"उपनल कर्मियों के विनियमितीकरण से जुड़े अवमानना मामलों में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है और कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
मंगलवार को न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ में उपनल कर्मचारी संघ समेत पांच अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 12 नवंबर 2018 को स्पष्ट आदेश देते हुए उपनल कर्मियों को नियमित करने, महंगाई भत्ता (डीए) देने और वेतन से जीएसटी कटौती पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
आदेशों के पालन पर सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन आदेशों के बावजूद अब तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं, इस मामले में दायर समीक्षा याचिका को सुप्रीम कोर्ट भी खारिज कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया। कर्मचारी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा, वहीं दूसरी ओर नियमित पदों पर नई भर्तियां जारी हैं, जो कोर्ट के आदेशों की भावना के विपरीत है।
सरकार का पक्ष
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कैबिनेट उपसमिति की सिफारिशों के आधार पर उपनल कर्मियों को ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2018 को कट-ऑफ तिथि मानते हुए संबंधित विभागों और कर्मियों के बीच अनुबंध व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, कर्मचारी संघ ने इस अनुबंध व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए और इसे आदेशों के अनुरूप नहीं बताया।
कोर्ट ने मांगा स्पष्ट जवाब
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। अब 20 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार को अपने रुख और कार्रवाई का पूरा ब्योरा देना होगा।
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