फरीदाबाद विकास निगम अधिनियम, 1956
(1956 का अधिनियम संख्यांक 90)
[28 दिसम्बर, 1956]
फरीदाबाद नगर में व्यापार और उद्योग को चलाने तथा उसकी अभिवृद्धि करने,
वहां बसे विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास में सहायता करने, और
उनसे संबंधित अन्य विषयों के प्रयोजनार्थ एक व्यापारिक
निगम की स्थापना और विनियमन का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सातवें वर्ष में निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम फरीदाबाद विकास निगम अधिनियम, 1956 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “निगम" से धारा 3 के अधीन स्थापित फरीदाबाद विकास निगम अभिप्रेत है ;
(ख) “विस्थापित व्यक्ति" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो भारत और पाकिस्तान के डोमीनियनों की स्थापना के कारण, या ऐसे किसी क्षेत्र में, जो अब पाकिस्तान का भाग है, नागरिक उपद्रवों या ऐसे उपद्रवों के भय के कारण, मार्च 1947 के पहले दिन के पश्चात् उस क्षेत्र में अपने निवास को छोड़ चुका है या वहां से विस्थापित हो गया है और जो तत्पश्चात् भारत में निवास करने लगा है ;
(ग) “फरीदाबाद" से [हरियाणा] राज्य के गुड़गांव जिले में फरीदाबाद का वह नया नगर अभिप्रेत है जिसका क्षेत्र अनुसूची में वर्णित है ;
(घ) “सदस्य" से फरीदाबाद विकास निगम का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत उसका अध्यक्ष भी है ;
(ङ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
अध्याय 2
निगम की स्थापना
3. निगमन-(1) ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, फरीदाबाद विकास निगम के नाम से एक निगम की स्थापना की जाएगी ।
(2) उक्त निगम शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा तथा वह उक्त नाम से वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
4. निगम का गठन-निगम में एक अध्यक्ष और चार से अन्यून तथा आठ से अनधिक उतने सदस्य होंगे, जितने केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
5. सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें-(1) अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।
(2) अध्यक्ष तथा कोई अन्य सदस्य, केन्द्रीय सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षरित लेख द्वारा अपने पद का त्याग कर सकेगा किन्तु वह तब तक पद पर बना रहेगा जब तक उसके उत्तराधिकारी की नियुक्ति राजपत्र में अधिसूचित नहीं कर दी जाती ।
(3) उपधारा (2) के अधीन अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य के पदत्याग से अथवा किसी अन्य कारणवश हुई आकस्मिक रिक्ति नई नियुक्ति करके भरी जाएगी ।
6. निगम का सदस्य नियुक्त होने या बने रहने के लिए निरर्हता-यदि किसी व्यक्ति का निगम के साथ की गई किसी अस्तित्वयुक्त संविदा में या निगम के लिए किए जा रहे किसी कार्य में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः कोई हित, किसी निगमित कंपनी में (निदेशक से भिन्न) शेयर-धारक के रूप में होने के सिवाय है तो, वह निगम का सदस्य नियुक्त किए जाने या बने रहने के लिए निरर्हित होगा :
परन्तु यदि वह कोई शेयर-धारक है तो वह उस कंपनी में अपने द्वारा धृत शेयरों की प्रकृति और उनके परिमाण का विवरण केन्द्रीय सरकार को देगा ।
7. किसी सदस्य की अस्थायी अनुपस्थिति-यदि निगम का कोई सदस्य अंगशैथिल्य के कारण अथवा अन्य किसी कारण से अपने कर्तव्यों का पालन करने में अस्थायी रूप से असमर्थ हो जाता है या ऐसी परिस्थितियों में, जिनमें उसकी नियुक्ति का रिक्त हो जाना अन्तर्निहित नहीं है, छुट्टी के कारण अथवा अनुपस्थित है तो, केन्द्रीय सरकार उसकी अनुपस्थिति के दौरान उसके स्थान पर कार्य करने के लिए अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी ।
8. सदस्यों के पदों की रिक्ति अथवा गठन में किसी त्रुटि से निगम के कार्यों या उसकी कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना-निगम का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि उसके सदस्यों का कोई पद रिक्त था या उसके गठन में कोई त्रुटि थी ।
