नाबालिग सौतेली बेटियों के साथ दुष्कर्म करने के मामले में पिता को ट्रायल कोर्ट की ओर से दोषी ठहराकर 15 साल की सजा देने के निर्णय को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा कि पीड़ित के बयान में छोटी-मोटी कमियों से अभियोजन पक्ष के मामले पर कोई असर नहीं पड़ता। पीठ ने कहा कि पीड़ितों की सगी मां ने भी शायद लड़कियों के साथ हो रहे इस अत्याचार को चुपचाप सहन कर लिया, क्योंकि जब उसे दोषी के गलत कामों के बारे में पता चला तब भी वह चुप रही और बच्चों को बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए।

पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीड़िताओं की मां आगे कुआं, पीछे खाई वाली स्थिति में फंसी हुई थ। क्योंकि उसने अपने पहले पति (जो पीड़ितों का सगा पिता भी था) को छोड़ दिया था। वह न सिर्फ आरोपी के साथ रहने लगी थी, बल्कि उससे उसकी एक बेटी भी हुई थी। शायद इसी वजह से आरोपी के साथ-साथ उस पर भी आरोप तय किए गए और मुकदमा चलाया गया। ट्रायल कोर्ट ने महिला को बरी कर दिया था।
इस टिप्पणी के साथ ट्रायल कोर्ट के निर्णय काे चुनौती देने वाली सौतेले पिता की अपील याचिका को खारिज कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को दोषी ठहराया था।

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