दिल्ली हाई कोर्ट ने राजोकरी गांव में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के तोड़फोड़ अभियान से प्रभावित कई फार्महाउस मालिकों को अंतरिम सुरक्षा दी है। उच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में है। ऐसे में बहरहाल यथास्थिति बनाए रखें।
उच्च न्यायालय अभी कई फार्महाउस मालिकों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में राजोकरी में एक स्टॉर्मवॉटर ड्रेन (नाला) के आसपास डीडीए की अतिक्रमण-रोधी कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी संपति के बड़े हिस्से (जिसमें बाउंड्री वॉल, गार्ड रूम, सर्वेंट क्वार्टर व अन्य ढांचे शामिल हैं) को बिना किसी को कारण बताओ नोटिस जारी किए और उन्हें सुनवाई का मौका दिए बिना तोड़ दिया गया।
यथास्थिति बनाए रखने के आदेश
दरअसल, 3 जून 2026 को हुई कार्रवाई के दौरान एक अहम निर्णय में न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ के सामने रखी गई बातों पर ध्यान देने के बाद संबंधित संपतियों के मामले में जैसा है वैसा ही रहने का निर्देश दिया गया है।
खास बात यह है कि पीठ ने देखा कि डीडीए जिस नोटिस पर भरोसा कर रहा था, उसमें तोड़फोड़ की कार्रवाई का प्रस्ताव देने वाला कोई अलग कारण बताओ नोटिस जारी करने का संकेत नहीं था।
याचिकाकर्ताओं ने लगातार यह तर्क दिया है उनकी संपति नियमित जमीन व उनके मालिकाना हक वाली जमीन पर बनी है। संबंधित विभागों द्वारा संबंधित ढांचे को मंजूरी दी गई थी। इतना ही दशकों से ये यहां बनी हैं।
याचिका में कहा गया है कि संबंधित तोड़फोड़ कार्रवाई में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। पीठ ने मामले के न्यायिक क्षेत्र में आने के मद्देजनर संबंधित विभागों को अब इस जगह व संपतियों पर और कार्रवाई ना करने को कहा गया है।
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