुए। पूजा-अर्चना के बाद फल और मिठाई का वितरण किया गया। आदित्य साहू ने कहा कि पीएम मोदी ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से देश के सभी वर्गों की सेवा की है।
पीएम मोदी के रिकॉर्ड पर राज्य में हुई पूजा-अर्चना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुड़मा स्थित राजी पहाड़ा जतरा शक्ति खूंटा में पूजा-अर्चना की। वहीं प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने पहाड़ी मंदिर में जलाभिषेक किया। प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने बोकारो के मामरकोदर शिव मंदिर में कार्यकर्ताओं के साथ पूजा-अर्चना की।
कर समाधान योजना का जारी किया प्रारूप
वाणिज्यिक कर और अन्य पुराने कराधान अधिनियमों से जुड़े लंबित विवादों और बकाया कर राशि के स्थायी निपटारा को लेकर आम लोगों के लिए कर समाधान योजना, 2026 का प्रारूप जारी किया है।
राज्य सरकार ने कहा है कि आम लोग 19 जून तक इस प्रारूप पर अपना सुझाव दे सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के लिए राजस्व जुटाना और करदाताओं को पुराने कानूनी मुकदमों और भारी-भरकम बकाए से राहत देना है। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने अपने रिटर्न में कर स्वीकार किया है लेकिन भुगतान नहीं किया, तो उसे स्वीकृत कर का 100% चुकाना होगा।
"इस मामले में बकाया ब्याज और पेनल्टी पर 95% की भारी छूट दी जाएगी और केवल 5% राशि का भुगतान करना होगा। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2017-18 (30 जून 2017 तक) का निर्धारित कर और पहले जमा किए गए कर के अंतर का केवल 30% भुगतान करना होगा, जबकि शेष 70% माफ कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, आदेश के तहत बकाया ब्याज और दंड की राशि पर भी 95% की छूट मिलेगी। यानी सिर्फ 5% ही देय होगा। वित्तीय वर्ष 2017-18 तक के ऐसे मामलों में पहले टैक्स पर 35% भुगतान करना होगा और शेष 65% माफ कर दिया जाएगा। इसके ब्याज और दंड की राशि में भी 95% की राहत दी जाएगी।"
कर समाधान का लाभ लेने के इच्छुक व्यक्तियों को इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा। विशेष परिस्थितियों में वाणिज्य कर आयुक्त इस अवधि को अधिकतम 30 दिनों के लिए बढ़ा सकते हैं। यदि मामला किसी फोरम या अदालत में लंबित है, तो आवेदक को वहां से याचिका वापस लेने के संबंध में एक अंडरटेकिंग आवेदन के साथ देना होगा। विधेयक में दावों के निपटारे के लिए अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं तय की गई हैं। यदि आवेदन पूरी तरह सही और स्पष्ट पाया जाता है, तो प्राधिकारी को पूर्ण आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर समाधान आदेश जारी करना होगा। आवेदन में त्रुटि होने पर 15 दिनों के भीतर सूचना देकर आवेदक को सुधार के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि कोई आवेदक तथ्यों को छुपाकर या गलत जानकारी देकर लाभ लेता है, तो प्राधिकारी 90 दिनों के भीतर (आयुक्त की अनुमति से एक वर्ष तक) आदेश में सुधार कर सकता है या उसे कैंसिल कर सकता है।
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