इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिकंदराबाद में तैनात नौसेना के जवान को दंगे और मारपीट के मामले में आरोपी बनाए जाने पर बुलंदशहर पुलिस से जवाब तलब किया है। पूछा है कि ड्यूटी पर तैनात जवान की घटनास्थल पर मौजूदगी कैसे संभव है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सतीश सोलंकी व अन्य सात की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने नौसेना के जवान अंशुल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, जबकि अन्य आरोपियों को राहत देने से इन्कार कर दिया। मामला बुलंदशहर के खुर्जा थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने दो दिसंबर को मारपीट की घटना में सतीश सोलंकी और उनके साथियों के साथ नौसेना के जवान अंशुल को भी नामजद कर दिया।
सभी आरोपियों ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने व एफआईआर रद्द करने की मांग के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची अंशुल सिकंदराबाद में भारतीय नौसेना का जवान है। ड्यूटी रोस्टर के मुताबिक 28 नवंबर 2025 तक अंशुल यूनिट में ड्यूटी पर तैनात था।
कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि जब तक इस तथ्य के विपरीत कोई तथ्य साबित नहीं किया जाता, तब तक यह माना जाएगा कि नौसेना का जवान बिना स्वीकृत अवकाश के अपनी पोस्टिंग नहीं छोड़ सकता। ऐसे में घटनास्थल पर उसकी उपस्थिति संदेहास्पद है।
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