9. निगम की समितियां-निगम, सामान्य या विशेष प्रयोजनों के लिए, ऐसी समितियों का गठन कर सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे ।
10. निगम की बैठकें-(1) निगम की बैठकें कामकाज को निपटाने के लिए ऐसे समय और स्थान पर होंगी जो नियत किया जाए :
परन्तु अध्यक्ष, जब कभी वह ठीक समझे, विशेष बैठक बुला सकेगा और कम से कम दो सदस्यों द्वारा लिखित मांग की जाने पर ऐसी बैठक बुलाएगा ।
(2) अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में कोई ऐसा सदस्य, जो उपस्थित सदस्यों द्वारा उनमें से ही चुना गया हो, निगम की बैठक की अध्यक्षता करेगा ।
(3) निगम की किसी बैठक के समक्ष आने वाले सभी प्रश्न उपस्थित सदस्यों के मतों की बहुसंख्या से विनिश्चित किए जाएंगे, और मतों की संख्या समान होने पर अध्यक्ष का, या उसकी अनुपस्थिति में किसी अन्य पीठासीन व्यक्ति का, दूसरा अथवा निर्णायक मत होगा ।
11. निगम के आदेशों या अन्य लिखतों का अधिप्रमाणन-निगम के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जाएंगे, तथा निगम द्वारा जारी की गई अन्य सभी लिखतें निगम के प्रशासक अथवा किसी अन्य ऐसे अधिकारी के, जिसे इस निमित्त उसी प्रकार प्राधिकृत किया गया हो, हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएंगी ।
12. निगम के प्रशासक तथा अन्य अधिकारी की नियुक्ति-(1) निगम का एक प्रशासक होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।
(2) प्रशासक निगम का मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा तथा निगम के अन्य सभी अधिकारी उसके अधीनस्थ होंगे ।
(3) प्रशासक को निगम के अथवा उसकी किसी भी समिति के विचार-विनिमय में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उसे निगम की अथवा उसकी किसी भी समिति की बैठकों में मत देने का अधिकार नहीं होगा :
परन्तु जब निगम का कोई सदस्य उपधारा (1) के अधीन प्रशासक नियुक्त किया जाता है तब ऐसे प्रशासक को सदस्य के सभी अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होंगे ।
(4) निगम ऐसे अन्य अधिकारियों की नियुक्ति कर सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के दक्षतापूर्वक पालन करने के लिए आवश्यक समझे ।
अध्याय 3
निगम की शक्तियां और कृत्य
13. निगम का सामान्य कर्तव्य-निगम का यह सामान्य कर्तव्य होगा कि वह फरीदाबाद में व्यापार, कारबार और उद्योग को चलाए तथा उसमें अभिवृद्धि करे, वहां बसे विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास में सहायता करे और निगम में निहित संघ की सम्पत्ति का प्रबन्ध और उसका विकास करे ।
14. निगम की शक्तियां-(1) निगम ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों का पालन करने के प्रयोजनार्थ आवश्यक या समीचीन हों ।
(2) पूर्वगामी उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी शक्ति के अन्तर्गत निम्नलिखित के लिए भी शक्ति होगी,-
(क) जंगम तथा स्थावर दोनों ही प्रकार की ऐसी सम्पत्ति को अर्जित तथा धारित करना, जिसे निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्वक पालन करने के लिए आवश्यक समझे, तथा ऐसी सम्पत्ति में सुधार करना, और विक्रय या पट्टे द्वारा या अन्य प्रकार से ऐसी सम्पत्ति का अन्तरण करना ;
(ख) किसी व्यापार, कारबार या उद्योग को चलाना या उसकी अभिवृद्धि करना ;
(ग) व्यक्तियों को, फरीदाबाद में, प्रथमतः इस दृष्टि से कि वहां बसे विस्थापित व्यक्तियों को काम मिल सके और उनका पुनर्वास हो सके, व्यापार, कारबार या उद्योग चलाने में उन्हें समर्थ बनाने के लिए वित्तीय या अन्य सहायता देना ;
(घ) रिहायशी अथवा अन्य प्रकार के भवन बनाना अथवा बनवाना और ऐसे निबन्धनों पर, जो विहित किए जाएं, उन भवनों को बेचना या बिकवाना या किराए पर उठाना या उठवाना ;
(ङ) ऐसे निबन्धनों पर तथा ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, उधार देना ;
(च) घरेलू तथा औद्योगिक प्रयोजनों के लिए उचित दरों पर विद्युत ऊर्जा का, तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार, प्रदाय करना या करवाना ;
(छ) ऐसे अन्य उपाय करना जिन्हें निगम फरीदाबाद में बसे विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए आवश्यक समझे ;
