पंजाब सरकार द्वारा बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए बनाए गए सख्त जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट को अब कानूनी चुनौती मिल गई है। इस संबंध में जालंधर निवासी सिमरनजीत सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें इस कानून की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में कहा गया है कि यह संशोधन एक्ट देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि किसी भी राज्य सरकार को ऐसा कानून बनाने का अधिकार नहीं है जो केवल एक धर्म विशेष तक सीमित हो। उन्होंने दलील दी कि इस कानून में अन्य धर्मों की बेअदबी या धार्मिक भावनाओं के अपमान का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे समानता के अधिकार का उल्लंघन होता है।
एक धर्मिक ग्रंथ के लिए कानून बनाना भावनाओ ंके विपरीत
याचिका में यह भी कहा गया है कि संविधान सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान और संरक्षण देने की बात करता है, ऐसे में किसी एक धार्मिक ग्रंथ के लिए विशेष कानून बनाना संविधान की मूल भावना के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इस एक्ट को निरस्त किया जाए या इसमें सभी धर्मों को समान रूप से शामिल करने के निर्देश दिए जाएं।
बेअदबी की घटनाओं को देखते हुए बनाया गया कानून
दूसरी ओर, पंजाब सरकार का तर्क रहा है कि बेअदबी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सख्त कानून बनाना जरूरी था, ताकि सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखी जा सके। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना है।
मामले के अदालत में पहुंचने के बाद अब इस पर कानूनी बहस तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश में धर्मनिरपेक्षता और कानून के दायरे को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। फिलहाल उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आने वाले समय में इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
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