सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि सरकार आधिकारिक रूप से यह घोषणा करे कि भारत की आजादी सिर्फ हिंसा का सहारा लेने वाले क्रांतिकारियों और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के योगदान के जरिये मिली है। पिनाक पानी मोहंती की ओर से दायर याचिका में मांग की गई कि 21 अक्टूबर यानी आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस और सुभाष चन्द्र बोस की जंयती 23 जनवरी को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि INA के लगभग 26,000 शहीद सैनिकों को सम्मान दिया जाए। याचिका में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र घोषित किए जाने की भी मांग की गई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप पहले भी ऐसी याचिका दाखिल कर चुके हैं। हर बार आप ऐसी याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं। ऐसी याचिका सिर्फ लोकप्रियता पाने की कोशिश है। जिन मांगों के साथ आप कोर्ट का रुख कर रहे हैं, उनका फैसला कोर्ट नहीं कर सकता।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा कि अगर आप ऐसा करेंगे, तो आपकी कोर्ट में एंट्री बंद करा देंगे।
चीफ जस्टिस ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि आगे से इस व्यक्ति की जनहित याचिका के तौर पर कोई नई याचिका स्वीकार न किया जाए।
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