(ज) ऐसे उपाय करना जो फरीदाबाद के निवासियों की आर्थिक और सामाजिक दशाओं में सुधार करने के लिए आवश्यक हों ।
(3) इस धारा की किसी भी बात का प्रभाव फरीदाबाद में अधिकारिता रखने वाले किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा किसी शक्ति के प्रयोग या किसी कृत्य का पालन करने पर नहीं पड़ेगा ।
15. निगम की पूंजी-फरीदाबाद के विकास के लिए या उसके संबंध में या इस अधिनियम में निर्दिष्ट किसी भी प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा, या फरीदाबाद विकास बोर्ड के रूप में ज्ञात निकाय द्वारा, निगम की स्थापना की तारीख तक किए गए ऐसे सभी अनावर्ती व्यय, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा पूंजी-व्यय घोषित किए गए हों, केन्द्रीय सरकार द्वारा निगम को दी गई पूंजी समझे जाएंगे ।
16. निगम को अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त संसद् द्वारा विधिना किए गए सम्यक् विनियोजन के पश्चात्, निगम को ऐसे अनुदान और ऐसे उधार दे सकेगी जिन्हें केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन निगम के कृत्यों का पालन करने के लिए, आवश्यक समझे, तथा सभी अनुदान और उधार ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर दिए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे ।
17. सम्पत्ति का निगम में निहित होना-ऐसी सभी सम्पत्ति, आस्तियां और निधियां, जो फरीदाबाद के विकास के लिए अथवा इस अधिनियम में निर्दिष्ट किन्हीं प्रयोजनों के लिए निगम की स्थापना से पूर्व, केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन थीं या उसके द्वारा अर्जित की गई थीं या जिनका फरीदाबाद विकास बोर्ड के रूप में ज्ञात निकाय द्वारा स्वामित्वाधीन होना या अर्जित किया जाना तात्पर्यित है, ऐसी स्थापना पर, निगम में निहित हो जाएंगी, जब तक कि केन्द्रीय सरकार ऐसी सम्पत्ति, आस्तियों या निधियों के किसी भाग की बाबत अन्यथा निदेश न दे ।
18. पूंजी तथा सब्याज उधार की वापसी-निगम ऐसे अन्तरालों पर और ऐसे निबन्धनों पर, जिन्हें केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, धारा 15 के अधीन उपबन्धित पूंजी की रकम और धारा 16 के अधीन दिए गए सभी उधार और उन पर उस दर से बजाय की रकम, जो उस सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाए, वापस करेगा, और पूंजी या उधार या ब्याज के संदाय की ऐसी वापसी निगम के व्यय का अंश समझी जाएगी ।
19. कतिपय मामलों में निगमों को केन्द्रीय सरकार के अधिकारों और दायित्वों का प्राप्त होना-(1) केन्द्रीय सरकार के वे सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, चाहे वे किसी संविदा के आधार पर उद्भूत हुई हों या अन्य प्रकार से, जो फरीदाबाद के विकासार्थ किसी संव्यवहार के सम्बन्ध में अथवा इस अधिनियम में निर्दिष्ट किन्हीं प्रयोजनों के लिए, निगम की स्थापना से पूर्व, उस सरकार द्वारा अर्जित या उपगत की गई थीं, निगम द्वारा अर्जित या उपगत की गई समझी जाएंगी और निगम के क्रमशः अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी ।
(2) सभी वाद तथा अन्य विधिक कार्यवाहियां, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित की गई हैं, या, यदि धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना न निकाली गई होती तो, संस्थित की जातीं, निगम द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकती हैं या संस्थित की जा सकती हैं ।
20. निगम की निधि-(1) निगम की अपनी निधि होगी और निगम की सभी प्राप्तियां उसमें जमा की जाएंगी तथा निगम द्वारा किए गए सभी भुगतान उसी निधि में से किए जाएंगे ।
(2) निधि का सभी धन ऐसे बैंक में जमा किया जाएगा या ऐसी रीति से विनिहित किया जाएगा जो निगम द्वारा विनिश्चित की जाए ।
21. अवक्षयण और रिजर्व तथा अन्य निधियों के लिए उपबन्ध-(1) निगम अवक्षयण के लिए तथा रिजर्व और अन्य निधियों के लिए ऐसा उपबन्ध करेगा जिसका निदेश केन्द्रीय सरकार समय-समय पर दे ।
