दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार की अधीनस्थ सचिवालय सेवा (DASS), जिसे अब GNCTDSS कहा जाता है, के अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए 2024 के संशोधित सेवा नियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही 217 नए ग्रुप ‘A’ पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने 1 जून को सुनाए गए फैसले में कहा कि 12 जून को होने वाली विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक तय योजना के अनुसार हो सकती है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि इन पदोन्नतियों(प्रमोशन्स) का भविष्य मामले में आने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
विवाद तब शुरू हुआ जब DANICS अधिकारियों ने 2024 के संशोधित नियमों को चुनौती दी। उनका आरोप है कि करीब 217 ऐसे पद, जो पहले DANICS और IAS अधिकारियों के लिए उपलब्ध थे, अब GNCTDSS अधिकारियों को दिए जा रहे हैं। DANICS अधिकारियों का कहना है कि इससे एक समानांतर सिविल सर्विस तैयार हो रही है और यह नियमों के खिलाफ है।
सालों से प्रमोशन के अवसर नहीं मिल रहे थे
- दूसरी ओर, दिल्ली सरकार और अन्य प्रतिवादियों का कहना है कि ये पद DANICS या IAS कैडर के नहीं थे।
- उनका तर्क है कि DASS अधिकारियों को सालों से प्रमोशन के अवसर नहीं मिल रहे थे और इस बदलाव का मकसद उनकी करियर में प्रोग्रेस सुनिश्चित करना है।
- कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (CAT) पहले ही उपराज्यपाल (LG) के नियम बनाने के अधिकार को सही ठहरा चुका है।
- हाई कोर्ट ने भी शुरुआती तौर पर इस निष्कर्ष से सहमति जताई।
17 साल से अटके प्रमोशन का रास्ता साफ
हालांकि कोर्ट ने DANICS अधिकारियों के हितों की सुरक्षा के लिए एक शर्त रखी है। जिन अधिकारियों को इन नए नियमों के तहत प्रमोशन मिलेगा, उन्हें लिखित रूप से यह स्वीकार करना होगा कि यदि भविष्य में DANICS अधिकारी मामला जीत जाते हैं, तो उन्हें अपने पुराने पदों पर वापस भेजा जा सकता है। फिलहाल, 17 साल से प्रमोशन का इंतजार कर रहे GNCTDSS अधिकारियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
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