लखनऊ के Echo बगीचा में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती 2009 के करीब 30 अभ्यर्थी 5 सितंबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनके हाथ में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की कॉपी है जिसमें लिखा है कि इनकी मांग सही है, उस मांग पर फैसला किया जाए। चुनावी रैली के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने आश्वासन भी दिया पर कोई नतीजा नहीं निकला।
अभ्यर्थी पहले सरकारी दफ्तर और नेताओं के पास फिर कोर्ट चले गए
आंदोलन कर रहे संदीप पटेल कहते हैं, रिजल्ट आने के बाद हम लोग पहले अधिकारियों और नेताओं के पास गए लेकिन कहीं भी हमारी बात नहीं सुनी गई। हम सभी अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। 2015 में कोर्ट ने हमारे हक में फैसला देते हुए सभी 6 गलत सवालों के नंबर देने को कहा, लेकिन सरकार नहीं मानी।
अभ्यर्थियों को जब नियुक्ति नहीं मिली तो सभी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। अनुज धामा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का केस बना। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 2017 में अभ्यर्थियों के हक में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट की तरह यहां भी सरकार को आदेश दिया गया कि इन अभ्यर्थियों को गलत सवालों के नंबर दिए जाएं। लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी इन्हें वह नंबर नहीं दिया गया।
गलत सवाल आने पर अभ्यर्थियों को मिले हैं पूरे नंबर
- 2014 में उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा में कुल 18 सवाल गलत आए थे। इन गलत सवालों के चलते बड़ी संख्या में लोग बाहर हो गए। अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट ने अनिल कुमार व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार की बातों को सुना। कोर्ट ने आदेश दिया कि उन 18 गलत सवालों के नंबर उन लोगों को दिए जाएं जिन्होंने इसे हल करने की कोशिश की है। सरकार ने ऐसा ही किया और नियुक्ति देनी पड़ी।
- TIT 2017 की परीक्षा में 14 गलत सवाल पूछे गए। याचिका में कहा गया, 15 अक्टूबर को हुई परीक्षा में 8 सवालों के जवाब या तो गलत हैं या फिर फिर उनके 2-2 विकल्प सही हैं। कोर्ट ने आखिर में अभ्यर्थियों की बात को सही माना और 14 सवालों के नंबर दिए।
- CPMT की परीक्षा में भी लिखित परीक्षा में गलत सवाल आए। अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दायर करके आपत्ति जताई तो उन्हें उस गलत सवाल के पूरे नंबर मिले।
अभ्यर्थी संदीप पटेल कहते हैं, "सबकुछ सरकार के ऊपर है। हम अधिकारियों के पास जाते हैं तो उनके पास खारिज करने का कोई विकल्प नहीं होता, बल्कि वह कहते हैं, 'तुम्हारा मामला बहुत पुराना हो गया है।' अब हमारा मामला सरकार के कारण ही तो पुराना हुआ है।"
मुख्यमंत्री ने आश्वासन भी दिया पर नियुक्ति नहीं दी
अभ्यर्थी बताते हैं, विधानसभा चुनाव के दौरान योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर में रोड शो कर रहे थे। उस वक्त हमारी मुलाकात उनसे हुई। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि 10 मार्च के बाद सरकार बनने पर हम सबसे पहले आप लोगों की नियुक्ति करवाएंगे लेकिन 7 महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिली। दो बार जनता दरबार में भी जा चुके हैं।
अभ्यर्थियों ने कहा, हमारे पास आगे कोई अवसर नहीं है। 12 साल से हम कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। हम 12 साल से मुकदमा लड़ रहे हैं। हम पीछे नहीं हटेंगे। अगर सरकार नहीं सुनती तो हम यहीं आत्मदाह कर लेंगे।
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