(2) इन निधियों का प्रबन्ध, उनमें समय-समय पर जमा की जाने वाली राशियां, और उसमें जमा धन के उपयोजन का अवधारण ऐसे निदेशों के अनुसार किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाएं ।
22. व्यय करने की निगम की शक्ति-निगम को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए ऐसी राशियां व्यय करने की शक्ति होगी जो वह ठीक समझे, और ऐसी राशियां निगम की निधि में से संदेय व्यय समझी जाएंगी ।
23. बजट-निगम, प्रत्येक आगामी वित्तीय वर्ष की बाबत प्रति वर्ष ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किए जाएं, एक बजट तैयार करेगा, जिसमें प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दिखाए जाएंगे तथा उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजी जाएंगी ।
24. वार्षिक रिपोर्ट-निगम प्रति वर्ष ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किए जाएं, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें ठीक पूर्व के वित्तीय वर्ष के दौरान के उसके कार्यकलाप का सही-सही और पूरा-पूरा विवरण दिया जाएगा, तथा उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार और पंजाब राज्य की सरकार को भेज दी जाएंगी ।
25. लेखा और लेखापरीक्षा-(1) निगम अपने लेखाओं के सम्बन्ध में ऐसी लेखा-बहियां तथा अन्य पुस्तकें ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से रखवाएगा जो विहित की जाएं ।
(2) निगम के लेखाओं की लेखापरीक्षा ऐसे समयों पर तथा ऐसी रीति से की जाएगी जो विहित की जाएं ।
26. निगम को देय रकम का प्रथम भार होना-(1) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई उधार भवन निर्माणार्थ किसी व्यक्ति को दिया गया है या जहां वह भवन किसी व्यक्ति को अन्तरित कर दिया गया है वहां, उधार या अन्तरण के कारण निगम की देय रकम और उस पर ब्याज इस प्रकार निर्मित या अन्तरित भवन पर प्रथम भार होंगे ।
(2) निगम कोई उधार देने या कोई भवन अन्तरित करने के लिए ऐसी अतिरिक्त प्रतिभूति भी ले सकता है जिसे वह आवश्यक समझे ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
27. निदेश-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय सरकार निगम को ऐसे सामान्य या विशेष निदेश समय-समय पर दे सकेगी जिन्हें वह सरकार ठीक समझे और निगम कृत्यों के सम्पादनार्थ उन निदेशों का अनुपालन करेगा ।
28. विवरणी और रिपोर्ट-निगम अपनी सम्पत्ति या कार्यकलाप की बाबत केन्द्रीय सरकार को ऐसी विरणियां, आकंड़े, लेखे तथा अन्य जानकारी देगा जिनकी वह सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।
29. निगम को देयधन की वसूली का ढंग-जब कोई धन किसी व्यक्ति द्वारा निगम को देय हो तब, वसूली के किसी अन्य ढंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निगम, उस व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, देय रकम का प्रमाणपत्र कलक्टर के पास भेजेगा और कलक्टर उस रकम को उसी रीति से वसूल करने की कार्यवाही करेगा मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो ।
30. शक्तियों का प्रत्यायोजन-निगम इस अधिनियम के अधीन अपनी उन शक्तियों और उन कर्तव्यों को, जिन्हें वह निगम के दिन-प्रति-दिन के प्रशासन को दक्षतापूर्वक चलाने के लिए अवश्यक समझे, सामान्य अथवा विशेष लिखित आदेश द्वारा, अध्यक्ष या निगम के किसी अन्य सदस्य या अधिकारी को, ऐसी शर्तों और सीमाओं (यदि कोई हों) के अधीन रहते हुए प्रत्यायोजित कर सकेगा जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं ।
31. निगम के सदस्यों और अधिकारियों का लोक-सेवक होना-निगम के सभी सदस्य और अधिकारी, जब वे इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या उनका वैसे कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक-सेवक समझे जाएंगे ।
32. संसद् की सदस्यता के लिए निरर्हता का हटाया जाना-एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि निगम के सदस्य का पद उसके धारक को, संसद् के दोनों सदनों में से किसी का भी सदस्य चुने जाने या होने के लिए, निरर्हित नहीं करेगा ।
33. विधिक कार्यवाहियों का वर्जन-कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के लिए, जो इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, निगम के किसी सदस्य या अधिकारी के विरुद्ध नहीं होगी ।
