भारतीय दंड संहिता की धारा 477 के अनुसार, जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से, या लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित करने के आशय से, किसी ऐसी दस्तावेज को, जो विल या पुत्र के दत्तकग्रहण करने का प्राधिकार-पत्र या कोई मूल्यवान प्रतिभूति हो, या होना तात्पर्यित हो, रद्द, नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करेगा, या छिपाएगा या छिपाने का प्रयत्न करेगा या ऐसी दस्तावेज के विषय में रिष्टि करेगा, वह 2[आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
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| धोखे से नष्ट करना या डिफेस करना, या नष्ट करने या विकृत करने का प्रयास करना, या स्राव करना, एक इच्छा, आदि | आजीवन कारावास या 7 साल + जुर्माना | गैर - संज्ञेय | गैर जमानतीय | प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट |

