राजस्थान हाईकोर्ट ने कैंसर पीड़ित पत्नी के स्कूल व्याख्याता पति का तबादला करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। वहीं अदालत ने अपीलार्थी को पूर्व की स्कूल से ही पद का वेतन देने को कहा है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश गोपाल सिंह की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। हाईकोर्ट ने गंदगी के मामले में नगर निगम के जोन आयुक्त को 28 अप्रैल को पेश होने के आदेश दिए हैं। एक अन्य मामले में कोर्ट ने ओपीजेएस विश्वविद्यालय के चेयरमैन जोगेंद्र सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है।
अपील में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि अपीलार्थी उदयपुर के फतेह सूरजपोल स्थित पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में व्याख्याता पद पर तैनात है। हाल ही में उसने एसआईआर की ड्यूटी पूरी की है और अब वह व्याख्याता पद का कार्यग्रहण करना चाहता है। इस बीच विभाग ने उसका तबादला राजसमंद कर दिया। अपील में कहा गया कि अपीलार्थी की पत्नी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित है और बीते चार साल से उदयपुर में नियमित उपचार ले रही है। ऐसे में अपीलार्थी का तबादला करने से उसकी पत्नी का इलाज प्रभावित होगा।
अपील में कहा गया कि अपीलार्थी के पद पर किसी अन्य को पदस्थापित नहीं किया गया है। इसके अलावा एकलपीठ ने याचिकाकर्ता सहित तबादलों से जुड़ी कई याचिकाओं को एक सामान्य आदेश से खारिज कर दिया था। इस दौरान याचिकाकर्ता के तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में अपीलार्थी के तबादले पर रोक लगाई जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अपीलार्थी के तबादला आदेश पर रोक लगा दी है।
फर्जी डिग्री प्रकरण में ओपीजेएस विवि के चेयरमैन को जमानत नहीं:
राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी डिग्री जारी करने से जुड़े मामले में ओपीजेएस विश्वविद्यालय के चेयरमैन जोगेंद्र सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी की चौथी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी की पूर्व में तीन बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और मामले की गंभीरता के साथ ही कोई नया आधार नहीं होने के कारण उसे जमानत नहीं दी जा सकती।
जमानत याचिका में कहा गया कि उस पर आरोप है कि उसने विवि के चेयरपर्सन के रूप में फर्जी डिग्रियां जारी की। जबकि ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं हुआ, जिससे यह साबित हो कि डिग्री पर उसके हस्ताक्षर हैं। इसके अलावा वह साल 2015 में ही विवि प्रबंधन से इस्तीफा दे चुका है। तब से उसके पास विवि के प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। इसके अलावा मामले में सीधे ही विशेष अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया है। विशेष अदालत को मामले में प्रसंज्ञान लेने का तब तक अधिकार नहीं है, जब तक मामले को मजिस्ट्रेट की ओर से कमिट नहीं किया जाए। इसलिए उसे जमानत दी जाए।
इसका विरोध करते हुए एएजी राजेश चौधरी ने कहा कि विवि की डिग्री का उपयोग कर सह आरोपी गणपत लाल पीटीआई भर्ती, 2022 में चयनित हुआ था। इसकी डिग्री जारी करने में याचिकाकर्ता की संलिप्तता रही थी। इसके अलावा गणपत लाल की डिग्री को सही बताते हुए सत्यापन रिपोर्ट भी जारी की गई थी। जिससे स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने अन्य स्टाफ सदस्यों से मिलकर फर्जी डिग्रियां जारी की हैं। इसके अलावा मजिस्ट्रेट की ओर से मामला कमिट नहीं करना सिर्फ प्रक्रियात्मक त्रुटि हो सकती है। इसे जमानत के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
नगर जोन आयुक्त को पेश होने के आदेश:
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले में वकील की ओर से गंदगी के चलते बीमार होने का आरोप लगाने पर नगर निगम के मालवीय नगर जोन उपायुक्त को 28 अप्रैल को पेश होने के आदेश दिए हैं। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता विमल चौधरी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 31 मई, 2012 को शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर 16 बिंदुओं पर विस्तृत दिशा निर्देश दिए थे। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से इन बिंदुओं की पालना नहीं की जा रही। याचिका में कहा गया कि बिरला मंदिर के पीछे गणेश नगर कॉलोनी में उनके निवास के आसपास काफी मात्रा में गंदगी है। जिसके चलते वे बीमार हो गए और 10 दिन तक हाईकोर्ट में मुकदमों की पैरवी के लिए नहीं आ पाए। इसके अलावा वहां अवैध पार्किंग और पशु डेयरी भी चल रही है। नगर निगम को कई बार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर अदालत ने स्थानीय जोन उपायुक्त को हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
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