34. कतिपय संव्यवहारों का विधिमान्यकरण-धारा 3 अधीन निगम की स्थापना हो जाने पर,-
(क) वह सब कार्रवाई, जिसका फरीदाबाद विकास बोर्ड के रूप में ज्ञात निकाय द्वारा किया जाना तात्पर्यित है, या वे सभी संव्यवहार, जिनका उस निकाय के साथ किया जाना तात्पर्यित है (जिसके अन्तर्गत ऐसी कोई कार्रवाई या संव्यवहार है, जिसके द्वारा यह तात्पर्यित था कि कोई सम्पत्ति, आस्ति या अधिकार अर्जित किया गया है, या कोई ऐसा दायित्व या बाध्यता भी है जिसका, संविदा द्वारा या अन्यथा, उपगत होना तात्पर्यित था), निगम के साथ विधिमान्य रूप से और विधिपूर्वक उसी प्रकार किए गए समझे जाएंगे मानो जिस दिन ऐसी कार्रवाई या संव्यवहार किया गया था उस दिन यह अधिनियम प्रवृत्त और निगम विद्यमान रहा हो ; तथा
(ख) विशिष्टतया, और पूर्वगामी उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना,-
(i) फरीदाबाद विकास बोर्ड के रूप में ज्ञात निकाय में निहित सभी सम्पत्ति और आस्तियां निगम में निहित हो जाएंगी,
(ii) फरीदाबाद विकास बोर्ड के रूप में ज्ञात निकाय के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, चाहे वे किसी संविदा से उद्भूत हुई हों या अन्यथा, निगम के क्रमशः, अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी, और
(iii) फरीदाबाद विकास बोर्ड के रूप में ज्ञात निकाय द्वारा प्रदत्त सभी पट्टे, उसके साथ की गई सभी संविदाएं, और उसकी ओर से निष्पादित सभी लिखतें, निगम द्वारा प्रदत्त, उसके साथ की गई, या उसकी ओर से निष्पादित समझी जाएंगी तथा तद्नुसार ही उनका प्रभाव होगा ।
35. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी बनाने में कोई शंका या कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकेगी या ऐसे निदेश दे सकेगी जो उसे शंका या कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों तथा ऐसे मामलों में केन्द्रीय सरकार का आदेश अंतिम होगा ।
36. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टया, तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित सभी या उनमें से किसी भी विषय का उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(क) सदस्यों की पदावधि तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें,
(ख) निगम के प्रशासक तथा अन्य अधिकारियों की सेवा के निबन्धन तथा शर्तें,
(ग) निगम की बैठकें और उनमें कामकाज के संचालन की प्रक्रिया,
(घ) वे अन्तराल तथा वे निबन्धन, जिन पर केन्द्रीय सरकार द्वारा निगम को दी गई पूंजी या उधार वापस किया जा सकेगा, और वह दर जिस पर केन्द्रीय सरकार द्वारा दी गई पूंजी या उधार पर ब्याज दिया जा सकेगा,
(ङ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे बजट तथा वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी,
(च) वह रीति जिससे निगम के लेखे रखे जा सकेंगे और उनकी लेखा-परीक्षा की जा सकेगी,
(छ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे विवरण, आंकड़े, लेखे तथा अन्य जानकारी केन्द्रीय सरकार को दी जा सकेगी,
(ज) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकती है, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्र के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, या दोनों सदन इस बात से सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम, यथास्थिति, तत्पश्चात् केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, तथापि, उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
अनुसूची
[धारा 2 (ग) देखिए]
फरीदाबाद का क्षेत्र-फरीदाबाद निम्नलिखित सीमाओं के भीतर आता है, अर्थात्-
उत्तर द्भ कारखाना उद्यान, रेलवे स्टेशन और विश्रामगृह, फरीदाबाद, श्रीमती सुशीला देवी के भवन तथा फतेहपुर चन्देला की आबादी ।
पूर्व - दिल्ली-मथुरा सड़क ।
दक्षिण - गांव मजसार की आबादी ।
पश्चिम - बडखल बैंड, दबवा, नवादह कोह और दौलताबाद गांवों की पहाड़ी, सारन गांव की आबादी ।
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