सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने सोमवार (1 जून, 2026) को कहा कि वह गर्मियों की छुट्टियों में अपनी बेंच के सामने न तो सीनियर एडवोकेट्स को केस लिस्ट करवाने के लिए उल्लेख करने देंगे और न ही सुनवाई के दौरान दलीलें रखने की अनुमति देंगे। उन्होंने कहा कि वह इस दौरान सिर्फ युवा वकीलों और ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ को अपनी बेंच के समक्ष दलीलें रखने की अनुमति देंगे।
सोमवार की सुबह जस्टिस विक्रम नाथ ने घोषणा की थी कि सीनियर वकीलों को दलीलें रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जस्टिस संजय करोल ने भी यही रुख अपनाया। 1 जून से 12 जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट की गर्मियों की छुट्टियां हैं।
सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मावकाश को अब आंशिक न्यायालय कार्य दिवस कहा जाता है। इस साल इस अवधि के दौरान हर हफ्ते तीन से चार बेंच सुनवाई करेंगी। जस्टिस विक्रम नाथ ने सुनवाई शुरू होते ही कहा, 'मेरी अदालत में किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को अनुमति नहीं दी जाएगी।' उन्होंने जस्टिस पी। बी। वराले की सदस्यता वाली बेंच की अगुवाई करते हुए यह कहा।
जब एक सीनियर एडवोकेट ने एक मामले का उल्लेख करने की कोशिश की तो जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वह आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान अपनी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध मामलों में वरिष्ठ वकीलों को न तो मामले का उल्लेख करने देंगे और न ही दलीलें रखने की अनुमति देंगे। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वह इस अवधि के दौरान सिर्फ युवा वकीलों और ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ को अपनी बेंच के समक्ष दलीलें रखने की अनुमति देंगे।
जब एक वरिष्ठ वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि उन्हें मामले में आज दलीलें रखने की अनुमति दी जाए क्योंकि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी तो जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, 'आप एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड या निर्देश देने वाले वकील को बुलाइए। हम उन्हें सुनेंगे लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नही।'
बेंच ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जाएगा और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सामान्य कार्यदिवस फिर शुरू होने के बाद जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। जस्टिस पी। एस। नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की एक अन्य बेंच ने भी कहा कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मामलों का उल्लेख करने या दलीलें रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जस्टिस नरसिम्हा ने अदालत कक्ष में मौजूद वकीलों से कहा, 'हम आज के लिए ही इसकी अनुमति दे रहे हैं लेकिन कल से वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दलीलें रखने या मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर कनिष्ठ अधिवक्ता मामलों में दलीलें रखते हैं तो नोटिस जारी होने की संभावना अधिक है और अगर वरिष्ठ अधिवक्ता दलीलें रखते हैं तो मामला खारिज होने की संभावना अधिक है।' जस्टिस संजय करोल ने भी इसी तरह की टिप्पणी की। उन्होंने जस्टिस ए। जी। मसीह की सदस्यता वाली बेंच की अध्यक्षता करते हुए अपनी बात रखी।
Picture Source :