गोकशी के मामले में शामली डीएम द्वारा आरोपियों पर लगाए गए एनएसए को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को भी रिहा कर दिया है। 1980 के तहत हिरासत में रखने के डीएम के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि कथित कृत्य एक मकान की चारदीवारी के भीतर किया गया था ना कि सार्वजनिक स्थल पर। बंद कमरे में हुई गोकशी से कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ी। हाईकोर्ट ने 26 मई को दिए अपने फैसले में कहा कि कथित कृत्य किसी तरह की हिंसा या लोक शांति में व्यवधान या सांप्रदायिक सौहार्द में व्यवधान नहीं था जो रासुका के तहत हिरासत के लिए आवश्यक है।

न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार की खंडपीठ ने इस्लाम उर्फ इसाम और समीर द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं स्वीकार करते हुए दोनों लोगों को तत्काल प्रभाव से रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, उपरोक्त दलीलों के मद्देनजर यह अपरिहार्य निष्कर्ष निकलता है कि एनएसए के तहत इन याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित हिरासत का आदेश कानून की दृष्टि में कहीं नहीं टिकता। इसलिए यह खारिज किए जाने योग्य है।

शामली डीएम ने दो आरोपियों पर की थी एनएसए की कार्रवाई

शामली के जिला मजिस्ट्रेट ने गो हत्या निषेध कानून की धारा तीन, पांच (ए) और आठ के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा तीन(दो) के तहत दोनों को हिरासत में लेने का आदेश जारी किया था। पुलिस को पिछले साल 23 अप्रैल को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ व्यक्ति गोकशी कर रहे हैं और मकान के भीतर तलाशी के बाद पुलिस ने एक कटा हुआ सिर, पैर, खाल व मांस बरामद किया था। पशु चिकित्सक द्वारा वैज्ञानिक जांच में बरामद मांस की पहचान गाय के मांस के तौर पर हुई थी। जिला मजिस्ट्रेट ने सात जुलाई, 2025 को आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को 12 महीने तक हिरासत में रखा जाए।

पत्रकार सत्यम वर्मा की याचिका पर सरकार से जवाब तलब

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्रकार सत्यम वर्मा से जुड़ी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया। वर्मा को नोएडा के श्रमिक आंदोलन के दौरान कामगारों को हिंसा के लिए भड़काने के आरोप में पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह की पीठ ने वर्मा की पत्नी द्वारा दाखिल इस याचिका पर राज्य सरकार के वकील को जवाब दाखिल करने को कहा और सुनवाई की अगली तिथि 13 जुलाई निर्धारित की।

इस याचिका में वर्मा को नोएडा में कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के मामले में हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में गिरफ्तारी और अभिरक्षा स्थानांतरण प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया गया और इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के संरक्षण के साथ ही वर्मा को रिहा किए जाने का अनुरोध किया गया।

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