पवन खेड़ा मामले में आज यानी मंगलवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने एफआईआर दर्ज कराई है। इसी आपराधिक मामले में पवन खेड़ा ने सोमवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। इस अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम की हिमंत सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने एजी की गैरमौजूदगी पर भी नाराजगी जताई।
दरअसल, असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के बयान को लेकर अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट में सवाल उठाया। अभिषेक मनु सिंघवी पवन खेड़ा की ओर से पेश हुए थे। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने ऐसे बयानों पर रोक लगाने की मांग की। पवन खेड़ा का आरोप है कि नोटिस के बाद भी सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने विवादित बयान दिए। इसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख तय की और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस दौरान बेंच ने कहा कि कम से कम जवाब दाखिल होना चाहिए था।
जज ने क्या सवाल उठाया
गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज ने एजी यानी अटार्नी जनरल की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाया और कहा कि कम से कम जवाब तो दाखिल होना ही चाहिए था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी। गौरतलब है कि पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। पवन खेड़ा ने रिंकी भुइयां शर्मा पर कई पासपोर्ट और अघोषित विदेशी संपत्ति रखने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्होंने यह मामला दर्ज कराया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था
सुप्रीम कोर्ट की ओर से तेलंगाना उच्च न्यायालय से खेड़ा को मिली सात दिनों की ‘ट्रांजिट’ अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के बाद अधिवक्ता के।एन। चौधरी ने कांग्रेस नेता की ओर से यह याचिका दायर की। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष खेड़ा ने पांच अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा के तीन पासपोर्ट, दुबई में दो संपत्तियां और फर्जी कंपनियों में संपत्ति है।
इस बीच, गुवाहाटी की एक अदालत ने कांग्रेस नेता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की असम पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कामरूप मेट्रो ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी द्वारा वारंट जारी करने के लिए बताए गए आधार ‘पूरी तरह से अनुमानों और अटकलों पर आधारित हैं और रिकॉर्ड पर मौजूद किसी भी सामग्री से समर्थित नहीं हैं।’
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