सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना के मामलों में मुआवजे को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने उदार रुख अपनाते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में मुआवजा देते समय मृतक की कमाई के लिहाज से सुदृढ़ (मजबूत) नजरिया अपनाना चाहिए। खासकर तब जब वह खेती करने वाला एक किसान हो या काम करने वाला एक कुशल श्रमिक है।

केरल हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ दो याचिका की सुनवाई 
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ (D.Y.Chandrachud) और न्यायमूर्ति हिमा कोहली (Hima Kohli) की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ दो अपील की सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि कम कर दी थी। मामले में MACT ने 30 जनवरी 2017 को अनानास की खेती करने वाले मृतक के परिजनों को 26.75 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। MST ने उसकी मूल आय 12,000 रुपये प्रति माह को इसका आधार माना, लेकिन हाईकोर्ट ने MACT द्वारा गणना की गई आय को 12,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया।

पहला मामला: मृतक अनानास की खेती करने वाला किसान
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में मृतक अनानास की खेती करने वाला किसान था। दुर्घटना एक अक्तूबर 2015 को हुई थी। ऐसे मामलों में कमाई की मात्रा पर सुदृढ़ नजरिया अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसके दस्तावेजी सबूत उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। विशेष रूप से एक खेती करने वाले कृषक की कमाई को साबित करने के लिए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में कहा कि उसके विचार में MACT द्वारा अपनाई गई 12,000 रुपये प्रति माह की आय को ‘अनियमित या मनमाना’ नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट की ओर से मृतक की आय की मात्रा को 12,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये प्रति माह करके मुआवजे में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की कुल राशि 26.75 लाख रुपये बहाल कर दी और आदेश दिया कि मृतक के परिवार को देय  राशि का भुगतान 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित एक महीने के भीतर किया जाए।

दूसरा मामला: मृतक एक बढ़ई था
एक अन्य मामले में MACT ने मृतक के परिवार को 24.59 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, जो एक बढ़ई था, उसकी मूल आय 15,000 रुपये प्रति माह आंकी गई थी। हाईकोर्ट ने MACT द्वारा गणना की गई आय को फिर से 15,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया। इस सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में मृतक एक बढ़ई था। दुर्घटना तीन मई, 2015 को हुई थी। ऐसे मामलों में कमाई पर सुदृढ़ नजरिया अपनाया जाना चाहिए था, क्योंकि (कमाई के) दस्तावेजी सबूत उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।  

सुप्रीम कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए 24.59 लाख रुपये की मुआवजा राशि को बहाल कर दिया और निर्देश दिया कि अपीलकर्ता यानी मृतक के परिजन को देय शेष राशि का भुगतान नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ एक महीने के भीतर किया जाए।

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