दिल्ली शराब घोटाले मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में एक असाधारण स्थिति तब देखने को मिली जब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दलीलों पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग कर दी। इस मांग पर सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा की एक टिप्पणी ने पूरे कोर्टरूम का ध्यान खींच लिया।
केजरीवाल की दलीलों पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि मेरी जिंदगी में पहली बार किसी ने मुझसे खुद को अलग करने के लिए कहा है लेकिन मैंने इस प्रक्रिया के बारे में बहुत कुछ सीखा है और उम्मीद है कि मैं एक अच्छा फैसला दूंगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली की विवादित शराब नीति से जुड़ा है जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों को राहत दी थी। इसके खिलाफ केन्द्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उस आदेश को चुनौती दी है। सीबीआई की इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने जज के सामने खुद खड़े होकर अपनी दलीलें पेश कीं और कहा कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका है।
केजरीवाल ने क्या कहा?
केजरीवाल ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने 3 महीने तक सुनवाई के बाद आदेश दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने कुछ ही मिनटों में उसे गलत बता दिया।इससे उनके मन में ‘गंभीर आशंका’ पैदा हुई कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? उन्होंने यह भी कहा कि जज कुछ ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हुई थीं जिनका संबंध एक विशेष विचारधारा से जोड़ा जाता है, जिससे उनके मन में संदेह पैदा हुआ।
CBI ने किया विरोध
केजरीवाल की इस मांग का सीबीआई ने कड़ा विरोध किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी लीगल सेमिनार में शामिल होना पक्षपात का आधार नहीं हो सकता। कई सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। यह आरोप ‘बेबुनियाद’ और ‘अनुचित’ हैं। सीबीआई ने अपने हलफनामे में भी कहा कि इस तरह के आरोप न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ हैं।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
इससे पहले की सुनवाई में भी दिलचस्प स्थिति बनी थी जब केजरीवाल ने कहा कि वह खुद अपनी दलीलें रखना चाहते हैं। इस पर CBI की ओर से कहा गया कि अगर वह खुद बहस करना चाहते हैं तो अपने वकील को हटाना होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा था कि कोर्ट कोई ‘थिएटर’ नहीं है।
कोर्ट ने क्या किया?
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इसका मतलब है कि अब अदालत बाद में तय करेगी कि क्या जज खुद को इस मामले से अलग करेंगी या फिर वही इस केस की आगे सुनवाई जारी रखेंगी।
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