इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीजीपी व प्रदेश के गृह सचिव को निर्देश दिया है कि पुलिस एफआइआर दर्ज करते समय सावधान रहे। देखे कि एफआइआर में सभ्य समाज की छवि धूमिल करने वाले शब्द या गाली न लिखी जाए।
कोर्ट ने दोनों शीर्ष अधिकारियों को शासनादेश जारी कर सभी पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही मारपीट कर गंभीर रूप से दो लोगों को घायल करने के आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति हरवीर सिंह ने प्रेमशंकर राम की जमानत अर्जी पर दिया है। अर्जी का अधिवक्ता डीके गुप्ता व राघवेंद्र सिंह ने विरोध किया। याची के खिलाफ बलिया के थाना रेवती में एफआइआर दर्ज है। दोनों पक्षों में मारपीट हुई। बचाव पक्ष से पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
पुलिस बता नहीं सकी कि कौन पक्ष हमला करने में आगे रहा। याची 15 फरवरी 2026 से जेल में बंद है। कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। याची पर डंडा कुल्हाड़ी लेकर परिवार पर हमला कर कई को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। एक की हड्डी टूट गई है।
कोर्ट ने एफआइआर में भद्दी गाली लिखे होने पर कहा कि गणतांत्रिक देश में समाज सभ्य होता है। प्राथमिकी सार्वजनिक दस्तावेज है, उसकी भाषा आम आदमी के पढ़ने लायक होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा तत्काल रोक लगाना कठिन है, यह गंभीर टास्क है, लेकिन एफआइआर दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों को सावधान रहना चाहिए। एफआइआर की भाषा सभ्य होनी चाहिए।
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