पंजाब में विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की अनुमति बिना पर्याप्त कारण और वैकल्पिक विकल्पों की जांच के नहीं दी जाएगी। अदालत ने विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार तथा विभिन्न आवेदनों की ओर से दायर कई अर्जियों पर सुनवाई करते हुए पेड़ों की कटाई से जुड़े मामलों में अलग-अलग आदेश पारित किए। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत से 24 दिसंबर 2025 को लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध में ढील देने की मांग की।
हालांकि अदालत ने कहा कि आवेदन के साथ लगाई गई तस्वीरें जमीनी स्थिति का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत नहीं करतीं। ऐसे में अदालत ने विभिन्न कोणों से खींची गई नई तस्वीरें रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया।
आदमपुर एयरबेस पर 86 पेड़ कटेंगे
वहीं, पंजाब राज्य वन विकास निगम ने भारतीय वायुसेना की ओर से आदमपुर एयरबेस की सुरक्षा उड़ान संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए 86 पेड़ काटने की अनुमति मांगी। अदालत को बताया गया कि इसके बदले पहले ही 30 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। इस पर संतुष्ट होते हुए हाई कोर्ट ने 86 पेड़ों की कटाई की अनुमति प्रदान कर दी।
लुधियाना जिले के धनांसू स्थित हाई-टेक साइकिल वैली तक पहुंच मार्ग विकसित करने के लिए 22 पेड़ काटने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी गई। हाई कोर्ट ने इस परियोजना को मंजूरी देते हुए शर्त लगाई कि काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ के बदले पांच गुना अधिक पौधे 5 से 6 किलोमीटर के दायरे में लगाए जाएं। साथ ही अनुपालन रिपोर्ट और तस्वीरें भी दाखिल करने के आदेश दिए।
784 पेड़ काटने से रोका
फरीदकोट में इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट विकसित करने के लिए 784 पेड़ काटने की मांग पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों ने पेड़ों को बचाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। अदालत ने पूछा कि क्या परियोजना के लिए पूर्वी या पश्चिमी दिशा में वैकल्पिक भूमि की तलाश की गई थी। इस संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए।
एक पेड़ के बदले लगेंगे 10 पौधे
जालंधर जिले के कटपालों गांव की ग्राम पंचायत को गांव में गंदे पानी की निकासी और तालाब निर्माण के लिए 33 पेड़ काटने की अनुमति दी गई। अदालत ने यहां प्रत्येक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाने की शर्त लगाई। इसके अलावा पटियाला और मोगा में प्रस्तावित पेट्रोल पंपों से जुड़े मामलों में भी सुनवाई हुई।
एक मामले में अदालत ने वन विभाग को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए, जबकि दूसरे मामले में प्रवेश और निकास मार्ग के लिए पेड़ काटने की अनुमति प्रतिपूरक पौधारोपण की शर्त के साथ प्रदान कर दी। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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