शादी टूटने के बाद अक्सर गुजारा भत्ता यानी एलिमनी को लेकर कोर्ट में लंबी जंग चलती है। हाल ही में झारखंड हाई कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक तलाकशुदा महिला की वन-टाइम सेटलमेंट एलिमनी को 40 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 70 लाख रुपये कर दिया। आइए जानते हैं कि हाई कोर्ट ने इस फैसले के पीछे की वजह और यह पूरा मामला क्या है…।
40 लाख एलिमनी को दोनों ने दी चुनौती
बता दें कि ये मामला एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति और उसकी पत्नी के बीच तलाक से जुड़ा है। फैमिली कोर्ट ने साल 2024 में दोनों का तलाक मंजूर करते हुए पति को 40 लाख रुपये वन-टाइम एलिमनी देने का आदेश दिया था। इस आदेश को पति-पत्नी दोनों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां पत्नी ने इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से बहुत कम बताया, तो वहीं पति का कहना था कि यह रकम बहुत ज्यादा है।
हाई कोर्ट ने एलिमनी बढ़ाकर की 70 लाख
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एलिमनी की राशि को बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ते का उद्देश्य पत्नी को वित्तीय संघर्ष की स्थिति से बचाना है ताकि वह सम्मान के साथ अपना जीवन जी सके। हाई कोर्ट ने स्थाई एलिमनी तय करने के लिए एक बेहद अनोखा और व्यावहारिक गणित सामने रखा। अदालत ने कहा कि पत्नी की उम्र अभी केवल 32 साल है और भारत में महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 70 वर्ष है। इसका मतलब है कि पत्नी को अगले 38 सालों तक इसी गुजारा भत्ते के ब्याज और भविष्य की महंगाई का सामना करते हुए अपना जीवन काटना है।
पति और पत्नी के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप
इस रिश्ते में दरार तब आई जब पति ने पत्नी पर मानसिक क्रूरता और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तलाक का केस दर्ज कराया। दूसरी तरफ, पत्नी ने आरोप लगाया कि उसका पति पुणे में किसी अन्य विवाहित महिला के साथ अवैध संबंधों में था। पत्नी ने यह भी दावा किया कि पति के दुर्व्यवहार और हिंसा के कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो गई और उनकी शादी पूरी तरह से टूट गई। वहीं, फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की अर्जी स्वीकार करते हुए तलाक की अर्जी को मंजूरी दिया था। वहीं, अदालत ने 40 लाख रुपये की एकमुश्त राशि तय की थी। दोनों पक्ष इसी फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट गए थे।
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