सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर अगली सुनवाई 10 जनवरी को नई बेंच करेगी. तीन जजों की इस बेंच का गठन 10 जनवरी से पहले कर दिया जाएगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई की तारीख महज 30 सेकंड में दोनों पक्षों की दलीलें सुने बगैर आगे बढ़ा दी।अलग-अलग पक्षों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरिश साल्वे और राजीव धवन को अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं मिला.
इसके अलावा इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) भी खारिज कर दी. इस याचिका में अयोध्या मसले से संबंधित सभी केस पर रोजाना सुनवाई की मांग की गई थी.
इस मामले में पहले पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही थी। ऐसे में दो सदस्यीय बेंच विस्तृत सुनवाई नहीं कर सकती। इस पर तीन या उससे अधिक जजों की बेंच ही सुनवाई करेगी। नई बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई करेगी।
आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.67 अकड़ ज़मीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था.एक हिस्सा राम लला विराजमान, एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया है. तीनों ही पक्षों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले में 533 एक्जीबिट, 87 गवाह जिन के बयान 14000 पन्नों में हैं और हजारों दस्तावेज हैं जो संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, हिंदी और अंग्रेज़ी में हैं. इन सब को पढ़ने में ही काफी समय लग सकता है.
अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 26 साल पूरे हो गए हैं. 06 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराया गया था, हालांकि विवादित स्थल पर आजतक मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया है और कई संगठन अब भी राम मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं.
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