" एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भारत के दो जजों ने वकीलों को ऐसी सलाह दी, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। जस्टिस अरविंद कुमार ने युवा वकीलों को वीकेंड कल्चर से दूर रहने और कठिन परिश्रम की सलाह दी, वहीं जस्टिस पीके मिश्रा ने मध्यस्थता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती अनिवार्य भूमिका और उसके खतरों पर चर्चा की। ICA के पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए जस्टिस अरविंद कुमार ने युवा अधिवक्ताओं को अनुशासन और लंबे समय तक काम करने की संस्कृति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों के युवा वकीलों में शनिवार-रविवार की छुट्टी लेने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई।"
"जस्टिस कुमार ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि बेंगलुरु में उनके समय में वकालत में छुट्टियों का कोई स्थान नहीं था। उन्होंने कहा, "हम रात 11:30 से लेकर देर रात 1:30 बजे तक काम करते थे। एकमात्र छुट्टी रविवार की शाम 4:30 बजे के बाद मिलती थी।""
शादी के दो दिन बाद काम पर
"प्रतिबद्धता का एक व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अपनी शादी के मात्र दो दिन बाद ही वे एक आर्बिट्रेशन मामले की कार्यवाही में शामिल होने पहुंच गए थे। जब मध्यस्थ ने उनसे हैरानी जताते हुए वहां होने का कारण पूछा तो उनका जवाब था, "मैं दलीलों और तर्कों के प्रवाह को खोना नहीं चाहता था, मैं सीखना चाहता था।" उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने पेशे के साथ विवाह करें, तभी परिणाम उत्साहजनक होंगे।"
वकालत में एआई की भूमिका पर भी बात
"कॉन्फ्रेंस के दूसरे सत्र में जस्टिस पी.के. मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल युग में आर्बिट्रेशन का भविष्य विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने AI को केवल एक नवाचार नहीं, बल्कि वर्तमान समय की अनिवार्यता करार दिया। जस्टिस मिश्रा ने स्वीकार किया कि दस्तावेजों की समीक्षा, कानूनी शोध और ड्राफ्टिंग में AI टूल के उपयोग से दक्षता बढ़ी है और लागत में कमी आई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि AI कभी भी मानवीय निर्णय की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने तर्क दिया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया में निष्पक्षता और न्याय का संतुलन बनाना पड़ता है, जो केवल एक मनुष्य ही कर सकता है।"
"दोनों जजों ने सामूहिक रूप से वकीलों को अपने काम के प्रति ईमानदार रहने और अपने वरिष्ठों के प्रति सम्मान बनाए रखने की सलाह दी। इस सम्मेलन में देश-विदेश के कानून विशेषज्ञों, जैसे अमित सिबल, एलेक्स गनिंग और टीन अब्राहम ने भी हिस्सा लिया और भविष्य की कानूनी चुनौतियों पर मंथन किया।"
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