कलकत्ता उच्च न्यायालय (अधिकारिता विस्तारण) अधिनियम, 1953
(1953 का अधिनियम संख्यांक 41)
[18 दिसम्बर, 1953]
कलकत्ता उच्च न्यायालय की अधिकारिता का चन्द्रनगर
और अण्डमान एंव निकोबार द्वीपों पर
विस्तार करने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कलकत्ता उच्च न्यायालय (अधिकारिता विस्तारण) अधिनियम, 1953 है ।
2. कलकत्ता उच्च न्यायालय की अधिकारिता का चन्द्रनगर और अण्डमान एवं निकोबार द्वीपों का विस्तार-कलकत्ता उच्च न्यायालय की अधिकारिता का चन्द्रनगर और अण्डमान एवं निकोबार द्वीपों पर विस्तार होगा और यह समझा जाएगा कि 1950 की मई के दूसरे दिन से चन्द्रनगर पर विस्तार हो गया था, और उक्त उच्च न्यायालय सभी प्रयोजनों के लिए चन्द्रनगर और अण्डमान एवं निकोबार द्वीपों के लिए उच्च न्यायालय समझा जाएगा ।
3. किन्हीं आदेशों का प्रभाव-कोई आदेश जो, -
(i) 1950 की मई के दूसरे दिन से पहले चन्द्रनगर के सम्बन्ध में अपील के उच्चतम न्यायालय द्वारा दिया गया है, या उस दिन उस न्यायालय के समक्ष लम्बित किसी कार्यवाही में दिया गया है, या
(ii) इस अधिनियम के प्रारम्भ से पहले अण्डमान एवं निकोबार द्वीपों के मुख्य आयुक्त द्वारा उन द्वीपों के उच्च न्यायालय के रूप में अपने कृत्यों के निर्वहन में दिया गया है,
सभी प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, न केवल उस न्यायालय या मुख्य आयुक्त के आदेश के रूप में प्रभावी होगा बल्िक इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वह आदेश कलकत्ता के उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है ।
4. नियम बनाने की शक्ति-तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, कलकत्ता उच्च न्यायालय इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए और चन्द्रनगर और अण्डमान एवं निकोबार द्वीपों में या उनके सम्बन्ध में अपनी अधिकारिता का प्रभावशील प्रयोग करने के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकता है ।
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